Unit-01

Liberty, Equality, Justice, Power, Influence, Authority, Legitimacy, Obligation, Rights, Duties ,Political Culture,
Political participation, Political development and Political modernization
स्वतंत्रता, समानता, न्याय, शक्ति, प्रभाव, सत्ता, वैधता, राजनीतिक दायित्व, अधिकार, कर्तव्य, राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक सहभागिता, राजनीतिक विकास तथा राजनीतिक आधुनिकीकरण।

मानव समाज के राजनीतिक जीवन को समझने के लिए केवल राज्य, सरकार और संविधान का अध्ययन पर्याप्त नहीं होता। राजनीति विज्ञान का वास्तविक उद्देश्य उन मूलभूत अवधारणाओं को समझना भी है जो किसी राजनीतिक व्यवस्था के निर्माण, संचालन और विकास का आधार बनती हैं। स्वतंत्रता, समानता, न्याय, शक्ति, प्रभाव, सत्ता, वैधता, राजनीतिक दायित्व, अधिकार, कर्तव्य, राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक सहभागिता, राजनीतिक विकास तथा राजनीतिक आधुनिकीकरण ऐसी ही महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। ये सभी एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं और किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता इन्हीं के संतुलित विकास पर निर्भर करती है। इन अवधारणाओं का अध्ययन हमें यह समझने में सहायता करता है कि राज्य और नागरिकों के बीच संबंध किस प्रकार विकसित होते हैं तथा लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था किस प्रकार अधिक उत्तरदायी, न्यायपूर्ण और जनहितकारी बनती है।

स्वतंत्रता मनुष्य का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार और उसकी गरिमा का आधार है। स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी करना नहीं, बल्कि विधि द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर रहकर अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास करना है। प्रत्येक व्यक्ति को विचार व्यक्त करने, शिक्षा प्राप्त करने, आजीविका चुनने, धर्म का पालन करने तथा शांतिपूर्ण जीवन जीने की स्वतंत्रता प्राप्त होनी चाहिए। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का मूल उद्देश्य नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा करना है। जहाँ स्वतंत्रता का सम्मान होता है, वहाँ व्यक्ति अपनी क्षमता का विकास कर समाज और राष्ट्र की उन्नति में सक्रिय योगदान देता है। दूसरी ओर, यदि स्वतंत्रता पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाए जाएँ, तो लोकतंत्र कमजोर होने लगता है और नागरिकों में असंतोष उत्पन्न होता है।

समानता लोकतंत्र का दूसरा महत्वपूर्ण आधार है। समानता का अर्थ यह नहीं है कि सभी व्यक्तियों को हर दृष्टि से एक समान बना दिया जाए, बल्कि इसका वास्तविक अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को कानून के समक्ष समान दर्जा, समान अवसर तथा भेदभाव से मुक्त वातावरण प्राप्त हो। जाति, धर्म, भाषा, लिंग, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति के आधार पर किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। समान अवसर उपलब्ध होने से प्रत्येक नागरिक अपनी योग्यता के अनुसार आगे बढ़ सकता है। सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक विकास की सफलता के लिए समानता का सिद्धांत अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

न्याय किसी भी सभ्य समाज का आधारभूत मूल्य है। न्याय का अर्थ प्रत्येक व्यक्ति को उसके अधिकारों और योग्यताओं के अनुरूप उचित व्यवहार प्रदान करना है। न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं होता, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समान अवसर, निष्पक्षता और सम्मान सुनिश्चित करना भी न्याय का ही भाग है। जब समाज में न्याय की स्थापना होती है, तब नागरिकों का शासन व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है तथा सामाजिक शांति और स्थिरता बनी रहती है।

राजनीतिक जीवन में शक्ति का विशेष महत्व है। शक्ति वह क्षमता है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति, संस्था या राज्य अपने निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकता है। शासन, प्रशासन, कानून निर्माण तथा राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कार्य शक्ति के बिना संभव नहीं हैं। शक्ति का उपयोग यदि संविधान और कानून के अनुसार किया जाए तो वह समाज के विकास का साधन बनती है, किंतु यदि उसका दुरुपयोग किया जाए तो वही शक्ति निरंकुशता और अन्याय का कारण बन सकती है। इसलिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में शक्ति के साथ उत्तरदायित्व और नियंत्रण की व्यवस्था भी आवश्यक मानी जाती है।

प्रभाव शक्ति से भिन्न अवधारणा है। प्रभाव का अर्थ किसी व्यक्ति या समूह की वह क्षमता है जिसके माध्यम से वह बिना प्रत्यक्ष बल प्रयोग के दूसरों के विचारों, निर्णयों और व्यवहार को प्रभावित कर सके। एक लोकप्रिय नेता, विद्वान, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता अथवा मीडिया संस्थान अपने विचारों के माध्यम से समाज पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। प्रभाव का आधार विश्वास, प्रतिष्ठा, ज्ञान और व्यक्तित्व होता है, जबकि शक्ति का आधार वैधानिक अधिकार भी हो सकता है। लोकतांत्रिक समाज में प्रभाव जनमत निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है।

सत्ता वह वैधानिक अधिकार है जिसके आधार पर आदेश दिए जाते हैं और उनका पालन कराया जाता है। सत्ता का प्रयोग सामान्यतः सरकार, न्यायपालिका, प्रशासन तथा अन्य वैधानिक संस्थाओं द्वारा किया जाता है। सत्ता तभी स्थायी और प्रभावी होती है जब नागरिक उसे स्वेच्छा से स्वीकार करें और उसे वैध मानें। यदि सत्ता केवल बल के आधार पर चलती है, तो वह अधिक समय तक टिक नहीं पाती। इसलिए लोकतंत्र में सत्ता का आधार जनता की स्वीकृति और संविधान होता है।

वैधता का अर्थ किसी शासन, कानून, नीति या सत्ता की सामाजिक और संवैधानिक स्वीकार्यता से है। जब नागरिक यह मानते हैं कि शासन के निर्णय संविधान, कानून और जनहित के अनुरूप हैं, तब शासन को वैधता प्राप्त होती है। लोकतांत्रिक चुनाव, संविधान का पालन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा नागरिक अधिकारों की रक्षा शासन की वैधता को मजबूत बनाते हैं। वैधता के बिना शासन केवल बल पर आधारित रह जाता है, जबकि वैध शासन जनता के विश्वास और सहयोग से संचालित होता है।

राजनीतिक दायित्व का अर्थ नागरिकों के उन उत्तरदायित्वों से है जिनका पालन लोकतांत्रिक व्यवस्था को सफल बनाने के लिए आवश्यक होता है। संविधान और कानून का सम्मान करना, करों का भुगतान करना, मतदान करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, राष्ट्रीय एकता बनाए रखना तथा सामाजिक सद्भाव को प्रोत्साहित करना प्रत्येक नागरिक का राजनीतिक दायित्व है। अधिकारों के साथ दायित्वों का पालन करने से ही लोकतंत्र संतुलित और मजबूत बनता है।

अधिकार वे वैधानिक और नैतिक सुविधाएँ हैं जो प्रत्येक व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक होती हैं। जीवन, स्वतंत्रता, समानता, शिक्षा, अभिव्यक्ति और गरिमा जैसे अधिकार व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं। लोकतांत्रिक राज्य का दायित्व है कि वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे तथा उनके उल्लंघन पर प्रभावी न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराए।

कर्तव्य अधिकारों के पूरक हैं। यदि नागरिक केवल अधिकारों की मांग करें और अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करें, तो समाज में संतुलन बनाए रखना कठिन हो जाएगा। संविधान का पालन करना, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना, पर्यावरण की रक्षा करना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना तथा सामाजिक सद्भाव बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य है। अधिकार और कर्तव्य दोनों मिलकर लोकतांत्रिक जीवन को संतुलित बनाते हैं।

राजनीतिक संस्कृति से अभिप्राय नागरिकों की राजनीतिक मान्यताओं, मूल्यों, विश्वासों, परंपराओं तथा राजनीतिक व्यवहार से है। किसी देश की राजनीतिक संस्कृति यह निर्धारित करती है कि नागरिक शासन व्यवस्था, संविधान, लोकतंत्र और राजनीतिक संस्थाओं के प्रति किस प्रकार का दृष्टिकोण रखते हैं। जहाँ लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति विकसित होती है, वहाँ नागरिक कानून का सम्मान करते हैं, शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हैं तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी करते हैं। स्वस्थ राजनीतिक संस्कृति लोकतंत्र की स्थिरता और सफलता की आधारशिला है।

राजनीतिक सहभागिता का अर्थ नागरिकों की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी से है। मतदान करना, चुनाव लड़ना, राजनीतिक दलों से जुड़ना, जनसभाओं में भाग लेना, जनमत बनाना, सामाजिक आंदोलनों में शामिल होना तथा सार्वजनिक नीतियों पर अपने विचार व्यक्त करना राजनीतिक सहभागिता के प्रमुख रूप हैं। लोकतंत्र तभी सफल होता है जब नागरिक केवल दर्शक न बनकर शासन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें। व्यापक राजनीतिक सहभागिता शासन को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाती है।

राजनीतिक विकास का संबंध राजनीतिक संस्थाओं की क्षमता, दक्षता, स्थिरता और उत्तरदायित्व से है। जब किसी देश की राजनीतिक संस्थाएँ मजबूत होती हैं, कानून का शासन स्थापित होता है, लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ प्रभावी होती हैं तथा नागरिकों का विश्वास शासन में बढ़ता है, तब राजनीतिक विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। राजनीतिक विकास केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुशासन, सामाजिक न्याय, जनसहभागिता और प्रशासनिक दक्षता से भी जुड़ा हुआ है।

राजनीतिक आधुनिकीकरण राजनीतिक व्यवस्था में होने वाले उन परिवर्तनों की प्रक्रिया है जिनके माध्यम से पारंपरिक संस्थाओं और व्यवस्थाओं को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाता है। इसमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी प्रगति, प्रशासनिक सुधार, लोकतांत्रिक मूल्यों का विस्तार, शिक्षा का प्रसार, नागरिक जागरूकता तथा सूचना प्रौद्योगिकी का बढ़ता उपयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक आधुनिकीकरण के परिणामस्वरूप शासन अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित बनता है। आधुनिक लोकतंत्रों में ई-गवर्नेंस, डिजिटल सेवाएँ, ऑनलाइन जनसुनवाई तथा सूचना का अधिकार जैसे उपाय राजनीतिक आधुनिकीकरण के उदाहरण हैं।

इन सभी अवधारणाओं का गहन अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्रता, समानता, न्याय, अधिकार, कर्तव्य और जनसहभागिता जैसे मूल्यों पर आधारित जीवन-पद्धति है। शक्ति और सत्ता तभी सार्थक होती हैं जब उन्हें वैधता प्राप्त हो और उनका उपयोग जनकल्याण के लिए किया जाए। राजनीतिक संस्कृति नागरिकों के व्यवहार को दिशा देती है, राजनीतिक सहभागिता लोकतंत्र को सशक्त बनाती है, राजनीतिक विकास शासन की गुणवत्ता को बढ़ाता है तथा राजनीतिक आधुनिकीकरण बदलते समय के अनुरूप राजनीतिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाता है। इन सभी अवधारणाओं का समन्वित अध्ययन राजनीति विज्ञान को व्यापक, व्यावहारिक और समकालीन स्वरूप प्रदान करता है तथा एक सुदृढ़, उत्तरदायी और लोकतांत्रिक राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
  1. स्वतंत्रता से क्या अभिप्राय है? इसके विभिन्न स्वरूपों एवं महत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  2. समानता की अवधारणा स्पष्ट करते हुए उसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  3. न्याय की संकल्पना का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  4. स्वतंत्रता और समानता के मध्य संबंध की व्याख्या कीजिए।
  5. शक्ति (Power) की अवधारणा स्पष्ट करते हुए उसके प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए।
  6. शक्ति एवं प्रभाव (Influence) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  7. शक्ति एवं सत्ता (Authority) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  8. सत्ता से क्या अभिप्राय है? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  9. वैधता (Legitimacy) का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसके महत्व का विवेचन कीजिए।
  10. वैधता और सत्ता के मध्य संबंध स्पष्ट कीजिए।
  11. राजनीतिक दायित्व (Political Obligation) से क्या अभिप्राय है? इसके आधारों का वर्णन कीजिए।
  12. अधिकार एवं कर्तव्य के मध्य संबंध का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  13. लोकतांत्रिक राज्य में नागरिकों के अधिकारों एवं कर्तव्यों का महत्व स्पष्ट कीजिए।
  14. राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा एवं उसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  15. राजनीतिक संस्कृति के निर्माण में सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारकों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  16. राजनीतिक सहभागिता का अर्थ एवं उसके प्रमुख रूपों का वर्णन कीजिए।
  17. लोकतंत्र में राजनीतिक सहभागिता का महत्व स्पष्ट कीजिए।
  18. राजनीतिक विकास से क्या अभिप्राय है? इसके प्रमुख संकेतकों का वर्णन कीजिए।
  19. राजनीतिक आधुनिकीकरण का अर्थ एवं उसकी विशेषताओं का विवेचन कीजिए।
  20. राजनीतिक विकास एवं राजनीतिक आधुनिकीकरण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  21. लोकतंत्र की सफलता में स्वतंत्रता, समानता और न्याय की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
  22. राजनीतिक संस्कृति और राजनीतिक सहभागिता के मध्य संबंध स्पष्ट कीजिए।
  23. आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य में वैधता का महत्व स्पष्ट कीजिए।
  24. राजनीतिक विकास एवं सुशासन (Good Governance) के संबंध का विवेचन कीजिए।
  25. स्वतंत्रता, समानता, न्याय, अधिकार एवं कर्तव्य—इन सभी अवधारणाओं का लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्व स्पष्ट कीजिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न
  1. स्वतंत्रता क्या है?
  2. स्वतंत्रता के दो प्रकार लिखिए।
  3. समानता से क्या अभिप्राय है?
  4. न्याय की परिभाषा दीजिए।
  5. शक्ति क्या है?
  6. प्रभाव क्या है?
  7. सत्ता क्या है?
  8. वैधता से क्या अभिप्राय है?
  9. राजनीतिक दायित्व क्या है?
  10. अधिकार क्या हैं?
  11. कर्तव्य क्या हैं?
  12. अधिकार और कर्तव्य में दो संबंध लिखिए।
  13. राजनीतिक संस्कृति क्या है?
  14. राजनीतिक संस्कृति के प्रकार लिखिए।
  15. राजनीतिक सहभागिता क्या है?
  16. राजनीतिक सहभागिता के चार प्रमुख रूप लिखिए।
  17. राजनीतिक विकास क्या है?
  18. राजनीतिक आधुनिकीकरण क्या है?
  19. राजनीतिक विकास की दो विशेषताएँ लिखिए।
  20. राजनीतिक आधुनिकीकरण की दो विशेषताएँ लिखिए।
  21. लोकतंत्र में वैधता क्यों आवश्यक है?
  22. शक्ति और सत्ता में दो अंतर लिखिए।
  23. राजनीतिक संस्कृति लोकतंत्र को कैसे प्रभावित करती है?
  24. मतदान राजनीतिक सहभागिता का प्रमुख माध्यम क्यों है?
  25. आधुनिक लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न
  1. स्वतंत्रता किसे कहते हैं?
  2. समानता का अर्थ क्या है?
  3. न्याय का उद्देश्य क्या है?
  4. शक्ति किसे कहते हैं?
  5. प्रभाव का एक स्रोत लिखिए।
  6. सत्ता किसका अधिकार है?
  7. वैधता किससे प्राप्त होती है?
  8. राजनीतिक दायित्व का एक उदाहरण लिखिए।
  9. अधिकार का एक उदाहरण लिखिए।
  10. कर्तव्य का एक उदाहरण लिखिए।
  11. राजनीतिक संस्कृति किससे संबंधित है?
  12. राजनीतिक सहभागिता का प्रमुख माध्यम क्या है?
  13. राजनीतिक विकास किससे संबंधित है?
  14. राजनीतिक आधुनिकीकरण का एक उदाहरण लिखिए।
  15. लोकतंत्र का आधार क्या है?

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)

1. स्वतंत्रता का अर्थ है—
(A) मनमानी करना
(B) कानून के अंतर्गत स्वतंत्र जीवन जीना
(C) दूसरों पर शासन करना
(D) किसी नियम का पालन न करना
उत्तर – (B)

2. समानता का अर्थ है—
(A) सभी को समान संपत्ति देना
(B) सभी को समान अवसर एवं कानून के समक्ष समानता प्रदान करना
(C) सभी को एक जैसा कार्य देना
(D) सभी को समान वेतन देना
उत्तर – (B)

3. न्याय का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(A) दण्ड देना
(B) प्रत्येक व्यक्ति को उचित अधिकार एवं अवसर प्रदान करना
(C) चुनाव कराना
(D) कर वसूलना
उत्तर – (B)

4. शक्ति (Power) का अर्थ है—
(A) केवल धन
(B) निर्णय लागू कराने की क्षमता
(C) लोकप्रियता
(D) चुनाव लड़ना
उत्तर – (B)

5. प्रभाव (Influence) का आधार क्या होता है?
(A) केवल बल
(B) विश्वास, व्यक्तित्व एवं प्रतिष्ठा
(C) सेना
(D) धन
उत्तर – (B)

6. सत्ता (Authority) का आधार क्या है?
(A) अवैध शक्ति
(B) वैधानिक अधिकार
(C) केवल धन
(D) केवल जनसंख्या
उत्तर – (B)

7. वैधता (Legitimacy) का अर्थ है—
(A) बल प्रयोग
(B) शासन की संवैधानिक एवं सामाजिक स्वीकार्यता
(C) कर संग्रह
(D) चुनाव प्रचार
उत्तर – (B)

8. राजनीतिक दायित्व का उदाहरण है—
(A) मतदान करना
(B) परीक्षा देना
(C) व्यापार करना
(D) खेलना
उत्तर – (A)

9. निम्नलिखित में कौन-सा अधिकार है?
(A) शिक्षा का अधिकार
(B) कर देना
(C) मतदान करना (कुछ देशों में अधिकार एवं कर्तव्य दोनों हो सकता है, पर भारतीय संदर्भ में यहाँ सर्वोत्तम उत्तर A है)
(D) कानून बनाना
उत्तर – (A)

10. निम्नलिखित में कौन-सा कर्तव्य है?
(A) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
(B) संविधान का सम्मान करना
(C) संपत्ति खरीदना
(D) चुनाव लड़ना
उत्तर – (B)

11. राजनीतिक संस्कृति का संबंध किससे है?
(A) आर्थिक विकास
(B) नागरिकों की राजनीतिक मान्यताओं एवं व्यवहार से
(C) कृषि से
(D) उद्योग से
उत्तर – (B)

12. राजनीतिक सहभागिता का सबसे प्रमुख माध्यम क्या है?
(A) व्यापार
(B) मतदान
(C) खेल
(D) पर्यटन
उत्तर – (B)

13. राजनीतिक विकास का प्रमुख संकेतक क्या है?
(A) सुशासन
(B) जनसंख्या वृद्धि
(C) आयात
(D) निर्यात
उत्तर – (A)

14. राजनीतिक आधुनिकीकरण किससे संबंधित है?
(A) परंपराओं को यथावत रखना
(B) आधुनिक एवं उत्तरदायी राजनीतिक व्यवस्था का विकास
(C) केवल उद्योगों का विकास
(D) केवल कृषि सुधार
उत्तर – (B)

15. लोकतंत्र का आधार क्या है?
(A) निरंकुश शासन
(B) नागरिक सहभागिता
(C) सैन्य शासन
(D) राजतंत्र
उत्तर – (B)

16. शक्ति और प्रभाव में मुख्य अंतर क्या है?
(A) दोनों समान हैं।
(B) शक्ति में आदेश लागू कराने की क्षमता होती है, जबकि प्रभाव विश्वास एवं व्यक्तित्व पर आधारित होता है।
(C) प्रभाव केवल सरकार के पास होता है।
(D) शक्ति केवल जनता के पास होती है।
उत्तर – (B)

17. वैधता किसे मजबूत बनाती है?
(A) व्यापार
(B) शासन की स्वीकार्यता
(C) कृषि
(D) उद्योग
उत्तर – (B)

18. अधिकार और कर्तव्य का संबंध कैसा है?
(A) दोनों असंबंधित हैं।
(B) दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
(C) दोनों विरोधी हैं।
(D) दोनों समान नहीं हैं।
उत्तर – (B)

19. राजनीतिक संस्कृति लोकतंत्र को कैसे प्रभावित करती है?
(A) लोकतंत्र को कमजोर करती है।
(B) नागरिकों के राजनीतिक व्यवहार को दिशा देती है।
(C) केवल चुनाव प्रभावित करती है।
(D) केवल सरकार को प्रभावित करती है।
उत्तर – (B)

20. आधुनिक लोकतंत्र में राजनीतिक आधुनिकीकरण का प्रमुख उदाहरण क्या है?
(A) ई-गवर्नेंस
(B) राजतंत्र
(C) सामंतवाद
(D) निरंकुश शासन
उत्तर – (A)

रिक्त स्थान भरिए
  1. स्वतंत्रता का अर्थ ________ के अंतर्गत स्वतंत्र जीवन जीना है।

    उत्तर: कानून
  2. समानता का आधार ________ के समक्ष समानता है।

    उत्तर: कानून
  3. सत्ता का आधार ________ अधिकार होता है।

    उत्तर: वैधानिक
  4. राजनीतिक सहभागिता का सबसे प्रमुख माध्यम ________ है।

    उत्तर: मतदान
  5. राजनीतिक आधुनिकीकरण में ________ का महत्वपूर्ण योगदान है।

    उत्तर: ई-गवर्नेंस / सूचना प्रौद्योगिकी

सत्य / असत्य
  1. स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी करना है। (असत्य)
  2. समानता का अर्थ सभी को समान अवसर देना है। (सत्य)
  3. शक्ति और प्रभाव एक ही अवधारणा हैं। (असत्य)
  4. राजनीतिक संस्कृति नागरिकों के राजनीतिक व्यवहार को प्रभावित करती है। (सत्य)
  5. राजनीतिक सहभागिता लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। (सत्य)
  6. वैधता के बिना भी शासन लंबे समय तक स्थिर रह सकता है। (असत्य)
  7. अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं। (सत्य)
  8. राजनीतिक विकास केवल आर्थिक विकास का दूसरा नाम है। (असत्य)
  9. ई-गवर्नेंस राजनीतिक आधुनिकीकरण का उदाहरण है। (सत्य)
  10. न्याय लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल आधार है। (सत्य)
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