Unit-07
Judiciary: Composition, Powers & Jurisdiction Of Supreme Court, High Court, District Court
भारतीय न्यायपालिका : सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालय की संरचना, शक्तियाँ तथा क्षेत्राधिकार।
भारतीय संविधान ने लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की सफलता के लिए विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के मध्य शक्तियों के संतुलन की व्यवस्था स्थापित की है। इनमें न्यायपालिका को विशेष महत्व प्रदान किया गया है क्योंकि वही संविधान की संरक्षक, नागरिकों के अधिकारों की रक्षक तथा विधि के शासन की अंतिम गारंटी है। भारतीय न्यायपालिका का मूल उद्देश्य संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखना, न्याय की स्थापना करना, नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना तथा शासन के विभिन्न अंगों के मध्य उत्पन्न विवादों का निष्पक्ष समाधान करना है। भारतीय संविधान निर्माताओं ने एक ऐसी स्वतंत्र, निष्पक्ष और एकीकृत न्यायिक प्रणाली की स्थापना की, जो राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहकर न्याय के सिद्धांतों के अनुसार कार्य कर सके। इसी कारण भारत में एकीकृत न्यायपालिका (Integrated Judiciary) की व्यवस्था अपनाई गई है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय शीर्ष पर, उसके नीचे विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालय तथा उनके अधीन जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय कार्य करते हैं। यह व्यवस्था देश में कानून की समान व्याख्या, न्यायिक एकरूपता तथा नागरिकों के अधिकारों की समान सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
भारतीय न्यायपालिका की संरचना संविधान के भाग पाँच और भाग छह में निर्धारित की गई है। संविधान के अनुच्छेद 124 से 147 तक सर्वोच्च न्यायालय तथा अनुच्छेद 214 से 231 तक उच्च न्यायालयों की व्यवस्था की गई है। जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों की व्यवस्था मुख्यतः अनुच्छेद 233 से 237 के अंतर्गत की गई है। भारतीय न्यायपालिका की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह पूर्णतः एकीकृत है। भारत में अमेरिका की भाँति संघीय और राज्य स्तर पर अलग-अलग न्यायालय प्रणाली नहीं है, बल्कि सभी न्यायालय एक ही न्यायिक श्रृंखला का हिस्सा हैं और सर्वोच्च न्यायालय उनका सर्वोच्च प्राधिकारी है। इस व्यवस्था से पूरे देश में कानून की समान व्याख्या तथा न्यायिक निर्णयों में एकरूपता बनी रहती है।
भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की आधारभूत विशेषताओं में से एक मानी जाती है। न्यायाधीशों की नियुक्ति की विशेष प्रक्रिया, उनके वेतन एवं सेवा शर्तों की सुरक्षा, कार्यकाल की स्थिरता, पद से हटाने की कठिन प्रक्रिया, न्यायिक कार्यों में कार्यपालिका के हस्तक्षेप पर नियंत्रण तथा न्यायालयों की अवमानना संबंधी शक्तियाँ न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुदृढ़ करती हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक निर्णयों में स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का अभिन्न अंग है और इसे किसी भी प्रकार समाप्त नहीं किया जा सकता।
सर्वोच्च न्यायालय भारतीय न्यायपालिका का सर्वोच्च और अंतिम न्यायालय है। इसका गठन संविधान के अनुच्छेद 124 के अंतर्गत किया गया। सर्वोच्च न्यायालय का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा संसद द्वारा समय-समय पर निर्धारित संख्या में अन्य न्यायाधीश होते हैं। न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार नियुक्ति की प्रक्रिया में सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों की कोलेजियम प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना आवश्यक है तथा उसे कम से कम पाँच वर्षों तक किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश, अथवा दस वर्षों तक किसी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता रहना चाहिए, अथवा राष्ट्रपति की दृष्टि में वह विशिष्ट विधिवेत्ता होना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश पैंसठ वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रहते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को केवल संसद द्वारा महाभियोग की जटिल प्रक्रिया के माध्यम से ही हटाया जा सकता है। सिद्ध दुराचार या अक्षमता के आधार पर संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होने के पश्चात राष्ट्रपति उन्हें पद से हटाते हैं। यह कठिन प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता की महत्वपूर्ण संवैधानिक गारंटी मानी जाती है।
सर्वोच्च न्यायालय को व्यापक अधिकार-क्षेत्र प्रदान किया गया है। इसका मूल क्षेत्राधिकार संघ और राज्यों अथवा राज्यों के मध्य उत्पन्न विवादों से संबंधित है। ऐसे मामलों की सुनवाई सीधे सर्वोच्च न्यायालय में होती है। अपीलीय क्षेत्राधिकार के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध दीवानी, फौजदारी तथा संवैधानिक मामलों में अपील सुनता है। विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय किसी भी न्यायालय अथवा न्यायाधिकरण के निर्णय के विरुद्ध अपील स्वीकार कर सकता है। यह शक्ति सर्वोच्च न्यायालय को भारतीय न्यायिक प्रणाली में अत्यंत प्रभावशाली बनाती है।
सर्वोच्च न्यायालय का परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार भी महत्वपूर्ण है। संविधान के अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी महत्वपूर्ण विधिक अथवा संवैधानिक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श मांग सकता है। यद्यपि न्यायालय की राय बाध्यकारी नहीं होती, फिर भी उसका अत्यधिक संवैधानिक महत्व होता है। सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय (Court of Record) का दर्जा प्राप्त है। उसके निर्णय पूरे देश के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होते हैं तथा उसे न्यायालय की अवमानना के मामलों में दंड देने की शक्ति भी प्राप्त है।
सर्वोच्च न्यायालय की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) है। इसके माध्यम से न्यायालय संसद अथवा राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए ऐसे कानूनों तथा सरकार के ऐसे कार्यों को असंवैधानिक घोषित कर सकता है जो संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करते हों। न्यायिक समीक्षा संविधान की सर्वोच्चता तथा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का प्रभावी माध्यम है। इसी प्रकार न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) तथा जनहित याचिका (Public Interest Litigation) के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकार, महिलाओं एवं बच्चों के अधिकार, श्रमिकों के हित, शिक्षा, स्वच्छता, कारागार सुधार तथा प्रशासनिक उत्तरदायित्व जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मौलिक अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च न्यायालय का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व है। संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार प्राप्त है। डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान की “आत्मा और हृदय” कहा था। सर्वोच्च न्यायालय पाँच प्रकार की संवैधानिक रिट—बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), उत्प्रेषण (Certiorari) तथा अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto)—जारी कर सकता है।
उच्च न्यायालय प्रत्येक राज्य अथवा कुछ राज्यों के लिए स्थापित सर्वोच्च न्यायिक संस्था है। संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य में एक उच्च न्यायालय होगा, यद्यपि संसद दो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक साझा उच्च न्यायालय की स्थापना कर सकती है। उच्च न्यायालय का गठन एक मुख्य न्यायाधीश तथा राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त अन्य न्यायाधीशों से होता है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना तथा कम से कम दस वर्षों तक किसी न्यायिक पद पर कार्य करना अथवा किसी उच्च न्यायालय में दस वर्षों तक अधिवक्ता रहना आवश्यक है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बासठ वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रहते हैं।
उच्च न्यायालय राज्य की सर्वोच्च न्यायिक संस्था होने के कारण व्यापक अधिकार-क्षेत्र रखता है। इसका मूल क्षेत्राधिकार कुछ विशेष दीवानी एवं संवैधानिक मामलों तक सीमित है, जबकि इसका अपीलीय क्षेत्राधिकार जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के निर्णयों पर लागू होता है। उच्च न्यायालय को संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है। यह शक्ति सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में अधिक व्यापक मानी जाती है क्योंकि उच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य वैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
उच्च न्यायालय अपने अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक तथा न्यायिक नियंत्रण भी रखता है। वह जिला न्यायालयों का निरीक्षण करता है, उनके कार्यों की समीक्षा करता है तथा अधीनस्थ न्यायपालिका के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करता है। संविधान के अनुच्छेद 227 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण की शक्ति प्राप्त है। इसके अतिरिक्त वह अधीनस्थ न्यायालयों से किसी मामले को अपने समक्ष मंगा सकता है तथा आवश्यक निर्देश भी जारी कर सकता है।
जिला न्यायालय राज्य की अधीनस्थ न्यायपालिका का सबसे महत्वपूर्ण स्तर है। प्रत्येक जिले में एक जिला एवं सत्र न्यायालय स्थापित किया जाता है। दीवानी मामलों में इसे जिला न्यायालय तथा आपराधिक मामलों में सत्र न्यायालय कहा जाता है। जिला न्यायाधीश की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा संबंधित उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है। जिला न्यायालय के अधीन सिविल जज, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायिक मजिस्ट्रेट, परिवार न्यायालय, श्रम न्यायालय, उपभोक्ता आयोग तथा अन्य विशेष न्यायालय कार्य करते हैं।
जिला न्यायालय का प्रमुख कार्य स्थानीय स्तर पर दीवानी तथा आपराधिक मामलों का निपटारा करना है। भूमि विवाद, संपत्ति विवाद, उत्तराधिकार, अनुबंध, विवाह, तलाक, भरण-पोषण तथा अन्य दीवानी मामलों की सुनवाई जिला न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आती है। गंभीर आपराधिक मामलों, जैसे हत्या, डकैती, बलात्कार तथा अन्य संगीन अपराधों की सुनवाई सत्र न्यायालय द्वारा की जाती है। जिला न्यायालय अपने अधीनस्थ न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील भी सुनता है। यदि किसी पक्ष को जिला न्यायालय के निर्णय से असंतोष हो तो वह संबंधित उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।
भारतीय न्यायपालिका की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह संविधान की सर्वोच्चता तथा विधि के शासन की रक्षा करती है। न्यायपालिका शासन के अन्य अंगों पर संवैधानिक नियंत्रण स्थापित करती है तथा यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी संस्था संविधान की सीमाओं का उल्लंघन न करे। न्यायिक समीक्षा, न्यायिक सक्रियता तथा जनहित याचिका के माध्यम से न्यायपालिका ने नागरिक स्वतंत्रताओं, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता, प्रशासनिक पारदर्शिता तथा सुशासन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973), मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978), एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994), विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997), के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) जैसे अनेक ऐतिहासिक निर्णयों ने भारतीय लोकतंत्र तथा संवैधानिक शासन को नई दिशा प्रदान की है।
यद्यपि भारतीय न्यायपालिका अनेक उपलब्धियों के बावजूद कुछ गंभीर चुनौतियों का भी सामना कर रही है। न्यायालयों में लंबित मामलों की अत्यधिक संख्या, न्यायाधीशों के रिक्त पद, न्याय प्राप्त करने में विलंब, मुकदमों का अधिक खर्च, तकनीकी संसाधनों की कमी तथा आम नागरिकों की न्याय तक सीमित पहुँच प्रमुख समस्याएँ हैं। इन चुनौतियों के समाधान के लिए न्यायालयों का डिजिटलीकरण, ई-कोर्ट परियोजना, वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली, लोक अदालतों का विस्तार, न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि, न्यायिक आधारभूत संरचना का विकास तथा न्यायिक सुधारों पर निरंतर कार्य किया जा रहा है।
भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका केवल विवादों का समाधान करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह संविधान की संरक्षक, नागरिक अधिकारों की प्रहरी तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वाली सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है। सर्वोच्च न्यायालय संविधान की अंतिम व्याख्या करता है, उच्च न्यायालय राज्यों में न्यायिक व्यवस्था का नेतृत्व करता है तथा जिला न्यायालय आम नागरिकों को स्थानीय स्तर पर न्याय उपलब्ध कराते हैं। इन तीनों स्तरों के न्यायालय मिलकर ऐसी न्यायिक व्यवस्था का निर्माण करते हैं जो संविधान की भावना, विधि के शासन, सामाजिक न्याय तथा लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व को व्यवहारिक रूप प्रदान करती है।
इस प्रकार भारतीय न्यायपालिका की संरचना, शक्तियाँ तथा क्षेत्राधिकार संविधान की दूरदर्शिता, लोकतांत्रिक आदर्शों तथा न्याय के सिद्धांतों का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा जिला न्यायालय अपने-अपने स्तर पर संविधान की रक्षा, कानून की समान व्याख्या, नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा तथा न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के उद्देश्य को साकार करते हैं। इन संस्थाओं की स्वतंत्रता, निष्पक्षता, उत्तरदायित्व और प्रभावशीलता ही भारतीय लोकतंत्र की स्थिरता, संविधान की सर्वोच्चता तथा विधि के शासन की वास्तविक आधारशिला है।
भाग–A : लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions) (2–5 अंक)
न्यायपालिका से क्या अभिप्राय है?
भारतीय न्यायपालिका की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
एकीकृत न्यायपालिका से क्या अभिप्राय है?
स्वतंत्र न्यायपालिका क्यों आवश्यक है?
भारतीय न्यायपालिका की संरचना स्पष्ट कीजिए।
सर्वोच्च न्यायालय का गठन किस अनुच्छेद के अंतर्गत किया गया है?
सर्वोच्च न्यायालय की संरचना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कैसे होती है?
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यताएँ लिखिए।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का कार्यकाल कितना होता है?
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को पद से कैसे हटाया जाता है?
महाभियोग से क्या अभिप्राय है?
सर्वोच्च न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार से क्या अभिप्राय है?
सर्वोच्च न्यायालय के अपीलीय क्षेत्राधिकार को स्पष्ट कीजिए।
परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार क्या है?
अभिलेख न्यायालय (Court of Record) से क्या अभिप्राय है?
न्यायालय की अवमानना क्या है?
न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) क्या है?
न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) से क्या अभिप्राय है?
जनहित याचिका (PIL) क्या है?
अनुच्छेद 32 का महत्व स्पष्ट कीजिए।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी की जाने वाली पाँच रिटों के नाम लिखिए।
बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) क्या है?
परमादेश (Mandamus) क्या है?
उत्प्रेषण (Certiorari) क्या है?
प्रतिषेध (Prohibition) क्या है?
अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) क्या है?
उच्च न्यायालय की संरचना स्पष्ट कीजिए।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कैसे होती है?
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यताएँ लिखिए।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का कार्यकाल कितना होता है?
उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
अनुच्छेद 226 का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उच्च न्यायालय की रिट संबंधी शक्ति क्या है?
उच्च न्यायालय की अधीक्षण शक्ति क्या है?
जिला न्यायालय क्या है?
जिला न्यायाधीश की नियुक्ति कैसे होती है?
जिला एवं सत्र न्यायालय में क्या अंतर है?
जिला न्यायालय के प्रमुख कार्य लिखिए।
अधीनस्थ न्यायालयों से क्या अभिप्राय है?
दीवानी न्यायालय क्या है?
फौजदारी न्यायालय क्या है?
न्यायपालिका की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी लिखिए।
न्यायपालिका और विधायिका में अंतर लिखिए।
न्यायपालिका और कार्यपालिका में अंतर लिखिए।
न्यायिक पुनर्विलोकन का महत्व स्पष्ट कीजिए।
संविधान का संरक्षक किसे कहा जाता है और क्यों?
मौलिक अधिकारों की रक्षा में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में दो अंतर लिखिए।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का महत्व स्पष्ट कीजिए।
ई-कोर्ट परियोजना क्या है?
लोक अदालत का महत्व लिखिए।
वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली (ADR) क्या है?
भारतीय न्यायपालिका की प्रमुख चुनौतियाँ लिखिए।
न्याय में विलंब के कारण लिखिए।
न्यायपालिका में लंबित मामलों की समस्या स्पष्ट कीजिए।
केशवानंद भारती मामले का महत्व लिखिए।
मेनका गांधी मामले का महत्व स्पष्ट कीजिए।
एस. आर. बोम्मई निर्णय का महत्व लिखिए।
भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
भाग–B : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions) (10–20 अंक)
भारतीय न्यायपालिका की संरचना एवं प्रमुख विशेषताओं का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
सर्वोच्च न्यायालय की संरचना, शक्तियों एवं क्षेत्राधिकार का विश्लेषण कीजिए।
सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक समीक्षा संबंधी शक्ति का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
भारतीय संविधान के संरक्षक के रूप में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
अनुच्छेद 32 का महत्व स्पष्ट करते हुए सर्वोच्च न्यायालय की रिट संबंधी शक्तियों का वर्णन कीजिए।
न्यायिक सक्रियता एवं जनहित याचिका का भारतीय लोकतंत्र पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
उच्च न्यायालय की संरचना, शक्तियों एवं क्षेत्राधिकार का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उच्च न्यायालय की रिट संबंधी शक्तियों एवं अधीक्षण शक्ति का विश्लेषण कीजिए।
सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
जिला न्यायालय की संरचना एवं कार्यों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
भारतीय न्यायपालिका में अधीनस्थ न्यायालयों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटियों का विश्लेषण कीजिए।
भारतीय न्यायपालिका की प्रमुख चुनौतियों एवं सुधारों का मूल्यांकन कीजिए।
न्यायिक समीक्षा एवं न्यायिक सक्रियता में अंतर स्पष्ट करते हुए दोनों की उपयोगिता का वर्णन कीजिए।
जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा, महत्व एवं सीमाओं का विवेचन कीजिए।
भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
भारतीय न्यायपालिका की प्रमुख विशेषताओं का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
न्यायपालिका को लोकतंत्र का संरक्षक क्यों कहा जाता है? स्पष्ट कीजिए।
भारतीय न्यायपालिका में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालय के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण कीजिए।
न्यायिक सुधारों की आवश्यकता एवं प्रमुख उपायों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
भाग–C : बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) (उत्तर सहित)
1. भारतीय न्यायपालिका का सर्वोच्च न्यायालय कौन-सा है?
(A) उच्च न्यायालय
(B) जिला न्यायालय
(C) सर्वोच्च न्यायालय
(D) सत्र न्यायालय
उत्तर – (C)
2. सर्वोच्च न्यायालय का गठन किस अनुच्छेद के अंतर्गत किया गया है?
(A) अनुच्छेद 32
(B) अनुच्छेद 124
(C) अनुच्छेद 214
(D) अनुच्छेद 226
उत्तर – (B)
3. सर्वोच्च न्यायालय का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
(A) मुंबई
(B) नई दिल्ली
(C) कोलकाता
(D) चेन्नई
उत्तर – (B)
4. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?
(A) प्रधानमंत्री
(B) राष्ट्रपति
(C) संसद
(D) मुख्य न्यायाधीश
उत्तर – (B)
5. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु कितनी है?
(A) 60 वर्ष
(B) 62 वर्ष
(C) 65 वर्ष
(D) 70 वर्ष
उत्तर – (C)
6. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु कितनी है?
(A) 60 वर्ष
(B) 62 वर्ष
(C) 65 वर्ष
(D) 68 वर्ष
उत्तर – (B)
7. उच्च न्यायालय का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
(A) अनुच्छेद 124
(B) अनुच्छेद 214
(C) अनुच्छेद 226
(D) अनुच्छेद 233
उत्तर – (B)
8. जिला न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?
(A) राष्ट्रपति
(B) प्रधानमंत्री
(C) राज्यपाल
(D) मुख्यमंत्री
उत्तर – (C)
9. भारतीय न्यायपालिका की प्रकृति कैसी है?
(A) द्वैध न्यायपालिका
(B) एकीकृत न्यायपालिका
(C) संसदीय न्यायपालिका
(D) संघीय न्यायपालिका
उत्तर – (B)
10. अनुच्छेद 32 किससे संबंधित है?
(A) चुनाव आयोग
(B) मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार
(C) संसद
(D) राज्यपाल
उत्तर – (B)
11. अनुच्छेद 226 किससे संबंधित है?
(A) संसद
(B) राष्ट्रपति शासन
(C) उच्च न्यायालय की रिट जारी करने की शक्ति
(D) वित्त आयोग
उत्तर – (C)
12. न्यायिक समीक्षा का अर्थ है—
(A) चुनाव कराना
(B) कानूनों की संवैधानिकता की जाँच करना
(C) न्यायाधीश नियुक्त करना
(D) संसद भंग करना
उत्तर – (B)
13. जनहित याचिका (PIL) का उद्देश्य क्या है?
(A) केवल सरकारी कर्मचारियों के हितों की रक्षा
(B) व्यापक जनहित की रक्षा
(C) केवल सांसदों की सुरक्षा
(D) कर निर्धारण
उत्तर – (B)
14. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) रिट का उद्देश्य है—
(A) अवैध गिरफ्तारी से मुक्ति
(B) सरकारी अधिकारी को आदेश देना
(C) न्यायालय को रोकना
(D) पद की वैधता की जाँच करना
उत्तर – (A)
15. परमादेश (Mandamus) रिट किसके लिए जारी की जाती है?
(A) अवैध गिरफ्तारी
(B) लोक अधिकारी को कर्तव्य पालन का आदेश देने हेतु
(C) पद की वैधता की जाँच
(D) अपील स्वीकार करने हेतु
उत्तर – (B)
16. अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) रिट का उद्देश्य क्या है?
(A) गिरफ्तारी रोकना
(B) किसी व्यक्ति के सार्वजनिक पद पर अधिकार की वैधता की जाँच करना
(C) संसद भंग करना
(D) चुनाव कराना
उत्तर – (B)
17. सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक क्यों कहा जाता है?
(A) क्योंकि वह चुनाव कराता है।
(B) क्योंकि वह संविधान की व्याख्या करता है और उसकी रक्षा करता है।
(C) क्योंकि वह कानून बनाता है।
(D) क्योंकि वह बजट प्रस्तुत करता है।
उत्तर – (B)
18. भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता किसका भाग मानी जाती है?
(A) राज्य नीति के निर्देशक तत्व
(B) संविधान की मूल संरचना
(C) मौलिक कर्तव्य
(D) प्रस्तावना
उत्तर – (B)
19. उच्च न्यायालय किस पर अधीक्षण रखता है?
(A) संसद
(B) सर्वोच्च न्यायालय
(C) अधीनस्थ न्यायालयों
(D) चुनाव आयोग
उत्तर – (C)
20. निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय भारत का अंतिम अपीलीय न्यायालय है?
(A) जिला न्यायालय
(B) उच्च न्यायालय
(C) सर्वोच्च न्यायालय
(D) सत्र न्यायालय
उत्तर – (C)
21. सर्वोच्च न्यायालय का परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार किस अनुच्छेद के अंतर्गत है?
(A) अनुच्छेद 32
(B) अनुच्छेद 124
(C) अनुच्छेद 143
(D) अनुच्छेद 226
उत्तर – (C)
22. न्यायालय की अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति किसे प्राप्त है?
(A) केवल संसद को
(B) केवल राष्ट्रपति को
(C) अभिलेख न्यायालयों को
(D) केवल राज्यपाल को
उत्तर – (C)
23. जिला एवं सत्र न्यायालय मुख्यतः किस स्तर पर कार्य करता है?
(A) राष्ट्रीय स्तर
(B) राज्य स्तर
(C) जिला स्तर
(D) ग्राम स्तर
उत्तर – (C)
24. न्यायपालिका का प्रमुख कार्य क्या है?
(A) कानून बनाना
(B) कानूनों की व्याख्या करना और न्याय प्रदान करना
(C) कर लगाना
(D) चुनाव कराना
उत्तर – (B)
25. भारतीय न्यायपालिका का सर्वोच्च उद्देश्य क्या है?
(A) शासन चलाना
(B) संविधान की रक्षा, न्याय की स्थापना तथा नागरिकों के अधिकारों का संरक्षण
(C) बजट पारित करना
(D) विदेश नीति बनाना
उत्तर – (B)
