Unit – 5
Administration for Welfare : Administration for the Welfare of Weaker Sections
With Particular reference to Scheduled Castes, Scheduled Tribes and Programmes for
The Welfare of Women.
Issue Areas in India Administration : Relationship between Political and Permanent
Executive, Generalist and Specialist, Administrative Reforms in India.
कल्याणकारी प्रशासन: कमजोर वर्गों के कल्याण हेतु प्रशासन, विशेष संदर्भ में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा महिलाओं के कल्याण कार्यक्रम।
भारतीय प्रशासन के मुद्दागत क्षेत्र: राजनीतिक एवं स्थायी कार्यपालिका के बीच संबंध, सामान्यज्ञ एवं विशेषज्ञ, तथा भारत में प्रशासनिक सुधार।
कल्याणकारी प्रशासन आधुनिक राज्य की वह विकसित अवधारणा है जिसमें सरकार का उद्देश्य केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखना या राजस्व संग्रह करना नहीं होता, बल्कि समाज के कमजोर, वंचित और पिछड़े वर्गों के जीवन स्तर में सुधार करना भी होता है। यह अवधारणा इस विचार पर आधारित है कि राज्य का दायित्व सभी नागरिकों के लिए समान अवसर, सामाजिक न्याय और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत जैसे विकासशील देश में, जहाँ सामाजिक असमानताएँ, जातिगत संरचनाएँ, लैंगिक भेदभाव और क्षेत्रीय विषमताएँ ऐतिहासिक रूप से विद्यमान रही हैं, वहाँ कल्याणकारी प्रशासन की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। कमजोर वर्गों के कल्याण हेतु प्रशासन विशेष रूप से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा महिलाओं के विकास के लिए अनेक योजनाएँ और कार्यक्रम संचालित करता है, जिनका उद्देश्य सामाजिक समावेशन और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना, शिक्षा के अवसरों का विस्तार करना, रोजगार में आरक्षण सुनिश्चित करना तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत छात्रवृत्ति योजनाएँ, आवास योजनाएँ, कौशल विकास कार्यक्रम और विशेष रोजगार योजनाएँ संचालित की जाती हैं। अनुसूचित जनजातियों के लिए प्रशासन विशेष रूप से उनके सांस्कृतिक संरक्षण, भूमि अधिकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और शिक्षा के प्रसार पर ध्यान देता है। जनजातीय क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के विकास, वन अधिकारों की सुरक्षा और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाते हैं। महिलाओं के कल्याण के संदर्भ में प्रशासन का उद्देश्य लैंगिक समानता सुनिश्चित करना, महिलाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार करना, उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। इसके लिए विभिन्न योजनाएँ जैसे महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, स्वयं सहायता समूह, मातृत्व लाभ योजनाएँ, बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम और महिला सुरक्षा से संबंधित कानून एवं नीतियाँ लागू की जाती हैं।
कल्याणकारी प्रशासन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि योजनाएँ कितनी प्रभावी ढंग से जमीनी स्तर तक पहुँचती हैं और उनका वास्तविक लाभ लक्षित वर्गों तक कितना पहुँच पाता है। इस प्रक्रिया में प्रशासनिक दक्षता, राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामाजिक जागरूकता का समन्वय अत्यंत आवश्यक होता है। अनेक बार योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं, जैसे भ्रष्टाचार, संसाधनों की कमी, जागरूकता का अभाव और प्रशासनिक विलंब, जो कल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को प्रभावित करते हैं।
भारतीय प्रशासन में मुद्दागत क्षेत्रों के अंतर्गत राजनीतिक और स्थायी कार्यपालिका के बीच संबंध एक महत्वपूर्ण विषय है। राजनीतिक कार्यपालिका, जिसमें मंत्री और निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल होते हैं, नीति निर्माण का कार्य करती है, जबकि स्थायी कार्यपालिका अर्थात नौकरशाही उन नीतियों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभाती है। दोनों के बीच संबंध सहयोग और संतुलन पर आधारित होना चाहिए, लेकिन व्यवहार में कई बार तनाव और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। राजनीतिक नेतृत्व त्वरित परिणाम चाहता है, जबकि नौकरशाही प्रक्रियात्मक नियमों और दीर्घकालिक स्थिरता पर जोर देती है। इस अंतर के कारण निर्णय प्रक्रिया में विलंब या असहमति उत्पन्न हो सकती है। फिर भी एक प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था के लिए दोनों के बीच समन्वय आवश्यक है, क्योंकि राजनीतिक नेतृत्व दिशा प्रदान करता है और नौकरशाही उसे व्यावहारिक रूप में लागू करती है।
भारतीय प्रशासन में एक अन्य महत्वपूर्ण बहस सामान्यज्ञ और विशेषज्ञ के बीच संतुलन को लेकर है। सामान्यज्ञ अधिकारी वे होते हैं जिनका प्रशिक्षण व्यापक प्रशासनिक क्षेत्रों में होता है और जो विभिन्न विभागों में कार्य कर सकते हैं, जबकि विशेषज्ञ अधिकारी किसी विशेष क्षेत्र जैसे स्वास्थ्य, तकनीकी, वित्त या इंजीनियरिंग में विशेष ज्ञान रखते हैं। सामान्यज्ञ प्रणाली का लाभ यह है कि यह प्रशासनिक लचीलापन और व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करती है, जबकि विशेषज्ञ प्रणाली तकनीकी दक्षता और गहन ज्ञान सुनिश्चित करती है। आधुनिक प्रशासन में दोनों की आवश्यकता महसूस की जाती है, क्योंकि जटिल नीतिगत समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता दोनों आवश्यक हैं। इसलिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाकर दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
भारत में प्रशासनिक सुधार एक सतत प्रक्रिया रही है, जिसका उद्देश्य प्रशासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक केंद्रित बनाना है। स्वतंत्रता के बाद से ही अनेक प्रशासनिक सुधार आयोग गठित किए गए, जिन्होंने नौकरशाही की कार्यप्रणाली में सुधार, प्रक्रियाओं के सरलीकरण, भ्रष्टाचार नियंत्रण और दक्षता बढ़ाने के लिए सुझाव दिए। हाल के वर्षों में ई-गवर्नेंस, डिजिटल इंडिया, सेवा वितरण सुधार, जन शिकायत निवारण प्रणाली और सूचना के अधिकार जैसे उपायों ने प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया है। प्रशासनिक सुधारों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सेवाएँ समय पर, प्रभावी और बिना किसी भेदभाव के नागरिकों तक पहुँचें।
कल्याणकारी प्रशासन और प्रशासनिक सुधारों के बीच गहरा संबंध है, क्योंकि बिना प्रभावी प्रशासनिक ढांचे के कल्याणकारी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन संभव नहीं है। इसी प्रकार राजनीतिक और स्थायी कार्यपालिका के बीच संतुलन तथा सामान्यज्ञ और विशेषज्ञ के बीच समन्वय प्रशासनिक दक्षता को निर्धारित करते हैं। भारतीय प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती इसकी विशालता, विविधता और सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ हैं, जिनके कारण नीतियों का एक समान क्रियान्वयन कठिन हो जाता है। इसके अतिरिक्त राजनीतिक हस्तक्षेप, नौकरशाही की जड़ता और संसाधनों की सीमाएँ भी प्रशासनिक कार्यप्रणाली को प्रभावित करती हैं।
फिर भी भारतीय कल्याणकारी प्रशासन ने सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रमों ने सामाजिक संरचना में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया है। प्रशासनिक सुधारों और तकनीकी प्रगति के माध्यम से शासन प्रणाली अधिक पारदर्शी और जनोन्मुखी बन रही है। भविष्य में यदि राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय को और अधिक मजबूत किया जाए तथा कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, तो भारत एक अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण समाज की दिशा में अग्रसर हो सकता है।
