Unit – 5

Political Culture, Political Socialization, Social Movements

राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण तथा सामाजिक आंदोलन

राजनीति विज्ञान का अध्ययन केवल राज्य, सरकार और संविधान तक सीमित नहीं है। आधुनिक राजनीति विज्ञान यह समझने का प्रयास करता है कि लोग राजनीति के बारे में क्या सोचते हैं, राजनीतिक व्यवस्था के प्रति उनका व्यवहार कैसा होता है, वे राजनीतिक मूल्य कैसे सीखते हैं और सामाजिक परिवर्तन के लिए किस प्रकार संगठित होते हैं। इसी संदर्भ में राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण और सामाजिक आंदोलन जैसी अवधारणाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये तीनों विषय किसी भी राजनीतिक व्यवस्था की स्थिरता, विकास और परिवर्तन को समझने के लिए आधार प्रदान करते हैं।

राजनीतिक संस्कृति (Political Culture)

राजनीतिक संस्कृति से अभिप्राय उन विश्वासों, मूल्यों, भावनाओं, दृष्टिकोणों और व्यवहारों से है जो किसी समाज के लोगों के मन में राजनीतिक व्यवस्था, सरकार, संविधान, राजनीतिक दलों और राजनीतिक प्रक्रियाओं के प्रति विकसित होते हैं। दूसरे शब्दों में, नागरिक राजनीति के बारे में क्या सोचते हैं और राजनीतिक घटनाओं पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, यही राजनीतिक संस्कृति का विषय है।

प्रत्येक समाज की अपनी राजनीतिक संस्कृति होती है। यह संस्कृति उस समाज के इतिहास, परंपराओं, धर्म, शिक्षा, सामाजिक संरचना और आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होती है। यदि किसी देश के नागरिक लोकतंत्र, स्वतंत्रता और समानता जैसे मूल्यों में विश्वास रखते हैं, तो वहाँ लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति विकसित होती है। इसके विपरीत यदि लोग अधिनायकवाद या तानाशाही को स्वीकार करते हैं, तो राजनीतिक संस्कृति भी उसी प्रकार की बन जाती है।

राजनीतिक संस्कृति का महत्व इसलिए है क्योंकि किसी भी राजनीतिक व्यवस्था की सफलता केवल संवैधानिक प्रावधानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि नागरिकों की राजनीतिक मानसिकता पर भी निर्भर करती है। लोकतंत्र तभी सफल हो सकता है जब नागरिक लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करें और राजनीतिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी करें।

राजनीतिक संस्कृति के प्रमुख तत्वों में राजनीतिक ज्ञान, राजनीतिक विश्वास, राजनीतिक मूल्य, राजनीतिक प्रतीकों के प्रति सम्मान तथा राजनीतिक भागीदारी की भावना शामिल होती है। राष्ट्रीय ध्वज, संविधान, राष्ट्रगान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान भी राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा माने जाते हैं।

राजनीतिक संस्कृति के विभिन्न प्रकार बताए गए हैं। सामान्यतः इसे तीन प्रमुख रूपों में समझा जाता है—

1. संकीर्ण राजनीतिक संस्कृति (Parochial Political Culture)

इस प्रकार की संस्कृति में लोगों का राजनीतिक व्यवस्था से बहुत कम संबंध होता है। वे राजनीतिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं के बारे में बहुत कम जानकारी रखते हैं। यह स्थिति प्रायः आदिवासी और पारंपरिक समाजों में दिखाई देती है।

2. अधीनस्थ राजनीतिक संस्कृति (Subject Political Culture)

इस संस्कृति में नागरिक राजनीतिक व्यवस्था को जानते हैं, लेकिन उसकी नीतियों और निर्णयों को केवल स्वीकार करते हैं। उनकी राजनीतिक भागीदारी सीमित होती है। वे शासन के अधीन रहते हैं, लेकिन शासन को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करते।

3. सहभागी राजनीतिक संस्कृति (Participant Political Culture)

यह लोकतांत्रिक समाजों की विशेषता मानी जाती है। इसमें नागरिक राजनीति में सक्रिय भाग लेते हैं, मतदान करते हैं, राजनीतिक चर्चाओं में शामिल होते हैं तथा सरकार को उत्तरदायी बनाने का प्रयास करते हैं।

आधुनिक लोकतांत्रिक राज्यों में सहभागी राजनीतिक संस्कृति को सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इससे लोकतंत्र मजबूत होता है।


राजनीतिक समाजीकरण (Political Socialization)

राजनीतिक समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति राजनीतिक ज्ञान, मूल्य, विश्वास और व्यवहार सीखता है। यह प्रक्रिया व्यक्ति के जन्म से लेकर जीवन भर चलती रहती है। जिस प्रकार सामाजिक समाजीकरण व्यक्ति को समाज के नियम और मूल्य सिखाता है, उसी प्रकार राजनीतिक समाजीकरण उसे राजनीतिक जीवन के नियम और मान्यताएँ सिखाता है।

राजनीतिक समाजीकरण के माध्यम से नागरिक लोकतंत्र, संविधान, अधिकार, कर्तव्य, चुनाव और राजनीतिक संस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। यह प्रक्रिया राजनीतिक संस्कृति के निर्माण और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

राजनीतिक समाजीकरण की प्रक्रिया केवल औपचारिक शिक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि जीवन के विभिन्न अनुभवों से भी प्रभावित होती है। इसके प्रमुख अभिकरण (Agents) निम्नलिखित हैं—

परिवार

परिवार राजनीतिक समाजीकरण का सबसे पहला और सबसे प्रभावशाली माध्यम है। बच्चे अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से राजनीतिक विचार और मूल्य सीखते हैं। परिवार की राजनीतिक सोच का प्रभाव व्यक्ति पर लंबे समय तक बना रहता है।

विद्यालय एवं शिक्षण संस्थान

विद्यालय नागरिकता, लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रीय मूल्यों की शिक्षा देते हैं। शिक्षा व्यक्ति में राजनीतिक जागरूकता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करती है।

मित्र समूह

मित्रों और सहपाठियों के साथ होने वाली चर्चाएँ व्यक्ति के राजनीतिक विचारों को प्रभावित करती हैं। युवावस्था में मित्र समूह राजनीतिक दृष्टिकोण निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जनसंचार माध्यम

समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन और सोशल मीडिया आज राजनीतिक समाजीकरण के अत्यंत प्रभावशाली साधन बन चुके हैं। इनके माध्यम से नागरिक राजनीतिक घटनाओं और नीतियों की जानकारी प्राप्त करते हैं।

राजनीतिक दल

राजनीतिक दल नागरिकों को राजनीतिक विचारधाराओं और कार्यक्रमों से परिचित कराते हैं। चुनाव प्रचार और राजनीतिक अभियान भी समाजीकरण के महत्वपूर्ण साधन हैं।

धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाएँ

धार्मिक संगठन, सामाजिक संगठन और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाएँ भी व्यक्तियों के राजनीतिक दृष्टिकोण को प्रभावित करती हैं।

राजनीतिक समाजीकरण का महत्व इसलिए है क्योंकि इसके माध्यम से राजनीतिक व्यवस्था को स्थिरता प्राप्त होती है। नागरिकों में राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था के प्रति सम्मान विकसित होता है। इसके बिना कोई भी राजनीतिक व्यवस्था लंबे समय तक टिक नहीं सकती।


सामाजिक आंदोलन (Social Movements)

सामाजिक आंदोलन ऐसे संगठित सामूहिक प्रयास होते हैं जिनका उद्देश्य समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था या संस्कृति में परिवर्तन लाना या किसी परिवर्तन का विरोध करना होता है। सामाजिक आंदोलन सामान्य राजनीतिक गतिविधियों से अलग होते हैं क्योंकि वे व्यापक सामाजिक हितों और जनसमस्याओं से जुड़े होते हैं।

जब समाज का कोई वर्ग यह महसूस करता है कि उसकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है या उसके अधिकारों का हनन हो रहा है, तब वह संगठित होकर आंदोलन का रूप ले सकता है। सामाजिक आंदोलन सामाजिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण साधन माने जाते हैं।

सामाजिक आंदोलनों की कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं—

  • सामूहिक भागीदारी

  • किसी साझा उद्देश्य की उपस्थिति

  • परिवर्तन या विरोध की भावना

  • संगठन और नेतृत्व

  • जनसमर्थन पर आधारित गतिविधियाँ

सामाजिक आंदोलन कई प्रकार के हो सकते हैं।

सुधारवादी आंदोलन

इनका उद्देश्य समाज में सुधार करना होता है, न कि संपूर्ण व्यवस्था को बदलना। उदाहरण के रूप में महिला शिक्षा आंदोलन और सामाजिक सुधार आंदोलन को देखा जा सकता है।

क्रांतिकारी आंदोलन

इनका उद्देश्य राजनीतिक या सामाजिक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाना होता है। ऐसे आंदोलन मौजूदा व्यवस्था को बदलने का प्रयास करते हैं।

प्रतिरोधी आंदोलन

ये आंदोलन किसी नई नीति या परिवर्तन का विरोध करते हैं। उदाहरण के लिए कुछ जनआंदोलन सरकार की विशेष नीतियों का विरोध करते हैं।

वैकल्पिक आंदोलन

इनका उद्देश्य लोगों के व्यवहार और जीवन शैली में परिवर्तन लाना होता है, जैसे पर्यावरण संरक्षण आंदोलन।


भारत में प्रमुख सामाजिक आंदोलन

भारत में सामाजिक आंदोलनों का समृद्ध इतिहास रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन स्वयं एक विशाल सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन था। इसके अतिरिक्त अनेक महत्वपूर्ण आंदोलन हुए हैं—

  • चिपको आंदोलन

  • नर्मदा बचाओ आंदोलन

  • महिला आंदोलन

  • दलित आंदोलन

  • किसान आंदोलन

  • पर्यावरण आंदोलन

  • भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन

इन आंदोलनों ने समाज में जागरूकता बढ़ाने और नीतिगत परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण और सामाजिक आंदोलन का पारस्परिक संबंध

ये तीनों अवधारणाएँ एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। राजनीतिक समाजीकरण के माध्यम से नागरिक राजनीतिक मूल्य और व्यवहार सीखते हैं। यही मूल्य आगे चलकर राजनीतिक संस्कृति का निर्माण करते हैं। जब राजनीतिक संस्कृति में जागरूकता, सहभागिता और अधिकारों के प्रति चेतना विकसित होती है, तब नागरिक सामाजिक आंदोलनों के माध्यम से अपने हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होते हैं।

इस प्रकार राजनीतिक समाजीकरण राजनीतिक संस्कृति को जन्म देता है और राजनीतिक संस्कृति सामाजिक आंदोलनों को दिशा प्रदान करती है। तीनों मिलकर लोकतंत्र को मजबूत बनाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करते हैं।

राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण तथा सामाजिक आंदोलन आधुनिक राजनीति विज्ञान की अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। राजनीतिक संस्कृति नागरिकों के राजनीतिक दृष्टिकोण और व्यवहार को व्यक्त करती है, राजनीतिक समाजीकरण इन दृष्टिकोणों के निर्माण की प्रक्रिया है और सामाजिक आंदोलन समाज में परिवर्तन लाने का माध्यम हैं। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता इन तीनों तत्वों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। जहाँ राजनीतिक समाजीकरण प्रभावी होगा, वहाँ स्वस्थ राजनीतिक संस्कृति विकसित होगी और जहाँ स्वस्थ राजनीतिक संस्कृति होगी, वहाँ सामाजिक आंदोलन लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप समाज के विकास और परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण एवं सामाजिक आंदोलन
(Political Culture, Political Socialization and Social Movements)
(A) वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)

एक शब्द / एक वाक्य में उत्तर दीजिए
  1. राजनीतिक संस्कृति से क्या अभिप्राय है?
  2. राजनीतिक संस्कृति किन तत्वों से निर्मित होती है?
  3. राजनीतिक संस्कृति को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं?
  4. लोकतंत्र की सफलता किस पर निर्भर करती है?
  5. राजनीतिक संस्कृति के तीन प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं?
  6. संकीर्ण राजनीतिक संस्कृति (Parochial Political Culture) क्या है?
  7. अधीनस्थ राजनीतिक संस्कृति (Subject Political Culture) क्या है?
  8. सहभागी राजनीतिक संस्कृति (Participant Political Culture) क्या है?
  9. आधुनिक लोकतंत्र के लिए कौन-सी राजनीतिक संस्कृति सबसे उपयुक्त मानी जाती है?
  10. राजनीतिक समाजीकरण क्या है?
  11. राजनीतिक समाजीकरण की प्रक्रिया कब से प्रारंभ होती है?
  12. राजनीतिक समाजीकरण का सबसे पहला अभिकरण कौन है?
  13. विद्यालय राजनीतिक समाजीकरण में क्या भूमिका निभाता है?
  14. जनसंचार माध्यम राजनीतिक समाजीकरण को कैसे प्रभावित करते हैं?
  15. राजनीतिक दल राजनीतिक समाजीकरण में क्या भूमिका निभाते हैं?
  16. सामाजिक आंदोलन क्या है?
  17. सामाजिक आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
  18. सुधारवादी आंदोलन क्या है?
  19. क्रांतिकारी आंदोलन क्या है?
  20. प्रतिरोधी आंदोलन क्या है?
  21. वैकल्पिक आंदोलन क्या है?
  22. भारत के दो प्रमुख सामाजिक आंदोलनों के नाम लिखिए।
  23. चिपको आंदोलन किससे संबंधित था?
  24. नर्मदा बचाओ आंदोलन किससे संबंधित है?
  25. राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण और सामाजिक आंदोलन में क्या संबंध है?

(B) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. राजनीतिक संस्कृति का संबंध मुख्य रूप से किससे है?

(A) आर्थिक विकास

(B) नागरिकों के राजनीतिक विश्वास एवं व्यवहार ✅

(C) न्यायपालिका

(D) प्रशासन

2. निम्नलिखित में लोकतांत्रिक समाज की प्रमुख राजनीतिक संस्कृति है—

(A) संकीर्ण

(B) अधीनस्थ

(C) सहभागी ✅

(D) तानाशाही

3. राजनीतिक समाजीकरण का सबसे प्रभावशाली अभिकरण है—

(A) विद्यालय

(B) परिवार ✅

(C) मीडिया

(D) राजनीतिक दल

4. राजनीतिक समाजीकरण के माध्यम से व्यक्ति क्या सीखता है?

(A) व्यापार

(B) राजनीतिक मूल्य एवं व्यवहार ✅

(C) उद्योग

(D) कृषि

5. निम्नलिखित में कौन राजनीतिक समाजीकरण का अभिकरण नहीं है?

(A) परिवार

(B) विद्यालय

(C) न्यायालय ✅

(D) जनसंचार माध्यम

6. सामाजिक आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है—

(A) केवल चुनाव जीतना

(B) सामाजिक एवं राजनीतिक परिवर्तन लाना ✅

(C) प्रशासन चलाना

(D) न्याय देना

7. चिपको आंदोलन संबंधित है—

(A) महिला अधिकार

(B) पर्यावरण संरक्षण ✅

(C) शिक्षा

(D) चुनाव सुधार

8. नर्मदा बचाओ आंदोलन संबंधित है—

(A) भ्रष्टाचार

(B) नदी एवं विस्थापन के प्रश्नों से ✅

(C) शिक्षा

(D) रोजगार

9. सहभागी राजनीतिक संस्कृति में नागरिक—

(A) राजनीति से दूर रहते हैं

(B) केवल सरकार का पालन करते हैं

(C) सक्रिय राजनीतिक भागीदारी करते हैं ✅

(D) मतदान नहीं करते

10. राजनीतिक संस्कृति का निर्माण मुख्य रूप से होता है—

(A) राजनीतिक समाजीकरण द्वारा ✅

(B) उद्योगों द्वारा

(C) व्यापार द्वारा

(D) सेना द्वारा

(C) अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer)
  1. राजनीतिक संस्कृति की परिभाषा दीजिए।
  2. राजनीतिक संस्कृति का महत्व लिखिए।
  3. संकीर्ण राजनीतिक संस्कृति क्या है?
  4. अधीनस्थ राजनीतिक संस्कृति क्या है?
  5. सहभागी राजनीतिक संस्कृति क्या है?
  6. राजनीतिक समाजीकरण क्या है?
  7. राजनीतिक समाजीकरण के दो प्रमुख अभिकरण लिखिए।
  8. परिवार की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  9. विद्यालय की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  10. जनसंचार माध्यम की भूमिका लिखिए।
  11. सामाजिक आंदोलन की परिभाषा दीजिए।
  12. सामाजिक आंदोलन की दो विशेषताएँ लिखिए।
  13. सुधारवादी आंदोलन क्या है?
  14. क्रांतिकारी आंदोलन क्या है?
  15. प्रतिरोधी आंदोलन क्या है?
  16. वैकल्पिक आंदोलन क्या है?
  17. चिपको आंदोलन का उद्देश्य क्या था?
  18. दलित आंदोलन का उद्देश्य क्या था?
  19. महिला आंदोलन का महत्व लिखिए।
  20. राजनीतिक संस्कृति एवं सामाजिक आंदोलन का संबंध स्पष्ट कीजिए।

(D) लघु उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
  1. राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा एवं प्रमुख तत्वों का वर्णन कीजिए।
  2. राजनीतिक संस्कृति के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  3. सहभागी राजनीतिक संस्कृति लोकतंत्र के लिए क्यों आवश्यक है?
  4. राजनीतिक समाजीकरण का अर्थ एवं महत्व स्पष्ट कीजिए।
  5. राजनीतिक समाजीकरण के प्रमुख अभिकरणों का वर्णन कीजिए।
  6. परिवार एवं विद्यालय की राजनीतिक समाजीकरण में भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  7. जनसंचार माध्यम एवं राजनीतिक दलों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  8. सामाजिक आंदोलन की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  9. सामाजिक आंदोलनों के प्रमुख प्रकारों की व्याख्या कीजिए।
  10. भारत के प्रमुख सामाजिक आंदोलनों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

(E) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10/15 अंक)
  1. राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा, विशेषताओं एवं प्रकारों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  2. राजनीतिक समाजीकरण की अवधारणा, प्रक्रिया एवं प्रमुख अभिकरणों की व्याख्या कीजिए।
  3. सामाजिक आंदोलन की अवधारणा, विशेषताओं एवं प्रकारों का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए।
  4. भारत के प्रमुख सामाजिक आंदोलनों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत कीजिए।
  5. राजनीतिक संस्कृति एवं लोकतंत्र के संबंध की व्याख्या कीजिए।
  6. राजनीतिक समाजीकरण लोकतांत्रिक व्यवस्था को किस प्रकार सुदृढ़ करता है? स्पष्ट कीजिए।
  7. सामाजिक आंदोलनों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
  8. राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण एवं सामाजिक आंदोलन के पारस्परिक संबंधों की विवेचना कीजिए।
  9. आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक संस्कृति एवं राजनीतिक समाजीकरण की प्रासंगिकता का मूल्यांकन कीजिए।
  10. लोकतंत्र की सफलता में राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण एवं सामाजिक आंदोलनों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

(F) तुलनात्मक/विश्लेषणात्मक प्रश्न (M.A. स्तर)
  1. संकीर्ण, अधीनस्थ एवं सहभागी राजनीतिक संस्कृति का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
  2. राजनीतिक संस्कृति एवं राजनीतिक समाजीकरण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  3. राजनीतिक समाजीकरण और सामाजिक नियंत्रण के संबंध का विश्लेषण कीजिए।
  4. क्या राजनीतिक समाजीकरण राजनीतिक संस्कृति के निर्माण का प्रमुख आधार है? विवेचना कीजिए।
  5. सामाजिक आंदोलन लोकतंत्र को मजबूत करते हैं या चुनौती देते हैं? समालोचनात्मक समीक्षा कीजिए।
  6. आधुनिक भारत में जनसंचार माध्यमों एवं सोशल मीडिया की राजनीतिक समाजीकरण में भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
  7. राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण एवं सामाजिक आंदोलन के पारस्परिक संबंधों का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
  8. भारतीय लोकतंत्र में सामाजिक आंदोलनों की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
  9. क्या सहभागी राजनीतिक संस्कृति लोकतांत्रिक स्थिरता की अनिवार्य शर्त है? स्पष्ट कीजिए।
  10. आधुनिक लोकतांत्रिक समाज में राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण एवं सामाजिक आंदोलनों की बदलती प्रकृति का विश्लेषण कीजिए।

(G) संभावित परीक्षा के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न (Most Expected Questions)
  1. राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा, विशेषताओं एवं प्रकारों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  2. राजनीतिक समाजीकरण की अवधारणा, अभिकरणों एवं महत्व का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  3. सामाजिक आंदोलन की अवधारणा, प्रकार एवं भारतीय सामाजिक आंदोलनों का विश्लेषण कीजिए।
  4. राजनीतिक संस्कृति, राजनीतिक समाजीकरण एवं सामाजिक आंदोलन के पारस्परिक संबंधों की व्याख्या कीजिए।
  5. सहभागी राजनीतिक संस्कृति लोकतंत्र को किस प्रकार सुदृढ़ करती है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

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