Unit-01

Modern political thought Machiavelli ,Austin, Jean Bodin.in hindi
आधुनिक राजनीतिक चिंतन : निकोलो मैकियावेली, जाँ बोदाँ तथा जॉन ऑस्टिन के राजनीतिक विचार
भाग–1 (मैकियावेली)

आधुनिक राजनीतिक चिंतन का उदय यूरोप में मध्ययुगीन व्यवस्था के पतन और पुनर्जागरण, धर्म-सुधार आंदोलन, वैज्ञानिक क्रांति तथा राष्ट्रीय राज्यों के उदय के साथ हुआ। मध्ययुग में राजनीति पर धर्म और चर्च का गहरा प्रभाव था। राज्य की शक्ति को ईश्वर प्रदत्त माना जाता था तथा राजनीतिक निर्णयों पर धार्मिक संस्थाओं का नियंत्रण था। किंतु पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी में यूरोप में ऐसे परिवर्तन हुए जिन्होंने मनुष्य की बुद्धि, तर्क, अनुभव और स्वतंत्र विचार को महत्व दिया। परिणामस्वरूप राजनीति को धर्म और नैतिक उपदेशों से अलग करके एक स्वतंत्र अध्ययन के रूप में विकसित किया गया। आधुनिक राजनीतिक चिंतन का मूल उद्देश्य यह समझना था कि राज्य की उत्पत्ति कैसे हुई, उसकी शक्ति का आधार क्या है, शासन किस प्रकार चलना चाहिए तथा कानून और संप्रभुता का वास्तविक स्वरूप क्या है।

इसी परिवर्तनशील वातावरण में निकोलो मैकियावेली का उदय हुआ। उन्हें आधुनिक राजनीतिक विज्ञान का जनक कहा जाता है क्योंकि उन्होंने राजनीति का अध्ययन आदर्शवादी कल्पनाओं के स्थान पर यथार्थवादी दृष्टिकोण से किया। उनका जन्म 1469 ईस्वी में इटली के फ्लोरेंस नगर में हुआ। उस समय इटली अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था। विदेशी आक्रमण, आंतरिक संघर्ष, राजनीतिक षड्यंत्र तथा अस्थिर शासन के कारण देश की एकता और सुरक्षा संकट में थी। मैकियावेली ने इन परिस्थितियों का प्रत्यक्ष अनुभव किया और निष्कर्ष निकाला कि एक शक्तिशाली, संगठित तथा व्यावहारिक राज्य ही समाज में शांति और स्थिरता स्थापित कर सकता है।

मैकियावेली की प्रसिद्ध कृति द प्रिंस (The Prince) आधुनिक राजनीतिक चिंतन की आधारशिला मानी जाती है। इस ग्रंथ में उन्होंने आदर्श राजा की कल्पना नहीं की, बल्कि ऐसे शासक का चित्र प्रस्तुत किया जो वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने में सक्षम हो। उनके अनुसार राजनीति का उद्देश्य राज्य की सुरक्षा, एकता और स्थिरता बनाए रखना है। यदि राज्य ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो न्याय, नैतिकता, धर्म और संस्कृति भी सुरक्षित नहीं रह सकते। इसलिए शासक का प्रथम कर्तव्य राज्य की रक्षा करना है।

मैकियावेली का सबसे महत्वपूर्ण योगदान राजनीति को धर्म और नैतिकता से अलग करना था। उनका मानना था कि धार्मिक और नैतिक आदर्श व्यक्तिगत जीवन के लिए उपयोगी हो सकते हैं, किंतु शासन संचालन केवल आदर्शों के आधार पर नहीं चल सकता। शासक को परिस्थितियों के अनुसार व्यावहारिक निर्णय लेने चाहिए। यदि राज्य के अस्तित्व की रक्षा के लिए कठोर उपाय आवश्यक हों, तो उनसे बचना उचित नहीं होगा। इस कारण उनके विचारों को यथार्थवादी राजनीति का प्रारंभ माना जाता है।

मैकियावेली ने मानव स्वभाव का भी गहन विश्लेषण किया। उनके अनुसार अधिकांश मनुष्य स्वार्थी, महत्वाकांक्षी, अस्थिर और अवसरवादी होते हैं। वे अपने हितों की रक्षा के लिए परिस्थितियों के अनुसार व्यवहार बदल लेते हैं। इसलिए केवल जनता की सद्भावना पर शासन को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। शासन व्यवस्था को ऐसे संस्थागत आधारों पर निर्मित होना चाहिए जो अनुशासन, कानून और शक्ति के माध्यम से राज्य की स्थिरता बनाए रखें। उनका यह दृष्टिकोण बाद के अनेक राजनीतिक विचारकों को प्रभावित करता है।

मैकियावेली ने शक्ति को राजनीति का आवश्यक तत्व माना। उनके अनुसार शक्ति का उद्देश्य अत्याचार करना नहीं, बल्कि राज्य की रक्षा और व्यवस्था बनाए रखना है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कमजोर शासन जनता की अपेक्षा अधिक हानिकारक होता है, क्योंकि उससे अराजकता, असुरक्षा और विदेशी हस्तक्षेप की संभावना बढ़ जाती है। इसीलिए वे सक्षम नेतृत्व, अनुशासित सेना और प्रभावी प्रशासन पर विशेष बल देते हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय एकता को सर्वोच्च राजनीतिक लक्ष्य माना। उनके समय में इटली अनेक राज्यों में विभाजित था और विदेशी शक्तियाँ उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करती थीं। मैकियावेली चाहते थे कि इटली एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में संगठित हो। इस उद्देश्य से उन्होंने ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता बताई जो व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दे। इस विचार ने आगे चलकर आधुनिक राष्ट्रवाद के विकास को भी प्रेरणा दी।

मैकियावेली ने नागरिक सेना का समर्थन किया और भाड़े के सैनिकों का विरोध किया। उनके अनुसार भाड़े के सैनिक धन के लिए युद्ध करते हैं, इसलिए संकट के समय वे राज्य के प्रति निष्ठावान नहीं रहते। इसके विपरीत नागरिक सेना अपने देश और समाज की रक्षा के लिए अधिक समर्पित होती है। इस विचार में राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक उत्तरदायित्व दोनों का समन्वय दिखाई देता है।

उनके राजनीतिक विचारों में व्यावहारिक बुद्धिमत्ता का विशेष स्थान है। वे मानते थे कि सफल शासक वही है जो बदलती परिस्थितियों को समझकर समयानुकूल निर्णय ले सके। भाग्य का प्रभाव स्वीकार करते हुए भी उन्होंने यह कहा कि केवल भाग्य पर निर्भर रहने वाला शासक सफल नहीं हो सकता। सफलता के लिए साहस, दूरदर्शिता, निर्णय क्षमता और नेतृत्व आवश्यक है।

यद्यपि मैकियावेली के विचारों की व्यापक प्रशंसा हुई, फिर भी उनकी आलोचना भी की गई। अनेक विद्वानों का मत है कि उन्होंने नैतिक मूल्यों की उपेक्षा करते हुए शक्ति और छल को अत्यधिक महत्व दिया। कुछ आलोचक उन्हें निरंकुश शासन का समर्थक मानते हैं। दूसरी ओर अनेक आधुनिक विद्वान यह स्वीकार करते हैं कि उन्होंने राजनीति का अध्ययन पहली बार वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर किया और राजनीतिक विज्ञान को धार्मिक एवं नैतिक नियंत्रण से मुक्त करके एक स्वतंत्र सामाजिक विज्ञान के रूप में स्थापित किया।

आधुनिक राजनीतिक चिंतन में मैकियावेली का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने राजनीति को आदर्शवादी कल्पनाओं से निकालकर यथार्थ की भूमि पर स्थापित किया। राज्य की शक्ति, राष्ट्रीय एकता, प्रभावी नेतृत्व, व्यावहारिक शासन और प्रशासनिक दक्षता पर उनके विचार आज भी प्रासंगिक माने जाते हैं। आधुनिक राष्ट्र-राज्य, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा प्रशासनिक नेतृत्व के अध्ययन में उनके विचारों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इसी कारण उन्हें आधुनिक राजनीतिक यथार्थवाद का प्रथम और सबसे प्रभावशाली प्रवक्ता माना जाता है।

भाग–2 (जाँ बोदाँ)

उन्नीसवीं शताब्दी में राजनीतिक एवं विधिक चिंतन के क्षेत्र में एक ऐसे विचारक का उदय हुआ जिसने राज्य, कानून और संप्रभुता की अवधारणाओं को नई दृष्टि से स्पष्ट किया। यह विचारक जॉन ऑस्टिन थे। उन्हें आधुनिक विधिशास्त्र (Jurisprudence) का प्रमुख प्रवर्तक तथा कानूनी संप्रभुता (Legal Sovereignty) का सबसे प्रभावशाली प्रतिपादक माना जाता है। उन्होंने कानून को नैतिकता, धर्म और परंपराओं से अलग करते हुए उसका विश्लेषण शुद्ध विधिक दृष्टिकोण से किया। इस कारण उनके विचारों ने आधुनिक संवैधानिक अध्ययन, विधिशास्त्र और राजनीतिक विज्ञान को गहराई से प्रभावित किया।

जॉन ऑस्टिन का जन्म 1790 ईस्वी में इंग्लैंड में हुआ। प्रारंभ में उन्होंने सेना में कार्य किया, बाद में विधि का अध्ययन किया और लंदन विश्वविद्यालय में विधिशास्त्र के प्राध्यापक बने। वे उपयोगितावादी विचारक जेरेमी बेंथम से प्रभावित थे। बेंथम की भाँति ऑस्टिन भी कानून को तर्कसंगत और वैज्ञानिक आधार पर समझाना चाहते थे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “The Province of Jurisprudence Determined” आधुनिक विधिशास्त्र की आधारभूत कृतियों में गिनी जाती है।

ऑस्टिन के अनुसार कानून का वास्तविक स्वरूप समझने के लिए उसे नैतिकता, धर्म, न्याय या आदर्शों से अलग करके देखना चाहिए। उन्होंने कानून को संप्रभु का आदेश बताया। उनके अनुसार जब कोई सर्वोच्च राजनीतिक सत्ता किसी व्यक्ति या समुदाय को आदेश देती है और उस आदेश का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान होता है, तब वही आदेश कानून कहलाता है। इस विचार को आदेश सिद्धांत (Command Theory of Law) कहा जाता है।

ऑस्टिन ने कानून के तीन आवश्यक तत्व बताए। पहला, आदेश देने वाला कोई सर्वोच्च संप्रभु होना चाहिए। दूसरा, आदेश का पालन करना नागरिकों के लिए अनिवार्य होना चाहिए। तीसरा, आदेश की अवहेलना करने पर दंड की व्यवस्था होनी चाहिए। यदि इन तीनों में से कोई तत्व अनुपस्थित हो, तो वह वास्तविक अर्थ में कानून नहीं माना जा सकता।

ऑस्टिन के अनुसार संप्रभु वह व्यक्ति या संस्था है जिसकी आज्ञा का अधिकांश लोग नियमित रूप से पालन करते हैं और जो स्वयं किसी अन्य सांसारिक सत्ता के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य नहीं होती। इस प्रकार संप्रभु राज्य की सर्वोच्च विधिक शक्ति है। कानून का स्रोत भी वही है और उसके पालन की अंतिम जिम्मेदारी भी उसी की होती है।

ऑस्टिन ने राजनीतिक संप्रभुता और कानूनी संप्रभुता में स्पष्ट अंतर नहीं किया, बल्कि मुख्य रूप से विधिक संप्रभुता पर बल दिया। उनके अनुसार संसद, राजा या संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त सर्वोच्च संस्था ही विधिक संप्रभु होती है। यही संस्था कानून बनाने, संशोधित करने तथा समाप्त करने का अधिकार रखती है।

ऑस्टिन ने कानून और नैतिकता के संबंध को भी अलग-अलग माना। उनका मत था कि कोई कानून नैतिक दृष्टि से अच्छा या बुरा हो सकता है, लेकिन यदि वह संप्रभु द्वारा बनाया गया है और उसके उल्लंघन पर दंड निर्धारित है, तो वह विधिक दृष्टि से कानून ही रहेगा। इस प्रकार उन्होंने “क्या कानून है” और “कानून कैसा होना चाहिए”—इन दोनों प्रश्नों को अलग कर दिया। यह उनके विधिक प्रत्यक्षवाद (Legal Positivism) की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है।

ऑस्टिन का सिद्धांत उस समय अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुआ क्योंकि उसने कानून की स्पष्ट और सरल परिभाषा प्रस्तुत की। प्रशासनिक व्यवस्था में भी यह विचार उपयोगी माना गया कि प्रत्येक कानून के पीछे एक वैध और सर्वोच्च सत्ता होनी चाहिए। आधुनिक विधि शिक्षा, न्यायिक प्रक्रिया तथा संवैधानिक अध्ययन में उनके विचारों का गहरा प्रभाव देखा जा सकता है।

यद्यपि ऑस्टिन के सिद्धांत की व्यापक आलोचना भी हुई। अनेक विद्वानों ने कहा कि सभी कानून केवल संप्रभु के आदेश नहीं होते। उदाहरण के लिए संवैधानिक परंपराएँ, अंतरराष्ट्रीय कानून, प्रथाएँ और न्यायालयों द्वारा विकसित सिद्धांत भी विधि का महत्वपूर्ण भाग हैं, जबकि वे हमेशा किसी एक संप्रभु के प्रत्यक्ष आदेश से उत्पन्न नहीं होते।

ब्रिटिश विधिवेत्ता ए. वी. डाइसी, एच. एल. ए. हार्ट, हेरॉल्ड लास्की तथा अन्य आधुनिक विचारकों ने भी ऑस्टिन की अवधारणा की आलोचना की। हार्ट ने कहा कि कानून केवल आदेश नहीं, बल्कि ऐसे नियमों की व्यवस्था है जिन्हें समाज वैध मानता है। लास्की ने बहुलवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि आधुनिक समाज में शक्ति अनेक संस्थाओं में विभाजित रहती है, इसलिए किसी एक संस्था को पूर्ण संप्रभु नहीं माना जा सकता।

संघीय शासन व्यवस्था, लोकतांत्रिक संविधान, न्यायिक पुनर्विलोकन तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विकास ने भी ऑस्टिन के सिद्धांत की सीमाओं को उजागर किया। आज अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में संविधान सर्वोच्च माना जाता है और सरकार की शक्तियाँ संविधान द्वारा सीमित होती हैं। इस कारण संप्रभुता की अवधारणा अब पहले की अपेक्षा अधिक जटिल हो गई है।

फिर भी जॉन ऑस्टिन का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कानून को वैज्ञानिक अध्ययन का विषय बनाया और विधिशास्त्र को एक स्वतंत्र अनुशासन के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका आदेश सिद्धांत आज भी विधिशास्त्र के अध्ययन का आधार माना जाता है और प्रत्येक विद्यार्थी को आधुनिक विधिक चिंतन को समझने के लिए उनके विचारों का अध्ययन करना आवश्यक होता है।

यदि आधुनिक राजनीतिक चिंतन के इन तीनों विचारकों का समग्र मूल्यांकन किया जाए, तो स्पष्ट होता है कि प्रत्येक ने राज्य और राजनीति के अध्ययन को नई दिशा प्रदान की। मैकियावेली ने राजनीति को यथार्थवादी आधार दिया और राज्य की शक्ति तथा राष्ट्रीय एकता को सर्वोच्च महत्व प्रदान किया। जाँ बोदाँ ने संप्रभुता के सिद्धांत को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत कर आधुनिक राष्ट्र-राज्य की वैचारिक नींव रखी। जॉन ऑस्टिन ने कानून और संप्रभुता का विधिक विश्लेषण करते हुए आधुनिक विधिशास्त्र को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।

तीनों विचारकों के विचारों में कुछ समानताएँ भी हैं। तीनों ने राज्य की शक्ति और प्रभावी शासन की आवश्यकता को स्वीकार किया। तीनों का मानना था कि राज्य की स्थिरता के बिना समाज में शांति और व्यवस्था संभव नहीं है। किंतु उनके दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण अंतर भी दिखाई देता है। मैकियावेली का चिंतन मुख्यतः राजनीतिक व्यवहार और शासन-कौशल पर आधारित है, बोदाँ का चिंतन राज्य की सर्वोच्च सत्ता पर केंद्रित है, जबकि ऑस्टिन का अध्ययन विधिक संप्रभुता और कानून के स्वरूप तक सीमित रहता है।

समकालीन लोकतांत्रिक युग में इन तीनों विचारकों के सिद्धांतों को यथावत स्वीकार नहीं किया जाता, किंतु उनके मूल विचार आज भी राजनीतिक विज्ञान, संवैधानिक अध्ययन, प्रशासनिक सिद्धांत, अंतरराष्ट्रीय राजनीति तथा विधिशास्त्र के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी हैं। आधुनिक राज्य, विधि के शासन, राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रशासनिक उत्तरदायित्व तथा राजनीतिक संस्थाओं के विकास को समझने में इन तीनों विचारकों का योगदान आज भी आधारभूत महत्व रखता है। इसी कारण आधुनिक राजनीतिक चिंतन के इतिहास में निकोलो मैकियावेली, जाँ बोदाँ तथा जॉन ऑस्टिन का स्थान अत्यंत विशिष्ट और स्थायी माना जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
  1. आधुनिक राजनीतिक चिंतन की पृष्ठभूमि एवं प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  2. निकोलो मैकियावेली को आधुनिक राजनीतिक विज्ञान का जनक क्यों कहा जाता है? स्पष्ट कीजिए।
  3. मैकियावेली के राजनीतिक विचारों का समालोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
  4. मैकियावेली की यथार्थवादी राजनीति का विश्लेषण कीजिए।
  5. मैकियावेली की राज्य संबंधी अवधारणा का मूल्यांकन कीजिए।
  6. मैकियावेली के अनुसार आदर्श शासक के गुणों का वर्णन कीजिए।
  7. मैकियावेली के विचारों की आधुनिक राजनीति में प्रासंगिकता का अध्ययन कीजिए।
  8. जाँ बोदाँ के जीवन एवं राजनीतिक विचारों का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  9. जाँ बोदाँ के संप्रभुता सिद्धांत का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
  10. संप्रभुता की अवधारणा के विकास में जाँ बोदाँ के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
  11. जाँ बोदाँ के राज्य संबंधी विचारों का विश्लेषण कीजिए।
  12. जाँ बोदाँ के राजनीतिक दर्शन की प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन कीजिए।
  13. जॉन ऑस्टिन के राजनीतिक एवं विधिक विचारों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  14. जॉन ऑस्टिन के आदेश सिद्धांत (Command Theory of Law) का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  15. जॉन ऑस्टिन के कानूनी संप्रभुता सिद्धांत का मूल्यांकन कीजिए।
  16. विधिशास्त्र के विकास में जॉन ऑस्टिन के योगदान का विश्लेषण कीजिए।
  17. आधुनिक विधिशास्त्र में ऑस्टिन के विचारों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
  18. मैकियावेली और जाँ बोदाँ के राजनीतिक विचारों की तुलना कीजिए।
  19. जाँ बोदाँ और जॉन ऑस्टिन के संप्रभुता संबंधी विचारों का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
  20. मैकियावेली और ऑस्टिन के विचारों का तुलनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
  21. आधुनिक राजनीतिक चिंतन के विकास में मैकियावेली, बोदाँ तथा ऑस्टिन के योगदान का विश्लेषण कीजिए।
  22. आधुनिक राज्य की अवधारणा के विकास में इन तीनों विचारकों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  23. आधुनिक राजनीतिक चिंतन में शक्ति, संप्रभुता और कानून की अवधारणाओं का अध्ययन कीजिए।
  24. आधुनिक लोकतंत्र के संदर्भ में मैकियावेली, बोदाँ तथा ऑस्टिन के विचारों की प्रासंगिकता का मूल्यांकन कीजिए।
  25. आधुनिक राजनीतिक चिंतन में यथार्थवाद और विधिक प्रत्यक्षवाद का विश्लेषण कीजिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न
  1. आधुनिक राजनीतिक चिंतन से क्या अभिप्राय है?
  2. मैकियावेली को आधुनिक राजनीति का जनक क्यों कहा जाता है?
  3. मैकियावेली की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम लिखिए।
  4. मैकियावेली के अनुसार राज्य का मुख्य उद्देश्य क्या है?
  5. मैकियावेली राजनीति को धर्म से अलग क्यों मानते हैं?
  6. जाँ बोदाँ कौन थे?
  7. संप्रभुता से क्या अभिप्राय है?
  8. जाँ बोदाँ के अनुसार संप्रभुता की दो विशेषताएँ लिखिए।
  9. जाँ बोदाँ की प्रसिद्ध कृति का नाम लिखिए।
  10. जॉन ऑस्टिन कौन थे?
  11. ऑस्टिन के आदेश सिद्धांत से क्या अभिप्राय है?
  12. कानूनी संप्रभुता क्या है?
  13. विधिक प्रत्यक्षवाद (Legal Positivism) क्या है?
  14. कानून और नैतिकता में ऑस्टिन ने क्या अंतर बताया?
  15. मैकियावेली के अनुसार सफल शासक की विशेषताएँ लिखिए।
  16. बोदाँ ने राजतंत्र का समर्थन क्यों किया?
  17. ऑस्टिन के अनुसार कानून के तीन आवश्यक तत्व कौन-से हैं?
  18. मैकियावेली के राष्ट्रवाद संबंधी विचार लिखिए।
  19. बोदाँ के संप्रभुता सिद्धांत की आलोचनाएँ लिखिए।
  20. ऑस्टिन के सिद्धांत की दो सीमाएँ लिखिए।
  21. आधुनिक राजनीतिक चिंतन की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
  22. मैकियावेली और ऑस्टिन में एक अंतर लिखिए।
  23. जाँ बोदाँ और ऑस्टिन में एक समानता लिखिए।
  24. आधुनिक राज्य के विकास में इन तीनों विचारकों का योगदान लिखिए।
  25. आधुनिक लोकतंत्र में इन विचारकों के विचारों का महत्व स्पष्ट कीजिए।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न
  1. आधुनिक राजनीतिक विज्ञान का जनक किसे माना जाता है?

    उत्तर – निकोलो मैकियावेली
  2. The Prince के लेखक कौन हैं?

    उत्तर – निकोलो मैकियावेली
  3. संप्रभुता सिद्धांत का प्रथम व्यवस्थित प्रतिपादक कौन था?

    उत्तर – जाँ बोदाँ
  4. Six Books of the Commonwealth किसकी रचना है?

    उत्तर – जाँ बोदाँ
  5. आदेश सिद्धांत का प्रतिपादक कौन था?

    उत्तर – जॉन ऑस्टिन
  6. The Province of Jurisprudence Determined किसकी रचना है?

    उत्तर – जॉन ऑस्टिन
  7. ऑस्टिन किस देश के विचारक थे?

    उत्तर – इंग्लैंड
  8. मैकियावेली किस देश के थे?

    उत्तर – इटली
  9. जाँ बोदाँ किस देश के थे?

    उत्तर – फ्रांस
  10. कानूनी संप्रभुता का प्रमुख प्रतिपादक कौन है?

    उत्तर – जॉन ऑस्टिन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)

1. आधुनिक राजनीतिक विज्ञान का जनक किसे कहा जाता है?
(A) प्लेटो
(B) अरस्तू
(C) निकोलो मैकियावेली
(D) रूसो
उत्तर – (C)

2. The Prince के लेखक कौन हैं?
(A) हॉब्स
(B) मैकियावेली
(C) लॉक
(D) ऑस्टिन
उत्तर – (B)

3. मैकियावेली किस देश के थे?
(A) इंग्लैंड
(B) फ्रांस
(C) इटली
(D) जर्मनी
उत्तर – (C)

4. संप्रभुता सिद्धांत का प्रथम व्यवस्थित प्रतिपादक कौन था?
(A) हॉब्स
(B) जाँ बोदाँ
(C) लॉक
(D) रूसो
उत्तर – (B)

5. जाँ बोदाँ की प्रसिद्ध पुस्तक कौन-सी है?
(A) The Prince
(B) Leviathan
(C) Six Books of the Commonwealth
(D) Social Contract
उत्तर – (C)

6. जॉन ऑस्टिन किस सिद्धांत के लिए प्रसिद्ध हैं?
(A) सामाजिक अनुबंध
(B) आदेश सिद्धांत
(C) शक्ति पृथक्करण
(D) उपयोगितावाद
उत्तर – (B)

7. ऑस्टिन के अनुसार कानून क्या है?
(A) परंपरा
(B) नैतिक नियम
(C) संप्रभु का आदेश
(D) धार्मिक आदेश
उत्तर – (C)

8. Legal Positivism का प्रमुख समर्थक कौन था?
(A) लॉक
(B) ऑस्टिन
(C) रूसो
(D) बर्क
उत्तर – (B)

9. मैकियावेली ने किस पर सबसे अधिक बल दिया?
(A) आदर्शवाद
(B) यथार्थवाद
(C) समाजवाद
(D) साम्यवाद
उत्तर – (B)

10. बोदाँ के अनुसार संप्रभुता कैसी होती है?
(A) अस्थायी
(B) विभाज्य
(C) सर्वोच्च एवं स्थायी
(D) सीमित
उत्तर – (C)

11. ऑस्टिन के अनुसार कानून के उल्लंघन पर क्या होना चाहिए?
(A) पुरस्कार
(B) दंड
(C) सम्मान
(D) समझौता
उत्तर – (B)

12. मैकियावेली की राजनीति किससे पृथक मानी जाती है?
(A) विज्ञान से
(B) धर्म और नैतिकता से
(C) अर्थशास्त्र से
(D) समाजशास्त्र से
उत्तर – (B)

13. बोदाँ का मुख्य योगदान किस अवधारणा से जुड़ा है?
(A) समानता
(B) संप्रभुता
(C) स्वतंत्रता
(D) न्याय
उत्तर – (B)

14. ऑस्टिन मुख्यतः किस विषय के विद्वान थे?
(A) अर्थशास्त्र
(B) विधिशास्त्र
(C) इतिहास
(D) समाजशास्त्र
उत्तर – (B)

15. आधुनिक राजनीतिक चिंतन का प्रमुख उद्देश्य क्या था?
(A) धर्म का विस्तार
(B) राज्य एवं राजनीति का वैज्ञानिक अध्ययन
(C) केवल नैतिक शिक्षा
(D) व्यापार का विकास
उत्तर – (B)

सत्य / असत्य
  1. मैकियावेली को आधुनिक राजनीतिक विज्ञान का जनक माना जाता है। (सत्य)
  2. The Prince के लेखक जाँ बोदाँ हैं। (असत्य)
  3. जाँ बोदाँ ने संप्रभुता सिद्धांत का प्रतिपादन किया। (सत्य)
  4. ऑस्टिन के अनुसार कानून संप्रभु का आदेश है। (सत्य)
  5. मैकियावेली ने राजनीति को धर्म और नैतिकता से अलग माना। (सत्य)
  6. जाँ बोदाँ इटली के विचारक थे। (असत्य)
  7. ऑस्टिन इंग्लैंड के विधिशास्त्री थे। (सत्य)
  8. बोदाँ के अनुसार संप्रभुता विभाज्य होती है। (असत्य)
  9. मैकियावेली ने राष्ट्रीय एकता पर बल दिया। (सत्य)
  10. आधुनिक विधिशास्त्र के विकास में ऑस्टिन का महत्वपूर्ण योगदान है। (सत्य)

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