Unit-06
Affirmative Action Policies With Respect To Women, Cast And Class
महिलाओं, जाति एवं वर्ग के संदर्भ में सकारात्मक कार्रवाई (आरक्षण एवं विशेष अवसर) की नीतियाँ।
आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य का उद्देश्य केवल शासन का संचालन करना नहीं होता, बल्कि ऐसा सामाजिक वातावरण निर्मित करना भी होता है जिसमें प्रत्येक नागरिक को समान सम्मान, समान अवसर और विकास के समान साधन उपलब्ध हो सकें। यदि समाज में कुछ वर्ग ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक अथवा सांस्कृतिक कारणों से लंबे समय तक वंचित रहे हों, तो केवल कानूनी समानता उन्हें वास्तविक समानता प्रदान नहीं कर सकती। ऐसी स्थिति में राज्य को विशेष उपाय अपनाने पड़ते हैं, ताकि समाज के कमजोर और वंचित वर्ग भी मुख्यधारा में सम्मिलित हो सकें। इसी विचार को आधुनिक राजनीतिक विज्ञान में सकारात्मक कार्रवाई (Affirmative Action) कहा जाता है।
सकारात्मक कार्रवाई का आधार सामाजिक न्याय का सिद्धांत है। सामाजिक न्याय का अर्थ केवल सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार करना नहीं है, बल्कि उन व्यक्तियों और समुदायों को विशेष अवसर प्रदान करना भी है जो लंबे समय तक सामाजिक भेदभाव, आर्थिक अभाव अथवा शैक्षिक पिछड़ेपन के कारण विकास की दौड़ में पीछे रह गए हैं। इस दृष्टि से समानता का वास्तविक अर्थ केवल समान नियम लागू करना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करना है जिनमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता का पूर्ण विकास कर सके।
भारतीय समाज का ऐतिहासिक विकास अत्यंत जटिल रहा है। यहाँ जाति व्यवस्था, आर्थिक असमानता, लैंगिक भेदभाव तथा शिक्षा के असमान अवसरों ने समाज के अनेक वर्गों को लंबे समय तक प्रभावित किया। अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों तथा महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, संपत्ति, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों ने स्वतंत्र भारत के नीति-निर्माताओं को यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि केवल समान अधिकार घोषित कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इन वर्गों के उत्थान के लिए विशेष नीतियाँ भी आवश्यक होंगी।
भारतीय संविधान के निर्माताओं ने इस ऐतिहासिक वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए समानता और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया। संविधान ने एक ओर सभी नागरिकों को विधि के समक्ष समानता तथा समान संरक्षण का अधिकार प्रदान किया, वहीं दूसरी ओर राज्य को यह अधिकार भी दिया कि वह सामाजिक एवं शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा महिलाओं के हित में विशेष प्रावधान कर सके। इस प्रकार भारतीय संविधान ने समानता और सकारात्मक कार्रवाई को एक-दूसरे का पूरक माना, विरोधी नहीं।
सकारात्मक कार्रवाई का उद्देश्य किसी वर्ग को स्थायी विशेषाधिकार देना नहीं है। इसका उद्देश्य उन बाधाओं को दूर करना है जिन्होंने कुछ समुदायों को लंबे समय तक विकास के अवसरों से वंचित रखा। इसलिए आरक्षण, छात्रवृत्ति, विशेष शैक्षिक योजनाएँ, कौशल विकास कार्यक्रम, आर्थिक सहायता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व तथा सामाजिक सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएँ सकारात्मक कार्रवाई के विभिन्न रूप मानी जाती हैं। इन उपायों के माध्यम से राज्य यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि प्रत्येक नागरिक को अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो।
महिलाओं के संदर्भ में सकारात्मक कार्रवाई का विशेष महत्व है। भारतीय समाज में महिलाओं ने शिक्षा, रोजगार, संपत्ति के अधिकार, राजनीतिक भागीदारी और निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में लंबे समय तक अनेक प्रकार की असमानताओं का सामना किया। यद्यपि आधुनिक भारत में महिलाओं की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, फिर भी अनेक क्षेत्रों में लैंगिक असमानता विद्यमान है। इसीलिए महिलाओं के लिए शिक्षा, रोजगार, स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में आरक्षण, मातृत्व संरक्षण, सुरक्षा, कौशल विकास तथा आर्थिक सशक्तिकरण से संबंधित अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं। इनका उद्देश्य महिलाओं को केवल लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में समान भागीदार बनाना है।
जाति के संदर्भ में सकारात्मक कार्रवाई भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण नीतियों में से एक है। सदियों तक चली सामाजिक विषमता और अस्पृश्यता ने समाज के अनेक वर्गों को शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन से दूर रखा। स्वतंत्रता के बाद संविधान ने इन वर्गों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान किए। अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य पिछड़े वर्गों को शिक्षा और सरकारी सेवाओं में आरक्षण, छात्रवृत्तियाँ, विशेष विकास योजनाएँ तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसी सुविधाएँ प्रदान की गईं। इन उपायों का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और सम्मान की स्थापना करना भी है।
वर्ग के संदर्भ में सकारात्मक कार्रवाई का विचार अपेक्षाकृत आधुनिक है। समय के साथ यह अनुभव किया गया कि केवल जातिगत पिछड़ापन ही असमानता का कारण नहीं है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग भी अनेक प्रकार की वंचनाओं का सामना करते हैं। इसलिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी विशेष योजनाएँ, छात्रवृत्तियाँ, शिक्षा में सहायता तथा अन्य अवसर प्रदान किए जाने लगे। इससे सामाजिक न्याय की अवधारणा को और व्यापक स्वरूप प्राप्त हुआ।
सकारात्मक कार्रवाई की नीतियों ने भारतीय समाज में अनेक सकारात्मक परिवर्तन लाए हैं। शिक्षा में पिछड़े वर्गों की भागीदारी बढ़ी है, महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व मजबूत हुआ है, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में प्रगति हुई है तथा लोकतंत्र अधिक समावेशी बना है। स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए आरक्षण ने लाखों लोगों को नेतृत्व का अवसर प्रदान किया है, जिससे लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत हुई हैं।
इसके बावजूद सकारात्मक कार्रवाई पर समय-समय पर बहस भी होती रही है। कुछ विद्वानों का मत है कि आरक्षण सामाजिक न्याय का प्रभावी साधन है, जबकि कुछ अन्य का मानना है कि इसे समय-समय पर बदलती सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार पुनः समीक्षा की जानी चाहिए। इसी प्रकार आर्थिक आधार, सामाजिक आधार, योग्यता और समान अवसर के बीच संतुलन स्थापित करने पर भी व्यापक चर्चा होती रही है। इन बहसों का उद्देश्य सकारात्मक कार्रवाई का विरोध करना नहीं, बल्कि उसे अधिक प्रभावी और न्यायपूर्ण बनाना है।
वर्तमान समय में सकारात्मक कार्रवाई केवल आरक्षण तक सीमित नहीं रह गई है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, उद्यमिता, सामाजिक सुरक्षा और समान अवसर की नीतियाँ भी इसके महत्वपूर्ण अंग बन चुकी हैं। आधुनिक लोकतंत्र में सामाजिक न्याय का अर्थ केवल अवसर प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियाँ निर्मित करना भी है जिनमें प्रत्येक नागरिक सम्मानपूर्वक जीवन जी सके और अपनी क्षमता का पूर्ण विकास कर सके।
इस प्रकार महिलाओं, जाति एवं वर्ग के संदर्भ में सकारात्मक कार्रवाई की नीतियाँ भारतीय लोकतंत्र की सामाजिक न्याय संबंधी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण हैं। इन नीतियों का उद्देश्य किसी वर्ग को विशेषाधिकार देना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक असमानताओं को कम करना, समान अवसर उपलब्ध कराना तथा एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ प्रत्येक नागरिक गरिमा, समानता और न्याय के साथ जीवन व्यतीत कर सके।
भाग–1 : वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
1. सकारात्मक कार्रवाई (Affirmative Action) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(अ) सभी नागरिकों को समान वेतन देना
(ब) ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना
(स) केवल सरकारी नौकरियाँ बढ़ाना
(द) करों में वृद्धि करना
उत्तर – (ब)
2. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद विधि के समक्ष समानता की गारंटी देता है?
(अ) अनुच्छेद 14
(ब) अनुच्छेद 19
(स) अनुच्छेद 21
(द) अनुच्छेद 32
उत्तर – (अ)
3. राज्य को महिलाओं एवं बच्चों के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार किस अनुच्छेद में दिया गया है?
(अ) अनुच्छेद 15(3)
(ब) अनुच्छेद 16
(स) अनुच्छेद 17
(द) अनुच्छेद 25
उत्तर – (अ)
4. सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान का आधार कौन-सा अनुच्छेद है?
(अ) अनुच्छेद 15(4)
(ब) अनुच्छेद 18
(स) अनुच्छेद 23
(द) अनुच्छेद 28
उत्तर – (अ)
5. सरकारी सेवाओं में समान अवसर किस अनुच्छेद में दिया गया है?
(अ) अनुच्छेद 16
(ब) अनुच्छेद 20
(स) अनुच्छेद 22
(द) अनुच्छेद 29
उत्तर – (अ)
6. अस्पृश्यता का उन्मूलन किस अनुच्छेद में किया गया है?
(अ) अनुच्छेद 15
(ब) अनुच्छेद 17
(स) अनुच्छेद 18
(द) अनुच्छेद 21
उत्तर – (ब)
7. सकारात्मक कार्रवाई का आधार कौन-सा सिद्धांत है?
(अ) सामाजिक न्याय
(ब) सैन्य शक्ति
(स) केंद्रीकरण
(द) निरंकुश शासन
उत्तर – (अ)
8. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का उद्देश्य क्या है?
(अ) राजनीतिक दल बनाना
(ब) सामाजिक एवं शैक्षिक समानता स्थापित करना
(स) कर संग्रह बढ़ाना
(द) जनसंख्या बढ़ाना
उत्तर – (ब)
9. महिलाओं के लिए स्थानीय निकायों में आरक्षण का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
(अ) राजनीतिक सहभागिता बढ़ाना
(ब) कर वसूली
(स) न्यायपालिका का विस्तार
(द) संसद समाप्त करना
उत्तर – (अ)
10. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से संबंधित आरक्षण किस आधार पर है?
(अ) धर्म
(ब) आर्थिक स्थिति
(स) भाषा
(द) क्षेत्र
उत्तर – (ब)
11. सकारात्मक कार्रवाई का संबंध मुख्यतः किससे है?
(अ) सामाजिक समानता
(ब) विदेश नीति
(स) रक्षा नीति
(द) मुद्रा नीति
उत्तर – (अ)
12. महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
(अ) केवल रोजगार
(ब) सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समानता
(स) केवल शिक्षा
(द) केवल मतदान
उत्तर – (ब)
13. सकारात्मक कार्रवाई का एक प्रमुख साधन कौन-सा है?
(अ) आरक्षण
(ब) युद्ध
(स) कर वृद्धि
(द) निजीकरण
उत्तर – (अ)
14. सामाजिक न्याय की अवधारणा किससे जुड़ी है?
(अ) समान अवसर
(ब) निरंकुश शासन
(स) उपनिवेशवाद
(द) साम्राज्यवाद
उत्तर – (अ)
15. भारतीय संविधान का कौन-सा भाग मौलिक अधिकारों से संबंधित है?
(अ) भाग III
(ब) भाग IV
(स) भाग V
(द) भाग VI
उत्तर – (अ)
16. आरक्षण का उद्देश्य क्या है?
(अ) स्थायी विशेषाधिकार देना
(ब) ऐतिहासिक असमानताओं को कम करना
(स) चुनाव कराना
(द) संसद का गठन
उत्तर – (ब)
17. निम्न में से कौन सकारात्मक कार्रवाई का उदाहरण है?
(अ) छात्रवृत्ति
(ब) कौशल विकास
(स) आरक्षण
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (द)
18. सकारात्मक कार्रवाई से लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(अ) लोकतंत्र कमजोर होता है
(ब) लोकतंत्र अधिक समावेशी बनता है
(स) चुनाव समाप्त हो जाते हैं
(द) न्यायपालिका समाप्त हो जाती है
उत्तर – (ब)
19. महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान का उद्देश्य क्या है?
(अ) लैंगिक समानता
(ब) कर संग्रह
(स) विदेश नीति
(द) रक्षा नीति
उत्तर – (अ)
20. सकारात्मक कार्रवाई की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
(अ) सामाजिक न्याय और योग्यता के बीच संतुलन
(ब) संसद का गठन
(स) मुद्रा प्रबंधन
(द) विदेश व्यापार
उत्तर – (अ)
भाग–2 : अति लघु उत्तरीय प्रश्न
सकारात्मक कार्रवाई क्या है?
सामाजिक न्याय से क्या अभिप्राय है?
आरक्षण क्या है?
महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान क्यों आवश्यक हैं?
अनुच्छेद 14 क्या है?
अनुच्छेद 15(3) क्या है?
अनुच्छेद 15(4) का महत्व लिखिए।
अनुच्छेद 16 क्या है?
अनुच्छेद 17 क्या है?
समान अवसर से क्या अभिप्राय है?
महिला सशक्तिकरण क्या है?
सामाजिक समानता क्या है?
अनुसूचित जाति से क्या अभिप्राय है?
अनुसूचित जनजाति क्या है?
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) क्या है?
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) क्या है?
सकारात्मक कार्रवाई के दो उद्देश्य लिखिए।
सामाजिक न्याय का महत्व लिखिए।
शिक्षा में आरक्षण का उद्देश्य क्या है?
रोजगार में आरक्षण का उद्देश्य क्या है?
राजनीतिक प्रतिनिधित्व का महत्व लिखिए।
समानता और सामाजिक न्याय में क्या संबंध है?
महिला आरक्षण का महत्व लिखिए।
छात्रवृत्ति सकारात्मक कार्रवाई का साधन कैसे है?
संविधान में सकारात्मक कार्रवाई क्यों आवश्यक मानी गई?
भाग–3 : लघु उत्तरीय प्रश्न
सकारात्मक कार्रवाई की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
सामाजिक न्याय का अर्थ एवं महत्व बताइए।
भारतीय संविधान में समानता के सिद्धांत का वर्णन कीजिए।
महिलाओं के लिए सकारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता स्पष्ट कीजिए।
जाति आधारित आरक्षण का औचित्य स्पष्ट कीजिए।
वर्ग आधारित सकारात्मक कार्रवाई का महत्व बताइए।
आरक्षण और समान अवसर के संबंध की व्याख्या कीजिए।
महिला सशक्तिकरण में आरक्षण की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
सकारात्मक कार्रवाई की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
सकारात्मक कार्रवाई के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन कीजिए।
सामाजिक न्याय और लोकतंत्र के संबंध को स्पष्ट कीजिए।
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का महत्व बताइए।
सकारात्मक कार्रवाई की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
सकारात्मक कार्रवाई की सीमाएँ स्पष्ट कीजिए।
सकारात्मक कार्रवाई पर होने वाली प्रमुख बहसों का उल्लेख कीजिए।
समानता और आरक्षण में सामंजस्य कैसे स्थापित किया जा सकता है?
शिक्षा में सकारात्मक कार्रवाई का महत्व स्पष्ट कीजिए।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष नीतियों का महत्व बताइए।
सामाजिक समावेशन में सकारात्मक कार्रवाई की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
भारतीय लोकतंत्र में सकारात्मक कार्रवाई की प्रासंगिकता पर टिप्पणी कीजिए।
भाग–4 : दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न
सकारात्मक कार्रवाई की अवधारणा एवं सामाजिक न्याय में उसकी भूमिका का विस्तृत विवेचन कीजिए।
भारतीय संविधान में सकारात्मक कार्रवाई के संवैधानिक आधार का विस्तार से वर्णन कीजिए।
महिलाओं के संदर्भ में सकारात्मक कार्रवाई की नीतियों का विश्लेषण कीजिए।
जाति आधारित सकारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता एवं प्रभाव का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
वर्ग आधारित सकारात्मक कार्रवाई की अवधारणा एवं महत्व का विवेचन कीजिए।
भारतीय लोकतंत्र में आरक्षण नीति की उपलब्धियों एवं सीमाओं का मूल्यांकन कीजिए।
समानता और सामाजिक न्याय के मध्य संतुलन स्थापित करने में सकारात्मक कार्रवाई की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
महिला सशक्तिकरण में आरक्षण एवं विशेष अवसरों के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
भारतीय समाज में सकारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा कीजिए।
सकारात्मक कार्रवाई पर समकालीन बहसों का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
शिक्षा एवं रोजगार में सकारात्मक कार्रवाई की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
सामाजिक समावेशन एवं लोकतांत्रिक विकास में सकारात्मक कार्रवाई के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
भारतीय संविधान के समानता संबंधी प्रावधानों एवं सकारात्मक कार्रवाई के संबंध का विवेचन कीजिए।
आरक्षण नीति के पक्ष एवं विपक्ष में दिए जाने वाले प्रमुख तर्कों का विश्लेषण कीजिए।
"सकारात्मक कार्रवाई केवल आरक्षण नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का व्यापक कार्यक्रम है।" इस कथन की समीक्षा कीजिए।
विश्वविद्यालय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न
सकारात्मक कार्रवाई की अवधारणा, उद्देश्य एवं महत्व स्पष्ट कीजिए।
महिलाओं, जाति एवं वर्ग के संदर्भ में सकारात्मक कार्रवाई की नीतियों का विश्लेषण कीजिए।
भारतीय संविधान में समानता एवं सामाजिक न्याय के संवैधानिक आधार का विवेचन कीजिए।
महिला सशक्तिकरण में सकारात्मक कार्रवाई की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
जाति आधारित एवं वर्ग आधारित सकारात्मक कार्रवाई का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
आरक्षण नीति की उपलब्धियों एवं सीमाओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
सकारात्मक कार्रवाई और लोकतंत्र के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण कीजिए।
सामाजिक न्याय की स्थापना में सकारात्मक कार्रवाई की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
भारतीय लोकतंत्र में समावेशी विकास के लिए सकारात्मक कार्रवाई क्यों आवश्यक है?
"समानता का वास्तविक अर्थ समान अवसर उपलब्ध कराना है।" इस कथन के आलोक में सकारात्मक कार्रवाई की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।
