The State : What of the State, Meaning & Definition
राज्य : राज्य की अवधारणा, अर्थ एवं परिभाषा
राजनीति विज्ञान का अध्ययन मूलतः राज्य, सरकार, सत्ता, अधिकार, नागरिक तथा राजनीतिक संस्थाओं के अध्ययन से संबंधित है। इनमें राज्य की अवधारणा सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि राजनीति विज्ञान का विकास ही राज्य के अध्ययन के इर्द-गिर्द हुआ है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक लगभग सभी राजनीतिक विचारकों ने राज्य की प्रकृति, उद्देश्य, कार्य तथा उसके स्वरूप को समझने का प्रयास किया है। यद्यपि समय के साथ राज्य की संरचना, कार्यक्षेत्र और भूमिका में व्यापक परिवर्तन हुए हैं, फिर भी आधुनिक राजनीतिक जीवन का सबसे संगठित और प्रभावशाली संस्थान राज्य ही है। व्यक्ति का जन्म, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा, संपत्ति, न्याय, स्वतंत्रता तथा सामाजिक जीवन प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से राज्य से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि राजनीति विज्ञान में राज्य की अवधारणा को मूलभूत स्थान प्राप्त है।
सामान्य अर्थ में राज्य उस संगठित राजनीतिक समुदाय को कहा जाता है जो एक निश्चित भू-भाग में निवास करता है, जिसके पास स्थायी जनसंख्या होती है, जो एक संगठित सरकार द्वारा संचालित होता है तथा जो आंतरिक और बाह्य दोनों स्तरों पर सर्वोच्च या संप्रभु सत्ता का प्रयोग करने में सक्षम होता है। राज्य केवल व्यक्तियों का समूह नहीं है और न ही यह केवल सरकार का दूसरा नाम है। यह एक ऐसी राजनीतिक संस्था है जिसके माध्यम से समाज में व्यवस्था बनाए रखी जाती है, कानूनों का निर्माण किया जाता है, न्याय प्रदान किया जाता है तथा नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों का निर्धारण किया जाता है। राज्य सामाजिक जीवन को संगठित करने वाली सर्वोच्च राजनीतिक संस्था है, जिसके बिना आधुनिक समाज की कल्पना करना कठिन है।
इतिहास पर दृष्टि डालने से स्पष्ट होता है कि राज्य की अवधारणा समय के साथ निरंतर विकसित हुई है। प्राचीन यूनान में राज्य का स्वरूप नगर-राज्य के रूप में था। एथेंस और स्पार्टा जैसे नगर-राज्य क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से छोटे थे, किंतु राजनीतिक दृष्टि से स्वतंत्र थे। उस समय नागरिक स्वयं शासन-कार्य में भाग लेते थे और राज्य को नैतिक तथा सामाजिक जीवन का केंद्र माना जाता था। प्लेटो और अरस्तू जैसे दार्शनिकों ने राज्य को मानव जीवन की सर्वोच्च संस्था माना। अरस्तू ने कहा कि मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है और राज्य का अस्तित्व इसलिए है ताकि मनुष्य श्रेष्ठ जीवन प्राप्त कर सके। इस प्रकार प्राचीन विचारधारा में राज्य केवल प्रशासनिक संस्था नहीं था, बल्कि नैतिक विकास का माध्यम भी माना जाता था।
मध्यकाल में राज्य की अवधारणा धार्मिक प्रभाव से अत्यधिक प्रभावित रही। इस समय राजसत्ता और धर्मसत्ता के बीच संबंधों पर विशेष बल दिया गया। राजा को ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता था और शासन को दैवी अधिकार का परिणाम समझा जाता था। चर्च तथा राजसत्ता के बीच प्रभुत्व की प्रतिस्पर्धा ने राज्य की प्रकृति को प्रभावित किया। आधुनिक युग में पुनर्जागरण, धर्म-सुधार आंदोलन, औद्योगिक क्रांति, राष्ट्रवाद तथा लोकतांत्रिक आंदोलनों के परिणामस्वरूप राज्य की अवधारणा में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। अब राज्य को जनता की इच्छा, सामाजिक अनुबंध, राष्ट्रीय संप्रभुता तथा विधि के शासन के आधार पर समझा जाने लगा। आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास तथा कल्याणकारी नीतियों के लिए उत्तरदायी माना जाता है।
राज्य का अर्थ केवल शासन करने वाली सरकार से नहीं लगाया जा सकता। अनेक बार सामान्य बोलचाल में राज्य और सरकार शब्दों का एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग किया जाता है, किंतु राजनीतिक विज्ञान में दोनों की अवधारणाएँ भिन्न हैं। राज्य एक स्थायी संस्था है, जबकि सरकार राज्य का केवल एक अंग है जो समय-समय पर बदलती रहती है। सरकार का कार्य राज्य की नीतियों का निर्माण तथा क्रियान्वयन करना है, जबकि राज्य स्वयं एक व्यापक राजनीतिक संगठन है जिसमें सरकार, नागरिक, भू-भाग, संप्रभुता तथा अन्य संस्थाएँ सम्मिलित होती हैं। यदि किसी देश में चुनाव के बाद सरकार बदल जाती है, तो इसका अर्थ यह नहीं होता कि राज्य समाप्त हो गया है। राज्य अपनी निरंतरता बनाए रखता है, जबकि सरकारें बदलती रहती हैं।
राजनीति विज्ञान में राज्य की अनेक परिभाषाएँ दी गई हैं, जिनमें विभिन्न विद्वानों ने उसके अलग-अलग पक्षों पर बल दिया है। प्रसिद्ध राजनीतिक विचारक गार्नर के अनुसार राज्य ऐसे व्यक्तियों का समुदाय है जो एक निश्चित भू-भाग में स्थायी रूप से निवास करते हैं, जो बाहरी नियंत्रण से स्वतंत्र अथवा लगभग स्वतंत्र होते हैं तथा जिनकी एक संगठित सरकार होती है, जिसके प्रति अधिकांश लोग स्वाभाविक रूप से आज्ञापालन करते हैं। गार्नर की परिभाषा राज्य के चार आवश्यक तत्वों—जनसंख्या, निश्चित भू-भाग, सरकार और संप्रभुता—पर विशेष बल देती है। यह परिभाषा आधुनिक राजनीति विज्ञान में सर्वाधिक प्रचलित मानी जाती है।
ब्लंटश्ली के अनुसार राज्य एक निश्चित भू-भाग में रहने वाले लोगों का राजनीतिक रूप से संगठित समुदाय है। इस परिभाषा में राजनीतिक संगठन तथा सामाजिक एकता पर बल दिया गया है। वुडरो विल्सन के अनुसार राज्य वह जनता है जो एक निश्चित क्षेत्र में कानून के उद्देश्य से संगठित होती है। लास्की ने राज्य को ऐसा क्षेत्रीय समाज माना जिसमें शासन करने और आदेश देने की सर्वोच्च सत्ता विद्यमान होती है। मैक्स वेबर ने राज्य की एक अत्यंत प्रभावशाली परिभाषा प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्य वह संस्था है जो एक निश्चित भू-भाग के भीतर वैध रूप से भौतिक शक्ति के प्रयोग पर एकाधिकार रखती है। वेबर की यह परिभाषा आधुनिक राज्य की कानूनी एवं प्रशासनिक प्रकृति को स्पष्ट करती है।
राज्य की अवधारणा को समझने के लिए उसके आवश्यक तत्वों का ज्ञान भी आवश्यक है। आधुनिक राजनीति विज्ञान के अनुसार राज्य के चार अनिवार्य तत्व माने जाते हैं—जनसंख्या, निश्चित भू-भाग, सरकार तथा संप्रभुता। इन चारों तत्वों के अभाव में राज्य का अस्तित्व संभव नहीं है। जनसंख्या राज्य का मानवीय आधार है। राज्य व्यक्तियों से मिलकर बनता है, इसलिए यदि जनसंख्या ही न हो तो राज्य की कल्पना नहीं की जा सकती। किसी राज्य की जनसंख्या कम या अधिक हो सकती है, किंतु उसका होना अनिवार्य है। विश्व में वेटिकन सिटी जैसे अत्यंत छोटे राज्य भी हैं और भारत तथा चीन जैसे विशाल जनसंख्या वाले राज्य भी हैं। जनसंख्या की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण उसका संगठन, शिक्षा, अनुशासन तथा नागरिक चेतना होती है।
निश्चित भू-भाग राज्य का दूसरा आवश्यक तत्व है। प्रत्येक राज्य का एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र होता है जिसके भीतर उसकी संप्रभु सत्ता लागू होती है। इस भू-भाग में भूमि, नदियाँ, पर्वत, वन, समुद्री क्षेत्र तथा वायु-क्षेत्र भी सम्मिलित होते हैं। यदि किसी समुदाय के पास निश्चित भू-भाग नहीं है, तो उसे आधुनिक अर्थ में राज्य नहीं कहा जा सकता। इसी कारण प्रवासी समुदाय या खानाबदोश समूह राज्य की श्रेणी में नहीं आते। निश्चित भू-भाग राज्य की सीमाओं, अधिकार-क्षेत्र तथा प्रशासनिक नियंत्रण को निर्धारित करता है।
सरकार राज्य का तीसरा आवश्यक तत्व है। सरकार वह संस्था है जिसके माध्यम से राज्य अपनी इच्छा व्यक्त करता है, कानूनों का निर्माण करता है, प्रशासन चलाता है तथा न्याय प्रदान करता है। सरकार के बिना राज्य केवल एक सैद्धांतिक कल्पना बनकर रह जाएगा। सरकार के विभिन्न रूप हो सकते हैं, जैसे लोकतांत्रिक, राजतंत्रीय, संसदीय, राष्ट्रपतिीय, संघात्मक अथवा एकात्मक। सरकार बदल सकती है, किंतु राज्य का अस्तित्व बना रहता है। इसलिए सरकार राज्य का साधन है, जबकि राज्य स्वयं व्यापक राजनीतिक संगठन है।
संप्रभुता राज्य का सबसे महत्वपूर्ण तथा विशिष्ट तत्व है। संप्रभुता से अभिप्राय राज्य की सर्वोच्च एवं अंतिम शक्ति से है, जिसके ऊपर कोई अन्य राजनीतिक सत्ता नहीं होती। आंतरिक संप्रभुता का अर्थ है कि राज्य अपने क्षेत्र के भीतर सर्वोच्च अधिकार रखता है, जबकि बाह्य संप्रभुता का अर्थ है कि राज्य किसी अन्य राज्य के अधीन नहीं होता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम होता है। आधुनिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में यद्यपि राज्यों को अंतरराष्ट्रीय कानून, संधियों तथा वैश्विक संस्थाओं का सम्मान करना पड़ता है, फिर भी संप्रभुता राज्य की मूल पहचान बनी हुई है।
राज्य की अवधारणा को समाज, राष्ट्र तथा सरकार जैसी अन्य अवधारणाओं से अलग करके समझना भी आवश्यक है। समाज एक व्यापक सामाजिक संगठन है जिसमें अनेक प्रकार के संबंध, संस्थाएँ तथा समूह सम्मिलित होते हैं, जबकि राज्य केवल राजनीतिक संगठन है। समाज का उद्देश्य सामाजिक जीवन का संचालन है, जबकि राज्य का उद्देश्य राजनीतिक व्यवस्था तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इसी प्रकार राष्ट्र और राज्य भी समान नहीं हैं। राष्ट्र का आधार सामान्य इतिहास, संस्कृति, भाषा, परंपरा तथा राष्ट्रीय भावना होती है, जबकि राज्य का आधार राजनीतिक संगठन और संप्रभुता है। भारत एक राज्य भी है और राष्ट्र भी, जबकि कुछ राष्ट्र ऐसे हैं जिनका अपना स्वतंत्र राज्य नहीं है। सरकार भी राज्य से भिन्न है क्योंकि सरकार बदलती रहती है, जबकि राज्य स्थायी संस्था है।
आधुनिक युग में राज्य की भूमिका में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। प्रारंभिक उदारवादी विचारधारा राज्य को न्यूनतम कार्य करने वाली संस्था मानती थी। उस समय यह विश्वास किया जाता था कि राज्य का मुख्य कार्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना, बाहरी आक्रमण से रक्षा करना तथा न्याय प्रदान करना है। किंतु औद्योगिक क्रांति, आर्थिक असमानताओं, श्रमिक आंदोलनों तथा सामाजिक न्याय की मांगों के कारण राज्य के कार्यक्षेत्र का विस्तार हुआ। आधुनिक कल्याणकारी राज्य शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला एवं बाल विकास, वृद्धजन कल्याण, वैज्ञानिक अनुसंधान, आधारभूत संरचना तथा आर्थिक नियोजन जैसे अनेक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाता है। इस प्रकार राज्य केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं रह गया है, बल्कि विकास और कल्याण का प्रमुख माध्यम भी बन गया है।
वैश्वीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी, क्षेत्रीय संगठनों तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के उदय ने राज्य की पारंपरिक भूमिका को नई चुनौतियों के सामने खड़ा किया है। विश्व व्यापार संगठन, संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तथा विभिन्न क्षेत्रीय संगठन राज्यों के बीच सहयोग और नियमों की व्यवस्था को मजबूत करते हैं। इसके बावजूद राज्य आज भी नागरिकों की सुरक्षा, विधि-व्यवस्था, राष्ट्रीय रक्षा, आर्थिक नीति, सार्वजनिक प्रशासन तथा लोकतांत्रिक शासन का प्रमुख आधार बना हुआ है। महामारी, जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद तथा आर्थिक संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों ने यह सिद्ध किया है कि राज्य की भूमिका समाप्त नहीं हुई है, बल्कि वह नई परिस्थितियों के अनुसार अधिक उत्तरदायी और बहुआयामी होती जा रही है।
इस प्रकार राज्य की अवधारणा राजनीति विज्ञान की आधारशिला है। राज्य एक संगठित राजनीतिक समुदाय है जो जनसंख्या, निश्चित भू-भाग, सरकार तथा संप्रभुता जैसे अनिवार्य तत्वों पर आधारित होता है। इतिहास के विभिन्न चरणों में इसकी प्रकृति और कार्यों में परिवर्तन अवश्य हुआ है, किंतु मानव समाज के संगठन, शांति, सुरक्षा, न्याय तथा विकास के लिए इसकी आवश्यकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी प्राचीन काल में थी। आधुनिक लोकतांत्रिक एवं कल्याणकारी राज्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ सामाजिक समानता, आर्थिक विकास और मानवीय गरिमा की स्थापना का भी प्रयास करता है। इसलिए राजनीति विज्ञान के अध्ययन में राज्य की अवधारणा, उसका अर्थ तथा उसकी परिभाषाएँ न केवल सैद्धांतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि समकालीन राजनीतिक जीवन को समझने के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions) (2–5 अंक)
राज्य से क्या अभिप्राय है?
राजनीति विज्ञान में राज्य का क्या महत्व है?
राज्य की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
राज्य की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
राज्य की कोई दो परिभाषाएँ दीजिए।
गार्नर के अनुसार राज्य की परिभाषा लिखिए।
ब्लंटश्ली के अनुसार राज्य क्या है?
मैक्स वेबर के अनुसार राज्य की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
लास्की के अनुसार राज्य क्या है?
वुडरो विल्सन द्वारा राज्य की परिभाषा लिखिए।
राज्य के चार आवश्यक तत्वों के नाम लिखिए।
जनसंख्या राज्य का आवश्यक तत्व क्यों है?
निश्चित भू-भाग से क्या अभिप्राय है?
सरकार राज्य का आवश्यक तत्व क्यों मानी जाती है?
संप्रभुता (Sovereignty) क्या है?
आंतरिक संप्रभुता से क्या अभिप्राय है?
बाह्य संप्रभुता का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
राज्य और सरकार में दो अंतर लिखिए।
राज्य और समाज में दो अंतर लिखिए।
राज्य और राष्ट्र में दो अंतर लिखिए।
नगर-राज्य (City State) क्या था?
प्राचीन यूनान में राज्य की अवधारणा कैसी थी?
अरस्तू ने राज्य को किस प्रकार परिभाषित किया?
प्लेटो की राज्य संबंधी अवधारणा क्या थी?
मध्यकाल में राज्य की अवधारणा किन आधारों पर विकसित हुई?
आधुनिक राज्य की दो विशेषताएँ लिखिए।
कल्याणकारी राज्य (Welfare State) से क्या अभिप्राय है?
उदारवादी राज्य की अवधारणा क्या है?
आधुनिक राज्य के चार प्रमुख कार्य लिखिए।
राज्य और सरकार में कौन स्थायी है?
क्या बिना सरकार के राज्य संभव है? स्पष्ट कीजिए।
क्या बिना संप्रभुता के राज्य संभव है? स्पष्ट कीजिए।
आधुनिक राज्य की भूमिका में क्या परिवर्तन आया है?
वैश्वीकरण का राज्य पर क्या प्रभाव पड़ा है?
लोकतांत्रिक राज्य की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
राज्य का मुख्य उद्देश्य क्या है?
नागरिक और राज्य का संबंध स्पष्ट कीजिए।
राज्य की वैध शक्ति (Legitimate Power) से क्या अभिप्राय है?
राज्य की स्थायित्व की विशेषता स्पष्ट कीजिए।
आधुनिक राजनीति विज्ञान में राज्य का क्या महत्व है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions) (10–20 अंक)
राज्य की अवधारणा, अर्थ एवं परिभाषा का विस्तारपूर्वक विवेचन कीजिए।
राज्य के आवश्यक तत्वों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
राज्य और सरकार में अंतर स्पष्ट कीजिए।
राज्य और समाज का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
राज्य और राष्ट्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
प्राचीन काल से आधुनिक काल तक राज्य की अवधारणा के विकास का वर्णन कीजिए।
गार्नर, ब्लंटश्ली, लास्की एवं मैक्स वेबर की राज्य संबंधी परिभाषाओं का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
आधुनिक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का विश्लेषण कीजिए।
आधुनिक युग में राज्य की बदलती भूमिका का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए।
राज्य की संप्रभुता की अवधारणा का विस्तृत अध्ययन कीजिए।
राज्य के आवश्यक तत्वों में संप्रभुता का विशेष महत्व स्पष्ट कीजिए।
राज्य की विशेषताओं का विस्तार से वर्णन कीजिए।
राज्य और सरकार के संबंधों का विश्लेषण कीजिए।
राज्य की अवधारणा पर वैश्वीकरण के प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।
राजनीति विज्ञान के अध्ययन में राज्य का महत्व स्पष्ट कीजिए।
राज्य के पारंपरिक एवं आधुनिक स्वरूप का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।
राज्य के कार्यों में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
राज्य की अवधारणा पर अरस्तू एवं आधुनिक विचारकों के विचारों की तुलना कीजिए।
आधुनिक राज्य के समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) (उत्तर सहित)
1. राजनीति विज्ञान का मुख्य विषय है—
(A) समाज
(B) राज्य
(C) परिवार
(D) धर्म
उत्तर – (B)
2. राज्य का सबसे महत्वपूर्ण तत्व कौन-सा है?
(A) सरकार
(B) संप्रभुता
(C) जनसंख्या
(D) भू-भाग
उत्तर – (B)
3. आधुनिक राज्य के कितने आवश्यक तत्व माने जाते हैं?
(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच
उत्तर – (C)
4. निम्नलिखित में से कौन राज्य का आवश्यक तत्व नहीं है?
(A) जनसंख्या
(B) सरकार
(C) संप्रभुता
(D) राजनीतिक दल
उत्तर – (D)
5. गार्नर के अनुसार राज्य का आवश्यक तत्व नहीं है—
(A) निश्चित भू-भाग
(B) सरकार
(C) संप्रभुता
(D) धर्म
उत्तर – (D)
6. "मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है" यह कथन किसका है?
(A) प्लेटो
(B) अरस्तू
(C) हॉब्स
(D) लॉक
उत्तर – (B)
7. मैक्स वेबर ने राज्य का आधार किसे माना?
(A) नैतिकता
(B) वैध बल प्रयोग का एकाधिकार
(C) धर्म
(D) संस्कृति
उत्तर – (B)
8. राज्य और सरकार में कौन-सा स्थायी होता है?
(A) सरकार
(B) राज्य
(C) संसद
(D) मंत्रिमंडल
उत्तर – (B)
9. निम्नलिखित में से कौन राज्य का मानवीय तत्व है?
(A) सरकार
(B) जनसंख्या
(C) संप्रभुता
(D) भू-भाग
उत्तर – (B)
10. राज्य का भौतिक आधार है—
(A) जनसंख्या
(B) सरकार
(C) निश्चित भू-भाग
(D) संविधान
उत्तर – (C)
11. संप्रभुता का अर्थ है—
(A) न्यायपालिका
(B) सर्वोच्च सत्ता
(C) चुनाव
(D) प्रशासन
उत्तर – (B)
12. आंतरिक संप्रभुता का संबंध किससे है?
(A) विदेश नीति
(B) राज्य के भीतर सर्वोच्च सत्ता
(C) युद्ध
(D) व्यापार
उत्तर – (B)
13. बाह्य संप्रभुता का संबंध है—
(A) स्थानीय प्रशासन
(B) अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्रता
(C) पंचायत
(D) चुनाव आयोग
उत्तर – (B)
14. ब्लंटश्ली किस विषय से संबंधित हैं?
(A) राज्य की परिभाषा
(B) सामाजिक अनुबंध
(C) लोकतंत्र
(D) चुनाव प्रणाली
उत्तर – (A)
15. आधुनिक राज्य का प्रमुख उद्देश्य है—
(A) केवल कर वसूलना
(B) केवल युद्ध करना
(C) जनकल्याण एवं विकास
(D) केवल कानून बनाना
उत्तर – (C)
16. कल्याणकारी राज्य का मुख्य उद्देश्य है—
(A) जनता का शोषण
(B) सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण
(C) केवल सैन्य शक्ति बढ़ाना
(D) केवल व्यापार करना
उत्तर – (B)
17. निम्नलिखित में से कौन राज्य और राष्ट्र के बीच अंतर का आधार है?
(A) संप्रभुता
(B) संस्कृति
(C) राजनीतिक संगठन
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (D)
18. राज्य की इच्छा को क्रियान्वित करने वाली संस्था है—
(A) समाज
(B) सरकार
(C) राष्ट्र
(D) परिवार
उत्तर – (B)
19. नगर-राज्य की अवधारणा किस सभ्यता से संबंधित है?
(A) रोमन
(B) यूनानी
(C) मिस्र
(D) भारतीय
उत्तर – (B)
20. आधुनिक राजनीति विज्ञान में राज्य को माना जाता है—
(A) केवल दमनकारी संस्था
(B) सर्वोच्च राजनीतिक संगठन
(C) धार्मिक संस्था
(D) आर्थिक संस्था
उत्तर – (B)
21. राज्य का कौन-सा तत्व उसे अन्य सभी संगठनों से अलग पहचान देता है?
(A) जनसंख्या
(B) सरकार
(C) संप्रभुता
(D) संविधान
उत्तर – (C)
22. राज्य की परिभाषा देते समय गार्नर ने कितने आवश्यक तत्वों पर बल दिया?
(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच
उत्तर – (C)
23. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(A) सरकार राज्य से बड़ी है।
(B) राज्य सरकार का एक भाग है।
(C) सरकार राज्य का एक अंग है।
(D) राज्य और सरकार समान हैं।
उत्तर – (C)
24. आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य की प्रमुख विशेषता है—
(A) निरंकुश शासन
(B) नागरिक अधिकारों का संरक्षण
(C) वंशानुगत शासन
(D) धार्मिक शासन
उत्तर – (B)
25. वैश्वीकरण के बावजूद राज्य की कौन-सी विशेषता बनी हुई है?
(A) संप्रभुता का पूर्ण लोप
(B) राष्ट्रीय शासन की आवश्यकता
(C) सरकार का अंत
(D) कानून का अभाव
उत्तर – (B)
