Unit-03
Impact of Democratic Decentralization: Urban and Local self government, 73rd& 74th Amendment of Indian Constitution
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का प्रभाव : नगरीय एवं स्थानीय स्वशासन; भारतीय संविधान का 73वाँ एवं 74वाँ संविधान संशोधन।
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र है। यहाँ लोकतंत्र केवल शासन की एक प्रणाली नहीं, बल्कि जनभागीदारी, उत्तरदायित्व, समानता और विकास की एक सतत प्रक्रिया है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि शासन जनता के कितना निकट है और सामान्य नागरिक अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में कितनी सक्रिय भूमिका निभा सकता है। यदि शासन की समस्त शक्तियाँ केवल केंद्र या राज्य सरकारों तक सीमित रहें, तो लोकतंत्र का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। इसलिए आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में शासन की शक्तियों को स्थानीय स्तर तक पहुँचाना आवश्यक माना गया। इसी विचार से लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की अवधारणा विकसित हुई।
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का मूल उद्देश्य यह है कि शासन की शक्तियाँ केवल उच्च स्तर की सरकारों तक सीमित न रहें, बल्कि गाँवों, कस्बों और नगरों तक पहुँचें। जब स्थानीय जनता अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से विकास योजनाएँ बनाती है, सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग निर्धारित करती है और स्थानीय प्रशासन की निगरानी करती है, तब लोकतंत्र अधिक प्रभावी और जीवंत बनता है। इस प्रकार लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्कृति का विस्तार है।
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में स्थानीय आवश्यकताएँ एक-दूसरे से भिन्न हैं। हिमालयी क्षेत्रों की समस्याएँ समुद्री क्षेत्रों से अलग हैं, ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकताएँ नगरीय क्षेत्रों से भिन्न हैं और महानगरों की चुनौतियाँ छोटे नगरों से अलग हैं। ऐसी स्थिति में यदि प्रत्येक निर्णय केवल राज्य या केंद्र स्तर पर लिया जाए, तो स्थानीय आवश्यकताओं की उपेक्षा होना स्वाभाविक है। इसलिए स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने वाली लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण भारतीय लोकतंत्र की व्यावहारिक आवश्यकता बन गया।
भारतीय समाज में स्थानीय स्वशासन की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। प्राचीन भारत में ग्राम सभाएँ सामाजिक और प्रशासनिक जीवन का महत्वपूर्ण आधार थीं। गाँव के लोग सामूहिक रूप से कृषि, सिंचाई, जल संरक्षण, विवादों के समाधान तथा सार्वजनिक कार्यों का संचालन करते थे। मध्यकाल में इन संस्थाओं की भूमिका सीमित हो गई, किंतु स्थानीय स्तर पर सामुदायिक व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। ब्रिटिश शासन के दौरान आधुनिक स्थानीय प्रशासन की शुरुआत हुई। वर्ष 1882 में लॉर्ड रिपन ने स्थानीय स्वशासन को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए। इसी कारण उन्हें भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक भी कहा जाता है। यद्यपि ब्रिटिश सरकार का उद्देश्य लोकतंत्र का विकास नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुविधा था, फिर भी इस व्यवस्था ने भविष्य के स्थानीय स्वशासन की आधारभूमि तैयार की।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारतीय नेतृत्व ने यह अनुभव किया कि लोकतंत्र तभी सफल होगा जब उसकी जड़ें गाँवों और नगरों तक पहुँचें। संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 40 के अंतर्गत राज्य को ग्राम पंचायतों का संगठन करने तथा उन्हें आवश्यक अधिकार प्रदान करने का निर्देश दिया गया। यह प्रावधान इस बात का प्रमाण था कि संविधान निर्माताओं ने स्थानीय स्वशासन को लोकतांत्रिक शासन का अनिवार्य अंग माना।
स्वतंत्रता के प्रारंभिक वर्षों में पंचायती राज संस्थाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं थी। अनेक राज्यों में पंचायतें नियमित रूप से कार्य नहीं कर रही थीं। उनके पास न तो पर्याप्त वित्तीय संसाधन थे और न ही प्रशासनिक अधिकार। विकास योजनाओं का संचालन मुख्यतः नौकरशाही के माध्यम से होता था, जिससे स्थानीय जनता की भागीदारी सीमित रह जाती थी। इस स्थिति को सुधारने के लिए समय-समय पर अनेक समितियों का गठन किया गया।
1957 में गठित बलवंत राय मेहता समिति ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को ग्रामीण विकास का आधार माना और त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की। इसके अनुसार ग्राम पंचायत, पंचायत समिति तथा जिला परिषद के माध्यम से विकास कार्यों का संचालन होना चाहिए। बाद में अशोक मेहता समिति, जी. वी. के. राव समिति तथा एल. एम. सिंहवी समिति ने भी स्थानीय स्वशासन को अधिक सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इन समितियों की अनुशंसाओं ने यह स्पष्ट किया कि जब तक पंचायतों और नगर निकायों को संवैधानिक दर्जा, नियमित चुनाव, वित्तीय संसाधन और प्रशासनिक अधिकार नहीं दिए जाएंगे, तब तक लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकेगा।
इसी विचार के परिणामस्वरूप 1992 में भारतीय संसद ने 73वाँ और 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम पारित किया, जो 24 अप्रैल 1993 तथा 1 जून 1993 से लागू हुए। इन संशोधनों ने पहली बार पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय स्थानीय निकायों को संवैधानिक आधार प्रदान किया। इससे स्थानीय स्वशासन केवल प्रशासनिक व्यवस्था न रहकर भारतीय लोकतंत्र का संवैधानिक अंग बन गया।
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का प्रभाव भारतीय लोकतंत्र पर अत्यंत व्यापक रहा है। सबसे पहले इसने लोकतंत्र को गाँवों और नगरों तक पहुँचाया। अब लाखों नागरिक प्रत्यक्ष रूप से स्थानीय शासन की प्रक्रिया में भाग लेते हैं। पंचायतों और नगर निकायों के चुनावों में व्यापक जनभागीदारी लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती है। नागरिक केवल मतदाता ही नहीं रहते, बल्कि विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में भी सहभागी बनते हैं।
इस व्यवस्था ने सामाजिक न्याय को भी नई दिशा प्रदान की। पंचायतों और नगर निकायों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था ने उन वर्गों को नेतृत्व का अवसर दिया जिन्हें लंबे समय तक निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखा गया था। लाखों महिलाएँ ग्राम प्रधान, जिला परिषद अध्यक्ष, महापौर और पार्षद के रूप में कार्य कर रही हैं। इससे भारतीय लोकतंत्र अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बना है।
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण ने प्रशासनिक उत्तरदायित्व को भी बढ़ाया है। स्थानीय प्रतिनिधि जनता के बीच रहते हैं, इसलिए वे स्थानीय समस्याओं से अधिक परिचित होते हैं। सड़क, पेयजल, स्वच्छता, प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय विकास से जुड़े अनेक कार्य अब स्थानीय निकायों के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जाते हैं। इससे प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ी हैं।
आर्थिक दृष्टि से भी इस व्यवस्था ने स्थानीय विकास को नई गति प्रदान की है। पंचायतें और नगर निकाय अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएँ बनाते हैं, स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हैं तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। इससे विकास योजनाएँ अधिक व्यावहारिक और जनहितकारी बनती हैं।
हालाँकि लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की अनेक उपलब्धियाँ हैं, फिर भी इसके सामने कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अनेक स्थानीय निकाय वित्तीय संसाधनों की कमी से जूझते हैं। कई स्थानों पर प्रशासनिक क्षमता सीमित है, तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव है तथा राजनीतिक हस्तक्षेप भी देखने को मिलता है। कुछ राज्यों में स्थानीय संस्थाओं को पर्याप्त अधिकार व्यवहार में नहीं मिल पाते। इसलिए लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की सफलता केवल संवैधानिक प्रावधानों पर नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, वित्तीय स्वायत्तता और सक्रिय जनसहभागिता पर भी निर्भर करती है।
राजनीति विज्ञान की दृष्टि से लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। इसने लोकतंत्र को केवल संसद और विधानसभाओं तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे प्रत्येक गाँव और प्रत्येक नगर तक पहुँचाया। यही कारण है कि स्थानीय स्वशासन को लोकतंत्र की आधारशिला और लोकतांत्रिक प्रशिक्षण का प्रथम विद्यालय कहा जाता है। यह व्यवस्था नागरिकों में नेतृत्व, उत्तरदायित्व, सहयोग और सार्वजनिक जीवन के प्रति जागरूकता का विकास करती है तथा लोकतंत्र को अधिक सशक्त, उत्तरदायी और जनोन्मुख बनाती है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
1. लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(अ) सत्ता का केंद्रीकरण
(ब) जनता को शासन में सहभागी बनाना
(स) न्यायपालिका को सशक्त बनाना
(द) संसद की शक्तियाँ बढ़ाना
उत्तर – (ब)
2. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में ग्राम पंचायतों के संगठन का निर्देश दिया गया है?
(अ) अनुच्छेद 32
(ब) अनुच्छेद 40
(स) अनुच्छेद 50
(द) अनुच्छेद 356
उत्तर – (ब)
3. पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा किस संविधान संशोधन से प्राप्त हुआ?
(अ) 42वाँ
(ब) 44वाँ
(स) 73वाँ
(द) 74वाँ
उत्तर – (स)
4. नगरीय स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन से मिला?
(अ) 52वाँ
(ब) 61वाँ
(स) 73वाँ
(द) 74वाँ
उत्तर – (द)
5. 73वाँ संविधान संशोधन कब लागू हुआ?
(अ) 26 जनवरी 1992
(ब) 24 अप्रैल 1993
(स) 1 जून 1993
(द) 15 अगस्त 1993
उत्तर – (ब)
6. 74वाँ संविधान संशोधन कब लागू हुआ?
(अ) 24 अप्रैल 1993
(ब) 1 जून 1993
(स) 26 जनवरी 1994
(द) 15 अगस्त 1993
उत्तर – (ब)
7. पंचायती राज व्यवस्था की त्रिस्तरीय प्रणाली की सिफारिश किस समिति ने की?
(अ) सरकारिया समिति
(ब) बलवंत राय मेहता समिति
(स) अशोक मेहता समिति
(द) एल.एम. सिंहवी समिति
उत्तर – (ब)
8. भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक किसे कहा जाता है?
(अ) लॉर्ड कर्जन
(ब) लॉर्ड रिपन
(स) लॉर्ड माउंटबेटन
(द) लॉर्ड इरविन
उत्तर – (ब)
9. ग्राम सभा किसकी आधारभूत संस्था है?
(अ) संसद
(ब) पंचायत
(स) न्यायपालिका
(द) राज्य सरकार
उत्तर – (ब)
10. पंचायतों का कार्यकाल कितना होता है?
(अ) 3 वर्ष
(ब) 4 वर्ष
(स) 5 वर्ष
(द) 6 वर्ष
उत्तर – (स)
11. पंचायत चुनाव कौन कराता है?
(अ) भारत निर्वाचन आयोग
(ब) राज्य निर्वाचन आयोग
(स) संसद
(द) उच्च न्यायालय
उत्तर – (ब)
12. पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा कौन करता है?
(अ) वित्त मंत्रालय
(ब) राज्य वित्त आयोग
(स) नीति आयोग
(द) निर्वाचन आयोग
उत्तर – (ब)
13. 73वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में कौन-सा भाग जोड़ा गया?
(अ) भाग VIII
(ब) भाग IX
(स) भाग X
(द) भाग XI
उत्तर – (ब)
14. 74वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में कौन-सा भाग जोड़ा गया?
(अ) भाग IX
(ब) भाग IX-A
(स) भाग X
(द) भाग XI
उत्तर – (ब)
15. पंचायतों के विषय किस अनुसूची में दिए गए हैं?
(अ) दसवीं
(ब) ग्यारहवीं
(स) बारहवीं
(द) सातवीं
उत्तर – (ब)
16. नगर निकायों के विषय किस अनुसूची में दिए गए हैं?
(अ) ग्यारहवीं
(ब) बारहवीं
(स) सातवीं
(द) दसवीं
उत्तर – (ब)
17. लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
(अ) सत्ता का केंद्रीकरण
(ब) जनसहभागिता
(स) सैन्य नियंत्रण
(द) नौकरशाही का विस्तार
उत्तर – (ब)
18. नगर निगम का निर्वाचित प्रमुख क्या कहलाता है?
(अ) सरपंच
(ब) महापौर
(स) जिलाधिकारी
(द) आयुक्त
उत्तर – (ब)
19. पंचायतों में महिलाओं के लिए न्यूनतम आरक्षण कितना है?
(अ) 25%
(ब) 33%
(स) 40%
(द) 50%
उत्तर – (ब)
20. स्थानीय स्वशासन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(अ) प्रशासन का केंद्रीकरण
(ब) स्थानीय विकास एवं जनभागीदारी
(स) केवल कर वसूली
(द) केवल कानून-व्यवस्था
उत्तर – (ब)
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण क्या है?
स्थानीय स्वशासन से क्या अभिप्राय है?
अनुच्छेद 40 क्या कहता है?
ग्राम सभा क्या है?
ग्राम पंचायत क्या है?
पंचायत समिति क्या है?
जिला परिषद क्या है?
नगर पंचायत क्या है?
नगर परिषद क्या है?
नगर निगम क्या है?
73वाँ संविधान संशोधन क्या है?
74वाँ संविधान संशोधन क्या है?
बलवंत राय मेहता समिति का महत्व लिखिए।
अशोक मेहता समिति का योगदान लिखिए।
एल.एम. सिंहवी समिति किससे संबंधित है?
राज्य निर्वाचन आयोग का कार्य लिखिए।
राज्य वित्त आयोग का कार्य लिखिए।
ग्राम सभा की दो शक्तियाँ लिखिए।
पंचायतों का कार्यकाल कितना होता है?
पंचायतों में आरक्षण का उद्देश्य क्या है?
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का एक लाभ लिखिए।
स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र को कैसे मजबूत करता है?
महापौर कौन होता है?
सरपंच का कार्य क्या है?
स्थानीय निकायों का महत्व लिखिए।
लघु उत्तरीय प्रश्न
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का अर्थ एवं उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
स्थानीय स्वशासन की विशेषताएँ लिखिए।
भारत में स्थानीय स्वशासन के विकास का संक्षिप्त इतिहास लिखिए।
पंचायती राज व्यवस्था की संरचना का वर्णन कीजिए।
नगर निकायों की संरचना स्पष्ट कीजिए।
73वें संविधान संशोधन के प्रमुख प्रावधान लिखिए।
74वें संविधान संशोधन के प्रमुख प्रावधान लिखिए।
ग्राम सभा की शक्तियों एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
पंचायत समिति के कार्य लिखिए।
जिला परिषद की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
नगर निगम के कार्यों का वर्णन कीजिए।
पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण का महत्व स्पष्ट कीजिए।
स्थानीय स्वशासन की प्रमुख समस्याएँ लिखिए।
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का ग्रामीण विकास पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
स्थानीय स्वशासन की वित्तीय समस्याओं का वर्णन कीजिए।
स्थानीय निकायों में जनभागीदारी का महत्व बताइए।
स्थानीय स्वशासन और सुशासन का संबंध स्पष्ट कीजिए।
पंचायती राज व्यवस्था की उपलब्धियाँ लिखिए।
नगरीय स्थानीय निकायों की चुनौतियाँ बताइए।
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का सामाजिक न्याय पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की अवधारणा एवं महत्व का विस्तृत विवेचन कीजिए।
भारत में स्थानीय स्वशासन के ऐतिहासिक विकास का विस्तार से वर्णन कीजिए।
पंचायती राज व्यवस्था की संरचना, शक्तियों एवं कार्यों का विस्तृत अध्ययन कीजिए।
नगरीय स्थानीय स्वशासन की संरचना एवं महत्व का विश्लेषण कीजिए।
भारतीय संविधान के 73वें संविधान संशोधन का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
भारतीय संविधान के 74वें संविधान संशोधन का विस्तृत विवेचन कीजिए।
73वें एवं 74वें संविधान संशोधनों का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का भारतीय लोकतंत्र पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
स्थानीय स्वशासन की उपलब्धियों एवं चुनौतियों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
"स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र का प्रथम विद्यालय है।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।
भारत में ग्रामीण एवं नगरीय स्थानीय स्वशासन का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं एवं वंचित वर्गों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
स्थानीय स्वशासन और सहभागी लोकतंत्र के संबंध की व्याख्या कीजिए।
स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने के उपायों का वर्णन कीजिए।
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और समावेशी विकास के संबंध का विश्लेषण कीजिए।
विश्वविद्यालय परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का अर्थ, विशेषताएँ एवं महत्व स्पष्ट कीजिए।
भारत में स्थानीय स्वशासन के विकास की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का वर्णन कीजिए।
73वें संविधान संशोधन की प्रमुख विशेषताओं का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
74वें संविधान संशोधन का नगरीय प्रशासन पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का ग्रामीण विकास एवं सामाजिक न्याय पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
स्थानीय स्वशासन की सफलता में ग्राम सभा की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
पंचायती राज व्यवस्था की उपलब्धियों एवं सीमाओं का विश्लेषण कीजिए।
नगरीय स्थानीय निकायों की संरचना एवं कार्यों की समीक्षा कीजिए।
73वें एवं 74वें संविधान संशोधनों के बाद भारतीय लोकतंत्र में आए परिवर्तनों का विवेचन कीजिए।
"लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति स्थानीय स्वशासन में निहित है।" इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
