Unit – 3
Foreign Policy : Determinants, Formulation and Execution, Foreign Polices of
India, U.S.A., U.K., France, Russia and People’s Republic of China.
विदेश नीति : निर्धारक तत्त्व, निर्माण एवं क्रियान्वयन तथा भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका (अमेरिका), यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन), फ्रांस, रूस एवं जनवादी गणराज्य चीन की विदेश नीतियाँ।
विदेश नीति (Foreign Policy) किसी भी संप्रभु राष्ट्र की वह सुविचारित नीति है जिसके माध्यम से वह अन्य देशों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ अपने राजनीतिक, आर्थिक, सामरिक, सांस्कृतिक एवं कूटनीतिक संबंधों का संचालन करता है। इसका प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना, आर्थिक विकास को गति देना, अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सहयोग को बढ़ावा देना तथा विश्व राजनीति में राष्ट्र की प्रतिष्ठा और प्रभाव को बढ़ाना होता है। आधुनिक वैश्वीकरण, तकनीकी विकास, आतंकवाद, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन तथा बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के युग में विदेश नीति किसी भी राष्ट्र के विकास और अस्तित्व का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।
विदेश नीति अनेक निर्धारक तत्त्वों से प्रभावित होती है। इनमें भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन, जनसंख्या, आर्थिक विकास, सैन्य शक्ति, वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमता, ऐतिहासिक अनुभव, राजनीतिक व्यवस्था, वैचारिक दृष्टिकोण, नेतृत्व की भूमिका, राष्ट्रीय जनमत, अंतरराष्ट्रीय शक्ति-संतुलन तथा वैश्विक परिस्थितियाँ प्रमुख हैं। उदाहरण के लिए, समुद्री सीमा वाले देशों की विदेश नीति प्रायः समुद्री सुरक्षा एवं व्यापार पर केंद्रित होती है, जबकि संसाधन-संपन्न देशों की नीति ऊर्जा एवं प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा पर अधिक बल देती है। इसी प्रकार लोकतांत्रिक देशों में जनमत तथा संसद का प्रभाव अधिक होता है, जबकि अधिनायकवादी व्यवस्थाओं में शीर्ष नेतृत्व विदेश नीति का प्रमुख निर्धारक होता है।
विदेश नीति के निर्माण (Formulation) की प्रक्रिया में राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद, विदेश मंत्रालय, संसद, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, रक्षा एवं गुप्तचर एजेंसियाँ, आर्थिक एवं सामरिक विशेषज्ञ, राजनयिक तथा कभी-कभी जनमत एवं मीडिया भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विदेश नीति बनाते समय राष्ट्रीय हित, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ, आर्थिक आवश्यकताएँ, सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ तथा दीर्घकालीन रणनीतिक उद्देश्यों का समुचित विश्लेषण किया जाता है। विदेश नीति का क्रियान्वयन (Execution) मुख्यतः विदेश मंत्रालय, राजदूतों, दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों, विशेष दूतों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, संधियों, कूटनीतिक वार्ताओं तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से किया जाता है।
भारत की विदेश नीति के प्रमुख आधार पंचशील, गुटनिरपेक्षता, रणनीतिक स्वायत्तता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन तथा “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना हैं। वर्तमान समय में भारत “पड़ोसी पहले” (Neighbourhood First), “एक्ट ईस्ट नीति” (Act East Policy), “सागर नीति” (Security and Growth for All in the Region), इंडो-पैसिफिक सहयोग, वैश्विक दक्षिण (Global South) के नेतृत्व तथा बहुपक्षीय कूटनीति पर विशेष बल देता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) की विदेश नीति का प्रमुख उद्देश्य वैश्विक नेतृत्व बनाए रखना, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना, लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन, आतंकवाद का मुकाबला, मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना तथा अपने आर्थिक एवं सामरिक हितों की रक्षा करना है। यूनाइटेड किंगडम (UK) की विदेश नीति राष्ट्रमंडल (Commonwealth), नाटो (NATO), यूरो-अटलांटिक सुरक्षा, वैश्विक व्यापार तथा लोकतांत्रिक सहयोग पर आधारित है। फ्रांस की विदेश नीति रणनीतिक स्वायत्तता, यूरोपीय संघ की एकता, परमाणु प्रतिरोधक क्षमता, अफ्रीका में प्रभाव तथा बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के समर्थन पर केंद्रित है। रूस की विदेश नीति राष्ट्रीय सुरक्षा, सामरिक शक्ति, ऊर्जा संसाधनों के प्रभावी उपयोग, निकटवर्ती क्षेत्रों में प्रभाव बनाए रखने तथा बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को प्रोत्साहित करने पर आधारित है। जनवादी गणराज्य चीन की विदेश नीति आर्थिक विस्तार, वैश्विक व्यापार, बेल्ट एंड रोड पहल (BRI), सैन्य आधुनिकीकरण, क्षेत्रीय प्रभाव तथा विश्व शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने पर केंद्रित है।
इन सभी देशों की विदेश नीतियों का अध्ययन स्पष्ट करता है कि प्रत्येक राष्ट्र अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, भौगोलिक स्थिति, आर्थिक क्षमता, सैन्य शक्ति, राजनीतिक व्यवस्था तथा राष्ट्रीय हितों के अनुरूप विदेश नीति का निर्माण और क्रियान्वयन करता है। यद्यपि उनकी प्राथमिकताएँ भिन्न हो सकती हैं, फिर भी सभी का मूल उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि तथा अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को बढ़ाना होता है। इसलिए विदेश नीति केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति, कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व का सबसे प्रभावशाली उपकरण है।
