Unit-03

Gender sensitivity , Unity In Diversity, State And Government, Nation Building, Affirmative Action, Universal Human Rights
लैंगिक संवेदनशीलता,विविधता में एकता, राज्य एवं सरकार,राष्ट्र निर्माण,सकारात्मक भेदभाव, सार्वभौमिक मानवाधिकार

मानव समाज की उन्नति केवल आर्थिक विकास या वैज्ञानिक प्रगति से नहीं होती, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि समाज अपने प्रत्येक सदस्य के साथ कितना न्यायपूर्ण, समान और सम्मानजनक व्यवहार करता है। आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल उद्देश्य ऐसा सामाजिक वातावरण निर्मित करना है जहाँ प्रत्येक व्यक्ति को उसकी जाति, धर्म, भाषा, लिंग, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव का सामना न करना पड़े। भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था इसी आदर्श को साकार करने का प्रयास करते हैं। इसी कारण लैंगिक समानता, विविधता में एकता, राज्य और सरकार की भूमिका, राष्ट्र निर्माण, सकारात्मक भेदभाव तथा सार्वभौमिक मानवाधिकार जैसी अवधारणाएँ आधुनिक नागरिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार मानी जाती हैं। ये सभी विषय एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और मिलकर एक समतामूलक, न्यायपूर्ण तथा प्रगतिशील समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

मानव समाज में स्त्री और पुरुष दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। दोनों की भागीदारी के बिना किसी भी समाज का संतुलित विकास संभव नहीं है। लंबे समय तक अनेक सामाजिक परंपराओं और रूढ़ियों के कारण महिलाओं तथा अन्य लैंगिक समूहों को समान अवसर प्राप्त नहीं हो सके। इसी पृष्ठभूमि में लैंगिक संवेदनशीलता की अवधारणा विकसित हुई। इसका अर्थ केवल महिलाओं के प्रति सहानुभूति रखना नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के साथ उसके लिंग की परवाह किए बिना समान सम्मान, समान अवसर और समान अधिकार का व्यवहार करना है। लैंगिक संवेदनशील समाज वह होता है जहाँ शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, संपत्ति, निर्णय लेने की प्रक्रिया तथा सार्वजनिक जीवन में सभी को समान भागीदारी प्राप्त हो। विद्यालय, परिवार, कार्यस्थल और शासन व्यवस्था में यदि लैंगिक संवेदनशीलता को व्यवहार में अपनाया जाए तो भेदभाव, हिंसा और असमानता जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। यह केवल महिलाओं के सशक्तिकरण का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज के संतुलित और न्यायपूर्ण विकास की आधारशिला है।

भारत विश्व के उन देशों में है जहाँ भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों, परंपराओं, वेशभूषाओं और जीवन-शैलियों की अत्यंत समृद्ध विविधता देखने को मिलती है। इतनी विविधताओं के बावजूद भारत एक राष्ट्र के रूप में संगठित और सुदृढ़ बना हुआ है। यही विशेषता विविधता में एकता कहलाती है। भारतीय समाज यह सिखाता है कि अलग-अलग पहचान होने के बावजूद सभी नागरिक समान रूप से राष्ट्र का हिस्सा हैं। विभिन्न धर्मों के पर्व, अनेक भाषाओं का सम्मान, विविध सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण तथा संविधान द्वारा सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करना इस भावना को और अधिक मजबूत बनाता है। विविधता में एकता केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है। यही भावना सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को निरंतर सुदृढ़ करती है।

किसी भी संगठित समाज के संचालन के लिए राज्य और सरकार की आवश्यकता होती है। सामान्यतः दोनों शब्दों का प्रयोग एक साथ किया जाता है, किंतु दोनों का अर्थ अलग-अलग है। राज्य एक स्थायी राजनीतिक संस्था है जिसके चार आवश्यक तत्व होते हैं—निश्चित भू-भाग, जनसंख्या, सरकार तथा संप्रभुता। दूसरी ओर सरकार राज्य का वह संगठन है जो प्रशासन चलाता है, कानून बनाता है और उन्हें लागू करता है। सरकार समय-समय पर चुनावों के माध्यम से बदल सकती है, लेकिन राज्य बना रहता है। सरकार का प्रमुख दायित्व नागरिकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखना, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आर्थिक विकास तथा सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। यदि सरकार संविधान के अनुसार कार्य करती है और जनता के प्रति उत्तरदायी रहती है, तो लोकतंत्र मजबूत होता है और नागरिकों का शासन व्यवस्था पर विश्वास बढ़ता है।

राष्ट्र निर्माण एक सतत और व्यापक प्रक्रिया है, जिसमें केवल सरकार ही नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होती है। राष्ट्र का निर्माण केवल भौतिक विकास से नहीं होता, बल्कि नागरिकों के चरित्र, नैतिकता, शिक्षा, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा राष्ट्रीय एकता की भावना से होता है। जब नागरिक संविधान का सम्मान करते हैं, राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाते हैं, करों का ईमानदारी से भुगतान करते हैं, पर्यावरण की रक्षा करते हैं और सामाजिक सद्भाव बनाए रखते हैं, तब वे राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृषि, उद्योग, संस्कृति और लोकतांत्रिक संस्थाओं का विकास भी राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण आधार हैं। एक सशक्त राष्ट्र वही होता है जहाँ नागरिक अपने व्यक्तिगत हितों के साथ-साथ राष्ट्रीय हितों को भी समान महत्व देते हैं।

समाज में लंबे समय तक चली असमानताओं और ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त करने के लिए केवल समान अधिकार प्रदान करना पर्याप्त नहीं होता। अनेक बार समाज के कुछ वर्ग इतने पीछे रह जाते हैं कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए विशेष सहायता की आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य से सकारात्मक भेदभाव की नीति अपनाई जाती है। इसका आशय यह है कि सामाजिक, शैक्षिक तथा आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में विशेष अवसर प्रदान किए जाएँ ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। भारत में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विभिन्न प्रकार के विशेष प्रावधान इसी नीति का परिणाम हैं। सकारात्मक भेदभाव का उद्देश्य किसी वर्ग को विशेष लाभ पहुँचाना नहीं, बल्कि समाज में वास्तविक समानता स्थापित करना और ऐतिहासिक असमानताओं को कम करना है। इस नीति के माध्यम से सामाजिक न्याय, समान अवसर तथा समावेशी विकास को प्रोत्साहन मिलता है।

मानवाधिकार वे अधिकार हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को केवल मानव होने के कारण प्राप्त होते हैं। इन अधिकारों का आधार किसी व्यक्ति का धर्म, जाति, राष्ट्रीयता, भाषा, लिंग या सामाजिक स्थिति नहीं, बल्कि उसकी मानवीय गरिमा है। इसी सिद्धांत को सार्वभौमिक मानवाधिकार कहा जाता है। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन, स्वतंत्रता, समानता, शिक्षा, सम्मान, विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म का पालन करने, न्याय प्राप्त करने तथा गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मानव गरिमा की रक्षा के उद्देश्य से विश्व स्तर पर मानवाधिकारों के संरक्षण पर विशेष बल दिया गया। भारत का संविधान भी मानवाधिकारों की मूल भावना का समर्थन करता है और नागरिकों को अनेक मौलिक अधिकार प्रदान करता है। मानवाधिकार केवल कानूनी अधिकार नहीं हैं, बल्कि वे मानव सभ्यता के नैतिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के आधार भी हैं। जब प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों का सम्मान किया जाता है, तभी समाज में शांति, समानता और लोकतंत्र मजबूत होते हैं।

इन सभी अवधारणाओं का मूल उद्देश्य एक ऐसे समाज की स्थापना करना है जहाँ प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान, समान अवसर और सुरक्षित जीवन प्राप्त हो। लैंगिक संवेदनशीलता सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करती है, विविधता में एकता राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत बनाती है, राज्य और सरकार नागरिकों के कल्याण की व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं, राष्ट्र निर्माण विकास की निरंतर प्रक्रिया को गति देता है, सकारात्मक भेदभाव सामाजिक असमानताओं को कम करता है और सार्वभौमिक मानवाधिकार प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करते हैं। इन सभी मूल्यों का समन्वित विकास ही एक सशक्त, समावेशी, लोकतांत्रिक और प्रगतिशील भारत की आधारशिला है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
  1. लैंगिक संवेदनशीलता का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसके महत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  2. विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है। स्पष्ट कीजिए।
  3. राज्य एवं सरकार में अंतर स्पष्ट करते हुए दोनों के कार्यों का वर्णन कीजिए।
  4. राष्ट्र निर्माण की अवधारणा का विवेचन करते हुए नागरिकों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  5. सकारात्मक भेदभाव (Affirmative Action) का अर्थ, उद्देश्य तथा आवश्यकता की व्याख्या कीजिए।
  6. सार्वभौमिक मानवाधिकार की अवधारणा तथा उसके महत्व का वर्णन कीजिए।
  7. भारतीय लोकतंत्र में लैंगिक समानता की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
  8. राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाने में विविधता की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
  9. राज्य और सरकार के मध्य संबंध का विश्लेषण कीजिए।
  10. सामाजिक न्याय की स्थापना में सकारात्मक भेदभाव की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
  11. मानवाधिकारों की रक्षा में भारतीय संविधान की भूमिका का वर्णन कीजिए।
  12. राष्ट्र निर्माण में शिक्षा, युवा शक्ति तथा नागरिक उत्तरदायित्व का महत्व स्पष्ट कीजिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न
  1. लैंगिक संवेदनशीलता से क्या अभिप्राय है?
  2. विविधता में एकता का अर्थ क्या है?
  3. राज्य की परिभाषा दीजिए।
  4. सरकार किसे कहते हैं?
  5. राज्य के चार आवश्यक तत्व कौन-कौन से हैं?
  6. राष्ट्र निर्माण से आप क्या समझते हैं?
  7. सकारात्मक भेदभाव क्या है?
  8. आरक्षण का उद्देश्य क्या है?
  9. मानवाधिकार किसे कहते हैं?
  10. सार्वभौमिक मानवाधिकार से क्या अभिप्राय है?
  11. लैंगिक समानता क्यों आवश्यक है?
  12. लोकतंत्र में नागरिकों की क्या भूमिका है?
  13. सरकार और राज्य में कोई दो अंतर लिखिए।
  14. सामाजिक न्याय से क्या अभिप्राय है?
  15. भारतीय संविधान में समानता का महत्व बताइए।
  16. राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाले दो उपाय लिखिए।
  17. महिला सशक्तिकरण का अर्थ क्या है?
  18. मानव गरिमा का क्या महत्व है?
  19. संविधान मानवाधिकारों की रक्षा कैसे करता है?
  20. सकारात्मक भेदभाव किन वर्गों के लिए किया जाता है?

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)

1. लैंगिक संवेदनशीलता का संबंध किससे है?
(A) आर्थिक विकास
(B) स्त्री-पुरुष एवं सभी लिंगों के प्रति समान सम्मान
(C) कृषि विकास
(D) व्यापार
उत्तर – (B)

2. "विविधता में एकता" किस देश की प्रमुख विशेषता है?
(A) चीन
(B) भारत
(C) जापान
(D) रूस
उत्तर – (B)

3. राज्य का स्थायी तत्व कौन-सा है?
(A) सरकार
(B) राजनीतिक दल
(C) राज्य
(D) मंत्रिमंडल
उत्तर – (C)

4. सरकार का मुख्य कार्य क्या है?
(A) केवल चुनाव कराना
(B) संविधान में संशोधन करना
(C) प्रशासन चलाना एवं कानून लागू करना
(D) केवल न्याय देना
उत्तर – (C)

5. राज्य का आवश्यक तत्व नहीं है—
(A) जनसंख्या
(B) भू-भाग
(C) संप्रभुता
(D) समाचार-पत्र
उत्तर – (D)

6. राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार क्या है?
(A) केवल उद्योग
(B) केवल सेना
(C) जागरूक एवं उत्तरदायी नागरिक
(D) केवल व्यापार
उत्तर – (C)

7. सकारात्मक भेदभाव का उद्देश्य है—
(A) सामाजिक असमानता बढ़ाना
(B) पिछड़े वर्गों को विशेष अवसर देना
(C) केवल आर्थिक विकास
(D) राजनीतिक प्रचार
उत्तर – (B)

8. भारत में आरक्षण किस सिद्धांत पर आधारित है?
(A) समानता समाप्त करने पर
(B) सकारात्मक भेदभाव पर
(C) पूँजीवाद पर
(D) समाजवाद समाप्त करने पर
उत्तर – (B)

9. मानवाधिकार किसे प्राप्त हैं?
(A) केवल नागरिकों को
(B) केवल महिलाओं को
(C) प्रत्येक मानव को
(D) केवल सरकारी कर्मचारियों को
उत्तर – (C)

10. मानवाधिकारों का आधार क्या है?
(A) संपत्ति
(B) जाति
(C) मानव गरिमा
(D) भाषा
उत्तर – (C)

11. महिलाओं और पुरुषों को समान अवसर देना किसका उदाहरण है?
(A) सामाजिक भेदभाव
(B) लैंगिक संवेदनशीलता
(C) धार्मिक स्वतंत्रता
(D) आर्थिक नीति
उत्तर – (B)

12. भारत की राष्ट्रीय एकता का प्रमुख आधार है—
(A) एक भाषा
(B) एक धर्म
(C) विविधता में एकता
(D) एक संस्कृति
उत्तर – (C)

13. सरकार बदल सकती है, लेकिन कौन स्थायी रहता है?
(A) संसद
(B) राज्य
(C) मंत्रिमंडल
(D) राजनीतिक दल
उत्तर – (B)

14. राष्ट्र निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका किसकी होती है?
(A) केवल न्यायपालिका
(B) केवल राष्ट्रपति
(C) प्रत्येक नागरिक की
(D) केवल संसद की
उत्तर – (C)

15. सकारात्मक भेदभाव का उद्देश्य है—
(A) ऐतिहासिक असमानताओं को कम करना
(B) केवल रोजगार बढ़ाना
(C) कर वसूलना
(D) उद्योग स्थापित करना
उत्तर – (A)

16. सार्वभौमिक मानवाधिकार का अर्थ है—
(A) केवल भारत के नागरिकों के अधिकार
(B) सभी मनुष्यों के समान अधिकार
(C) केवल सरकारी कर्मचारियों के अधिकार
(D) केवल बच्चों के अधिकार
उत्तर – (B)

17. निम्नलिखित में कौन मानवाधिकार है?
(A) जीवन का अधिकार
(B) व्यापार कर
(C) सड़क कर
(D) संपत्ति कर
उत्तर – (A)

18. भारतीय संविधान किस प्रकार के समाज की स्थापना का लक्ष्य रखता है?
(A) असमान समाज
(B) न्यायपूर्ण एवं समतामूलक समाज
(C) सामंती समाज
(D) औपनिवेशिक समाज
उत्तर – (B)

19. सामाजिक न्याय की प्राप्ति के लिए कौन-सी नीति अपनाई जाती है?
(A) निजीकरण
(B) सकारात्मक भेदभाव
(C) उदारीकरण
(D) वैश्वीकरण
उत्तर – (B)

20. मानवाधिकारों का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य क्या है?
(A) आर्थिक लाभ देना
(B) मानव गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा करना
(C) केवल चुनाव कराना
(D) व्यापार बढ़ाना
उत्तर – (B)

अति लघु प्रश्न (परीक्षा हेतु)
  1. लैंगिक संवेदनशीलता क्या है?
  2. विविधता में एकता का अर्थ लिखिए।
  3. राज्य किसे कहते हैं?
  4. सरकार किसे कहते हैं?
  5. राष्ट्र निर्माण क्या है?
  6. सकारात्मक भेदभाव क्या है?
  7. मानवाधिकार की परिभाषा दीजिए।
  8. सामाजिक न्याय से क्या अभिप्राय है?
  9. महिला सशक्तिकरण क्या है?
  10. राज्य का कोई एक तत्व लिखिए।
  11. सरकार का एक कार्य लिखिए।
  12. मानव गरिमा का अर्थ बताइए।
  13. राष्ट्रीय एकता क्यों आवश्यक है?
  14. आरक्षण का उद्देश्य क्या है?
  15. लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका क्या है?

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