Unit – 3
Basic Principles of India’s Foreign Policy.
भारत की विदेश नीति के मूलभूत सिद्धांत।
भारत की विदेश नीति के मूलभूत सिद्धांत स्वतंत्र भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा, विश्व शांति तथा वैश्विक सहयोग की आधारशिला हैं। किसी भी राष्ट्र की विदेश नीति उसके राष्ट्रीय हितों, ऐतिहासिक अनुभवों, भौगोलिक स्थिति, आर्थिक आवश्यकताओं, सांस्कृतिक परंपराओं तथा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर निर्मित होती है। भारत की विदेश नीति का विकास भी इन्हीं विविध तत्वों के समन्वय से हुआ है। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के समक्ष विभाजन की पीड़ा, आर्थिक पिछड़ापन, सीमाई चुनौतियाँ, औपनिवेशिक विरासत तथा शीत युद्ध जैसी जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ विद्यमान थीं। इन परिस्थितियों में भारत ने ऐसी विदेश नीति अपनाई जो एक ओर राष्ट्रीय हितों की रक्षा करे और दूसरी ओर विश्व शांति, न्याय, समानता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी प्रोत्साहित करे। इस प्रकार भारतीय विदेश नीति आदर्शवाद और यथार्थवाद का संतुलित समन्वय प्रस्तुत करती है।
भारतीय विदेश नीति का पहला और सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत राष्ट्रीय संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा है। प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र की भाँति भारत के लिए भी अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता, सीमाओं की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय एकता सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत को अनेक सुरक्षा चुनौतियों, सीमाई विवादों तथा बाहरी आक्रमणों का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों ने यह स्पष्ट किया कि विदेश नीति का मूल उद्देश्य देश की संप्रभुता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना होना चाहिए। इसी कारण भारत ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अपनी स्वतंत्र निर्णय क्षमता बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव से मुक्त रहकर नीति निर्माण करने पर विशेष बल दिया।
भारतीय विदेश नीति का दूसरा मूलभूत सिद्धांत स्वतंत्र विदेश नीति अथवा रणनीतिक स्वायत्तता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने यह निर्णय लिया कि वह किसी भी महाशक्ति के प्रभाव में आकर अपनी विदेश नीति निर्धारित नहीं करेगा। प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय प्रश्न पर भारत अपने राष्ट्रीय हितों, नैतिक मूल्यों तथा परिस्थितियों के अनुसार स्वतंत्र निर्णय लेगा। इस सिद्धांत का उद्देश्य भारत की नीति-निर्माण प्रक्रिया को बाहरी नियंत्रण से मुक्त रखना तथा राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा करना था। समय के साथ इस सिद्धांत ने रणनीतिक स्वायत्तता का स्वरूप ग्रहण किया, जिसके अंतर्गत भारत विभिन्न देशों के साथ सहयोग करता है, किंतु अपनी स्वतंत्र नीति बनाए रखता है।
भारतीय विदेश नीति का तीसरा महत्वपूर्ण सिद्धांत गुटनिरपेक्षता रहा है। शीत युद्ध के समय विश्व दो प्रमुख शक्ति गुटों में विभाजित था। ऐसी स्थिति में भारत ने किसी भी सैन्य गुट में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र और संतुलित नीति अपनाई। गुटनिरपेक्षता का अर्थ निष्क्रिय रहना नहीं था, बल्कि प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय विषय पर स्वतंत्र एवं वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण अपनाना था। भारत का विश्वास था कि किसी भी गुट का स्थायी सदस्य बनने से उसकी स्वतंत्र निर्णय क्षमता सीमित हो सकती है। इसलिए भारत ने सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप विदेश नीति का संचालन किया। इस सिद्धांत ने भारत को विश्व राजनीति में एक स्वतंत्र और सम्मानजनक स्थान प्रदान किया।
विश्व शांति तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व भारतीय विदेश नीति का एक अन्य मूलभूत सिद्धांत है। भारत का विश्वास रहा है कि युद्ध मानवता के लिए विनाशकारी है तथा स्थायी शांति केवल संवाद, सहयोग, पारस्परिक सम्मान और न्यायपूर्ण संबंधों से ही स्थापित की जा सकती है। भारत ने सदैव विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, वार्ता, मध्यस्थता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान का समर्थन किया है। भारत ने यह भी माना कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग के स्थान पर कूटनीति और संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी कारण भारत ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संकटों के समाधान में शांतिपूर्ण उपायों का समर्थन किया।
पंचशील का सिद्धांत भारतीय विदेश नीति का अत्यंत महत्वपूर्ण आधार है। पंचशील के अंतर्गत एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, परस्पर आक्रमण न करना, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, समानता और पारस्परिक लाभ तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व जैसे सिद्धांत सम्मिलित हैं। इन सिद्धांतों का उद्देश्य राष्ट्रों के बीच विश्वास, सहयोग तथा स्थिरता स्थापित करना था। पंचशील ने विशेष रूप से एशिया और अफ्रीका के नवस्वतंत्र देशों के बीच सहयोग की भावना को सुदृढ़ किया और भारत की विदेश नीति को नैतिक आधार प्रदान किया।
उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद तथा नस्लीय भेदभाव का विरोध भी भारतीय विदेश नीति का मूलभूत सिद्धांत रहा है। भारत स्वयं औपनिवेशिक शासन का शिकार रहा था, इसलिए उसने विश्व के उन सभी देशों के स्वतंत्रता संघर्षों का समर्थन किया जो विदेशी शासन के अधीन थे। भारत ने एशिया और अफ्रीका के स्वतंत्रता आंदोलनों को नैतिक, राजनीतिक तथा कूटनीतिक समर्थन प्रदान किया। साथ ही उसने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद तथा अन्य देशों में नस्लीय भेदभाव का निरंतर विरोध किया। भारत का विश्वास था कि सभी राष्ट्र और सभी मानव समुदाय समान सम्मान और स्वतंत्रता के अधिकारी हैं।
आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन भारतीय विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। भारत का मत रहा है कि प्रत्येक राष्ट्र को अपनी राजनीतिक व्यवस्था, शासन प्रणाली तथा विकास की दिशा स्वयं निर्धारित करने का अधिकार होना चाहिए। किसी भी देश पर बाहरी शक्ति द्वारा शासन थोपना अथवा उसकी स्वतंत्रता का दमन करना अंतरराष्ट्रीय न्याय के विरुद्ध है। इसी कारण भारत ने अनेक राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलनों का समर्थन किया तथा उपनिवेशवाद के शीघ्र अंत की वकालत की।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग भारतीय विदेश नीति का एक अन्य महत्वपूर्ण आधार है। भारत का विश्वास है कि आधुनिक विश्व की अनेक समस्याएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, महामारी, आतंकवाद, ऊर्जा संकट, खाद्य सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा तथा आर्थिक असमानता—किसी एक देश द्वारा अकेले हल नहीं की जा सकतीं। इन समस्याओं के समाधान के लिए सभी देशों के बीच सहयोग, संवाद तथा सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। इसी कारण भारत ने विभिन्न बहुपक्षीय संगठनों, क्षेत्रीय मंचों तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
संयुक्त राष्ट्र के प्रति आस्था भारतीय विदेश नीति का स्थायी सिद्धांत रही है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति स्थापना, मानवाधिकारों तथा बहुपक्षीय सहयोग का निरंतर समर्थन किया है। भारत का विश्वास है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा वैश्विक शासन संस्थाओं में अधिक लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण सुधारों की आवश्यकता पर भी बल दिया है।
समानता और पारस्परिक सम्मान का सिद्धांत भारतीय विदेश नीति की नैतिक आधारशिला है। भारत का मानना है कि बड़े और छोटे सभी राष्ट्र समान संप्रभुता तथा सम्मान के अधिकारी हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंध शक्ति के आधार पर नहीं, बल्कि समानता, न्याय तथा पारस्परिक हितों के आधार पर विकसित होने चाहिए। यही कारण है कि भारत ने विकासशील देशों के हितों की रक्षा तथा वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को सशक्त बनाने का निरंतर प्रयास किया है।
अहस्तक्षेप का सिद्धांत भी भारतीय विदेश नीति का महत्वपूर्ण भाग है। भारत सामान्यतः अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की नीति का पालन करता है तथा अपेक्षा करता है कि अन्य राष्ट्र भी भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करें। यह सिद्धांत संप्रभु समानता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित है। यद्यपि मानवीय संकटों और वैश्विक दायित्वों के संदर्भ में समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ जटिल हो सकती हैं, फिर भी भारत ने मूलतः संप्रभुता और संवाद आधारित समाधान को प्राथमिकता दी है।
राष्ट्रीय हित भारतीय विदेश नीति का व्यावहारिक आधार है। विदेश नीति के सभी निर्णय अंततः भारत की सुरक्षा, आर्थिक विकास, ऊर्जा आवश्यकताओं, व्यापारिक हितों, तकनीकी प्रगति तथा वैश्विक प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। आदर्शवाद और नैतिकता के साथ-साथ राष्ट्रीय हितों की रक्षा भारतीय विदेश नीति का केंद्रीय उद्देश्य है। यही कारण है कि भारत समयानुकूल परिस्थितियों के अनुसार अपनी कूटनीतिक रणनीतियों में आवश्यक परिवर्तन करता रहा है।
आर्थिक कूटनीति आधुनिक भारतीय विदेश नीति का अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत बन चुकी है। स्वतंत्रता के प्रारंभिक वर्षों में आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रमुख लक्ष्य था, जबकि उदारीकरण के बाद व्यापार, विदेशी निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ तथा नवाचार विदेश नीति के महत्वपूर्ण आयाम बन गए। भारत ने विभिन्न देशों के साथ आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देकर अपने विकास को गति देने का प्रयास किया है। आज विदेश नीति का एक प्रमुख उद्देश्य आर्थिक समृद्धि तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत बनाना भी है।
विकासशील देशों के साथ सहयोग भारतीय विदेश नीति की विशिष्ट पहचान है। भारत ने एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिका के देशों के साथ समानता, सम्मान तथा साझी विकास आवश्यकताओं के आधार पर संबंध स्थापित किए। तकनीकी सहयोग, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा क्षमता निर्माण के माध्यम से भारत ने अनेक विकासशील देशों की सहायता की है। दक्षिण-दक्षिण सहयोग की यह नीति भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका का महत्वपूर्ण पक्ष है।
मानवतावाद तथा वैश्विक कल्याण की भावना भी भारतीय विदेश नीति में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय संकटों, महामारी तथा अन्य वैश्विक चुनौतियों के समय भारत ने अनेक देशों को मानवीय सहायता, चिकित्सा सहयोग, खाद्य सामग्री, दवाइयाँ तथा राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। यह दृष्टिकोण भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के “वसुधैव कुटुम्बकम्” तथा “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे आदर्शों से प्रेरित माना जाता है।
भारतीय विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बहुपक्षवाद का समर्थन भी है। भारत का विश्वास है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय संस्थाओं के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इसलिए भारत ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सक्रिय भागीदारी निभाई है और वैश्विक शासन प्रणाली को अधिक प्रतिनिधिक तथा न्यायपूर्ण बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है।
पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास भी वर्तमान भारतीय विदेश नीति के प्रमुख सिद्धांतों में सम्मिलित हो चुके हैं। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, जल सुरक्षा तथा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग का समर्थन करता है। भारत का मत है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना समूची मानवता की साझा जिम्मेदारी है।
समकालीन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारतीय विदेश नीति निरंतर विकसित हो रही है। बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष सहयोग तथा वैश्विक आर्थिक परिवर्तनों ने विदेश नीति के स्वरूप को अधिक व्यापक बना दिया है। फिर भी इसके मूल सिद्धांत—राष्ट्रीय संप्रभुता, रणनीतिक स्वायत्तता, विश्व शांति, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, समानता, उपनिवेशवाद-विरोध, मानव गरिमा, बहुपक्षवाद तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा—आज भी भारतीय विदेश नीति की आधारशिला बने हुए हैं।
समग्र रूप से देखा जाए तो भारत की विदेश नीति के मूलभूत सिद्धांत भारतीय सभ्यता की नैतिक परंपराओं, स्वतंत्रता आंदोलन के अनुभवों, संवैधानिक मूल्यों तथा समकालीन अंतरराष्ट्रीय यथार्थ का संतुलित समन्वय प्रस्तुत करते हैं। इन सिद्धांतों का उद्देश्य केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय वातावरण का निर्माण करना भी है जिसमें शांति, न्याय, समानता, सहयोग तथा सतत विकास को बढ़ावा मिल सके। यही कारण है कि भारतीय विदेश नीति को मूल्य-आधारित, व्यावहारिक, संतुलित तथा दूरदर्शी विदेश नीति के रूप में व्यापक मान्यता प्राप्त है।
भारत की विदेश नीति के मूलभूत सिद्धांत
(Basic Principles of India’s Foreign Policy)
(A) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions – 15/20 अंक)
भारत की विदेश नीति के मूलभूत सिद्धांतों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
भारत की विदेश नीति के निर्माण के आधारों का विश्लेषण कीजिए।
भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के महत्व का विवेचन कीजिए।
रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) से क्या अभिप्राय है? भारतीय विदेश नीति में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
गुटनिरपेक्षता के सिद्धांत की व्याख्या करते हुए भारतीय विदेश नीति में उसके महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
पंचशील के सिद्धांतों का वर्णन करते हुए भारतीय विदेश नीति में उनके महत्व की समीक्षा कीजिए।
भारतीय विदेश नीति में विश्व शांति और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत का विश्लेषण कीजिए।
भारतीय विदेश नीति में उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद तथा नस्लीय भेदभाव के विरोध की नीति का मूल्यांकन कीजिए।
भारतीय विदेश नीति में संयुक्त राष्ट्र के प्रति आस्था और बहुपक्षवाद के महत्व की विवेचना कीजिए।
भारतीय विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और आदर्शवाद के बीच संतुलन का समालोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
भारतीय विदेश नीति में आर्थिक कूटनीति की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
विकासशील देशों के साथ भारत के सहयोग की नीति का मूल्यांकन कीजिए।
भारतीय विदेश नीति में मानवतावाद एवं "वसुधैव कुटुम्बकम्" की अवधारणा का विश्लेषण कीजिए।
समकालीन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारतीय विदेश नीति के बदलते स्वरूप का विवेचन कीजिए।
भारतीय विदेश नीति को मूल्य-आधारित एवं व्यावहारिक विदेश नीति क्यों कहा जाता है? स्पष्ट कीजिए।
(B) मध्यम / लघु उत्तरीय प्रश्न (5–10 अंक)
भारतीय विदेश नीति से क्या अभिप्राय है?
भारतीय विदेश नीति के निर्माण के प्रमुख आधार लिखिए।
राष्ट्रीय संप्रभुता का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
क्षेत्रीय अखंडता का महत्व बताइए।
रणनीतिक स्वायत्तता क्या है?
गुटनिरपेक्षता का अर्थ एवं उद्देश्य लिखिए।
पंचशील के पाँच सिद्धांत लिखिए।
विश्व शांति के प्रति भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट कीजिए।
शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व से क्या अभिप्राय है?
उपनिवेशवाद-विरोधी नीति का महत्व बताइए।
आत्मनिर्णय के अधिकार से क्या अभिप्राय है?
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता क्यों है?
संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत की नीति स्पष्ट कीजिए।
समानता एवं पारस्परिक सम्मान के सिद्धांत का वर्णन कीजिए।
अहस्तक्षेप (Non-Intervention) का सिद्धांत क्या है?
राष्ट्रीय हित भारतीय विदेश नीति का आधार क्यों है?
आर्थिक कूटनीति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) का महत्व बताइए।
बहुपक्षवाद (Multilateralism) क्या है?
पर्यावरण संरक्षण भारतीय विदेश नीति का महत्वपूर्ण पक्ष क्यों बन गया है?
(C) अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2–3 अंक)
भारतीय विदेश नीति का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रीय संप्रभुता से क्या अभिप्राय है?
रणनीतिक स्वायत्तता क्या है?
गुटनिरपेक्षता किसे कहते हैं?
पंचशील के कोई दो सिद्धांत लिखिए।
शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व क्या है?
उपनिवेशवाद क्या है?
आत्मनिर्णय का अधिकार क्या है?
संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण क्या है?
अंतरराष्ट्रीय सहयोग का क्या महत्व है?
बहुपक्षवाद क्या है?
आर्थिक कूटनीति क्या है?
राष्ट्रीय हित का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
अहस्तक्षेप का सिद्धांत क्या है?
वैश्विक दक्षिण (Global South) से क्या अभिप्राय है?
सतत विकास (Sustainable Development) क्या है?
"वसुधैव कुटुम्बकम्" का अर्थ लिखिए।
विकासशील देशों के प्रति भारत की नीति क्या है?
पर्यावरण संरक्षण भारतीय विदेश नीति में क्यों महत्वपूर्ण है?
भारतीय विदेश नीति की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
(D) वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)
रिक्त स्थान भरिए
भारतीय विदेश नीति का प्रमुख उद्देश्य ________ की रक्षा करना है।
भारत ने ________ की नीति अपनाई।
पंचशील में ________ सह-अस्तित्व का सिद्धांत शामिल है।
भारत ________ राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का समर्थन करता है।
भारत ________ देशों के साथ सहयोग को महत्व देता है।
भारतीय विदेश नीति ________ स्वायत्तता पर आधारित है।
आर्थिक कूटनीति का उद्देश्य ________ को बढ़ावा देना है।
भारत ________ भेदभाव का विरोध करता है।
भारत ________ विकास का समर्थन करता है।
भारतीय विदेश नीति ________ और यथार्थवाद का समन्वय है।
सही/गलत बताइए
भारत किसी सैन्य गुट का स्थायी सदस्य है।
भारत पंचशील के सिद्धांतों का समर्थन करता है।
भारत संयुक्त राष्ट्र के प्रति आस्था रखता है।
भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विरोध करता है।
भारत राष्ट्रीय हितों को महत्व देता है।
भारत उपनिवेशवाद का समर्थक रहा है।
भारत बहुपक्षवाद का समर्थन करता है।
भारत आर्थिक कूटनीति को महत्व देता है।
भारत अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की नीति अपनाता है।
पर्यावरण संरक्षण वर्तमान भारतीय विदेश नीति का महत्वपूर्ण भाग है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
भारतीय विदेश नीति का सबसे प्रमुख उद्देश्य है—
(A) व्यापार विस्तार
(B) राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा
(C) सैन्य विस्तार
(D) उपनिवेश स्थापित करनाभारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण सिद्धांत है—
(A) सैन्यवाद
(B) साम्राज्यवाद
(C) गुटनिरपेक्षता
(D) विस्तारवादपंचशील में कितने सिद्धांत हैं?
(A) 3
(B) 4
(C) 5
(D) 6भारत किस संगठन के चार्टर का सम्मान करता है?
(A) NATO
(B) WTO
(C) संयुक्त राष्ट्र
(D) G-7रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ है—
(A) किसी महाशक्ति का अनुसरण करना
(B) स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना
(C) सैन्य गठबंधन में शामिल होना
(D) युद्ध करनाभारत किसका विरोध करता है?
(A) लोकतंत्र
(B) मानवाधिकार
(C) उपनिवेशवाद एवं नस्लीय भेदभाव
(D) अंतरराष्ट्रीय सहयोगभारत की विदेश नीति में आर्थिक कूटनीति का उद्देश्य है—
(A) युद्ध की तैयारी
(B) आर्थिक विकास एवं व्यापार को बढ़ावा देना
(C) उपनिवेश स्थापित करना
(D) सैन्य गठबंधन बनाना"वसुधैव कुटुम्बकम्" का संबंध है—
(A) सैन्यवाद
(B) मानवतावाद एवं वैश्विक कल्याण
(C) उपनिवेशवाद
(D) गुट राजनीतिभारत किस नीति का समर्थक है?
(A) एकध्रुवीय विश्व
(B) बहुपक्षवाद
(C) साम्राज्यवाद
(D) रंगभेदभारतीय विदेश नीति का मूल स्वरूप है—
(A) आक्रामक
(B) विस्तारवादी
(C) मूल्य-आधारित एवं व्यावहारिक
(D) साम्राज्यवादी
