Paper 2 – Comparative Politics
तुलनात्मक राजनीति
तुलनात्मक राजनीति राजनीति विज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जिसका अध्ययन आज के समय में अत्यंत आवश्यक माना जाता है। सामान्य रूप से तुलनात्मक राजनीति का अर्थ विभिन्न देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं, संस्थाओं, प्रक्रियाओं तथा राजनीतिक व्यवहारों की तुलना करके उनका अध्ययन करना है। जब हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि एक देश की राजनीतिक व्यवस्था दूसरे देश की व्यवस्था से किस प्रकार समान या भिन्न है, तब हम तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन कर रहे होते हैं। यह विषय हमें केवल सरकारों और संविधानों की जानकारी नहीं देता, बल्कि यह भी बताता है कि विभिन्न देशों में राजनीति वास्तव में कैसे कार्य करती है।
तुलनात्मक राजनीति का इतिहास बहुत पुराना है। प्राचीन यूनानी दार्शनिक Aristotle को तुलनात्मक राजनीति का जनक माना जाता है। उन्होंने अपने समय के अनेक नगर-राज्यों की शासन व्यवस्थाओं का अध्ययन किया और उनकी तुलना करके राजनीतिक सिद्धांतों का निर्माण किया। उनके बाद भी अनेक विद्वानों ने इस क्षेत्र में योगदान दिया, लेकिन आधुनिक काल में तुलनात्मक राजनीति का स्वरूप अधिक व्यापक और वैज्ञानिक हो गया। अब इसका अध्ययन केवल संवैधानिक व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक दलों, चुनावों, राजनीतिक संस्कृति, जनमत, दबाव समूहों और राजनीतिक विकास को भी इसमें शामिल किया जाता है।
तुलनात्मक राजनीति का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं को समझना और उनकी तुलना करके सामान्य सिद्धांतों की खोज करना है। प्रत्येक देश की अपनी ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियाँ होती हैं, जिनका प्रभाव उसकी राजनीतिक व्यवस्था पर पड़ता है। तुलनात्मक राजनीति इन सभी परिस्थितियों का अध्ययन करके यह समझने का प्रयास करती है कि विभिन्न देशों की राजनीतिक व्यवस्थाएँ किन कारणों से अलग-अलग रूप धारण करती हैं।
इस विषय की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह अध्ययन की तुलनात्मक पद्धति का उपयोग करती है। किसी एक देश की राजनीति को समझने के लिए उसे दूसरे देशों की राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। उदाहरण के लिए भारत और ब्रिटेन दोनों में संसदीय शासन प्रणाली है, लेकिन दोनों देशों की राजनीतिक परिस्थितियाँ और कार्यप्रणाली पूरी तरह समान नहीं हैं। इसी प्रकार भारत और अमेरिका दोनों लोकतांत्रिक देश हैं, लेकिन उनकी शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण अंतर हैं। इन अंतरों और समानताओं का अध्ययन तुलनात्मक राजनीति के अंतर्गत किया जाता है।
आधुनिक तुलनात्मक राजनीति केवल राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन नहीं करती, बल्कि लोगों के राजनीतिक व्यवहार का भी अध्ययन करती है। यह जानने का प्रयास किया जाता है कि लोग मतदान क्यों करते हैं, राजनीतिक दल कैसे कार्य करते हैं, सरकारें किस प्रकार निर्णय लेती हैं और समाज के विभिन्न समूह राजनीति को कैसे प्रभावित करते हैं। इस प्रकार आधुनिक तुलनात्मक राजनीति राजनीति के व्यावहारिक पक्ष को समझने का प्रयास करती है।
तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन क्षेत्र बहुत व्यापक है। इसके अंतर्गत संविधान, शासन प्रणाली, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, राजनीतिक दल, चुनाव प्रणाली, दबाव समूह, राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक विकास, लोक प्रशासन तथा सार्वजनिक नीतियों का अध्ययन किया जाता है। आज के समय में विकासशील देशों, लोकतांत्रिक देशों, साम्यवादी देशों तथा अधिनायकवादी देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं की तुलना भी तुलनात्मक राजनीति का महत्वपूर्ण भाग है।
तुलनात्मक राजनीति का महत्व वर्तमान युग में अत्यधिक बढ़ गया है। वैश्वीकरण के कारण विश्व के विभिन्न देश पहले की तुलना में अधिक निकट आ गए हैं। एक देश की राजनीतिक घटनाओं का प्रभाव दूसरे देशों पर भी पड़ता है। ऐसी स्थिति में विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं को समझना आवश्यक हो जाता है। तुलनात्मक राजनीति हमें यह समझने में सहायता करती है कि कौन-सी राजनीतिक व्यवस्था अधिक प्रभावी है, कौन-सी नीतियाँ सफल हैं और किन कारणों से कुछ देशों में राजनीतिक स्थिरता तथा विकास अधिक दिखाई देता है।
यह विषय लोकतंत्र को समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विभिन्न लोकतांत्रिक देशों की व्यवस्थाओं की तुलना करके यह जाना जा सकता है कि लोकतंत्र को अधिक प्रभावी और उत्तरदायी कैसे बनाया जा सकता है। इसी प्रकार यह राजनीतिक समस्याओं के समाधान खोजने में भी सहायता करता है क्योंकि एक देश के सफल अनुभवों से दूसरे देश सीख सकते हैं।
यद्यपि तुलनात्मक राजनीति अत्यंत उपयोगी विषय है, फिर भी इसकी कुछ सीमाएँ हैं। प्रत्येक देश की परिस्थितियाँ अलग होती हैं, इसलिए सभी देशों की तुलना पूरी तरह समान आधार पर नहीं की जा सकती। कई बार राजनीतिक व्यवहार और सामाजिक परिस्थितियों में तेजी से परिवर्तन होने के कारण निश्चित निष्कर्ष निकालना कठिन हो जाता है। फिर भी राजनीति विज्ञान में इसकी उपयोगिता और महत्व को नकारा नहीं जा सकता।
अंततः कहा जा सकता है कि तुलनात्मक राजनीति राजनीति विज्ञान की एक ऐसी शाखा है जो विभिन्न देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं का गहन और वैज्ञानिक अध्ययन करके हमें राजनीति की वास्तविक प्रकृति को समझने में सहायता प्रदान करती है। यह विषय केवल राजनीतिक संस्थाओं की जानकारी नहीं देता, बल्कि यह भी बताता है कि राजनीति समाज, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और मानव व्यवहार से किस प्रकार जुड़ी हुई है। आधुनिक राजनीति विज्ञान के विकास में तुलनात्मक राजनीति का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है और आज भी यह विषय राजनीतिक अध्ययन का एक अनिवार्य आधार बना हुआ है।
Unit – 1
Comparative Politics : Meaning, Nature and Importance.
तुलनात्मक राजनीति : अवधारणा, स्वरूप एवं महत्व
तुलनात्मक राजनीति राजनीति विज्ञान की एक अत्यंत महत्वपूर्ण शाखा है। यह विषय हमें यह समझने में सहायता करता है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में राजनीतिक व्यवस्थाएँ किस प्रकार काम करती हैं, उनकी विशेषताएँ क्या हैं और वे एक-दूसरे से किस प्रकार समान या भिन्न हैं। सरल शब्दों में कहा जाए तो जब हम दो या दो से अधिक देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं, सरकारों, संविधानों, राजनीतिक दलों, चुनाव प्रणालियों और राजनीतिक व्यवहारों की तुलना करते हैं, तब उसे तुलनात्मक राजनीति कहा जाता है।
आज का विश्व आपस में जुड़ा हुआ विश्व है। किसी देश की राजनीतिक घटनाएँ केवल उसी देश तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि उनका प्रभाव अन्य देशों पर भी पड़ता है। इसलिए राजनीति को समझने के लिए केवल अपने देश का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। हमें अन्य देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं को भी समझना पड़ता है। इसी आवश्यकता से तुलनात्मक राजनीति का विकास हुआ।
तुलनात्मक राजनीति का मूल आधार “तुलना” है। तुलना के माध्यम से हम किसी राजनीतिक व्यवस्था की खूबियों और कमियों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि हमें भारतीय लोकतंत्र को समझना है, तो उसकी तुलना ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस या जापान जैसे देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं से की जा सकती है। इससे हमें यह पता चलता है कि भारत की व्यवस्था किन मामलों में मजबूत है और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन बहुत प्राचीन है। प्राचीन यूनान के महान दार्शनिक Aristotle ने विभिन्न नगर-राज्यों की शासन व्यवस्थाओं का अध्ययन करके उनकी तुलना की थी। इसी कारण उन्हें तुलनात्मक राजनीति का जनक कहा जाता है। अरस्तू का मानना था कि किसी भी राजनीतिक व्यवस्था को सही रूप से समझने के लिए उसकी तुलना अन्य व्यवस्थाओं से करना आवश्यक है।
प्रारंभ में तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन केवल संविधान और सरकार तक सीमित था। विद्वान यह देखते थे कि किसी देश में संसद कैसी है, राष्ट्रपति के क्या अधिकार हैं, न्यायपालिका कैसे कार्य करती है और सरकार का स्वरूप क्या है। लेकिन समय के साथ यह महसूस किया गया कि केवल संवैधानिक व्यवस्था का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। राजनीति को वास्तव में समझने के लिए जनता, राजनीतिक दलों, चुनावों, नेतृत्व, राजनीतिक संस्कृति और सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन भी आवश्यक है। इसी कारण आधुनिक तुलनात्मक राजनीति का क्षेत्र अत्यंत व्यापक हो गया है।
तुलनात्मक राजनीति का स्वरूप बहुआयामी है। यह केवल राज्य और सरकार का अध्ययन नहीं करती, बल्कि राजनीतिक जीवन के प्रत्येक पहलू को समझने का प्रयास करती है। इसमें संविधान, कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका, राजनीतिक दल, दबाव समूह, चुनाव प्रणाली, राजनीतिक संस्कृति, जनमत, राजनीतिक विकास तथा प्रशासनिक संरचना सभी का अध्ययन किया जाता है।
उदाहरण के लिए भारत और ब्रिटेन दोनों देशों में संसदीय शासन प्रणाली है। दोनों देशों में प्रधानमंत्री सरकार का वास्तविक प्रमुख होता है। लेकिन ब्रिटेन में लिखित संविधान नहीं है, जबकि भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। यह अंतर तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन का विषय है।
इसी प्रकार भारत और अमेरिका दोनों लोकतांत्रिक देश हैं, लेकिन उनकी शासन प्रणालियाँ अलग हैं। भारत में संसदीय शासन प्रणाली है, जबकि अमेरिका में अध्यक्षीय शासन प्रणाली है। भारत में प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है, जबकि अमेरिका में राष्ट्रपति ही राज्य और सरकार दोनों का प्रमुख होता है। इन व्यवस्थाओं की तुलना करके हम दोनों प्रणालियों की विशेषताओं को समझ सकते हैं।
फ्रांस का उदाहरण भी महत्वपूर्ण है। फ्रांस में अर्ध-अध्यक्षीय शासन प्रणाली पाई जाती है, जिसमें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह व्यवस्था भारत और अमेरिका दोनों से भिन्न है। इसी प्रकार चीन में एकदलीय राजनीतिक व्यवस्था है, जहाँ मुख्य रूप से एक ही राजनीतिक दल शासन करता है। इसके विपरीत भारत में बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था है। इन दोनों देशों की तुलना करने से लोकतांत्रिक और एकदलीय व्यवस्थाओं के बीच अंतर स्पष्ट होता है।
जापान का उदाहरण भी तुलनात्मक राजनीति में दिया जाता है। जापान में संवैधानिक राजतंत्र और संसदीय लोकतंत्र दोनों का समन्वय दिखाई देता है। वहाँ सम्राट राष्ट्र का प्रतीकात्मक प्रमुख है, जबकि वास्तविक शासन प्रधानमंत्री और संसद के हाथों में होता है। यह व्यवस्था ब्रिटेन से मिलती-जुलती है लेकिन पूरी तरह समान नहीं है।
तुलनात्मक राजनीति का महत्व अत्यंत व्यापक है। इसका पहला महत्व यह है कि यह हमें विश्व की विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं को समझने में सहायता करती है। जब हम विभिन्न देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं का अध्ययन करते हैं, तो राजनीति की व्यापक समझ विकसित होती है।
दूसरा महत्व यह है कि इससे राजनीतिक संस्थाओं की सफलता और असफलता के कारणों को समझा जा सकता है। उदाहरण के लिए अमेरिका में राष्ट्रपति प्रणाली लंबे समय से सफल है, जबकि कुछ अन्य देशों में यही प्रणाली राजनीतिक अस्थिरता का कारण बन जाती है। तुलनात्मक राजनीति इन कारणों का विश्लेषण करती है।
तीसरा महत्व यह है कि यह लोकतंत्र को समझने में सहायता करती है। भारत, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का अध्ययन करके यह जाना जा सकता है कि लोकतंत्र की सफलता किन परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
चौथा महत्व यह है कि यह राजनीतिक सुधारों का मार्गदर्शन करती है। यदि किसी देश को अपनी राजनीतिक व्यवस्था में सुधार करना हो तो वह अन्य देशों के सफल अनुभवों से सीख सकता है। उदाहरण के लिए भारत ने संसदीय व्यवस्था ब्रिटेन से प्रेरित होकर अपनाई, जबकि मौलिक अधिकारों की अवधारणा पर अमेरिकी संविधान का प्रभाव देखा जा सकता है।
पाँचवाँ महत्व यह है कि तुलनात्मक राजनीति अंतरराष्ट्रीय समझ और सहयोग को बढ़ावा देती है। जब विभिन्न देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं को समझा जाता है, तब उनके बीच बेहतर संबंध स्थापित करने में सहायता मिलती है।
आधुनिक युग में तुलनात्मक राजनीति का महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि आज विश्व के सामने लोकतंत्र, मानवाधिकार, आतंकवाद, पर्यावरण, आर्थिक विकास और वैश्वीकरण जैसी समान चुनौतियाँ हैं। इन समस्याओं का समाधान खोजने के लिए विभिन्न देशों के अनुभवों का अध्ययन आवश्यक है।
हालाँकि तुलनात्मक राजनीति की कुछ सीमाएँ भी हैं। प्रत्येक देश की ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियाँ अलग होती हैं। इसलिए एक देश की व्यवस्था को पूरी तरह दूसरे देश पर लागू नहीं किया जा सकता। फिर भी तुलना के माध्यम से राजनीति की गहरी समझ प्राप्त की जा सकती है।
अंत में कहा जा सकता है कि तुलनात्मक राजनीति राजनीति विज्ञान की वह शाखा है जो हमें विभिन्न देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं को समझने, उनकी तुलना करने और उनसे सीखने का अवसर प्रदान करती है। यह केवल राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन नहीं है, बल्कि राजनीति के वास्तविक स्वरूप को समझने का एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक माध्यम है। भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, चीन और जापान जैसे देशों के उदाहरण यह स्पष्ट करते हैं कि दुनिया में राजनीतिक व्यवस्थाओं के अनेक रूप हैं और तुलनात्मक राजनीति इन सभी रूपों को समझने का सबसे प्रभावी साधन है। यही कारण है कि आधुनिक राजनीति विज्ञान में तुलनात्मक राजनीति को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
तुलनात्मक राजनीति – अवधारणा, स्वरूप एवं महत्व
(Comparative Politics : Meaning, Nature and Importance)
(A) वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)
एक शब्द / एक वाक्य में उत्तर दीजिए
तुलनात्मक राजनीति किसकी शाखा है?
तुलनात्मक राजनीति का मुख्य आधार क्या है?
तुलनात्मक राजनीति के जनक किसे माना जाता है?
अरस्तू किस देश के दार्शनिक थे?
आधुनिक तुलनात्मक राजनीति किस पद्धति पर आधारित है?
तुलनात्मक राजनीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भारत में कौन-सी शासन प्रणाली है?
अमेरिका में कौन-सी शासन प्रणाली है?
फ्रांस में कौन-सी शासन प्रणाली पाई जाती है?
चीन में मुख्य रूप से कैसी राजनीतिक व्यवस्था है?
जापान में कौन-सा राजतंत्र पाया जाता है?
ब्रिटेन में संविधान किस प्रकार का है?
भारत का संविधान किस प्रकार का है?
राजनीतिक संस्कृति किस विषय का भाग है?
दबाव समूह किसके अध्ययन का विषय है?
वैश्वीकरण ने किस विषय का महत्व बढ़ाया है?
राजनीतिक व्यवहार का अध्ययन आधुनिक तुलनात्मक राजनीति की कौन-सी विशेषता है?
लोकतंत्र की सफलता जानने के लिए किस विषय का अध्ययन आवश्यक है?
तुलनात्मक राजनीति किन देशों की तुलना करती है?
तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन क्यों किया जाता है?
(B) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
तुलनात्मक राजनीति के जनक माने जाते हैं—
(A) प्लेटो
(B) अरस्तू ✅
(C) लॉक
(D) रूसो
भारत में कौन-सी शासन प्रणाली है?
(A) अध्यक्षीय
(B) संसदीय ✅
(C) राजतंत्रीय
(D) तानाशाही
अमेरिका में शासन प्रणाली है—
(A) संसदीय
(B) अध्यक्षीय ✅
(C) अर्ध-अध्यक्षीय
(D) राजतंत्रीय
फ्रांस में कौन-सी शासन प्रणाली है?
(A) संसदीय
(B) अध्यक्षीय
(C) अर्ध-अध्यक्षीय ✅
(D) सैन्य शासन
ब्रिटेन का संविधान है—
(A) लिखित
(B) अलिखित ✅
(C) कठोर
(D) समाजवादी
चीन की राजनीतिक व्यवस्था है—
(A) बहुदलीय
(B) द्विदलीय
(C) एकदलीय ✅
(D) संघीय
तुलनात्मक राजनीति का मूल आधार है—
(A) अध्ययन
(B) संविधान
(C) तुलना ✅
(D) न्यायपालिका
आधुनिक तुलनात्मक राजनीति में किसका अध्ययन भी किया जाता है?
(A) राजनीतिक व्यवहार ✅
(B) केवल संविधान
(C) केवल संसद
(D) केवल राष्ट्रपति
जापान में शासन व्यवस्था है—
(A) पूर्ण राजतंत्र
(B) संवैधानिक राजतंत्र एवं संसदीय लोकतंत्र ✅
(C) अध्यक्षीय
(D) एकदलीय
तुलनात्मक राजनीति का उद्देश्य है—
(A) युद्ध करना
(B) विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं की तुलना करना ✅
(C) चुनाव कराना
(D) संविधान बनाना
(C) अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer)
तुलनात्मक राजनीति से आप क्या समझते हैं?
तुलनात्मक राजनीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
तुलनात्मक राजनीति के जनक कौन हैं?
आधुनिक तुलनात्मक राजनीति की दो विशेषताएँ लिखिए।
राजनीतिक व्यवहार क्या है?
राजनीतिक संस्कृति क्या है?
दबाव समूह क्या है?
तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन क्यों आवश्यक है?
वैश्वीकरण और तुलनात्मक राजनीति का क्या संबंध है?
तुलनात्मक राजनीति की दो सीमाएँ लिखिए।
(D) लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer – 5 अंक)
तुलनात्मक राजनीति की परिभाषा दीजिए।
तुलनात्मक राजनीति की प्रकृति (स्वरूप) स्पष्ट कीजिए।
तुलनात्मक राजनीति की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन क्षेत्र स्पष्ट कीजिए।
आधुनिक तुलनात्मक राजनीति और परम्परागत तुलनात्मक राजनीति में अंतर बताइए।
तुलनात्मक राजनीति के विकास का संक्षिप्त इतिहास लिखिए।
तुलनात्मक राजनीति में राजनीतिक व्यवहार का महत्व स्पष्ट कीजिए।
भारत और ब्रिटेन की शासन व्यवस्था में दो समानताएँ एवं दो अंतर लिखिए।
भारत और अमेरिका की शासन प्रणाली की तुलना कीजिए।
तुलनात्मक राजनीति की सीमाओं का वर्णन कीजिए।
(E) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer – 10/15 अंक)
तुलनात्मक राजनीति की अवधारणा, स्वरूप एवं महत्व का विस्तृत विवेचन कीजिए।
तुलनात्मक राजनीति की परिभाषा देते हुए इसके अध्ययन क्षेत्र का विस्तार से वर्णन कीजिए।
आधुनिक तुलनात्मक राजनीति के विकास एवं विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
तुलनात्मक राजनीति के महत्व का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
तुलनात्मक राजनीति की प्रकृति एवं उद्देश्यों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
परम्परागत एवं आधुनिक तुलनात्मक राजनीति में अंतर स्पष्ट कीजिए।
तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन में राजनीतिक संस्कृति एवं राजनीतिक व्यवहार की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
भारत, ब्रिटेन एवं अमेरिका की शासन व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
तुलनात्मक राजनीति में फ्रांस, चीन एवं जापान की राजनीतिक व्यवस्थाओं का तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए।
वैश्वीकरण के युग में तुलनात्मक राजनीति के बढ़ते महत्व की विवेचना कीजिए।
(F) आलोचनात्मक/विश्लेषणात्मक प्रश्न (M.A. स्तर)
क्या आधुनिक तुलनात्मक राजनीति केवल संवैधानिक अध्ययन तक सीमित नहीं रह गई है? स्पष्ट कीजिए।
तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन में व्यवहारवादी दृष्टिकोण की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
क्या तुलनात्मक राजनीति राजनीतिक सुधारों का प्रभावी माध्यम है? विवेचना कीजिए।
तुलनात्मक राजनीति लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की सफलता का मूल्यांकन किस प्रकार करती है?
तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन में सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारकों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
"तुलनात्मक राजनीति राजनीति विज्ञान का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक अध्ययन है।" इस कथन की समीक्षा कीजिए।
आधुनिक तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन में राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक विकास एवं राजनीतिक व्यवहार की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
"प्रत्येक देश की राजनीतिक व्यवस्था उसकी ऐतिहासिक एवं सामाजिक परिस्थितियों का परिणाम होती है।" तुलनात्मक राजनीति के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
