Unit-06
New public administration, New Public Management, New Public Service Approach, Good Governance, Public Policy Formulation
नव लोक प्रशासन, नव लोक प्रबंधन, नव लोक सेवा उपागम, सुशासन तथा सार्वजनिक नीति निर्माण
आधुनिक राज्य की बदलती हुई प्रकृति और समाज की बढ़ती हुई आवश्यकताओं ने लोक प्रशासन के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन उत्पन्न किए हैं। प्रारंभिक काल में लोक प्रशासन का मुख्य उद्देश्य कानूनों का पालन कराना, व्यवस्था बनाए रखना और सरकारी निर्णयों को लागू करना था, लेकिन कल्याणकारी राज्य के विकास के साथ प्रशासन की भूमिका अत्यधिक विस्तृत हो गई। अब प्रशासन से केवल नियमों के पालन की अपेक्षा नहीं की जाती, बल्कि उससे सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास, नागरिक सहभागिता, पारदर्शिता और प्रभावी सेवा प्रदान करने की भी अपेक्षा की जाती है। इन्हीं परिवर्तनों के परिणामस्वरूप लोक प्रशासन में अनेक नवीन दृष्टिकोणों का विकास हुआ, जिनमें नव लोक प्रशासन, नव लोक प्रबंधन, नव लोक सेवा उपागम, सुशासन और सार्वजनिक नीति निर्माण प्रमुख हैं।
परंपरागत लोक प्रशासन मुख्य रूप से नौकरशाही, पदानुक्रम, नियमों और औपचारिक प्रक्रियाओं पर आधारित था। इसमें प्रशासन को एक तटस्थ और तकनीकी व्यवस्था के रूप में देखा जाता था। इसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता और स्थिरता प्राप्त करना था, लेकिन समय के साथ यह महसूस किया गया कि केवल नियमों और प्रक्रियाओं पर आधारित प्रशासन समाज की जटिल समस्याओं का समाधान करने में पर्याप्त सक्षम नहीं है। गरीबी, असमानता, सामाजिक अन्याय और नागरिक अपेक्षाओं में वृद्धि जैसी समस्याओं ने प्रशासन को अधिक संवेदनशील और जनोन्मुख बनाने की आवश्यकता उत्पन्न की। इसी पृष्ठभूमि में नव लोक प्रशासन का उदय हुआ।
नव लोक प्रशासन का विकास विशेष रूप से 1960 और 1970 के दशक में हुआ। इसका प्रमुख उद्देश्य लोक प्रशासन को सामाजिक प्रासंगिकता प्रदान करना था। इस दृष्टिकोण ने प्रशासन को केवल दक्षता और नियमों तक सीमित न रखकर सामाजिक समानता और न्याय के साथ जोड़ा। नव लोक प्रशासन के समर्थकों का मानना था कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य केवल कार्यों को पूरा करना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा करना और सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देना भी है।
नव लोक प्रशासन ने पारंपरिक प्रशासनिक विचारधारा की आलोचना करते हुए कहा कि प्रशासन को मूल्य-निरपेक्ष नहीं माना जा सकता। प्रशासनिक निर्णयों का समाज पर प्रभाव पड़ता है, इसलिए प्रशासन को सामाजिक मूल्यों और जनहित के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए। इस दृष्टिकोण ने नागरिकों की आवश्यकताओं, सहभागिता और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर विशेष बल दिया।
नव लोक प्रशासन की प्रमुख विशेषताओं में सामाजिक समानता, परिवर्तनशीलता, नागरिक सहभागिता, उत्तरदायित्व और जनोन्मुखता प्रमुख हैं। यह दृष्टिकोण प्रशासन को समाज के विकास और सुधार का साधन मानता है। इसके अनुसार प्रशासन को केवल सरकार का उपकरण नहीं, बल्कि समाज के कल्याण और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने वाली संस्था होना चाहिए।
इसके बाद 1980 के दशक में नव लोक प्रबंधन का विकास हुआ। यह दृष्टिकोण मुख्य रूप से आर्थिक सुधारों, वैश्वीकरण और निजी क्षेत्र की प्रबंधन तकनीकों के प्रभाव से विकसित हुआ। नव लोक प्रबंधन का उद्देश्य सरकारी प्रशासन में दक्षता, प्रभावशीलता और परिणामोन्मुखता को बढ़ाना था। इसके समर्थकों का मानना था कि सरकारी संस्थाओं को भी निजी क्षेत्र की तरह आधुनिक प्रबंधन तकनीकों को अपनाना चाहिए ताकि सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
नव लोक प्रबंधन प्रशासन में प्रतिस्पर्धा, विकेंद्रीकरण, कार्य निष्पादन मूल्यांकन, ग्राहक केंद्रित सेवाओं और संसाधनों के कुशल उपयोग पर बल देता है। इस दृष्टिकोण के अंतर्गत प्रशासन को परिणाम आधारित बनाया जाता है, जिसमें यह देखा जाता है कि किसी योजना या कार्यक्रम से वास्तविक उपलब्धियाँ क्या प्राप्त हुईं। इसमें सरकारी विभागों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करने और उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने की व्यवस्था पर जोर दिया जाता है।
नव लोक प्रबंधन ने प्रशासन में कई सकारात्मक परिवर्तन किए। इससे सरकारी संस्थाओं में दक्षता बढ़ाने, सेवा वितरण में सुधार करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहन मिला। अनेक देशों में प्रशासनिक सुधारों के अंतर्गत निजी क्षेत्र की तकनीकों, अनुबंध व्यवस्था, प्रदर्शन मूल्यांकन और ई-गवर्नेंस जैसी व्यवस्थाओं को अपनाया गया।
हालाँकि नव लोक प्रबंधन की कुछ आलोचनाएँ भी की गईं। आलोचकों का कहना है कि यह दृष्टिकोण प्रशासन को अत्यधिक व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखता है और नागरिकों को केवल उपभोक्ता के रूप में मानने की प्रवृत्ति रखता है। सरकार का उद्देश्य केवल दक्षता प्राप्त करना नहीं, बल्कि न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना भी है। इसलिए केवल बाजार आधारित दृष्टिकोण सार्वजनिक प्रशासन के सभी उद्देश्यों को पूरा नहीं कर सकता।
नव लोक सेवा उपागम इसी आलोचना की पृष्ठभूमि में विकसित हुआ। यह दृष्टिकोण प्रशासन को नागरिक केंद्रित बनाने पर बल देता है। इसके प्रमुख विचारकों ने यह तर्क दिया कि सरकार का कार्य केवल सेवाएँ प्रदान करना नहीं, बल्कि नागरिकों के साथ मिलकर सार्वजनिक हित का निर्माण करना है। इस दृष्टिकोण में नागरिकों को ग्राहक नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सक्रिय सहभागी के रूप में देखा जाता है।
नव लोक सेवा उपागम के अनुसार प्रशासनिक अधिकारियों का मुख्य दायित्व नागरिकों की सेवा करना, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देना है। यह दृष्टिकोण सहभागिता, संवाद, सहयोग और उत्तरदायित्व पर आधारित है। इसमें प्रशासन और जनता के बीच विश्वासपूर्ण संबंध स्थापित करने पर विशेष बल दिया जाता है।
इस प्रकार नव लोक प्रशासन, नव लोक प्रबंधन और नव लोक सेवा उपागम लोक प्रशासन के विकास की तीन महत्वपूर्ण अवस्थाओं को दर्शाते हैं। नव लोक प्रशासन सामाजिक न्याय और समानता पर बल देता है, नव लोक प्रबंधन दक्षता और परिणामों को महत्व देता है, जबकि नव लोक सेवा नागरिक सहभागिता और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व को केंद्र में रखता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
नव लोक प्रशासन की अवधारणा, विकास एवं प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत विवेचन कीजिए।
नव लोक प्रशासन के उदय के कारणों का विश्लेषण कीजिए।
नव लोक प्रशासन और पारंपरिक लोक प्रशासन के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
सामाजिक समानता के सिद्धांत पर नव लोक प्रशासन के विचारों का मूल्यांकन कीजिए।
नव लोक प्रशासन की प्रासंगिकता का आधुनिक प्रशासन के संदर्भ में अध्ययन कीजिए।
नव लोक प्रबंधन की अवधारणा एवं विशेषताओं का विस्तार से वर्णन कीजिए।
नव लोक प्रबंधन के विकास के कारणों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
नव लोक प्रबंधन में निजी क्षेत्र की प्रबंधन तकनीकों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
नव लोक प्रबंधन के गुण एवं दोषों का विश्लेषण कीजिए।
नव लोक प्रबंधन और पारंपरिक लोक प्रशासन का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
नव लोक सेवा उपागम की अवधारणा एवं प्रमुख सिद्धांतों का विवेचन कीजिए।
नव लोक सेवा उपागम नागरिक केंद्रित प्रशासन को किस प्रकार बढ़ावा देता है? स्पष्ट कीजिए।
नव लोक सेवा और नव लोक प्रबंधन के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
लोकतांत्रिक प्रशासन में नव लोक सेवा उपागम की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
सुशासन की अवधारणा, प्रकृति एवं महत्व का विस्तृत अध्ययन कीजिए।
सुशासन के प्रमुख तत्वों का वर्णन कीजिए।
सुशासन और लोकतंत्र के संबंधों की व्याख्या कीजिए।
विकासशील देशों में सुशासन की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।
प्रशासनिक सुधारों में सुशासन की भूमिका का अध्ययन कीजिए।
पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुशासन के महत्वपूर्ण आधार हैं, स्पष्ट कीजिए।
सार्वजनिक नीति की अवधारणा एवं महत्व का विवेचन कीजिए।
सार्वजनिक नीति निर्माण की प्रक्रिया का क्रमबद्ध वर्णन कीजिए।
सार्वजनिक नीति निर्माण में राजनीतिक एवं प्रशासनिक संस्थाओं की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
सार्वजनिक नीति निर्माण के विभिन्न चरणों का विश्लेषण कीजिए।
सार्वजनिक नीति के क्रियान्वयन की समस्याओं का अध्ययन कीजिए।
सार्वजनिक नीति निर्माण में नागरिक सहभागिता के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
आधुनिक लोक प्रशासन में नव लोक प्रशासन, नव लोक प्रबंधन और नव लोक सेवा की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
सुशासन की स्थापना में सार्वजनिक नीति की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
वैश्वीकरण के संदर्भ में लोक प्रशासन के बदलते स्वरूप का अध्ययन कीजिए।
समकालीन प्रशासनिक चिंतन में नव लोक सेवा उपागम की प्रासंगिकता का मूल्यांकन कीजिए।
लघु उत्तरीय प्रश्न
नव लोक प्रशासन क्या है?
नव लोक प्रशासन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
नव लोक प्रशासन किस मूल्य पर अधिक बल देता है?
नव लोक प्रबंधन क्या है?
नव लोक प्रबंधन का मुख्य आधार क्या है?
नव लोक प्रबंधन में किस क्षेत्र की तकनीकों को अपनाया गया है?
नव लोक सेवा उपागम क्या है?
नव लोक सेवा का मुख्य केंद्र कौन है?
सुशासन से क्या अभिप्राय है?
सुशासन के दो तत्व लिखिए।
पारदर्शिता क्या है?
उत्तरदायित्व का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
सार्वजनिक नीति क्या है?
नीति निर्माण से क्या अभिप्राय है?
सार्वजनिक नीति निर्माण में सरकार की भूमिका क्या है?
नीति क्रियान्वयन क्या है?
नागरिक सहभागिता का महत्व लिखिए।
ई-गवर्नेंस का सुशासन में क्या योगदान है?
नव लोक प्रशासन की दो विशेषताएँ लिखिए।
नव लोक प्रबंधन की दो विशेषताएँ लिखिए।
नव लोक सेवा उपागम की दो विशेषताएँ लिखिए।
सुशासन और अच्छे प्रशासन में अंतर लिखिए।
सार्वजनिक नीति के प्रमुख चरण कौन-कौन से हैं?
प्रशासनिक सुधार क्या है?
परिणामोन्मुख प्रशासन से क्या अभिप्राय है?
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
New Public Administration का हिंदी अर्थ क्या है?
उत्तर – नव लोक प्रशासनNew Public Management का हिंदी अर्थ क्या है?
उत्तर – नव लोक प्रबंधनNew Public Service Approach का हिंदी अर्थ क्या है?
उत्तर – नव लोक सेवा उपागमGood Governance का हिंदी अर्थ क्या है?
उत्तर – सुशासनPublic Policy का हिंदी अर्थ क्या है?
उत्तर – सार्वजनिक नीतिनव लोक प्रशासन का विकास किस दशक में हुआ?
उत्तर – 1960-70 के दशक मेंसुशासन का प्रमुख आधार क्या है?
उत्तर – पारदर्शिता और उत्तरदायित्वसार्वजनिक नीति कौन बनाता है?
उत्तर – सरकारनागरिक केंद्रित प्रशासन किस दृष्टिकोण से संबंधित है?
उत्तर – नव लोक सेवा उपागमप्रशासन में दक्षता पर कौन-सा दृष्टिकोण बल देता है?
उत्तर – नव लोक प्रबंधन
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
1. नव लोक प्रशासन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(A) केवल दक्षता
(B) सामाजिक समानता और जनहित
(C) निजी लाभ
(D) प्रशासनिक गोपनीयता
उत्तर – (B)
2. नव लोक प्रशासन का विकास मुख्य रूप से किस काल में हुआ?
(A) 18वीं शताब्दी
(B) 19वीं शताब्दी
(C) 1960-70 का दशक
(D) 2000 के बाद
उत्तर – (C)
3. नव लोक प्रबंधन किस पर बल देता है?
(A) नियमों पर
(B) दक्षता और परिणामों पर
(C) न्यायपालिका पर
(D) राजनीति पर
उत्तर – (B)
4. नव लोक प्रबंधन ने किस क्षेत्र की तकनीकों को अपनाया?
(A) सैन्य क्षेत्र
(B) निजी क्षेत्र
(C) न्यायिक क्षेत्र
(D) धार्मिक क्षेत्र
उत्तर – (B)
5. नव लोक सेवा उपागम में नागरिकों को माना जाता है—
(A) ग्राहक मात्र
(B) करदाता मात्र
(C) लोकतांत्रिक सहभागी
(D) कर्मचारी
उत्तर – (C)
6. सुशासन का प्रमुख तत्व है—
(A) गोपनीयता
(B) पारदर्शिता
(C) निरंकुशता
(D) केंद्रीकरण
उत्तर – (B)
7. सार्वजनिक नीति किससे संबंधित है?
(A) निजी निर्णयों से
(B) सरकारी निर्णयों से
(C) व्यक्तिगत विचारों से
(D) धार्मिक नियमों से
उत्तर – (B)
8. नव लोक प्रशासन किस अवधारणा पर अधिक बल देता है?
(A) सामाजिक समानता
(B) सैन्य शक्ति
(C) व्यापार
(D) केंद्रीकरण
उत्तर – (A)
9. Good Governance में कौन शामिल है?
(A) भ्रष्टाचार
(B) जवाबदेही
(C) गोपनीयता
(D) निरंकुशता
उत्तर – (B)
10. सार्वजनिक नीति निर्माण का पहला चरण क्या होता है?
(A) समस्या की पहचान
(B) मूल्यांकन
(C) समाप्ति
(D) नियंत्रण
उत्तर – (A)
11. नव लोक सेवा उपागम के प्रमुख विचार का संबंध किससे है?
(A) नागरिक सेवा
(B) बाजार नियंत्रण
(C) सैन्य प्रशासन
(D) राजतंत्र
उत्तर – (A)
12. नव लोक प्रबंधन किससे प्रभावित है?
(A) निजी प्रबंधन
(B) धार्मिक विचार
(C) न्यायिक प्रक्रिया
(D) परंपरागत व्यवस्था
उत्तर – (A)
13. सुशासन में किसका महत्व अधिक है?
(A) जनसहभागिता
(B) गोपनीयता
(C) शक्ति केंद्रीकरण
(D) नियंत्रण
उत्तर – (A)
14. सार्वजनिक नीति का उद्देश्य क्या है?
(A) सार्वजनिक समस्याओं का समाधान
(B) निजी लाभ
(C) राजनीतिक संघर्ष
(D) प्रशासन समाप्त करना
उत्तर – (A)
15. नागरिक केंद्रित प्रशासन किसका आधार है?
(A) नव लोक सेवा
(B) पारंपरिक नौकरशाही
(C) सैन्य प्रशासन
(D) राजतंत्र
उत्तर – (A)
सत्य / असत्य
नव लोक प्रशासन सामाजिक समानता पर बल देता है।
(सत्य)नव लोक प्रबंधन केवल नियमों और प्रक्रियाओं पर आधारित है।
(असत्य)नव लोक सेवा उपागम नागरिक सहभागिता को महत्व देता है।
(सत्य)सुशासन में पारदर्शिता आवश्यक नहीं है।
(असत्य)सार्वजनिक नीति सरकार द्वारा बनाई जाती है।
(सत्य)नव लोक प्रबंधन निजी क्षेत्र की तकनीकों से प्रभावित है।
(सत्य)सुशासन का संबंध उत्तरदायित्व से है।
(सत्य)सार्वजनिक नीति निर्माण एक सतत प्रक्रिया है।
(सत्य)नव लोक प्रशासन केवल आर्थिक लाभ पर केंद्रित है।
(असत्य)नागरिक सहभागिता लोकतांत्रिक प्रशासन को मजबूत करती है।
(सत्य)
