Unit-04
Decolonization And The Role Of State In The Developing World.
विऔपनिवेशीकरण और विकासशील विश्व में राज्य की भूमिका
आधुनिक विश्व राजनीति के इतिहास में विऔपनिवेशीकरण एक ऐसी ऐतिहासिक प्रक्रिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, राज्य की प्रकृति तथा वैश्विक शक्ति-संतुलन को गहराई से प्रभावित किया। कई शताब्दियों तक एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विशाल भूभाग यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियों के नियंत्रण में रहे। इन क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों का व्यापक दोहन किया गया, स्थानीय उद्योगों और पारंपरिक अर्थव्यवस्थाओं को कमजोर किया गया तथा राजनीतिक निर्णयों पर विदेशी सत्ता का प्रभुत्व स्थापित रहा। उपनिवेशवाद का मूल उद्देश्य उपनिवेशों के संसाधनों, श्रमशक्ति और बाजार का उपयोग साम्राज्यवादी शक्तियों के आर्थिक एवं राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए करना था। इस कारण उपनिवेशित समाजों में आर्थिक विषमता, सामाजिक असंतुलन और राजनीतिक पराधीनता का विस्तार हुआ।
समय के साथ उपनिवेशित देशों में राष्ट्रीय चेतना का विकास हुआ। शिक्षा के प्रसार, संचार साधनों के विस्तार, आधुनिक राजनीतिक विचारों के प्रभाव तथा स्थानीय नेतृत्व के उदय ने स्वतंत्रता की आकांक्षा को मजबूत किया। अनेक देशों में राष्ट्रीय आंदोलनों ने जनता को संगठित किया और स्वतंत्रता के लिए व्यापक संघर्ष प्रारंभ हुआ। इन आंदोलनों का उद्देश्य केवल विदेशी शासन को समाप्त करना नहीं था, बल्कि ऐसी राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना करना भी था जिसमें जनता स्वयं अपने भविष्य का निर्धारण कर सके। इस प्रकार विऔपनिवेशीकरण केवल सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय आत्मनिर्णय, राजनीतिक स्वतंत्रता और सामाजिक पुनर्निर्माण का व्यापक आंदोलन बन गया।
द्वितीय विश्वयुद्ध ने विऔपनिवेशीकरण की प्रक्रिया को निर्णायक गति प्रदान की। युद्ध के परिणामस्वरूप यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियाँ आर्थिक और सैन्य दृष्टि से कमजोर हो गईं। दूसरी ओर उपनिवेशों में स्वतंत्रता आंदोलनों ने अधिक संगठित और प्रभावशाली रूप धारण कर लिया। युद्ध के बाद विश्व राजनीति में आत्मनिर्णय, मानवाधिकार और राष्ट्रीय संप्रभुता जैसे सिद्धांतों को अधिक महत्व मिला। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना ने भी उपनिवेशवाद के विरोध और स्वतंत्र राष्ट्रों की मान्यता को अंतरराष्ट्रीय वैधता प्रदान की। परिणामस्वरूप एशिया और अफ्रीका के अनेक देशों ने बीसवीं शताब्दी के मध्य में स्वतंत्रता प्राप्त की और विश्व मानचित्र पर नए संप्रभु राष्ट्रों का उदय हुआ।
विऔपनिवेशीकरण के बाद नवस्वतंत्र देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करना नहीं थी, बल्कि एक प्रभावी और उत्तरदायी राज्य का निर्माण करना भी था। औपनिवेशिक शासन ने अधिकांश देशों में ऐसी प्रशासनिक संरचनाएँ विकसित की थीं जिनका उद्देश्य जनता का विकास नहीं, बल्कि औपनिवेशिक हितों की रक्षा करना था। स्वतंत्रता के पश्चात इन देशों को लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण, संविधान का निर्माण, विधि के शासन की स्थापना, प्रशासनिक सुधार तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने जैसे जटिल कार्यों का सामना करना पड़ा। इस प्रकार विकासशील विश्व में राज्य की भूमिका पहले की अपेक्षा कहीं अधिक व्यापक और उत्तरदायित्वपूर्ण बन गई।
विकासशील देशों में राज्य को केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि उसे सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक विकास का प्रमुख साधन माना गया। इन देशों में व्यापक निर्धनता, अशिक्षा, बेरोजगारी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ तथा क्षेत्रीय असमानताएँ विद्यमान थीं। इसलिए राज्य से अपेक्षा की गई कि वह योजनाबद्ध विकास, औद्योगिकीकरण, कृषि सुधार, शिक्षा के विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं के विकास तथा सामाजिक न्याय की स्थापना के माध्यम से नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाए। इस दृष्टिकोण ने विकासशील देशों में राज्य की भूमिका को अत्यंत सक्रिय और हस्तक्षेपकारी बना दिया।
राष्ट्र-निर्माण विकासशील देशों के सामने एक और महत्वपूर्ण चुनौती थी। अनेक नवस्वतंत्र राज्यों की सीमाएँ औपनिवेशिक शक्तियों द्वारा निर्धारित की गई थीं, जिनके भीतर विभिन्न भाषाई, धार्मिक, सांस्कृतिक और जातीय समुदाय निवास करते थे। ऐसी परिस्थितियों में राष्ट्रीय एकता और साझा राजनीतिक पहचान का निर्माण आसान नहीं था। राज्य ने संविधान, नागरिकता, शिक्षा, राष्ट्रीय प्रतीकों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से एक समावेशी राष्ट्रीय पहचान विकसित करने का प्रयास किया। राष्ट्र-निर्माण की यह प्रक्रिया राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक विकास की आधारशिला बनी।
आर्थिक विकास के क्षेत्र में भी राज्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। अनेक विकासशील देशों ने योजनाबद्ध विकास मॉडल अपनाया, सार्वजनिक क्षेत्र की स्थापना की और आधारभूत संरचना के निर्माण को प्राथमिकता दी। सिंचाई, ऊर्जा, परिवहन, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश के माध्यम से विकास की गति को बढ़ाने का प्रयास किया गया। कृषि सुधार, भूमि सुधार तथा लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देने जैसी नीतियों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रयास भी किया गया। इन पहलों का उद्देश्य केवल आर्थिक उत्पादन बढ़ाना नहीं था, बल्कि सामाजिक असमानताओं को कम करना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना भी था।
लोकतांत्रिक शासन की स्थापना विकासशील विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रही। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, बहुदलीय व्यवस्था, स्वतंत्र न्यायपालिका, उत्तरदायी कार्यपालिका और सक्रिय नागरिक समाज जैसी संस्थाओं का विकास लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक माना गया। हालांकि अनेक देशों में राजनीतिक अस्थिरता, सैन्य हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अक्षमता जैसी समस्याएँ सामने आईं, फिर भी लोकतांत्रिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया निरंतर जारी रही। इससे यह स्पष्ट हुआ कि लोकतंत्र केवल संवैधानिक व्यवस्था का प्रश्न नहीं है, बल्कि सामाजिक सहभागिता, राजनीतिक संस्कृति और उत्तरदायी शासन का भी विषय है।
समकालीन वैश्विक परिदृश्य में विकासशील देशों की भूमिका निरंतर बदल रही है। वैश्वीकरण, डिजिटल प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, प्रवासन, मानवाधिकार और सतत विकास जैसे मुद्दों ने राज्य की जिम्मेदारियों का दायरा और अधिक विस्तृत कर दिया है। आज विकासशील देशों का राज्य केवल आंतरिक प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे वैश्विक संस्थाओं, क्षेत्रीय संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा भी करनी पड़ती है। इसलिए आधुनिक विकासशील राज्य का स्वरूप बहुआयामी, उत्तरदायी और विकासोन्मुख माना जाता है।
इस प्रकार विऔपनिवेशीकरण केवल विदेशी शासन की समाप्ति की प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह राजनीतिक स्वतंत्रता, राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और सामाजिक परिवर्तन का व्यापक ऐतिहासिक चरण था। इसके परिणामस्वरूप विकासशील देशों में राज्य की भूमिका अत्यंत विस्तृत हुई और उसे राष्ट्र-निर्माण, लोकतंत्रीकरण, आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय तथा नागरिक कल्याण के प्रमुख साधन के रूप में स्वीकार किया गया। आज भी विकासशील विश्व की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि राज्य लोकतांत्रिक मूल्यों, सुशासन, पारदर्शिता और समावेशी विकास के सिद्धांतों को किस सीमा तक प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
विऔपनिवेशीकरण की अवधारणा स्पष्ट करते हुए इसके ऐतिहासिक विकास का विस्तृत विवेचन कीजिए।
उपनिवेशवाद के पतन के प्रमुख कारणों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
द्वितीय विश्वयुद्ध ने विऔपनिवेशीकरण की प्रक्रिया को किस प्रकार प्रभावित किया? स्पष्ट कीजिए।
एशिया और अफ्रीका में विऔपनिवेशीकरण की प्रक्रिया का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
विऔपनिवेशीकरण में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
विकासशील विश्व की अवधारणा तथा उसकी प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।
विकासशील देशों में राज्य की भूमिका का समकालीन संदर्भ में आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
राष्ट्र-निर्माण और राज्य-निर्माण की अवधारणाओं का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
विकासशील देशों में आर्थिक नियोजन की आवश्यकता एवं महत्व का विश्लेषण कीजिए।
विकासशील देशों में लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया का मूल्यांकन कीजिए।
विकासशील राज्यों में प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
विकासशील देशों में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
विकासशील देशों में सामाजिक न्याय की स्थापना में राज्य की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
विकासशील विश्व में गरीबी और बेरोजगारी की समस्या के समाधान में राज्य की भूमिका का विवेचन कीजिए।
विकासशील देशों में कृषि सुधार एवं भूमि सुधार की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।
वैश्वीकरण के युग में विकासशील राज्यों की बदलती भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
नव-उपनिवेशवाद (Neo-colonialism) की अवधारणा तथा विकासशील देशों पर उसके प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
विकासशील देशों में सुशासन की आवश्यकता एवं महत्व का विवेचन कीजिए।
सतत विकास के संदर्भ में राज्य की भूमिका का समालोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
मानवाधिकारों की रक्षा में विकासशील राज्यों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
विकासशील देशों में लोकतंत्र के समक्ष प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
विकासशील विश्व में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक विकास के संबंध का अध्ययन कीजिए।
विकासशील देशों में सार्वजनिक नीति निर्माण में राज्य की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
विऔपनिवेशीकरण और राष्ट्रवाद के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण कीजिए।
समकालीन विश्व में विकासशील राज्यों की प्रासंगिकता का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
लघु उत्तरीय प्रश्न
विऔपनिवेशीकरण से क्या अभिप्राय है?
उपनिवेशवाद क्या है?
विकासशील विश्व से क्या अभिप्राय है?
राज्य-निर्माण क्या है?
राष्ट्र-निर्माण क्या है?
नव-उपनिवेशवाद क्या है?
आर्थिक नियोजन का महत्व लिखिए।
विकासशील देशों में शिक्षा की भूमिका लिखिए।
विकासशील देशों में स्वास्थ्य सेवाओं का महत्व स्पष्ट कीजिए।
सामाजिक न्याय से क्या अभिप्राय है?
सुशासन क्या है?
सतत विकास क्या है?
संयुक्त राष्ट्र ने विऔपनिवेशीकरण में क्या भूमिका निभाई?
लोकतंत्रीकरण से क्या अभिप्राय है?
प्रशासनिक सुधार क्या हैं?
विकासशील देशों में गरीबी की समस्या का उल्लेख कीजिए।
विकासशील देशों में बेरोजगारी के दो कारण लिखिए।
सार्वजनिक क्षेत्र का महत्व स्पष्ट कीजिए।
भूमि सुधार क्या है?
मानवाधिकारों की रक्षा में राज्य की भूमिका लिखिए।
वैश्वीकरण का विकासशील देशों पर क्या प्रभाव पड़ा?
विकासशील देशों में कृषि सुधार का महत्व स्पष्ट कीजिए।
लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व लिखिए।
विकासशील देशों में संविधान का महत्व स्पष्ट कीजिए।
विकासशील राज्यों की दो प्रमुख चुनौतियाँ लिखिए।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
विऔपनिवेशीकरण का अंग्रेज़ी शब्द क्या है?
उपनिवेशवाद का अंग्रेज़ी शब्द क्या है?
विकासशील विश्व का अंग्रेज़ी रूप क्या है?
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना कब हुई?
आत्मनिर्णय (Self-determination) से क्या अभिप्राय है?
नव-उपनिवेशवाद किससे संबंधित है?
लोकतंत्रीकरण किस प्रकार की प्रक्रिया है?
राज्य-निर्माण का उद्देश्य क्या है?
सुशासन का एक प्रमुख तत्व लिखिए।
सतत विकास का मुख्य उद्देश्य क्या है?
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
विऔपनिवेशीकरण का अर्थ है—
(A) उपनिवेशों की स्थापना
(B) उपनिवेशवाद का अंत
(C) साम्राज्यवाद का विस्तार
(D) सैन्य शासन की स्थापना
उत्तर – (B)
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद किस प्रक्रिया को सबसे अधिक गति मिली?
(A) सामंतवाद
(B) विऔपनिवेशीकरण
(C) दास प्रथा
(D) निरंकुश शासन
उत्तर – (B)
विऔपनिवेशीकरण का सबसे प्रमुख परिणाम क्या था?
(A) नए स्वतंत्र राष्ट्रों का उदय
(B) साम्राज्यवाद का विस्तार
(C) राजतंत्र की स्थापना
(D) दास प्रथा का पुनरुत्थान
उत्तर – (A)
विकासशील देशों में राज्य की प्रमुख भूमिका क्या मानी जाती है?
(A) केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना
(B) सामाजिक एवं आर्थिक विकास करना
(C) केवल कर संग्रह करना
(D) केवल रक्षा करना
उत्तर – (B)
विकासशील देशों में आर्थिक विकास के लिए कौन-सा उपाय महत्वपूर्ण माना जाता है?
(A) आर्थिक नियोजन
(B) उपनिवेशवाद
(C) दास प्रथा
(D) सामंतवाद
उत्तर – (A)
संयुक्त राष्ट्र ने किस सिद्धांत को बढ़ावा दिया?
(A) आत्मनिर्णय
(B) साम्राज्यवाद
(C) उपनिवेशवाद
(D) निरंकुशता
उत्तर – (A)
नव-उपनिवेशवाद का संबंध किससे है?
(A) आर्थिक एवं राजनीतिक निर्भरता
(B) लोकतंत्र
(C) राजतंत्र
(D) सामंतवाद
उत्तर – (A)
राष्ट्र-निर्माण का उद्देश्य क्या है?
(A) राष्ट्रीय एकता स्थापित करना
(B) युद्ध करना
(C) उपनिवेश बनाना
(D) सैन्य शासन स्थापित करना
उत्तर – (A)
विकासशील देशों में शिक्षा का विस्तार क्यों आवश्यक है?
(A) मानव संसाधन विकास के लिए
(B) कर बढ़ाने के लिए
(C) युद्ध के लिए
(D) व्यापार समाप्त करने के लिए
उत्तर – (A)
सुशासन का प्रमुख आधार क्या है?
(A) पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व
(B) निरंकुश शासन
(C) सैन्य नियंत्रण
(D) उपनिवेशवाद
उत्तर – (A)
सतत विकास का उद्देश्य क्या है?
(A) वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों का संतुलित विकास
(B) केवल औद्योगीकरण
(C) केवल व्यापार
(D) केवल कर संग्रह
उत्तर – (A)
विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन के लिए कौन-सा उपाय आवश्यक है?
(A) रोजगार सृजन
(B) युद्ध
(C) उपनिवेशवाद
(D) सैन्य शासन
उत्तर – (A)
लोकतंत्रीकरण का संबंध किससे है?
(A) लोकतांत्रिक संस्थाओं के विकास से
(B) राजतंत्र से
(C) साम्राज्यवाद से
(D) उपनिवेशवाद से
उत्तर – (A)
विकासशील राज्यों में सार्वजनिक नीति का उद्देश्य क्या है?
(A) जनकल्याण
(B) निजी लाभ
(C) युद्ध
(D) साम्राज्य विस्तार
उत्तर – (A)
विऔपनिवेशीकरण के बाद राज्य की भूमिका कैसी हो गई?
(A) अधिक व्यापक एवं विकासोन्मुख
(B) केवल सैन्य
(C) केवल न्यायिक
(D) केवल औपचारिक
उत्तर – (A)
विकासशील देशों में लोकतंत्र की सफलता के लिए कौन-सा तत्व आवश्यक है?
(A) नागरिक सहभागिता
(B) तानाशाही
(C) उपनिवेशवाद
(D) सैन्य शासन
उत्तर – (A)
विकासशील देशों में भूमि सुधार का उद्देश्य क्या है?
(A) कृषि विकास एवं सामाजिक न्याय
(B) व्यापार समाप्त करना
(C) युद्ध करना
(D) निरंकुश शासन स्थापित करना
उत्तर – (A)
मानवाधिकारों की रक्षा किसकी प्रमुख जिम्मेदारी है?
(A) राज्य
(B) निजी कंपनियाँ
(C) केवल न्यायालय
(D) केवल संसद
उत्तर – (A)
वैश्वीकरण ने विकासशील राज्यों के सामने क्या चुनौती उत्पन्न की?
(A) वैश्विक प्रतिस्पर्धा
(B) दास प्रथा
(C) सामंतवाद
(D) राजतंत्र
उत्तर – (A)
विकासशील विश्व में राज्य का अंतिम उद्देश्य क्या माना जाता है?
(A) समावेशी एवं सतत विकास
(B) साम्राज्य विस्तार
(C) निरंकुश शासन
(D) केवल कर संग्रह
उत्तर – (A)
