Unit-03
Chief Executive :Types and Function, Line, Staff, Auxiliary agencies, Departments, Public Corporation, Boards and commissions Independent Regulatory
Commissions, Delegated legislation
मुख्य कार्यपालिका : प्रकार एवं कार्य; रेखा, स्टाफ एवं सहायक अभिकरण; विभागीय संगठन; सार्वजनिक निगम; बोर्ड एवं आयोग; स्वतंत्र नियामक आयोग तथा प्रत्यायोजित (अधीनस्थ) विधायन।
राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को यदि एक जीवंत शरीर माना जाए, तो मुख्य कार्यपालिका उसका मस्तिष्क है। जिस प्रकार मानव शरीर का प्रत्येक अंग मस्तिष्क के निर्देशन में कार्य करता है, उसी प्रकार शासन की संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था मुख्य कार्यपालिका के नेतृत्व, निर्देशन और नियंत्रण में संचालित होती है। संविधान शासन की रूपरेखा प्रदान करता है, विधायिका कानून बनाती है, न्यायपालिका न्याय सुनिश्चित करती है, किन्तु इन सभी के बीच जनता तक शासन की नीतियों और योजनाओं को पहुँचाने का वास्तविक उत्तरदायित्व मुख्य कार्यपालिका पर ही होता है। इसलिए लोक प्रशासन के अध्ययन में मुख्य कार्यपालिका का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मानव इतिहास के प्रारम्भिक चरणों में शासन का संचालन राजा अथवा जनजातीय प्रमुख के हाथों में केंद्रित था। समय के साथ राज्य का आकार बढ़ा, प्रशासनिक दायित्व विस्तृत हुए और शासन की संरचना अधिक जटिल होती गई। आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था के विकास के साथ मुख्य कार्यपालिका का स्वरूप भी परिवर्तित हुआ। आज यह केवल आदेश देने वाला पद नहीं है, बल्कि नीति-निर्माण, नीति-क्रियान्वयन, प्रशासनिक समन्वय, वित्तीय अनुशासन, कार्मिक प्रबंधन, संकट-प्रबंधन तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन का केंद्रीय आधार है।
मुख्य कार्यपालिका से आशय उस सर्वोच्च प्रशासनिक प्राधिकारी से है जो शासन की कार्यपालिका का नेतृत्व करता है और जिसके निर्देशन में संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र कार्य करता है। विभिन्न देशों की शासन-व्यवस्था के अनुसार इसका स्वरूप भिन्न हो सकता है। संसदीय शासन प्रणाली में मंत्रिपरिषद के नेतृत्व में प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका होते हैं, जबकि राष्ट्रपति संवैधानिक अथवा नाममात्र के प्रमुख हो सकते हैं। इसके विपरीत राष्ट्रपति शासन प्रणाली में राष्ट्रपति ही राज्याध्यक्ष और वास्तविक कार्यपालिका दोनों की भूमिका निभाते हैं। कुछ देशों में बहुल कार्यपालिका की व्यवस्था भी देखने को मिलती है, जहाँ प्रशासनिक उत्तरदायित्व एक व्यक्ति के स्थान पर अनेक सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से निभाया जाता है।
मुख्य कार्यपालिका का महत्व केवल प्रशासनिक नेतृत्व तक सीमित नहीं है। वह शासन की नीतियों को दिशा प्रदान करता है, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करता है, प्रशासनिक उत्तरदायित्व सुनिश्चित करता है और जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही को सुदृढ़ बनाता है। आधुनिक लोककल्याणकारी राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण, आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाएँ, आपदा प्रबंधन तथा राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विविध क्षेत्रों में प्रशासनिक गतिविधियों का विस्तार हुआ है। इन सभी क्षेत्रों में प्रभावी समन्वय स्थापित करना मुख्य कार्यपालिका की प्रमुख जिम्मेदारी है।
प्रशासनिक संगठन केवल शीर्ष नेतृत्व से संचालित नहीं होता। किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में विभिन्न प्रकार के अभिकरण मिलकर कार्य करते हैं। कुछ अभिकरण सीधे जनता को सेवाएँ प्रदान करते हैं, कुछ नीति-निर्माण और परामर्श का कार्य करते हैं, जबकि कुछ सहायक सेवाएँ उपलब्ध कराकर संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र को सुचारु रूप से चलाने में योगदान देते हैं। इस प्रकार प्रशासन एक समन्वित व्यवस्था है जिसमें प्रत्येक इकाई का अपना विशिष्ट महत्व है।
रेखा अभिकरण प्रशासन की वह शाखा है जो सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों का प्रत्यक्ष क्रियान्वयन करती है। नागरिकों का सबसे अधिक संपर्क इन्हीं अभिकरणों से होता है, क्योंकि शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पुलिस, कृषि, परिवहन तथा अन्य सार्वजनिक सेवाएँ इन्हीं के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके विपरीत स्टाफ अभिकरण मुख्य कार्यपालिका को परामर्श, योजना, अनुसंधान, विश्लेषण तथा समन्वय में सहायता प्रदान करते हैं। वे स्वयं सामान्यतः प्रत्यक्ष सेवा नहीं देते, बल्कि निर्णयों को अधिक प्रभावी और तर्कसंगत बनाने में सहयोग करते हैं। सहायक अभिकरण इन दोनों के लिए आवश्यक प्रशासनिक, तकनीकी, वित्तीय, अभिलेखीय तथा कार्मिक सहायता उपलब्ध कराते हैं, जिससे संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
आधुनिक शासन में विभागीय संगठन प्रशासन की सबसे सामान्य और प्रचलित संरचना है। किसी विशिष्ट कार्य या विषय के लिए पृथक विभाग स्थापित किए जाते हैं, जैसे शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, वित्त विभाग, कृषि विभाग तथा गृह विभाग। विभागीय व्यवस्था से विशेषज्ञता, उत्तरदायित्व और प्रशासनिक नियंत्रण को बल मिलता है। जैसे-जैसे शासन के कार्यों का विस्तार हुआ, वैसे-वैसे विभागों की संख्या और उनकी विशेषज्ञता में भी वृद्धि हुई।
कुछ ऐसे कार्य भी होते हैं जिन्हें सामान्य विभागीय ढाँचे से अधिक स्वायत्तता की आवश्यकता होती है। ऐसे कार्यों के लिए सार्वजनिक निगमों की स्थापना की जाती है। सार्वजनिक निगम विधि द्वारा स्थापित ऐसे निकाय होते हैं जिन्हें प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान की जाती है ताकि वे व्यावसायिक दक्षता के साथ सार्वजनिक हित में कार्य कर सकें। इसी प्रकार अनेक प्रशासनिक क्षेत्रों में बोर्ड एवं आयोगों का गठन किया जाता है, जिनका उद्देश्य विशिष्ट विषयों पर विशेषज्ञ निर्णय, निष्पक्षता तथा प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करना होता है।
समकालीन शासन में अनेक आर्थिक, तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों के नियमन के लिए स्वतंत्र नियामक आयोगों का महत्व निरंतर बढ़ा है। इन संस्थाओं का उद्देश्य निष्पक्ष नियमन, प्रतिस्पर्धा की रक्षा, उपभोक्ता हितों का संरक्षण तथा सार्वजनिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ बनाना है। आधुनिक अर्थव्यवस्था की जटिलताओं ने ऐसे विशेषज्ञ निकायों की आवश्यकता को और अधिक बढ़ा दिया है।
आधुनिक प्रशासन का एक महत्वपूर्ण पक्ष प्रत्यायोजित अथवा अधीनस्थ विधायन भी है। वर्तमान समय में विधायिकाओं के सामने कार्यों का अत्यधिक विस्तार है, जिसके कारण प्रत्येक विषय का विस्तृत विधायी विनियमन स्वयं विधायिका द्वारा करना व्यावहारिक नहीं रह गया है। इसलिए मूल कानून के अंतर्गत कार्यपालिका को नियम, विनियम, उपविधियाँ तथा अधिसूचनाएँ बनाने की शक्ति प्रदान की जाती है। इससे प्रशासन अधिक लचीला, त्वरित तथा परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करने में सक्षम बनता है, यद्यपि इस शक्ति पर संसदीय और न्यायिक नियंत्रण भी आवश्यक माना जाता है ताकि इसका दुरुपयोग न हो।
इस प्रकार मुख्य कार्यपालिका तथा उससे संबंधित विभिन्न प्रशासनिक अभिकरण आधुनिक शासन-व्यवस्था के आधारस्तंभ हैं। इनके बीच प्रभावी समन्वय, स्पष्ट उत्तरदायित्व, वैज्ञानिक संगठन, निष्पक्ष निर्णय तथा जनहित के प्रति प्रतिबद्धता ही प्रशासन को सफल, उत्तरदायी और लोकतांत्रिक बनाती है। आधुनिक लोककल्याणकारी राज्य में प्रशासन की सफलता केवल नीतियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि मुख्य कार्यपालिका और उसके अधीन कार्यरत संगठन किस सीमा तक कुशलता, पारदर्शिता, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
मुख्य कार्यपालिका
1. मुख्य कार्यपालिका का प्रमुख कार्य क्या है?
(अ) प्रशासन का संचालन
(ब) न्याय प्रदान करना
(स) कानून बनाना
(द) चुनाव कराना
उत्तर – (अ)
2. संसदीय शासन प्रणाली में वास्तविक कार्यपालिका कौन होती है?
(अ) मंत्रिपरिषद
(ब) राष्ट्रपति
(स) न्यायपालिका
(द) संसद
उत्तर – (अ)
3. राष्ट्रपति शासन प्रणाली में वास्तविक कार्यपालिका कौन होता है?
(अ) राष्ट्रपति
(ब) प्रधानमंत्री
(स) संसद
(द) राज्यपाल
उत्तर – (अ)
4. बहुल कार्यपालिका का प्रमुख उदाहरण कौन-सा देश है?
(अ) स्विट्ज़रलैंड
(ब) भारत
(स) जापान
(द) रूस
उत्तर – (अ)
5. मुख्य कार्यपालिका का प्रमुख उत्तरदायित्व क्या है?
(अ) नीतियों का क्रियान्वयन
(ब) न्यायिक निर्णय देना
(स) संविधान संशोधन करना
(द) चुनाव कराना
उत्तर – (अ)
6. प्रशासन में समन्वय स्थापित करने का प्रमुख उत्तरदायित्व किसका होता है?
(अ) मुख्य कार्यपालिका
(ब) संसद
(स) न्यायपालिका
(द) निर्वाचन आयोग
उत्तर – (अ)
7. नाममात्र कार्यपालिका का उदाहरण क्या है?
(अ) भारत के राष्ट्रपति
(ब) भारत के प्रधानमंत्री
(स) मुख्यमंत्री
(द) कैबिनेट सचिव
उत्तर – (अ)
8. वास्तविक कार्यपालिका किसे कहा जाता है?
(अ) जो वास्तविक प्रशासनिक शक्ति का प्रयोग करे
(ब) जो केवल औपचारिक प्रमुख हो
(स) जो न्याय करे
(द) जो चुनाव कराए
उत्तर – (अ)
9. राजनीतिक कार्यपालिका का कार्यकाल किस पर निर्भर करता है?
(अ) राजनीतिक परिस्थितियों पर
(ब) आयु पर
(स) वरिष्ठता पर
(द) परीक्षा पर
उत्तर – (अ)
10. स्थायी कार्यपालिका का प्रमुख उदाहरण कौन है?
(अ) लोक सेवक (सिविल सेवक)
(ब) मंत्री
(स) सांसद
(द) विधायक
उत्तर – (अ)
रेखा, स्टाफ एवं सहायक अभिकरण
11. रेखा (Line) अभिकरण का मुख्य कार्य क्या है?
(अ) नीतियों का प्रत्यक्ष क्रियान्वयन
(ब) केवल परामर्श देना
(स) न्याय देना
(द) कानून बनाना
उत्तर – (अ)
12. स्टाफ अभिकरण किसे सहायता प्रदान करता है?
(अ) मुख्य कार्यपालिका
(ब) न्यायपालिका
(स) निर्वाचन आयोग
(द) संसद
उत्तर – (अ)
13. सहायक (Auxiliary) अभिकरण का प्रमुख कार्य क्या है?
(अ) प्रशासनिक सहायता देना
(ब) चुनाव कराना
(स) न्याय करना
(द) कानून बनाना
उत्तर – (अ)
14. निम्न में से कौन रेखा अभिकरण का उदाहरण है?
(अ) स्वास्थ्य विभाग
(ब) योजना प्रकोष्ठ
(स) विधि परामर्श शाखा
(द) कार्मिक प्रशिक्षण इकाई
उत्तर – (अ)
15. स्टाफ अभिकरण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(अ) परामर्श एवं योजना
(ब) कर वसूली
(स) पुलिस व्यवस्था
(द) न्याय देना
उत्तर – (अ)
16. सहायक अभिकरण किस प्रकार की सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं?
(अ) कार्मिक, लेखा एवं कार्यालय संबंधी सेवाएँ
(ब) न्यायिक सेवाएँ
(स) विधायी सेवाएँ
(द) चुनावी सेवाएँ
उत्तर – (अ)
17. रेखा अभिकरण का जनता से संबंध कैसा होता है?
(अ) प्रत्यक्ष
(ब) अप्रत्यक्ष
(स) कोई संबंध नहीं
(द) केवल सलाहकार
उत्तर – (अ)
18. स्टाफ अभिकरण का जनता से संबंध सामान्यतः कैसा होता है?
(अ) अप्रत्यक्ष
(ब) प्रत्यक्ष
(स) न्यायिक
(द) संवैधानिक
उत्तर – (अ)
विभागीय संगठन
19. विभागीय संगठन का आधार क्या है?
(अ) कार्यों का विभाजन
(ब) व्यक्तिगत संबंध
(स) राजनीतिक दल
(द) जाति
उत्तर – (अ)
20. विभागीय संगठन का प्रमुख लाभ क्या है?
(अ) उत्तरदायित्व की स्पष्टता
(ब) भ्रम
(स) अव्यवस्था
(द) विलंब
उत्तर – (अ)
21. विभाग का प्रमुख सामान्यतः कौन होता है?
(अ) मंत्री
(ब) न्यायाधीश
(स) सांसद
(द) महालेखा परीक्षक
उत्तर – (अ)
22. विभागीय संगठन की प्रमुख विशेषता क्या है?
(अ) पदानुक्रम
(ब) अराजकता
(स) निजी स्वामित्व
(द) असंगठित व्यवस्था
उत्तर – (अ)
सार्वजनिक निगम
23. सार्वजनिक निगम की स्थापना किसके द्वारा होती है?
(अ) विधि (अधिनियम) द्वारा
(ब) निजी अनुबंध द्वारा
(स) पंचायत द्वारा
(द) न्यायालय द्वारा
उत्तर – (अ)
24. सार्वजनिक निगम का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
(अ) सार्वजनिक हित में सेवा
(ब) निजी लाभ
(स) चुनाव कराना
(द) न्याय देना
उत्तर – (अ)
25. सार्वजनिक निगम की प्रमुख विशेषता क्या है?
(अ) प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वायत्तता
(ब) पूर्ण निजी स्वामित्व
(स) कोई उत्तरदायित्व नहीं
(द) अस्थायी स्वरूप
उत्तर – (अ)
बोर्ड एवं आयोग
26. बोर्ड एवं आयोगों का गठन क्यों किया जाता है?
(अ) विशेषज्ञ एवं निष्पक्ष कार्यों के लिए
(ब) व्यापार करने के लिए
(स) चुनाव लड़ने के लिए
(द) कर वसूलने के लिए
उत्तर – (अ)
27. आयोग की प्रमुख विशेषता क्या है?
(अ) विशेषज्ञता
(ब) निजी स्वामित्व
(स) अस्थायी व्यापार
(द) राजनीतिक दल
उत्तर – (अ)
स्वतंत्र नियामक आयोग
28. स्वतंत्र नियामक आयोग का उद्देश्य क्या है?
(अ) विभिन्न क्षेत्रों का निष्पक्ष नियमन
(ब) न्यायिक निर्णय देना
(स) संविधान संशोधन करना
(द) चुनाव कराना
उत्तर – (अ)
29. स्वतंत्र नियामक आयोग किस सिद्धांत पर कार्य करते हैं?
(अ) निष्पक्षता एवं स्वायत्तता
(ब) पक्षपात
(स) निजी लाभ
(द) राजनीतिक नियंत्रण
उत्तर – (अ)
प्रत्यायोजित (अधीनस्थ) विधायन
30. प्रत्यायोजित विधायन का अर्थ क्या है?
(अ) विधायिका द्वारा कार्यपालिका को नियम बनाने की शक्ति देना
(ब) न्यायपालिका द्वारा कानून बनाना
(स) जनता द्वारा कानून बनाना
(द) केवल संसद का कार्य
उत्तर – (अ)
31. प्रत्यायोजित विधायन की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
(अ) प्रशासनिक कार्यों की जटिलता एवं समय की कमी
(ब) न्यायपालिका की कमी
(स) चुनाव की आवश्यकता
(द) कर वसूली
उत्तर – (अ)
32. प्रत्यायोजित विधायन पर नियंत्रण कौन रखता है?
(अ) संसद एवं न्यायपालिका
(ब) केवल मीडिया
(स) केवल राजनीतिक दल
(द) केवल राज्यपाल
उत्तर – (अ)
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
मुख्य कार्यपालिका से क्या अभिप्राय है?
मुख्य कार्यपालिका के प्रमुख प्रकार लिखिए।
एकल कार्यपालिका क्या है?
बहुल कार्यपालिका क्या है?
नाममात्र कार्यपालिका क्या है?
वास्तविक कार्यपालिका क्या है?
राजनीतिक कार्यपालिका क्या है?
स्थायी कार्यपालिका क्या है?
मुख्य कार्यपालिका के पाँच प्रमुख कार्य लिखिए।
रेखा अभिकरण क्या है?
स्टाफ अभिकरण क्या है?
सहायक अभिकरण क्या है?
रेखा एवं स्टाफ अभिकरण में एक अंतर लिखिए।
विभागीय संगठन क्या है?
विभागीय संगठन का एक गुण लिखिए।
सार्वजनिक निगम क्या है?
सार्वजनिक निगम की दो विशेषताएँ लिखिए।
बोर्ड क्या है?
आयोग क्या है?
स्वतंत्र नियामक आयोग क्या है?
प्रत्यायोजित विधायन क्या है?
प्रत्यायोजित विधायन की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
प्रत्यायोजित विधायन के दो लाभ लिखिए।
प्रत्यायोजित विधायन के दो दोष लिखिए।
संसदीय नियंत्रण से क्या अभिप्राय है?
लघु उत्तरीय प्रश्न
मुख्य कार्यपालिका का अर्थ एवं विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।
मुख्य कार्यपालिका के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
मुख्य कार्यपालिका के कार्यों की व्याख्या कीजिए।
रेखा, स्टाफ एवं सहायक अभिकरणों का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
विभागीय संगठन की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
सार्वजनिक निगम का अर्थ एवं महत्व स्पष्ट कीजिए।
बोर्ड एवं आयोग में अंतर स्पष्ट कीजिए।
स्वतंत्र नियामक आयोगों की आवश्यकता स्पष्ट कीजिए।
प्रत्यायोजित (अधीनस्थ) विधायन की अवधारणा की व्याख्या कीजिए।
प्रत्यायोजित विधायन के गुण एवं दोषों का विवेचन कीजिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
मुख्य कार्यपालिका के प्रकार एवं कार्यों का समालोचनात्मक विवेचन कीजिए।
रेखा, स्टाफ एवं सहायक अभिकरणों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत कीजिए।
विभागीय संगठन की संरचना, गुण एवं दोषों का विस्तृत विश्लेषण कीजिए।
सार्वजनिक निगम की अवधारणा, विशेषताओं तथा महत्व का विवेचन कीजिए।
बोर्ड एवं आयोगों की प्रशासनिक भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
स्वतंत्र नियामक आयोगों की आवश्यकता, संरचना एवं कार्यों की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
प्रत्यायोजित (अधीनस्थ) विधायन की अवधारणा, आवश्यकता, लाभ, सीमाएँ तथा नियंत्रण के उपायों का समालोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
आधुनिक लोक प्रशासन में मुख्य कार्यपालिका की भूमिका का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए।
