Unit – 5
Contemporary Liberalism: John Rawls and Robert Nozick.
समकालीन उदारवाद: जॉन रॉल्स और रॉबर्ट नोज़िक
समकालीन उदारवाद बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विकसित राजनीतिक दर्शन की एक अत्यंत प्रभावशाली धारा है, जिसने स्वतंत्रता, समानता, न्याय, अधिकार, राज्य तथा व्यक्ति के संबंधों की नई व्याख्या प्रस्तुत की। शास्त्रीय उदारवाद जहाँ मुख्यतः व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सीमित शासन और मुक्त बाज़ार पर बल देता था, वहीं समकालीन उदारवाद ने यह स्वीकार किया कि केवल औपचारिक स्वतंत्रता पर्याप्त नहीं है। यदि समाज में गहरी आर्थिक और सामाजिक असमानताएँ विद्यमान हों, तो अनेक व्यक्तियों के लिए स्वतंत्रता का वास्तविक उपयोग करना संभव नहीं होता। इसी कारण समकालीन उदारवाद ने न्याय, अवसरों की समानता, सामाजिक उत्तरदायित्व, मानव गरिमा तथा संवैधानिक लोकतंत्र को उदारवादी चिंतन के केंद्रीय तत्वों के रूप में विकसित किया। इस बौद्धिक परंपरा के दो सबसे प्रभावशाली विचारक जॉन रॉल्स और रॉबर्ट नोज़िक हैं। दोनों ही व्यक्ति की स्वतंत्रता और अधिकारों को अत्यंत महत्व देते हैं, किंतु न्याय, राज्य की भूमिका और संसाधनों के वितरण के संबंध में उनके विचार एक-दूसरे से भिन्न हैं। यही कारण है कि आधुनिक राजनीतिक दर्शन में इन दोनों विचारकों के बीच होने वाला वैचारिक संवाद समकालीन उदारवाद की सबसे महत्वपूर्ण बहसों में से एक माना जाता है।
जॉन रॉल्स का राजनीतिक दर्शन आधुनिक न्याय सिद्धांत का आधार माना जाता है। उन्होंने यह अनुभव किया कि आधुनिक लोकतांत्रिक समाजों में स्वतंत्रता और समानता दोनों को संतुलित करना आवश्यक है। यदि केवल स्वतंत्रता पर बल दिया जाए, तो आर्थिक असमानताएँ बढ़ सकती हैं, और यदि केवल समानता पर बल दिया जाए, तो व्यक्तिगत स्वतंत्रता सीमित हो सकती है। इसलिए उन्होंने न्याय को ऐसी अवधारणा के रूप में विकसित किया जो दोनों मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित कर सके। उनके अनुसार न्याय किसी भी लोकतांत्रिक समाज का प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण नैतिक सिद्धांत है।
रॉल्स ने न्याय को निष्पक्षता के रूप में परिभाषित किया। उनका मत था कि समाज की संस्थाओं का निर्माण ऐसे सिद्धांतों पर होना चाहिए जिन्हें सभी व्यक्ति निष्पक्ष परिस्थितियों में स्वीकार कर सकें। इसी उद्देश्य से उन्होंने मूल स्थिति और अज्ञान के आवरण की प्रसिद्ध अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं। मूल स्थिति एक काल्पनिक परिस्थिति है जिसमें सभी व्यक्ति समाज के मूल नियमों का निर्धारण करते हैं। अज्ञान के आवरण का अर्थ यह है कि निर्णय लेते समय किसी व्यक्ति को यह ज्ञात नहीं होता कि भविष्य में वह समाज में किस वर्ग, जाति, धर्म, लिंग, आर्थिक स्थिति या प्रतिभा के साथ जन्म लेगा। ऐसी स्थिति में प्रत्येक व्यक्ति ऐसे नियमों का चयन करेगा जो सभी के लिए न्यायपूर्ण हों, क्योंकि उसे स्वयं नहीं मालूम कि भविष्य में उसकी सामाजिक स्थिति क्या होगी।
रॉल्स के अनुसार ऐसी निष्पक्ष परिस्थिति में व्यक्ति दो मूलभूत न्याय सिद्धांतों को स्वीकार करेंगे। पहला सिद्धांत यह है कि प्रत्येक व्यक्ति को समान मूलभूत स्वतंत्रताएँ प्राप्त होनी चाहिए। इनमें विचार, अभिव्यक्ति, धर्म, संगठन, राजनीतिक सहभागिता तथा विधि के समक्ष समानता जैसे अधिकार सम्मिलित हैं। इन स्वतंत्रताओं का संरक्षण लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला है और इन्हें किसी आर्थिक लाभ या राजनीतिक सुविधा के लिए समाप्त नहीं किया जा सकता।
दूसरा सिद्धांत सामाजिक और आर्थिक असमानताओं से संबंधित है। रॉल्स का मत था कि असमानताएँ पूर्णतः समाप्त नहीं की जा सकतीं, किंतु वे तभी न्यायसंगत हैं जब उनसे समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्ग को अधिकतम लाभ प्राप्त हो। इसे अंतर सिद्धांत कहा जाता है। इसके साथ ही उन्होंने अवसरों की निष्पक्ष समानता पर भी बल दिया। उनका मानना था कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा, रोजगार तथा सामाजिक उन्नति के समान अवसर प्राप्त होने चाहिए। जन्म, जाति, परिवार, धन या सामाजिक प्रतिष्ठा के आधार पर किसी को विशेष लाभ नहीं मिलना चाहिए।
रॉल्स ने कल्याणकारी लोकतांत्रिक राज्य का समर्थन किया। उनके अनुसार राज्य का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं है, बल्कि ऐसी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियाँ निर्मित करना भी है जिनसे प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमताओं का विकास कर सके। उन्होंने प्रगतिशील कर व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा अवसरों की समानता को न्यायपूर्ण समाज की आवश्यक शर्तें माना। उनके विचार में व्यक्तिगत संपत्ति का अधिकार महत्वपूर्ण है, किंतु वह सामाजिक न्याय से ऊपर नहीं हो सकता।
रॉल्स का राजनीतिक दर्शन संवैधानिक लोकतंत्र, मानवाधिकार तथा सार्वजनिक विवेक पर आधारित है। उनका मत था कि विभिन्न धार्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक मान्यताओं वाले समाजों में भी लोकतांत्रिक सहमति संभव है यदि सार्वजनिक निर्णय ऐसे सिद्धांतों पर आधारित हों जिन्हें सभी नागरिक तर्कसंगत रूप से स्वीकार कर सकें। इस प्रकार उन्होंने बहुलतावादी समाजों के लिए न्याय और लोकतंत्र का व्यावहारिक आधार प्रस्तुत किया।
रॉबर्ट नोज़िक समकालीन उदारवाद की उदार-स्वातंत्र्यवादी धारा के प्रमुख प्रतिनिधि हैं। उन्होंने रॉल्स के वितरणात्मक न्याय सिद्धांत की आलोचना करते हुए व्यक्ति की स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकार को सर्वोच्च महत्व दिया। उनका मत था कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन, श्रम और प्रतिभा का स्वामी है। इसलिए उसे अपने श्रम से अर्जित संपत्ति पर पूर्ण अधिकार होना चाहिए और राज्य को उसके संसाधनों का पुनर्वितरण करने का नैतिक अधिकार नहीं है।
नोज़िक ने न्यूनतम राज्य की अवधारणा प्रस्तुत की। उनके अनुसार राज्य की भूमिका अत्यंत सीमित होनी चाहिए। उसका मुख्य कार्य नागरिकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अनुबंधों का पालन सुनिश्चित करना तथा बाहरी आक्रमणों से रक्षा करना है। इसके अतिरिक्त राज्य को व्यक्तियों के आर्थिक और सामाजिक जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह तर्क दिया कि यदि राज्य लोगों से कर लेकर उनकी आय का पुनर्वितरण करता है, तो यह व्यक्ति के श्रम और स्वतंत्रता में अनुचित हस्तक्षेप है।
नोज़िक का न्याय सिद्धांत अधिकार सिद्धांत के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने न्याय को वितरण के परिणामों से नहीं, बल्कि संपत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया से जोड़ा। उनके अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने संपत्ति वैध और न्यायपूर्ण तरीके से अर्जित की है तथा उसका हस्तांतरण स्वैच्छिक रूप से हुआ है, तो उस संपत्ति का वितरण न्यायसंगत है, चाहे समाज में आर्थिक असमानता कितनी भी क्यों न हो। उन्होंने तीन सिद्धांत प्रस्तुत किए—न्यायपूर्ण अधिग्रहण, न्यायपूर्ण हस्तांतरण तथा अन्याय के सुधार का सिद्धांत। यदि ये तीनों शर्तें पूरी होती हैं, तो राज्य को संपत्ति के वितरण में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
नोज़िक ने समानता पर आधारित वितरणात्मक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि यदि राज्य सभी नागरिकों को समान आर्थिक परिणाम देने का प्रयास करेगा, तो उसे लोगों की स्वतंत्रता पर नियंत्रण स्थापित करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति अपनी प्रतिभा, परिश्रम या लोकप्रियता के कारण अधिक आय अर्जित करता है, तो उससे अतिरिक्त कर लेकर दूसरों में बाँटना उसकी स्वतंत्रता का उल्लंघन होगा। उनके अनुसार स्वतंत्रता और स्वैच्छिक विनिमय का सम्मान करने वाला समाज स्वाभाविक रूप से कुछ आर्थिक असमानताओं को जन्म देगा, और इन्हें अन्याय नहीं माना जाना चाहिए।
नोज़िक का विचार था कि व्यक्ति स्वयं अपने जीवन का स्वामी है और उसे अपनी इच्छानुसार जीवन जीने का अधिकार है। राज्य को यह निर्धारित करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि व्यक्ति अपनी आय, संपत्ति या श्रम का उपयोग किस प्रकार करे। उन्होंने इस सिद्धांत को आत्म-स्वामित्व की अवधारणा के माध्यम से स्पष्ट किया। उनके अनुसार किसी व्यक्ति के श्रम के फल पर जबरन कर लगाना उसके श्रम के एक भाग को बलपूर्वक प्राप्त करने के समान है।
जॉन रॉल्स और रॉबर्ट नोज़िक दोनों उदारवादी परंपरा से संबंधित हैं, किंतु उनके दृष्टिकोण में मूलभूत अंतर हैं। रॉल्स स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के संतुलन की बात करते हैं, जबकि नोज़िक स्वतंत्रता को सर्वोच्च मूल्य मानते हैं। रॉल्स राज्य को सामाजिक न्याय की स्थापना का आवश्यक साधन मानते हैं, जबकि नोज़िक राज्य की भूमिका को न्यूनतम रखना चाहते हैं। रॉल्स के अनुसार आर्थिक असमानताएँ तभी उचित हैं जब उनका लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग को मिले, जबकि नोज़िक के अनुसार यदि संपत्ति वैध तरीके से अर्जित की गई है तो उसके परिणामस्वरूप उत्पन्न असमानताएँ भी न्यायसंगत हैं।
दोनों विचारकों में व्यक्ति की गरिमा, संवैधानिक शासन और नागरिक स्वतंत्रताओं के प्रति समान सम्मान दिखाई देता है। दोनों ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विधि के शासन, निजी अधिकारों तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं का समर्थन करते हैं। अंतर केवल इस बात में है कि रॉल्स सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने के लिए राज्य की सक्रिय भूमिका को आवश्यक मानते हैं, जबकि नोज़िक इसे व्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संभावित खतरा मानते हैं।
समकालीन राजनीतिक विज्ञान में रॉल्स और नोज़िक के विचारों का व्यापक प्रभाव दिखाई देता है। रॉल्स के सिद्धांतों ने सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, कल्याणकारी राज्य, सकारात्मक भेदभाव, सार्वजनिक नीति तथा संवैधानिक लोकतंत्र के अध्ययन को नई दिशा प्रदान की। उनकी अवधारणाओं का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक सुरक्षा तथा अवसरों की समानता से संबंधित नीतियों के औचित्य को स्पष्ट करने में किया जाता है। दूसरी ओर नोज़िक के विचारों ने मुक्त बाज़ार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, निजी संपत्ति, सीमित सरकार तथा आर्थिक उदारीकरण के पक्ष में महत्वपूर्ण दार्शनिक आधार प्रस्तुत किया। आधुनिक उदार-स्वातंत्र्यवादी चिंतन पर उनका गहरा प्रभाव है।
इन दोनों विचारकों की आलोचनाएँ भी हुई हैं। रॉल्स की आलोचना करने वाले कुछ विद्वानों का मत है कि उनका सिद्धांत अत्यधिक आदर्शवादी है और वास्तविक समाजों की आर्थिक तथा राजनीतिक जटिलताओं को पर्याप्त रूप से नहीं समझता। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि अंतर सिद्धांत अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप को वैध ठहरा सकता है। दूसरी ओर नोज़िक की आलोचना इस आधार पर की जाती है कि उनका न्यूनतम राज्य सामाजिक असमानताओं, गरीबी, बेरोज़गारी और ऐतिहासिक अन्यायों के समाधान के लिए पर्याप्त नहीं है। यदि राज्य केवल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था तक सीमित रहे, तो समाज के कमजोर वर्ग शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसरों की समानता से वंचित रह सकते हैं।
समकालीन विश्व में वैश्वीकरण, तकनीकी परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बढ़ती आर्थिक विषमताओं तथा सामाजिक न्याय की नई चुनौतियों के संदर्भ में रॉल्स और नोज़िक दोनों के विचार अत्यंत प्रासंगिक बने हुए हैं। लोकतांत्रिक सरकारें आज भी इस प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास कर रही हैं कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के बीच उचित संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। इसी कारण सार्वजनिक नीति, कर व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, बाज़ार नियमन तथा नागरिक अधिकारों से संबंधित बहसों में इन दोनों विचारकों का उल्लेख निरंतर होता है।
समग्र रूप से कहा जा सकता है कि समकालीन उदारवाद जॉन रॉल्स और रॉबर्ट नोज़िक के विचारों के माध्यम से स्वतंत्रता, न्याय और राज्य की भूमिका पर दो महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। रॉल्स ने न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के लिए समान मूलभूत स्वतंत्रताओं, अवसरों की निष्पक्ष समानता और सबसे कमजोर वर्ग के कल्याण पर आधारित उदारवादी सिद्धांत विकसित किया। रॉबर्ट नोज़िक ने व्यक्ति की स्वतंत्रता, आत्म-स्वामित्व, निजी संपत्ति और न्यूनतम राज्य की अवधारणा के माध्यम से उदारवाद की स्वतंत्रतावादी व्याख्या प्रस्तुत की। दोनों विचारकों के मध्य वैचारिक मतभेद होने के बावजूद उनका साझा योगदान यह है कि उन्होंने आधुनिक राजनीतिक दर्शन में स्वतंत्रता, अधिकार, न्याय, लोकतंत्र और राज्य की भूमिका पर गहन बौद्धिक विमर्श को नई ऊँचाई प्रदान की। आज भी उनके विचार राजनीतिक सिद्धांत, सार्वजनिक नीति, संवैधानिक शासन और लोकतांत्रिक समाज के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक माने जाते हैं।
