Unit-03

State: Definition and Elements, Origin theories: Divine theory, Force theory, Social Contract, Evolutionary theory and Marxists theory. Functions of state: Idealistic theory ,Liberal theory, Socialist theory and Welfare theory
राज्य : परिभाषा एवं तत्व; राज्य की उत्पत्ति के सिद्धांत—दैवी उत्पत्ति का सिद्धांत, शक्ति (बल) सिद्धांत, सामाजिक अनुबंध सिद्धांत, विकासवादी सिद्धांत तथा मार्क्सवादी सिद्धांत; राज्य के कार्यों के सिद्धांत—आदर्शवादी, उदारवादी, समाजवादी तथा लोककल्याणकारी सिद्धांत।

मानव समाज के विकास के साथ यह अनुभव किया गया कि यदि लोगों के जीवन को सुरक्षित, संगठित और व्यवस्थित बनाना है, तो ऐसी संस्था की आवश्यकता होगी जो नियम बनाए, उनका पालन कराए, विवादों का समाधान करे तथा सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे। इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए राज्य की अवधारणा विकसित हुई। राज्य मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संस्था है। यह केवल शासन करने वाली शक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था, न्याय, सुरक्षा, विकास और जनकल्याण का आधार भी है। आधुनिक युग में राज्य का महत्व और अधिक बढ़ गया है, क्योंकि आज उससे केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपेक्षा नहीं की जाती, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और नागरिक कल्याण जैसे अनेक उत्तरदायित्वों का निर्वहन भी अपेक्षित है। इसलिए राजनीति विज्ञान में राज्य का अध्ययन सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक माना जाता है।

राज्य की परिभाषा अनेक विद्वानों ने अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत की है, किंतु सभी परिभाषाओं का मूल भाव समान है। राज्य एक ऐसा संगठित राजनीतिक समुदाय है, जो निश्चित भू-भाग में निवास करने वाली जनसंख्या पर वैधानिक एवं सर्वोच्च सत्ता के माध्यम से शासन करता है। राज्य का अस्तित्व केवल सरकार के होने से सिद्ध नहीं होता, बल्कि उसके लिए कुछ आवश्यक तत्वों का होना भी अनिवार्य है। यही तत्व राज्य को अन्य सामाजिक संगठनों से अलग पहचान प्रदान करते हैं।

राज्य का पहला और सबसे आवश्यक तत्व जनसंख्या है। किसी भी राज्य का निर्माण लोगों के बिना संभव नहीं है। नागरिक ही राज्य की वास्तविक शक्ति होते हैं। जनसंख्या की संख्या से अधिक उसका संगठन, शिक्षा, जागरूकता, अनुशासन तथा उत्तरदायित्व महत्वपूर्ण होते हैं। एक जागरूक और शिक्षित नागरिक समाज राज्य की प्रगति का आधार बनता है।

राज्य का दूसरा आवश्यक तत्व निश्चित भू-भाग है। प्रत्येक राज्य की अपनी निश्चित भौगोलिक सीमा होती है जिसके भीतर उसका शासन लागू होता है। भूमि, जल, वायु-क्षेत्र तथा प्राकृतिक संसाधन राज्य के भू-भाग का हिस्सा माने जाते हैं। बिना निश्चित क्षेत्र के राज्य की संप्रभुता और प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित नहीं की जा सकती।

राज्य का तीसरा आवश्यक तत्व सरकार है। सरकार राज्य का वह संगठन है जिसके माध्यम से प्रशासन संचालित होता है, कानून बनाए जाते हैं, न्याय प्रदान किया जाता है तथा नीतियों को लागू किया जाता है। सरकार राज्य का स्थायी तत्व नहीं होती, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावों के माध्यम से सरकार बदल सकती है। फिर भी राज्य के उद्देश्यों की पूर्ति सरकार के माध्यम से ही होती है।

राज्य का चौथा और सबसे महत्वपूर्ण तत्व संप्रभुता है। संप्रभुता का अर्थ राज्य की सर्वोच्च और स्वतंत्र शक्ति से है। राज्य अपने आंतरिक मामलों में सर्वोच्च अधिकार रखता है तथा बाहरी हस्तक्षेप से स्वतंत्र होता है। यदि किसी राजनीतिक संगठन में संप्रभुता का अभाव हो, तो उसे पूर्ण राज्य नहीं माना जा सकता। यही तत्व राज्य को अन्य सभी संस्थाओं से अलग और सर्वोच्च बनाता है।

राज्य की उत्पत्ति कैसे हुई, यह प्रश्न प्राचीन काल से ही राजनीतिक चिंतन का विषय रहा है। विभिन्न विचारकों ने अपने-अपने समय, परिस्थितियों और विचारधाराओं के आधार पर अलग-अलग सिद्धांत प्रस्तुत किए। इन सिद्धांतों ने राज्य की उत्पत्ति को समझाने का प्रयास किया तथा राजनीतिक विचारधारा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

राज्य की उत्पत्ति का सबसे प्राचीन सिद्धांत दैवी उत्पत्ति का सिद्धांत है। इस सिद्धांत के अनुसार राज्य की स्थापना ईश्वर की इच्छा से हुई है तथा राजा ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता है। इसलिए उसकी आज्ञा का पालन करना प्रत्येक व्यक्ति का धार्मिक और नैतिक कर्तव्य माना गया। मध्यकाल में इस सिद्धांत का व्यापक प्रभाव था और अनेक राजाओं ने अपने शासन को वैध ठहराने के लिए इसका सहारा लिया। आधुनिक लोकतांत्रिक विचारधारा के विकास के बाद इस सिद्धांत का महत्व कम हो गया, क्योंकि इसमें जनता की इच्छा और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व को पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया।

शक्ति अथवा बल सिद्धांत के अनुसार राज्य की उत्पत्ति बल और विजय के परिणामस्वरूप हुई। इस सिद्धांत का मत है कि शक्तिशाली व्यक्तियों या समूहों ने कमजोर लोगों को पराजित कर उन पर अपना शासन स्थापित किया और इसी प्रक्रिया से राज्य का निर्माण हुआ। इतिहास में अनेक साम्राज्यों की स्थापना युद्धों और विजयों के माध्यम से हुई, इसलिए इस सिद्धांत में कुछ ऐतिहासिक सत्य अवश्य दिखाई देते हैं। फिर भी केवल बल के आधार पर राज्य की उत्पत्ति को पूरी तरह समझाया नहीं जा सकता, क्योंकि राज्य का विकास सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारकों से भी प्रभावित होता है।

सामाजिक अनुबंध सिद्धांत राजनीति विज्ञान के सबसे प्रभावशाली सिद्धांतों में से एक है। इसके अनुसार प्रारंभ में मनुष्य प्राकृतिक अवस्था में रहता था, जहाँ कोई संगठित राज्य नहीं था। समय के साथ लोगों ने अनुभव किया कि सुरक्षा, शांति और व्यवस्था के लिए एक संगठित राजनीतिक संस्था की आवश्यकता है। इसलिए लोगों ने आपसी सहमति से एक समझौता किया और राज्य की स्थापना की। इस सिद्धांत के विभिन्न रूप प्रस्तुत करते हुए अनेक विचारकों ने प्राकृतिक अवस्था तथा अनुबंध की अलग-अलग व्याख्या की, किंतु सभी का मूल उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि राज्य जनता की सहमति पर आधारित संस्था है। आधुनिक लोकतंत्र, जनसहमति और संवैधानिक शासन की अवधारणा पर इस सिद्धांत का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।

विकासवादी सिद्धांत राज्य की उत्पत्ति को किसी एक घटना या समझौते का परिणाम नहीं मानता। इसके अनुसार राज्य का विकास एक दीर्घकालीन और क्रमिक सामाजिक प्रक्रिया के रूप में हुआ। परिवार से कुल, कुल से कबीला, कबीले से जनजाति और जनजाति से राज्य का क्रमिक विकास हुआ। इस प्रक्रिया में धर्म, रीति-रिवाज, आर्थिक गतिविधियाँ, सुरक्षा की आवश्यकता, सामाजिक संगठन तथा राजनीतिक अनुभव जैसे अनेक कारकों ने योगदान दिया। यह सिद्धांत राज्य की उत्पत्ति को सबसे अधिक व्यावहारिक और ऐतिहासिक दृष्टि से समझाने का प्रयास करता है, क्योंकि यह किसी एक कारण के बजाय अनेक कारणों को समान महत्व देता है।

मार्क्सवादी सिद्धांत राज्य की उत्पत्ति को आर्थिक आधार पर समझाता है। इसके अनुसार आदिम साम्यवादी समाज में राज्य का अस्तित्व नहीं था। जब निजी संपत्ति का विकास हुआ और समाज में वर्गों का निर्माण हुआ, तब आर्थिक हितों की रक्षा के लिए राज्य का उदय हुआ। इस दृष्टिकोण में राज्य को शासक वर्ग का उपकरण माना गया है, जिसका उद्देश्य अपने आर्थिक और राजनीतिक प्रभुत्व को बनाए रखना होता है। मार्क्सवादी विचारधारा के अनुसार वर्गविहीन समाज की स्थापना के बाद राज्य की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इस सिद्धांत ने राज्य की आर्थिक भूमिका और वर्गीय संरचना को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

राज्य केवल अस्तित्व बनाए रखने वाली संस्था नहीं है, बल्कि उसके अनेक कार्य भी होते हैं। समय के साथ राज्य के कार्यों के संबंध में भी विभिन्न विचारधाराएँ विकसित हुईं। इन विचारधाराओं ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि राज्य को नागरिकों के जीवन में कितनी भूमिका निभानी चाहिए।

आदर्शवादी सिद्धांत राज्य को सर्वोच्च नैतिक संस्था मानता है। इसके अनुसार व्यक्ति का वास्तविक विकास राज्य के माध्यम से ही संभव है। राज्य केवल कानून लागू करने वाला संगठन नहीं, बल्कि नैतिक जीवन का संरक्षक भी है। इसलिए व्यक्ति को राज्य के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए और राज्य के हितों को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए। इस दृष्टिकोण में राज्य का उद्देश्य केवल सुरक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि नैतिक एवं सांस्कृतिक विकास को भी प्रोत्साहित करना है।

उदारवादी सिद्धांत राज्य के सीमित कार्यों का समर्थन करता है। इस विचारधारा के अनुसार व्यक्ति राज्य से अधिक महत्वपूर्ण है और उसे अधिकतम स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। राज्य का मुख्य कार्य नागरिकों की सुरक्षा करना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना, न्याय प्रदान करना तथा बाहरी आक्रमणों से रक्षा करना है। आर्थिक और सामाजिक जीवन में राज्य का हस्तक्षेप न्यूनतम होना चाहिए ताकि व्यक्ति अपनी प्रतिभा और क्षमता का स्वतंत्र रूप से विकास कर सके। आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की अवधारणा पर उदारवाद का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।

समाजवादी सिद्धांत राज्य को सामाजिक और आर्थिक समानता स्थापित करने का प्रमुख साधन मानता है। इस विचारधारा के अनुसार समाज में व्याप्त आर्थिक असमानता, शोषण और गरीबी को समाप्त करने के लिए राज्य को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उत्पादन के प्रमुख साधनों पर समाज या राज्य का नियंत्रण होना चाहिए ताकि संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित किया जा सके। समाजवादी दृष्टिकोण सामाजिक न्याय, समान अवसर तथा सामूहिक कल्याण पर विशेष बल देता है।

लोककल्याणकारी सिद्धांत आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य की सबसे व्यापक और व्यावहारिक अवधारणा प्रस्तुत करता है। इसके अनुसार राज्य का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना भी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास, पर्यावरण संरक्षण, वृद्धजन कल्याण, दिव्यांगजन सहायता, ग्रामीण विकास तथा आर्थिक प्रगति जैसे क्षेत्रों में राज्य की सक्रिय भागीदारी आवश्यक मानी जाती है। लोककल्याणकारी राज्य नागरिकों के सर्वांगीण विकास तथा सामाजिक न्याय की स्थापना का प्रयास करता है। वर्तमान समय में अधिकांश लोकतांत्रिक देशों ने इसी सिद्धांत को अपने शासन का आधार बनाया है।

इस प्रकार राज्य मानव सभ्यता के विकास की एक अनिवार्य राजनीतिक संस्था है। इसकी परिभाषा, तत्व, उत्पत्ति तथा कार्यों के संबंध में प्रस्तुत विभिन्न सिद्धांत राजनीति विज्ञान को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। दैवी, शक्ति, सामाजिक अनुबंध, विकासवादी और मार्क्सवादी सिद्धांत राज्य की उत्पत्ति को अलग-अलग आधारों पर स्पष्ट करते हैं, जबकि आदर्शवादी, उदारवादी, समाजवादी और लोककल्याणकारी सिद्धांत राज्य के उद्देश्यों और कार्यों की विभिन्न व्याख्याएँ प्रस्तुत करते हैं। इन सभी विचारों का समन्वित अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि आधुनिक राज्य केवल शासन करने वाली संस्था नहीं, बल्कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता, सुरक्षा और जनकल्याण का आधार है। यही कारण है कि राजनीति विज्ञान में राज्य को सबसे केंद्रीय और महत्वपूर्ण अध्ययन विषय माना जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
  1. राज्य की परिभाषा देते हुए उसके आवश्यक तत्वों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  2. राज्य की उत्पत्ति के विभिन्न सिद्धांतों का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए।
  3. दैवी उत्पत्ति सिद्धांत की प्रमुख विशेषताओं, गुणों एवं दोषों का वर्णन कीजिए।
  4. शक्ति (बल) सिद्धांत का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
  5. सामाजिक अनुबंध सिद्धांत का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसके प्रमुख विचारों का विवेचन कीजिए।
  6. विकासवादी सिद्धांत को राज्य की उत्पत्ति का सर्वाधिक वैज्ञानिक सिद्धांत क्यों माना जाता है? स्पष्ट कीजिए।
  7. राज्य की उत्पत्ति के संबंध में मार्क्सवादी सिद्धांत का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  8. राज्य के कार्यों के संबंध में आदर्शवादी सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
  9. उदारवादी सिद्धांत के अनुसार राज्य के कार्यों का वर्णन कीजिए।
  10. समाजवादी सिद्धांत राज्य की भूमिका को किस प्रकार स्पष्ट करता है? विवेचन कीजिए।
  11. लोककल्याणकारी राज्य की अवधारणा एवं उसके प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।
  12. आदर्शवादी, उदारवादी, समाजवादी एवं लोककल्याणकारी सिद्धांतों की तुलनात्मक समीक्षा कीजिए।
  13. आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य के कार्यों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  14. राज्य के तत्वों का राजनीतिक महत्व स्पष्ट कीजिए।
  15. राज्य की उत्पत्ति के सिद्धांतों में विकासवादी सिद्धांत को सर्वाधिक व्यावहारिक क्यों माना जाता है?

लघु उत्तरीय प्रश्न
  1. राज्य से क्या अभिप्राय है?
  2. राज्य की कोई दो परिभाषाएँ लिखिए।
  3. राज्य के चार आवश्यक तत्वों के नाम लिखिए।
  4. जनसंख्या राज्य का आवश्यक तत्व क्यों है?
  5. संप्रभुता का अर्थ क्या है?
  6. सरकार और राज्य में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  7. दैवी उत्पत्ति सिद्धांत क्या है?
  8. शक्ति सिद्धांत से क्या अभिप्राय है?
  9. सामाजिक अनुबंध सिद्धांत क्या है?
  10. विकासवादी सिद्धांत किस पर आधारित है?
  11. मार्क्सवादी सिद्धांत राज्य की उत्पत्ति को कैसे स्पष्ट करता है?
  12. आदर्शवादी सिद्धांत की मुख्य विशेषता क्या है?
  13. उदारवादी सिद्धांत राज्य के कार्यों को कैसे देखता है?
  14. समाजवादी राज्य का उद्देश्य क्या है?
  15. लोककल्याणकारी राज्य क्या है?
  16. आधुनिक राज्य के दो प्रमुख कार्य लिखिए।
  17. राज्य और सरकार में दो अंतर लिखिए।
  18. संप्रभुता क्यों आवश्यक है?
  19. सामाजिक न्याय से क्या अभिप्राय है?
  20. लोककल्याणकारी राज्य की दो विशेषताएँ लिखिए।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न
  1. राज्य क्या है?
  2. राज्य का मुख्य उद्देश्य क्या है?
  3. राज्य का पहला आवश्यक तत्व कौन-सा है?
  4. राज्य का सबसे महत्वपूर्ण तत्व कौन-सा माना जाता है?
  5. दैवी सिद्धांत किस पर आधारित है?
  6. शक्ति सिद्धांत का आधार क्या है?
  7. सामाजिक अनुबंध का अर्थ क्या है?
  8. विकासवादी सिद्धांत किस प्रक्रिया को मानता है?
  9. मार्क्सवादी सिद्धांत का आधार क्या है?
  10. उदारवादी राज्य किसका समर्थन करता है?
  11. समाजवादी राज्य किस पर बल देता है?
  12. लोककल्याणकारी राज्य का मुख्य उद्देश्य क्या है?
  13. सरकार का एक कार्य लिखिए।
  14. संप्रभुता किसकी विशेषता है?
  15. आधुनिक राज्य का एक कार्य लिखिए।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)

1. राज्य का सबसे महत्वपूर्ण तत्व कौन-सा है?
(A) जनसंख्या
(B) सरकार
(C) संप्रभुता
(D) भू-भाग
उत्तर – (C)

2. राज्य के आवश्यक तत्वों की संख्या कितनी मानी जाती है?
(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच
उत्तर – (C)

3. निम्नलिखित में से कौन राज्य का आवश्यक तत्व नहीं है?
(A) जनसंख्या
(B) सरकार
(C) राजनीतिक दल
(D) संप्रभुता
उत्तर – (C)

4. दैवी उत्पत्ति सिद्धांत के अनुसार राज्य की स्थापना किसके द्वारा हुई?
(A) जनता द्वारा
(B) ईश्वर द्वारा
(C) राजा द्वारा
(D) सेना द्वारा
उत्तर – (B)

5. शक्ति (बल) सिद्धांत के अनुसार राज्य की उत्पत्ति किससे हुई?
(A) समझौते से
(B) बल एवं विजय से
(C) व्यापार से
(D) धर्म से
उत्तर – (B)

6. सामाजिक अनुबंध सिद्धांत का आधार क्या है?
(A) युद्ध
(B) जनता की सहमति
(C) धर्म
(D) व्यापार
उत्तर – (B)

7. विकासवादी सिद्धांत राज्य की उत्पत्ति को किसका परिणाम मानता है?
(A) एक घटना
(B) क्रमिक विकास
(C) युद्ध
(D) संयोग
उत्तर – (B)

8. मार्क्सवादी सिद्धांत राज्य को किसका साधन मानता है?
(A) धार्मिक संस्था
(B) शासक वर्ग का उपकरण
(C) सामाजिक संस्था
(D) सांस्कृतिक संस्था
उत्तर – (B)

9. आदर्शवादी सिद्धांत राज्य को क्या मानता है?
(A) व्यापारिक संस्था
(B) सर्वोच्च नैतिक संस्था
(C) आर्थिक संस्था
(D) धार्मिक संस्था
उत्तर – (B)

10. उदारवादी सिद्धांत किस पर बल देता है?
(A) राज्य का अधिक हस्तक्षेप
(B) व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं सीमित राज्य
(C) पूर्ण सरकारी नियंत्रण
(D) सैन्य शासन
उत्तर – (B)

11. समाजवादी सिद्धांत का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(A) निजी लाभ
(B) सामाजिक एवं आर्थिक समानता
(C) व्यापार विस्तार
(D) कर वृद्धि
उत्तर – (B)

12. लोककल्याणकारी राज्य का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
(A) केवल कानून बनाना
(B) नागरिकों का सर्वांगीण कल्याण
(C) केवल रक्षा करना
(D) केवल कर वसूलना
उत्तर – (B)

13. निम्नलिखित में कौन आधुनिक राज्य का कार्य है?
(A) शिक्षा
(B) स्वास्थ्य
(C) सामाजिक सुरक्षा
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (D)

14. सरकार क्या है?
(A) राज्य का स्थायी तत्व
(B) राज्य का प्रशासन चलाने वाला संगठन
(C) केवल न्यायालय
(D) केवल संसद
उत्तर – (B)

15. संप्रभुता का अर्थ है—
(A) कर वसूलना
(B) सर्वोच्च एवं स्वतंत्र सत्ता
(C) चुनाव कराना
(D) कानून बनाना
उत्तर – (B)

16. राज्य और सरकार में क्या संबंध है?
(A) दोनों समान हैं।
(B) सरकार राज्य का एक तत्व है।
(C) राज्य सरकार का एक अंग है।
(D) दोनों का कोई संबंध नहीं।
उत्तर – (B)

17. विकासवादी सिद्धांत के अनुसार राज्य का विकास किस क्रम में हुआ?
(A) राज्य → परिवार → जनजाति
(B) परिवार → कुल → जनजाति → राज्य
(C) सरकार → राज्य → समाज
(D) धर्म → राज्य → परिवार
उत्तर – (B)

18. मार्क्सवादी सिद्धांत का आधार क्या है?
(A) धार्मिक विचार
(B) वर्ग संघर्ष एवं आर्थिक आधार
(C) नैतिकता
(D) परंपरा
उत्तर – (B)

19. उदारवादी राज्य का मुख्य कार्य क्या है?
(A) सभी उद्योग चलाना
(B) कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा बनाए रखना
(C) सभी संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण करना
(D) धर्म का प्रचार करना
उत्तर – (B)

20. वर्तमान समय में अधिकांश लोकतांत्रिक देश किस राज्य की अवधारणा को अपनाते हैं?
(A) दैवी राज्य
(B) पुलिस राज्य
(C) लोककल्याणकारी राज्य
(D) निरंकुश राज्य
उत्तर – (C)

रिक्त स्थान भरिए
  1. राज्य के चार आवश्यक तत्व हैं—________, ________, ________ तथा ________।

    उत्तर: जनसंख्या, निश्चित भू-भाग, सरकार, संप्रभुता
  2. सामाजिक अनुबंध सिद्धांत ________ की सहमति पर आधारित है।

    उत्तर: जनता
  3. विकासवादी सिद्धांत राज्य की उत्पत्ति को ________ प्रक्रिया का परिणाम मानता है।

    उत्तर: क्रमिक
  4. मार्क्सवादी सिद्धांत का आधार ________ संघर्ष है।

    उत्तर: वर्ग
  5. आधुनिक लोकतंत्र का आदर्श ________ राज्य है।

    उत्तर: लोककल्याणकारी

सत्य / असत्य
  1. राज्य का एक आवश्यक तत्व संप्रभुता है। (सत्य)
  2. दैवी सिद्धांत के अनुसार राज्य जनता की सहमति से बना। (असत्य)
  3. सामाजिक अनुबंध सिद्धांत जनता की सहमति पर आधारित है। (सत्य)
  4. विकासवादी सिद्धांत राज्य की उत्पत्ति को एक ही घटना का परिणाम मानता है। (असत्य)
  5. लोककल्याणकारी राज्य नागरिकों के कल्याण पर बल देता है। (सत्य)

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