Unit-02

The Nation State System: National Power, National Interest, Collective Security, Balance of Power
राष्ट्र-राज्य व्यवस्था : राष्ट्रीय शक्ति, राष्ट्रीय हित, सामूहिक सुरक्षा एवं शक्ति-संतुलन

आधुनिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति का आधार मुख्यतः राष्ट्र-राज्य व्यवस्था है। राष्ट्र-राज्य वह राजनीतिक इकाई है जिसके पास निश्चित भू-भाग, जनसंख्या, सरकार और संप्रभु सत्ता होती है। प्रत्येक राष्ट्र-राज्य अपने अस्तित्व, सुरक्षा, स्वतंत्रता और विकास को सुनिश्चित करने के लिए दूसरे राज्यों के साथ संबंध स्थापित करता है। इन संबंधों में सहयोग, प्रतिस्पर्धा, संघर्ष, समझौता और कूटनीति सभी शामिल होते हैं।

राष्ट्र-राज्य व्यवस्था को समझने के लिए राष्ट्रीय शक्ति, राष्ट्रीय हित, सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन चार अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। राष्ट्रीय शक्ति राज्य की क्षमता को बताती है, राष्ट्रीय हित राज्य के उद्देश्यों को निर्धारित करता है, सामूहिक सुरक्षा मिलकर शांति बनाए रखने की व्यवस्था है और शक्ति-संतुलन किसी एक राज्य के अत्यधिक प्रभुत्व को रोकने का प्रयास है।

राष्ट्र-राज्य व्यवस्था

राष्ट्र-राज्य व्यवस्था से आशय ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से है जिसमें संप्रभु राष्ट्र-राज्य अंतरराष्ट्रीय राजनीति की प्रमुख इकाइयों के रूप में कार्य करते हैं। प्रत्येक राज्य अपनी सीमाओं के भीतर सर्वोच्च राजनीतिक सत्ता रखता है और बाहरी मामलों में अपनी स्वतंत्रता तथा संप्रभुता की रक्षा करता है।

आधुनिक राष्ट्र-राज्य व्यवस्था के विकास को सामान्यतः 1648 की वेस्टफेलिया की संधि से जोड़ा जाता है। इस व्यवस्था ने राज्य की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राज्यों के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप न करने की धारणा को मजबूत किया।

राष्ट्र-राज्य व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ हैं—संप्रभुता, निश्चित क्षेत्र, स्थायी जनसंख्या, सरकार, राष्ट्रीय हित, सुरक्षा की चिंता और अन्य राज्यों के साथ पारस्परिक संबंध। वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय संगठन, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और गैर-सरकारी संगठन भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करते हैं, फिर भी राष्ट्र-राज्य इसकी सबसे महत्वपूर्ण इकाई बने हुए हैं।

राष्ट्रीय शक्ति

राष्ट्रीय शक्ति से आशय किसी राज्य की उस समग्र क्षमता से है जिसके माध्यम से वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने उद्देश्यों की प्राप्ति करता है।

राष्ट्रीय शक्ति को केवल सैनिक शक्ति के रूप में देखना उचित नहीं है। किसी देश की आर्थिक क्षमता, सैन्य शक्ति, तकनीकी विकास, प्राकृतिक संसाधन, भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, राजनीतिक स्थिरता, राष्ट्रीय मनोबल और कूटनीतिक क्षमता भी उसकी राष्ट्रीय शक्ति को निर्धारित करते हैं।

आधुनिक समय में तकनीकी और आर्थिक शक्ति का महत्व बहुत बढ़ गया है। किसी देश की मजबूत अर्थव्यवस्था उसे सैन्य और तकनीकी क्षमता विकसित करने में सहायता देती है। इसी प्रकार उन्नत तकनीक, साइबर क्षमता, अंतरिक्ष कार्यक्रम और वैज्ञानिक अनुसंधान भी राष्ट्रीय शक्ति के महत्वपूर्ण आधार बन गए हैं।

कूटनीतिक शक्ति के माध्यम से राज्य दूसरे देशों के साथ संबंधों को अपने हित में प्रभावित कर सकता है। सांस्कृतिक प्रभाव और किसी देश की भाषा, शिक्षा, विचार तथा जीवन-शैली का आकर्षण भी अंतरराष्ट्रीय प्रभाव का माध्यम बन सकता है। इसे सामान्यतः सॉफ्ट पावर के संदर्भ में समझा जाता है।

इस प्रकार राष्ट्रीय शक्ति बहुआयामी अवधारणा है। आधुनिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी राज्य की वास्तविक शक्ति का मूल्यांकन उसकी सैन्य क्षमता के साथ-साथ उसकी आर्थिक, तकनीकी, राजनीतिक, कूटनीतिक और सांस्कृतिक क्षमताओं के आधार पर किया जाता है।

राष्ट्रीय हित

राष्ट्रीय हित से आशय उन उद्देश्यों और आवश्यकताओं से है जिन्हें कोई राज्य अपने अस्तित्व, सुरक्षा, स्वतंत्रता, विकास और प्रतिष्ठा के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता, आर्थिक विकास, राजनीतिक स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा राष्ट्रीय हित के प्रमुख तत्व हो सकते हैं। राज्य अपनी विदेश नीति निर्धारित करते समय इन हितों को ध्यान में रखता है।

राष्ट्रीय हित स्थायी और परिवर्तनशील दोनों हो सकते हैं। किसी राज्य की संप्रभुता और सुरक्षा उसके स्थायी हितों में शामिल हो सकती है, जबकि व्यापार, ऊर्जा, तकनीक या क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े हित परिस्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं।

राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय शक्ति का गहरा संबंध है। राज्य अपने हितों की प्राप्ति के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करता है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अपनी शक्ति को बढ़ाने का प्रयास भी करता है।

यथार्थवादी विचारधारा में राष्ट्रीय हित को अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्रीय आधार माना गया है। यथार्थवादी दृष्टिकोण के अनुसार राज्य अपनी विदेश नीति बनाते समय अपने अस्तित्व, सुरक्षा और शक्ति को विशेष महत्व देता है।

सामूहिक सुरक्षा

सामूहिक सुरक्षा से आशय ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से है जिसमें किसी एक राज्य के विरुद्ध आक्रमण को केवल उस राज्य की समस्या नहीं माना जाता, बल्कि सभी सदस्य राज्यों की सामूहिक चिंता माना जाता है।

इसका मूल सिद्धांत है कि “एक राज्य की सुरक्षा सभी राज्यों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।” यदि कोई राज्य दूसरे राज्य पर आक्रमण करता है, तो अन्य सदस्य राज्य मिलकर आक्रमणकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने का प्रयास करते हैं।

सामूहिक सुरक्षा का उद्देश्य किसी संभावित आक्रमण को रोकना तथा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना है। इसके लिए सदस्य राज्यों के बीच सहयोग, सामूहिक निर्णय और सामूहिक कार्रवाई आवश्यक होती है।

प्रथम विश्व युद्ध के बाद स्थापित राष्ट्र संघ में सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा का महत्वपूर्ण स्थान था। बाद में संयुक्त राष्ट्र ने भी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सामूहिक सुरक्षा की व्यवस्था को अधिक संस्थागत रूप दिया।

हालाँकि सामूहिक सुरक्षा की सफलता सदस्य देशों की राजनीतिक इच्छा और सहयोग पर निर्भर करती है। यदि सदस्य राज्य सामूहिक हित की अपेक्षा अपने संकीर्ण राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दें, तो सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो सकती है।

शक्ति-संतुलन

शक्ति-संतुलन अंतरराष्ट्रीय राजनीति की एक प्रमुख अवधारणा है। इसका अर्थ ऐसी स्थिति या नीति से है जिसमें किसी एक राज्य या राज्य-समूह को इतना शक्तिशाली होने से रोका जाए कि वह अन्य राज्यों पर प्रभुत्व स्थापित कर सके।

राज्य शक्ति-संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा सकते हैं, दूसरे देशों के साथ गठबंधन कर सकते हैं, रणनीतिक साझेदारी विकसित कर सकते हैं या कूटनीतिक समझौते कर सकते हैं।

यदि किसी राज्य की शक्ति तेजी से बढ़ती है और उससे दूसरे राज्यों को खतरा महसूस होता है, तो वे उसके विरुद्ध अपनी सामूहिक शक्ति बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं। इस प्रकार शक्ति-संतुलन किसी एक शक्ति के प्रभुत्व को सीमित करने का प्रयास करता है।

शक्ति-संतुलन के समर्थकों के अनुसार यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने में सहायक हो सकता है। लेकिन इसकी आलोचना यह कहकर की जाती है कि शक्ति-संतुलन की प्रतिस्पर्धा कभी-कभी हथियारों की दौड़, अविश्वास और तनाव को बढ़ा सकती है।

सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन में अंतर

सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन दोनों का संबंध अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से है, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली अलग है।

शक्ति-संतुलन का उद्देश्य किसी एक राज्य को अत्यधिक शक्तिशाली होने से रोकना है। इसमें राज्य अपनी शक्ति या गठबंधन के माध्यम से दूसरे राज्य की शक्ति का मुकाबला करते हैं।

इसके विपरीत सामूहिक सुरक्षा में सभी सदस्य राज्य किसी भी आक्रमणकारी के विरुद्ध मिलकर कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता रखते हैं। यहाँ किसी विशेष राज्य को स्थायी शत्रु नहीं माना जाता, बल्कि आक्रमण करने वाला कोई भी राज्य सामूहिक प्रतिक्रिया का लक्ष्य बन सकता है।

सामूहिक सुरक्षा एवं शक्ति-संतुलन

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में प्रत्येक राष्ट्र अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना चाहता है। चूँकि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में ऐसी कोई सर्वोच्च विश्व सरकार नहीं है जो सभी राज्यों को नियंत्रित कर सके, इसलिए राज्यों को अपनी सुरक्षा के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं और रणनीतियों का सहारा लेना पड़ता है। इसी संदर्भ में सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन दो महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। दोनों का संबंध अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से है, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली और आधार अलग-अलग हैं।

सामूहिक सुरक्षा का अर्थ ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से है जिसमें किसी एक राज्य के विरुद्ध किया गया आक्रमण सभी सदस्य राज्यों के विरुद्ध आक्रमण के समान माना जाता है। इसके अनुसार यदि कोई राज्य अंतरराष्ट्रीय शांति भंग करता है या दूसरे राज्य पर आक्रमण करता है, तो अन्य राज्य सामूहिक रूप से आक्रमणकारी के विरुद्ध कार्रवाई करते हैं। इसका मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी राज्य को आक्रमण करने का लाभ न मिले।

सामूहिक सुरक्षा की मूल भावना “सभी के लिए एक और एक के लिए सभी” के सिद्धांत से समझी जा सकती है। इसमें राज्य अपनी सुरक्षा को केवल व्यक्तिगत प्रयास का विषय न मानकर सामूहिक उत्तरदायित्व का हिस्सा मानते हैं। इस व्यवस्था में किसी विशेष राज्य को स्थायी शत्रु नहीं माना जाता, बल्कि जो भी राज्य आक्रमण करेगा, उसके विरुद्ध सामूहिक कार्रवाई की जा सकती है।

प्रथम विश्व युद्ध के बाद स्थापित राष्ट्र संघ में सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा को विशेष महत्व दिया गया। इसका उद्देश्य भविष्य में होने वाले युद्धों को रोकना और अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना था। हालांकि राष्ट्र संघ सामूहिक सुरक्षा को प्रभावी रूप से लागू करने में पूरी तरह सफल नहीं हो सका।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित संयुक्त राष्ट्र ने सामूहिक सुरक्षा की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित रूप प्रदान किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई। आर्थिक प्रतिबंध, कूटनीतिक दबाव तथा आवश्यकता पड़ने पर सामूहिक कार्रवाई जैसे उपायों का प्रयोग सामूहिक सुरक्षा के अंतर्गत किया जा सकता है।

सामूहिक सुरक्षा की सफलता के लिए सदस्य राष्ट्रों के बीच विश्वास, सहयोग, सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता और आक्रमणकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने की राजनीतिक इच्छा आवश्यक होती है। यदि शक्तिशाली राष्ट्र अपने राष्ट्रीय हितों को सामूहिक हितों से ऊपर रख दें, तो सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।

दूसरी ओर, शक्ति-संतुलन से आशय ऐसी स्थिति या नीति से है जिसमें किसी एक राज्य या राज्य-समूह को इतना शक्तिशाली होने से रोका जाए कि वह अन्य राज्यों पर प्रभुत्व स्थापित कर सके। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में शक्ति का ऐसा वितरण बनाए रखना है जिससे कोई एक शक्ति पूरे क्षेत्र या विश्व पर अपना वर्चस्व स्थापित न कर सके।

शक्ति-संतुलन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के पारंपरिक सिद्धांतों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अनुसार यदि किसी एक राज्य की शक्ति बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो अन्य राज्य अपनी सुरक्षा के लिए उसकी शक्ति का मुकाबला करने का प्रयास करते हैं। इसके लिए वे अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा सकते हैं, दूसरे देशों के साथ गठबंधन कर सकते हैं या रणनीतिक साझेदारी स्थापित कर सकते हैं।

शक्ति-संतुलन के अनेक साधन हो सकते हैं। गठबंधन निर्माण, सैन्य शक्ति में वृद्धि, हथियारों का विकास, कूटनीतिक समझौते और रणनीतिक साझेदारी इसके प्रमुख साधन हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में एक राज्य अत्यधिक शक्तिशाली हो जाता है, तो अन्य राज्य उसके प्रभाव को सीमित करने के लिए आपस में सहयोग कर सकते हैं।

शक्ति-संतुलन का उद्देश्य आवश्यक रूप से युद्ध करना नहीं है। इसका उद्देश्य कई बार युद्ध की संभावना को कम करना भी होता है। यदि संभावित आक्रमणकारी को यह विश्वास हो कि दूसरे राज्य मिलकर उसका मुकाबला कर सकते हैं, तो वह आक्रमण करने से बच सकता है। इस प्रकार शक्ति-संतुलन निवारण और स्थिरता का साधन भी बन सकता है।

हालाँकि शक्ति-संतुलन की कुछ सीमाएँ भी हैं। शक्ति बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा हथियारों की दौड़ को जन्म दे सकती है। एक राज्य अपनी सुरक्षा के लिए हथियार बढ़ाता है तो दूसरा राज्य उसे अपने लिए खतरा मानकर और अधिक हथियार विकसित कर सकता है। इस प्रकार सुरक्षा प्राप्त करने का प्रयास कभी-कभी असुरक्षा और तनाव को बढ़ा सकता है।

सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन में सबसे महत्वपूर्ण अंतर उनके आधार और उद्देश्य की कार्यप्रणाली में है। शक्ति-संतुलन में राज्य किसी संभावित शक्तिशाली राज्य के विरुद्ध अपनी या गठबंधन की शक्ति बढ़ाकर संतुलन स्थापित करते हैं। इसके विपरीत सामूहिक सुरक्षा में सभी सदस्य राज्य किसी भी आक्रमणकारी के विरुद्ध सामूहिक कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।

सामूहिक सुरक्षा का आधार सहयोग और सामूहिक उत्तरदायित्व है, जबकि शक्ति-संतुलन का आधार शक्ति-वितरण और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है। सामूहिक सुरक्षा में आक्रमणकारी की पहचान होने के बाद सामूहिक प्रतिक्रिया की जाती है, जबकि शक्ति-संतुलन में राज्य पहले से ही संभावित शक्ति-प्रतिद्वंद्विता को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बनाते हैं।

दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न
  1. सामूहिक सुरक्षा से क्या अभिप्राय है? इसकी प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
  2. सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा को विस्तारपूर्वक समझाइए।
  3. सामूहिक सुरक्षा के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
  4. सामूहिक सुरक्षा की आवश्यकता और महत्व की विवेचना कीजिए।
  5. सामूहिक सुरक्षा के मूल सिद्धांतों का विश्लेषण कीजिए।
  6. अंतरराष्ट्रीय शांति की स्थापना में सामूहिक सुरक्षा की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  7. राष्ट्र संघ की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन कीजिए।
  8. राष्ट्र संघ सामूहिक सुरक्षा के उद्देश्य को प्राप्त करने में क्यों असफल रहा?
  9. संयुक्त राष्ट्र और सामूहिक सुरक्षा के संबंधों की विवेचना कीजिए।
  10. संयुक्त राष्ट्र की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  11. सामूहिक सुरक्षा की सफलता के लिए आवश्यक परिस्थितियों की विवेचना कीजिए।
  12. सामूहिक सुरक्षा की प्रमुख सीमाओं का विश्लेषण कीजिए।
  13. सामूहिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।
  14. सामूहिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के संबंधों का परीक्षण कीजिए।
  15. आधुनिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सामूहिक सुरक्षा की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
शक्ति-संतुलन से संबंधित प्रश्न
  1. शक्ति-संतुलन से क्या अभिप्राय है?
  2. शक्ति-संतुलन की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
  3. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शक्ति-संतुलन के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
  4. शक्ति-संतुलन के प्रमुख साधनों का वर्णन कीजिए।
  5. शक्ति-संतुलन अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में किस प्रकार सहायक है?
  6. शक्ति-संतुलन के निर्माण में गठबंधनों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  7. शक्ति-संतुलन और राष्ट्रीय शक्ति के संबंध को स्पष्ट कीजिए।
  8. शक्ति-संतुलन और राष्ट्रीय हित के संबंध की विवेचना कीजिए।
  9. शक्ति-संतुलन की प्रमुख सीमाओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  10. क्या शक्ति-संतुलन अंतरराष्ट्रीय स्थिरता का प्रभावी साधन है? विवेचना कीजिए।
  11. शक्ति-संतुलन और हथियारों की दौड़ के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।
  12. आधुनिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शक्ति-संतुलन की प्रासंगिकता का मूल्यांकन कीजिए।
  13. शक्ति-संतुलन की पारंपरिक और आधुनिक अवधारणाओं की तुलना कीजिए।
  14. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन निर्माण शक्ति-संतुलन को किस प्रकार प्रभावित करता है?
  15. शक्ति-संतुलन किसी एक राज्य के प्रभुत्व को रोकने में किस प्रकार सहायक है?
तुलनात्मक एवं आलोचनात्मक प्रश्न
  1. सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  2. सामूहिक सुरक्षा तथा शक्ति-संतुलन का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
  3. सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन के उद्देश्यों की तुलना कीजिए।
  4. सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन के साधनों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  5. सामूहिक सुरक्षा को शक्ति-संतुलन से बेहतर व्यवस्था क्यों माना जा सकता है? विवेचना कीजिए।
  6. क्या सामूहिक सुरक्षा शक्ति-संतुलन का विकल्प हो सकती है?
  7. सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन दोनों की सीमाओं का तुलनात्मक परीक्षण कीजिए।
  8. “शक्ति-संतुलन प्रतिस्पर्धा पर जबकि सामूहिक सुरक्षा सहयोग पर आधारित है।” स्पष्ट कीजिए।
  9. “सामूहिक सुरक्षा सभी के विरुद्ध आक्रमण को रोकने का प्रयास है, जबकि शक्ति-संतुलन किसी एक शक्ति के प्रभुत्व को रोकता है।” व्याख्या कीजिए।
  10. आधुनिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सामूहिक सुरक्षा एवं शक्ति-संतुलन की उपयोगिता का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

लघु-उत्तरीय प्रश्न
  1. सामूहिक सुरक्षा क्या है?
  2. सामूहिक सुरक्षा का मूल उद्देश्य क्या है?
  3. सामूहिक सुरक्षा का मूल सिद्धांत क्या है?
  4. सामूहिक सुरक्षा में आक्रमणकारी के प्रति क्या दृष्टिकोण अपनाया जाता है?
  5. सामूहिक सुरक्षा में सामूहिक कार्रवाई से क्या अभिप्राय है?
  6. राष्ट्र संघ और सामूहिक सुरक्षा का क्या संबंध है?
  7. संयुक्त राष्ट्र और सामूहिक सुरक्षा का क्या संबंध है?
  8. सामूहिक सुरक्षा की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
  9. सामूहिक सुरक्षा की दो सीमाएँ बताइए।
  10. सामूहिक सुरक्षा की सफलता के लिए किन परिस्थितियों की आवश्यकता होती है?
  11. शक्ति-संतुलन क्या है?
  12. शक्ति-संतुलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
  13. शक्ति-संतुलन के दो साधन बताइए।
  14. गठबंधन से शक्ति-संतुलन किस प्रकार प्रभावित होता है?
  15. शक्ति-संतुलन और राष्ट्रीय शक्ति में क्या संबंध है?
  16. शक्ति-संतुलन और राष्ट्रीय हित में क्या संबंध है?
  17. शक्ति-संतुलन हथियारों की दौड़ को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है?
  18. शक्ति-संतुलन का एक लाभ बताइए।
  19. शक्ति-संतुलन की एक सीमा बताइए।
  20. सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन में एक प्रमुख अंतर बताइए।
  21. सामूहिक सुरक्षा का आधार क्या है?
  22. शक्ति-संतुलन का आधार क्या है?
  23. सामूहिक सुरक्षा में सामूहिक उत्तरदायित्व से क्या अभिप्राय है?
  24. शक्ति-संतुलन में गठबंधन क्यों बनाए जाते हैं?
  25. अंतरराष्ट्रीय शांति में सामूहिक सुरक्षा का क्या महत्व है?
  26. आधुनिक युग में शक्ति-संतुलन क्यों महत्वपूर्ण है?
  27. सामूहिक सुरक्षा में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका क्या है?
  28. क्या सामूहिक सुरक्षा राष्ट्रीय हितों से प्रभावित होती है?
  29. क्या शक्ति-संतुलन युद्ध को रोक सकता है?
  30. सामूहिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून में क्या संबंध है?

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. सामूहिक सुरक्षा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(क) युद्ध को बढ़ावा देना
(ख) अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना
(ग) सैन्य शक्ति बढ़ाना
(घ) आर्थिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना
उत्तर — (ख)

2. सामूहिक सुरक्षा का मूल आधार क्या है?
(क) सहयोग
(ख) प्रतिस्पर्धा
(ग) अलगाव
(घ) सैन्य विस्तार
उत्तर — (क)

3. सामूहिक सुरक्षा में किसी एक राज्य पर आक्रमण को किस रूप में देखा जाता है?
(क) केवल उस राज्य की समस्या
(ख) सामूहिक चिंता
(ग) घरेलू समस्या
(घ) आर्थिक समस्या
उत्तर — (ख)

4. राष्ट्र संघ की स्थापना किस युद्ध के बाद हुई?
(क) प्रथम विश्व युद्ध
(ख) द्वितीय विश्व युद्ध
(ग) शीत युद्ध
(घ) क्रीमिया युद्ध
उत्तर — (क)

5. राष्ट्र संघ की स्थापना का एक प्रमुख उद्देश्य क्या था?
(क) सामूहिक सुरक्षा
(ख) उपनिवेश विस्तार
(ग) हथियारों की दौड़
(घ) आर्थिक प्रभुत्व
उत्तर — (क)

6. संयुक्त राष्ट्र की स्थापना कब हुई?
(क) 1919
(ख) 1939
(ग) 1945
(घ) 1950
उत्तर — (ग)

7. संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी किस अंग को दी गई है?
(क) महासभा
(ख) सुरक्षा परिषद
(ग) सचिवालय
(घ) अंतरराष्ट्रीय न्यायालय
उत्तर — (ख)

8. शक्ति-संतुलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(क) एक राज्य का प्रभुत्व स्थापित करना
(ख) किसी एक शक्ति के अत्यधिक प्रभुत्व को रोकना
(ग) युद्ध को बढ़ाना
(घ) अंतरराष्ट्रीय व्यापार रोकना
उत्तर — (ख)

9. शक्ति-संतुलन में सबसे महत्वपूर्ण तत्व क्या है?
(क) शक्ति का वितरण
(ख) धर्म
(ग) भाषा
(घ) शिक्षा
उत्तर — (क)

10. शक्ति-संतुलन स्थापित करने का प्रमुख साधन कौन-सा है?
(क) गठबंधन
(ख) अलगाव
(ग) सांस्कृतिक कार्यक्रम
(घ) जनगणना
उत्तर — (क)

11. यदि एक राज्य अत्यधिक शक्तिशाली हो जाए तो अन्य राज्य क्या कर सकते हैं?
(क) गठबंधन बना सकते हैं
(ख) अपनी शक्ति समाप्त कर सकते हैं
(ग) अंतरराष्ट्रीय राजनीति से बाहर हो सकते हैं
(घ) अपनी संप्रभुता समाप्त कर सकते हैं
उत्तर — (क)

12. शक्ति-संतुलन का संबंध मुख्यतः किससे है?
(क) शक्ति-वितरण
(ख) जनसंख्या वितरण
(ग) भाषा वितरण
(घ) शिक्षा व्यवस्था
उत्तर — (क)

13. सामूहिक सुरक्षा में किस भावना को महत्व दिया जाता है?
(क) सामूहिक उत्तरदायित्व
(ख) व्यक्तिगत प्रभुत्व
(ग) अलगाववाद
(घ) साम्राज्यवाद
उत्तर — (क)

14. शक्ति-संतुलन में राज्यों का प्रमुख उद्देश्य क्या होता है?
(क) अपनी सुरक्षा बनाए रखना
(ख) अपनी संप्रभुता समाप्त करना
(ग) दूसरे राज्यों को समाप्त करना
(घ) अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को समाप्त करना
उत्तर — (क)

15. सामूहिक सुरक्षा किस प्रकार की व्यवस्था है?
(क) सहयोगात्मक
(ख) पूर्णतः प्रतिस्पर्धात्मक
(ग) औपनिवेशिक
(घ) अलगाववादी
उत्तर — (क)

16. शक्ति-संतुलन मुख्यतः किस पर आधारित है?
(क) रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
(ख) केवल नैतिकता
(ग) केवल कानून
(घ) केवल संस्कृति
उत्तर — (क)

17. सामूहिक सुरक्षा की सफलता के लिए क्या आवश्यक है?
(क) सदस्य राज्यों का सहयोग
(ख) राज्यों का अलगाव
(ग) हथियारों की अनियंत्रित वृद्धि
(घ) आर्थिक प्रतिबंधों का अभाव
उत्तर — (क)

18. शक्ति-संतुलन की एक संभावित समस्या क्या है?
(क) हथियारों की दौड़
(ख) सहयोग की वृद्धि
(ग) शांति की गारंटी
(घ) आर्थिक विकास
उत्तर — (क)

19. सामूहिक सुरक्षा में आक्रमणकारी के विरुद्ध कार्रवाई किस प्रकार की होती है?
(क) सामूहिक
(ख) व्यक्तिगत
(ग) निजी
(घ) स्थानीय
उत्तर — (क)

20. निम्न में से कौन सामूहिक सुरक्षा की प्रमुख संस्था है?
(क) संयुक्त राष्ट्र
(ख) विश्व बैंक
(ग) विश्व व्यापार संगठन
(घ) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
उत्तर — (क)

21. शक्ति-संतुलन का संबंध किस अवधारणा से सबसे अधिक है?
(क) राष्ट्रीय शक्ति
(ख) जनसंख्या नीति
(ग) शिक्षा नीति
(घ) सामाजिक नीति
उत्तर — (क)

22. सामूहिक सुरक्षा में किसी आक्रमणकारी के विरुद्ध कार्रवाई का उद्देश्य क्या है?
(क) आक्रमण को रोकना
(ख) आक्रमण को बढ़ाना
(ग) युद्ध को स्थायी बनाना
(घ) व्यापार रोकना
उत्तर — (क)

23. शक्ति-संतुलन में गठबंधन क्यों बनाए जाते हैं?
(क) शक्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए
(ख) शिक्षा बढ़ाने के लिए
(ग) जनसंख्या घटाने के लिए
(घ) सांस्कृतिक आदान-प्रदान रोकने के लिए
उत्तर — (क)

24. सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन में मुख्य अंतर किसका है?
(क) सहयोग और शक्ति-वितरण का
(ख) भाषा का
(ग) धर्म का
(घ) जनसंख्या का
उत्तर — (क)

25. शक्ति-संतुलन का उद्देश्य किसे रोकना है?
(क) एक शक्ति के प्रभुत्व को
(ख) अंतरराष्ट्रीय सहयोग को
(ग) कूटनीति को
(घ) अंतरराष्ट्रीय कानून को
उत्तर — (क)

रिक्त स्थान भरिए
  1. सामूहिक सुरक्षा का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय ______ एवं सुरक्षा बनाए रखना है।

    उत्तर — शांति
  2. सामूहिक सुरक्षा का आधार ______ सहयोग है।

    उत्तर — सामूहिक
  3. राष्ट्र संघ की स्थापना ______ विश्व युद्ध के बाद हुई।

    उत्तर — प्रथम
  4. संयुक्त राष्ट्र की स्थापना ______ में हुई।

    उत्तर — 1945
  5. संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी ______ परिषद की है।

    उत्तर — सुरक्षा
  6. शक्ति-संतुलन का उद्देश्य किसी एक शक्ति के ______ को रोकना है।

    उत्तर — प्रभुत्व
  7. शक्ति-संतुलन में ______ निर्माण महत्वपूर्ण साधन है।

    उत्तर — गठबंधन
  8. सामूहिक सुरक्षा का आधार ______ उत्तरदायित्व है।

    उत्तर — सामूहिक
  9. शक्ति-संतुलन का संबंध शक्ति के ______ से है।

    उत्तर — वितरण
  10. सामूहिक सुरक्षा में आक्रमणकारी के विरुद्ध ______ कार्रवाई की जाती है।

    उत्तर — सामूहिक

सही या गलत
  1. सामूहिक सुरक्षा का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखना है। — सही
  2. सामूहिक सुरक्षा केवल एक राज्य की सुरक्षा पर आधारित है। — गलत
  3. राष्ट्र संघ में सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा महत्वपूर्ण थी। — सही
  4. संयुक्त राष्ट्र सामूहिक सुरक्षा की व्यवस्था से जुड़ा है। — सही
  5. शक्ति-संतुलन का उद्देश्य एक राज्य का प्रभुत्व स्थापित करना है। — गलत
  6. शक्ति-संतुलन किसी एक शक्ति के अत्यधिक प्रभुत्व को रोकने का प्रयास करता है। — सही
  7. गठबंधन शक्ति-संतुलन का एक साधन है। — सही
  8. सामूहिक सुरक्षा का आधार सहयोग है। — सही
  9. शक्ति-संतुलन हथियारों की दौड़ को कभी भी प्रभावित नहीं करता। — गलत
  10. सामूहिक सुरक्षा में सदस्य राज्यों का सहयोग आवश्यक है। — सही
  11. शक्ति-संतुलन में राष्ट्रीय शक्ति का महत्व होता है। — सही
  12. सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन बिल्कुल समान अवधारणाएँ हैं। — गलत
  13. सामूहिक सुरक्षा किसी भी आक्रमणकारी के विरुद्ध सामूहिक कार्रवाई की भावना रखती है। — सही
  14. शक्ति-संतुलन में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का महत्व होता है। — सही
  15. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। — सही
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न

अगर इस अध्याय से 10 सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न तैयार करने हों, तो ये विशेष रूप से पढ़ें:
  1. सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा एवं विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
  2. सामूहिक सुरक्षा की सफलता और असफलता के कारणों का विश्लेषण कीजिए।
  3. संयुक्त राष्ट्र की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  4. शक्ति-संतुलन की अवधारणा एवं विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
  5. शक्ति-संतुलन के प्रमुख साधनों की विवेचना कीजिए।
  6. अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने में शक्ति-संतुलन की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  7. शक्ति-संतुलन की सीमाओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  8. सामूहिक सुरक्षा और शक्ति-संतुलन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  9. आधुनिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सामूहिक सुरक्षा की प्रासंगिकता का परीक्षण कीजिए।
  10. “सामूहिक सुरक्षा सहयोग पर और शक्ति-संतुलन शक्ति-वितरण पर आधारित है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।

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