Unit – 2
War, Laws of Warfare – Land, Aerial and Naval
(युद्ध तथा युद्ध के नियम – स्थल, वायु एवं नौसैनिक युद्ध विधि।
युद्ध तथा युद्ध के नियम अंतरराष्ट्रीय विधि का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र है, जिसका उद्देश्य सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में भी मानवता के मूलभूत सिद्धांतों को बनाए रखना और युद्ध की क्रूरता को सीमित करना है। यद्यपि युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून में वांछनीय स्थिति नहीं माना जाता, फिर भी इतिहास में राज्यों के बीच संघर्ष की संभावना को देखते हुए युद्ध के संचालन के लिए कुछ नियम और सिद्धांत विकसित किए गए हैं, जिन्हें युद्ध विधि या मानवीय अंतरराष्ट्रीय विधि के अंतर्गत रखा जाता है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध के दौरान अनावश्यक हिंसा न हो, नागरिकों की सुरक्षा बनी रहे और युद्धरत पक्षों के बीच न्यूनतम मानवीय मानकों का पालन किया जाए।
युद्ध के नियमों का विकास मुख्यतः जिनेवा संधियों और हेग संधियों के माध्यम से हुआ है, जिनमें युद्ध के दौरान सैनिकों, नागरिकों, युद्धबंदियों और चिकित्सा सेवाओं के संरक्षण के लिए विस्तृत प्रावधान किए गए हैं। ये नियम यह स्पष्ट करते हैं कि युद्ध केवल सैन्य लक्ष्यों तक सीमित रहना चाहिए और नागरिक आबादी, सांस्कृतिक धरोहरों तथा आवश्यक बुनियादी ढांचे को अनावश्यक क्षति नहीं पहुँचाई जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त युद्ध में प्रयुक्त हथियारों और तरीकों पर भी सीमाएँ निर्धारित की गई हैं ताकि अत्यधिक क्रूरता और विनाश को रोका जा सके।
स्थल युद्ध विधि युद्ध के नियमों का सबसे पुराना और व्यापक क्षेत्र है, जिसमें भूमि पर होने वाले सशस्त्र संघर्षों को नियंत्रित किया जाता है। इसके अंतर्गत यह निर्धारित किया गया है कि युद्धरत सेनाओं को नागरिक क्षेत्रों से दूर रहकर सैन्य लक्ष्यों पर ही आक्रमण करना चाहिए। युद्धबंदियों के साथ मानवीय व्यवहार करना अनिवार्य है और उन्हें यातना या अपमानजनक व्यवहार से बचाया जाना चाहिए। घायल सैनिकों और चिकित्सा कर्मियों को विशेष संरक्षण प्रदान किया जाता है। स्थल युद्ध विधि में यह भी प्रावधान है कि युद्ध के दौरान अनावश्यक विनाश या लूटपाट को रोका जाए और कब्जे वाले क्षेत्रों में नागरिक प्रशासन और मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए।
वायु युद्ध विधि आधुनिक युद्ध प्रणाली के विकास के साथ विकसित हुई है, क्योंकि हवाई शक्ति ने युद्ध की प्रकृति को अत्यंत व्यापक और विनाशकारी बना दिया है। वायु युद्ध में बमबारी, मिसाइल हमले और हवाई अभियानों के दौरान यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि लक्ष्य केवल सैन्य ठिकाने हों और नागरिक क्षेत्रों को न्यूनतम नुकसान पहुँचे। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अंधाधुंध बमबारी और गैर-सैन्य क्षेत्रों पर अनियंत्रित हमले निषिद्ध हैं। वायु युद्ध में आनुपातिकता (proportionality) और भेदभाव (distinction) के सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिनके अनुसार सैन्य और नागरिक लक्ष्यों के बीच स्पष्ट अंतर करना आवश्यक होता है। इसके अलावा, पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान पहुँचाने वाले हथियारों के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
नौसैनिक युद्ध विधि समुद्री क्षेत्रों में होने वाले सशस्त्र संघर्षों को नियंत्रित करती है। समुद्री युद्ध में व्यापारिक जहाजों, तटस्थ देशों के जहाजों और मानवीय सहायता से जुड़े जहाजों की सुरक्षा के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। युद्धरत देशों को यह अधिकार होता है कि वे शत्रु राष्ट्र के सैन्य जहाजों को रोक सकें या कब्जे में ले सकें, लेकिन तटस्थ देशों के जहाजों के अधिकारों का सम्मान करना आवश्यक होता है। समुद्री युद्ध में समुद्री डकैती, अवैध कब्जा और अत्यधिक बल प्रयोग को नियंत्रित करने के लिए भी नियम बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त समुद्र में घायल सैनिकों और जहाज दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए बचाव और मानवीय सहायता प्रदान करना अनिवार्य माना गया है।
युद्ध विधि के सभी प्रकारों में एक सामान्य सिद्धांत मानवता का संरक्षण है, जिसे युद्ध के दौरान भी सर्वोच्च माना जाता है। यह सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि युद्ध में भी नैतिक और कानूनी सीमाएँ होती हैं, जिन्हें पार नहीं किया जा सकता। आधुनिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में युद्ध अपराधों की अवधारणा भी विकसित हुई है, जिसके अंतर्गत युद्ध के नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में दंडित किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि युद्ध अब पूरी तरह से एक अराजक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक नियंत्रित कानूनी ढांचे के अंतर्गत संचालित गतिविधि है।
आधुनिक समय में युद्ध विधि की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है, क्योंकि तकनीकी विकास, परमाणु हथियारों, ड्रोन युद्ध और साइबर युद्ध ने संघर्ष की प्रकृति को और अधिक जटिल बना दिया है। इन परिस्थितियों में युद्ध के नियमों को और अधिक मजबूत और अद्यतन करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि वैश्विक स्तर पर शांति और मानवता की रक्षा की जा सके। अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह प्रयास कर रहा है कि युद्ध की परिस्थितियों में भी मानवाधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित हो और युद्ध केवल अंतिम विकल्प के रूप में ही उपयोग किया जाए।
इस प्रकार युद्ध तथा युद्ध के नियम यह दर्शाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय विधि केवल शांति के समय का नियम नहीं है, बल्कि यह संघर्ष की स्थिति में भी मानवता, न्याय और नैतिकता को बनाए रखने का प्रयास करती है। स्थल, वायु और नौसैनिक युद्ध विधियाँ इस व्यापक ढांचे के विभिन्न पहलू हैं, जो मिलकर एक ऐसा कानूनी और नैतिक ढांचा प्रदान करते हैं जिसके माध्यम से युद्ध की विनाशकारी प्रवृत्ति को नियंत्रित किया जा सके और वैश्विक शांति की दिशा में प्रयास किया जा सके।
