Uint-04

Working And Role Of Parliament In Actual Public Policy Formulation.
वास्तविक लोक नीति निर्माण में संसद की कार्यप्रणाली एवं भूमिका

लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में संसद केवल कानून बनाने वाली संस्था नहीं है, बल्कि वह लोक नीति (Public Policy) के निर्माण, समीक्षा, संशोधन, अनुमोदन तथा निगरानी की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था भी है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार द्वारा बनाई जाने वाली अधिकांश नीतियाँ संसद की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका से प्रभावित होती हैं। भारत में संसद जनता की सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था है, जो नागरिकों की आवश्यकताओं, अपेक्षाओं तथा राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन की दिशा निर्धारित करती है। इस प्रकार संसद लोकतांत्रिक शासन और सार्वजनिक नीति के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती है।

लोक नीति निर्माण की प्रक्रिया सामान्यतः किसी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक अथवा प्रशासनिक समस्या की पहचान से प्रारंभ होती है। यह समस्या संसद सदस्यों, संसदीय समितियों, मीडिया, नागरिकों, विशेषज्ञों, न्यायालयों अथवा सरकार के विभिन्न विभागों के माध्यम से सामने आ सकती है। जब किसी समस्या का व्यापक प्रभाव समाज पर पड़ता है, तब सरकार उसके समाधान के लिए नई नीति अथवा कानून बनाने की आवश्यकता अनुभव करती है। इस प्रकार संसद नीति निर्माण की प्रक्रिया को दिशा प्रदान करने वाली प्रमुख संस्था बन जाती है।

संसद की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका विधायी कार्य है। लोक नीति के अनेक महत्वपूर्ण प्रावधान कानून के रूप में संसद द्वारा पारित किए जाते हैं। सरकार किसी विषय पर विधेयक (Bill) संसद में प्रस्तुत करती है, जहाँ उस पर विस्तृत चर्चा, बहस तथा संशोधन के बाद उसे पारित किया जाता है। राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त होने पर वही विधेयक अधिनियम (Act) बन जाता है। इस प्रकार संसद नीति को कानूनी स्वरूप प्रदान करती है, जिससे उसका प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो सके।

लोक नीति निर्माण में संसद का दूसरा महत्वपूर्ण कार्य विचार-विमर्श एवं बहस है। संसद के दोनों सदनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य किसी नीति के सामाजिक, आर्थिक, वित्तीय तथा प्रशासनिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हैं। इस प्रक्रिया में नीति की संभावित कमियों की पहचान होती है तथा आवश्यक संशोधन सुझाए जाते हैं। लोकतांत्रिक विमर्श के कारण नीति अधिक संतुलित, व्यावहारिक तथा जनहितकारी बनती है।

संसद की संसदीय समितियाँ (Parliamentary Committees) लोक नीति निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विभाग संबंधी स्थायी समितियाँ, लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति तथा लोक उपक्रम समिति जैसे निकाय विभिन्न नीतियों एवं विधेयकों का गहन अध्ययन करते हैं। ये समितियाँ विशेषज्ञों, अधिकारियों, नागरिक संगठनों तथा संबंधित हितधारकों से सुझाव प्राप्त करती हैं और अपनी अनुशंसाएँ सरकार को प्रस्तुत करती हैं। इससे नीति अधिक तथ्यपरक एवं प्रभावी बनती है।

वित्तीय नियंत्रण भी संसद की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार की प्रत्येक सार्वजनिक नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। संसद वार्षिक बजट, विनियोग विधेयक तथा वित्त विधेयक पर विचार कर यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग जनहित में हो। संसद की स्वीकृति के बिना सरकार सार्वजनिक धन व्यय नहीं कर सकती। इस प्रकार संसद नीति निर्माण के साथ-साथ उसके वित्तीय आधार को भी नियंत्रित करती है।

संसद सरकार पर उत्तरदायित्व एवं नियंत्रण स्थापित करने का भी कार्य करती है। प्रश्नकाल, शून्यकाल, अल्पकालिक चर्चा, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, स्थगन प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव तथा विभिन्न संसदीय बहसों के माध्यम से सांसद सरकार से नीतियों के संबंध में प्रश्न पूछते हैं और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा करते हैं। इससे सरकार जनता तथा संसद दोनों के प्रति उत्तरदायी बनी रहती है।

लोक नीति निर्माण में संसद जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं, आवश्यकताओं तथा सुझावों को संसद में प्रस्तुत करते हैं। इससे ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक न्याय जैसे विषय नीति निर्माण में स्थान प्राप्त करते हैं। इस प्रकार संसद राष्ट्रीय नीतियों को स्थानीय आवश्यकताओं से जोड़ने का कार्य करती है।

संसद लोक नीति के क्रियान्वयन की निगरानी (Oversight) भी करती है। किसी नीति के लागू होने के बाद संसद विभिन्न मंत्रालयों से प्रगति रिपोर्ट प्राप्त करती है, समितियों के माध्यम से समीक्षा करती है तथा आवश्यक होने पर नीति में संशोधन की अनुशंसा करती है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों पर विचार कर संसद यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हुआ है।

आधुनिक समय में संसद नीति निर्माण के दौरान विशेषज्ञों, नागरिक समाज, गैर-सरकारी संगठनों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों तथा विभिन्न हितधारकों से भी सुझाव प्राप्त करती है। कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसदीय समितियों के पास भेजा जाता है, जहाँ व्यापक परामर्श के पश्चात अंतिम अनुशंसाएँ तैयार की जाती हैं। इससे नीति निर्माण अधिक सहभागी (Participatory) तथा लोकतांत्रिक बनता है।

भारतीय संसद ने अनेक महत्वपूर्ण लोक नीतियों को विधिक आधार प्रदान किया है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, वस्तु एवं सेवा कर (GST), शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, तथा डिजिटल डेटा संरक्षण संबंधी कानून जैसे अनेक महत्वपूर्ण कानून संसद द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श के पश्चात पारित किए गए। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि संसद सार्वजनिक नीति निर्माण की केंद्रीय संस्था है।

यद्यपि संसद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। राजनीतिक ध्रुवीकरण, सदन में व्यवधान, सीमित समय में विधेयकों का पारित होना, तकनीकी विषयों की जटिलता, विशेषज्ञता की कमी तथा दलगत राजनीति कई बार नीति निर्माण की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। इसके अतिरिक्त कुछ विधेयकों पर पर्याप्त सार्वजनिक परामर्श न होने के कारण भी आलोचना होती है।

इन चुनौतियों के समाधान के लिए संसदीय समितियों को अधिक सशक्त बनाना, विधेयकों पर व्यापक सार्वजनिक परामर्श सुनिश्चित करना, सांसदों के लिए विषय-विशेष प्रशिक्षण, संसदीय कार्यवाही में व्यवधान कम करना, शोध एवं विशेषज्ञ सहायता को बढ़ाना तथा डिजिटल संसदीय प्रणाली को विकसित करना आवश्यक है। इससे संसद की नीति निर्माण क्षमता और अधिक प्रभावी हो सकती है।

समग्र रूप से देखा जाए तो संसद वास्तविक लोक नीति निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक संस्था है। यह केवल कानून बनाकर ही अपनी भूमिका का निर्वहन नहीं करती, बल्कि नीति निर्माण, वित्तीय स्वीकृति, विचार-विमर्श, हितधारकों की भागीदारी, सरकार की जवाबदेही तथा नीति के मूल्यांकन और संशोधन तक प्रत्येक चरण में सक्रिय भूमिका निभाती है। इसी कारण संसद को लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में लोक नीति निर्माण का केंद्रीय स्तंभ माना जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
  1. वास्तविक लोक नीति निर्माण में संसद की भूमिका का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  2. लोक नीति निर्माण की प्रक्रिया में संसद के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  3. संसद लोक नीति निर्माण की केंद्रीय संस्था क्यों मानी जाती है? स्पष्ट कीजिए।
  4. लोक नीति निर्माण में संसद की विधायी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
  5. संसद की वित्तीय शक्तियाँ लोक नीति निर्माण को किस प्रकार प्रभावित करती हैं?
  6. संसद की उत्तरदायित्व एवं नियंत्रण संबंधी भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
  7. लोक नीति निर्माण में संसदीय समितियों की भूमिका का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  8. संसद द्वारा लोक नीति निर्माण में विचार-विमर्श एवं बहस का महत्व स्पष्ट कीजिए।
  9. संसद और कार्यपालिका के मध्य लोक नीति निर्माण में संबंधों का विश्लेषण कीजिए।
  10. संसद लोक नीति के क्रियान्वयन की निगरानी किस प्रकार करती है?
  11. प्रश्नकाल एवं शून्यकाल लोक नीति निर्माण एवं उत्तरदायित्व को कैसे सुदृढ़ करते हैं?
  12. संसदीय समितियाँ नीति निर्माण की गुणवत्ता में किस प्रकार सुधार करती हैं?
  13. संसद लोक नीति निर्माण में जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व किस प्रकार करती है?
  14. लोक नीति निर्माण में संसद एवं हितधारकों के मध्य संबंधों का विवेचन कीजिए।
  15. संसद द्वारा नीति निर्माण में विशेषज्ञों एवं नागरिक समाज की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
  16. संसद द्वारा पारित प्रमुख लोक नीति संबंधी अधिनियमों का उल्लेख करते हुए उनकी भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  17. संसद द्वारा नीति निर्माण में आने वाली प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
  18. संसद की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों का वर्णन कीजिए।
  19. संसद, लोकतंत्र एवं सुशासन के मध्य संबंधों की विवेचना कीजिए।
  20. संसद नीति निर्माण, नीति क्रियान्वयन तथा नीति मूल्यांकन के प्रत्येक चरण में किस प्रकार योगदान देती है?

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
  1. लोक नीति निर्माण में संसद की भूमिका क्या है?
  2. संसद को नीति निर्माण की केंद्रीय संस्था क्यों कहा जाता है?
  3. संसद का विधायी कार्य क्या है?
  4. विधेयक (Bill) क्या है?
  5. अधिनियम (Act) क्या है?
  6. संसदीय समिति क्या है?
  7. लोक नीति निर्माण में स्थायी समितियों की भूमिका लिखिए।
  8. संसद की वित्तीय भूमिका क्या है?
  9. प्रश्नकाल का महत्व लिखिए।
  10. शून्यकाल क्या है?
  11. ध्यानाकर्षण प्रस्ताव क्या है?
  12. अविश्वास प्रस्ताव क्या है?
  13. संसद सरकार को उत्तरदायी कैसे बनाती है?
  14. संसद की निगरानी (Oversight) भूमिका क्या है?
  15. संसद में बहस का महत्व बताइए।
  16. संसद और कार्यपालिका का संबंध स्पष्ट कीजिए।
  17. संसद और जनता के मध्य संबंध स्पष्ट कीजिए।
  18. संसद नीति क्रियान्वयन की समीक्षा कैसे करती है?
  19. संसद की दो प्रमुख चुनौतियाँ लिखिए।
  20. संसद की कार्यप्रणाली में सुधार के दो उपाय लिखिए।
  21. संसद में बजट की भूमिका क्या है?
  22. विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) क्या है?
  23. वित्त विधेयक (Finance Bill) क्या है?
  24. संसद द्वारा नीति निर्माण में हितधारकों की भूमिका लिखिए।
  25. संसद लोकतंत्र को कैसे मजबूत बनाती है?

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions / MCQs)

1. भारत में लोक नीति निर्माण की सर्वोच्च विधायी संस्था कौन है?
(A) सर्वोच्च न्यायालय
(B) संसद
(C) निर्वाचन आयोग
(D) नीति आयोग
उत्तर – (B)

2. संसद का प्रमुख कार्य है—
(A) न्याय देना
(B) कानून एवं नीतियों का निर्माण करना
(C) चुनाव कराना
(D) कर संग्रह करना
उत्तर – (B)

3. विधेयक (Bill) कब अधिनियम (Act) बनता है?
(A) संसद में प्रस्तुत होने पर
(B) दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर
(C) मंत्री की स्वीकृति पर
(D) न्यायालय के आदेश पर
उत्तर – (B)

4. संसद सरकार को उत्तरदायी बनाने का प्रमुख माध्यम है—
(A) प्रश्नकाल
(B) शून्यकाल
(C) संसदीय समितियाँ
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (D)

5. संसद की वित्तीय शक्ति का प्रमुख साधन है—
(A) बजट की स्वीकृति
(B) न्यायिक पुनरावलोकन
(C) जनमत संग्रह
(D) चुनाव
उत्तर – (A)

6. संसदीय समितियों का मुख्य कार्य है—
(A) न्याय देना
(B) विधेयकों एवं नीतियों का विस्तृत परीक्षण करना
(C) चुनाव कराना
(D) कर लगाना
उत्तर – (B)

7. संसद के प्रश्नकाल का उद्देश्य है—
(A) सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करना
(B) चुनाव कराना
(C) कानून समाप्त करना
(D) न्याय देना
उत्तर – (A)

8. संसद का कौन-सा कार्य नीति क्रियान्वयन की निगरानी से संबंधित है?
(A) Oversight (निगरानी)
(B) निर्वाचन
(C) न्यायिक पुनरावलोकन
(D) जनमत संग्रह
उत्तर – (A)

9. संसद में जनता का प्रतिनिधित्व कौन करता है?
(A) न्यायाधीश
(B) सांसद
(C) राज्यपाल
(D) मुख्य सचिव
उत्तर – (B)

10. संसद की स्थायी समितियाँ किससे संबंधित होती हैं?
(A) विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों से
(B) केवल न्यायपालिका से
(C) केवल चुनाव आयोग से
(D) केवल राष्ट्रपति से
उत्तर – (A)

11. संसद का कौन-सा कार्य लोक नीति को कानूनी स्वरूप देता है?
(A) विधेयक पारित करना
(B) चुनाव कराना
(C) न्याय देना
(D) कर संग्रह करना
उत्तर – (A)

12. संसद की कार्यवाही का उद्देश्य है—
(A) लोकतांत्रिक विमर्श को बढ़ावा देना
(B) केवल राजनीतिक भाषण देना
(C) चुनाव प्रचार करना
(D) न्याय देना
उत्तर – (A)

13. संसद द्वारा बजट पारित करने का उद्देश्य है—
(A) सार्वजनिक व्यय को स्वीकृति देना
(B) न्याय देना
(C) चुनाव कराना
(D) संविधान संशोधन करना
उत्तर – (A)

14. लोक नीति निर्माण में संसद की भूमिका होती है—
(A) नीति निर्माण
(B) नीति अनुमोदन
(C) नीति निगरानी
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (D)

15. संसद लोकतंत्र का कौन-सा सिद्धांत सुदृढ़ करती है?
(A) उत्तरदायित्व
(B) पारदर्शिता
(C) जनप्रतिनिधित्व
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (D)

16. संसद की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक है—
(A) प्रभावी संसदीय समितियाँ
(B) शोध एवं विशेषज्ञ सहायता
(C) व्यापक सार्वजनिक परामर्श
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (D)

17. संसद में नीति निर्माण के दौरान व्यापक चर्चा का उद्देश्य है—
(A) नीति को अधिक प्रभावी बनाना
(B) चुनाव कराना
(C) न्याय देना
(D) प्रशासन समाप्त करना
उत्तर – (A)

18. संसद का नियंत्रण मुख्य रूप से किस पर होता है?
(A) कार्यपालिका पर
(B) न्यायपालिका पर
(C) निर्वाचन आयोग पर
(D) मीडिया पर
उत्तर – (A)

19. संसद की नीति निर्माण प्रक्रिया को कौन अधिक लोकतांत्रिक बनाता है?
(A) हितधारकों की भागीदारी
(B) संसदीय बहस
(C) समितियों की समीक्षा
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (D)

20. संसद का अंतिम उद्देश्य है—
(A) जनकल्याण एवं लोकतांत्रिक शासन सुनिश्चित करना
(B) केवल कानून बनाना
(C) कर बढ़ाना
(D) चुनाव कराना
उत्तर – (A)

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