Unit – 4

Federalism: Essentials, Problems, Trends, Fundamental Rights.

संघवाद : आवश्यक तत्व, समस्याएँ, समकालीन प्रवृत्तियाँ एवं मौलिक अधिकार

संघवाद (Federalism) आधुनिक शासन व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जिसमें शासन की शक्तियों को संविधान के माध्यम से केंद्रीय सरकार और क्षेत्रीय सरकारों (राज्यों या प्रांतों) के बीच विभाजित किया जाता है। यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि विविधताओं से भरे समाज में एकता और स्वायत्तता के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम भी है। विशाल भौगोलिक क्षेत्र, बहुभाषिकता, सांस्कृतिक विविधता तथा विभिन्न सामाजिक समूहों वाले देशों में संघवाद लोकतांत्रिक शासन को प्रभावी बनाने का कार्य करता है। भारत, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों ने संघीय शासन प्रणाली को अपनाकर राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय हितों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया है।

संघवाद का मूल उद्देश्य सत्ता का विकेंद्रीकरण करना है ताकि शासन जनता के निकट पहुँच सके और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नीतियाँ बनाई जा सकें। यह व्यवस्था इस विचार पर आधारित है कि किसी एक स्तर की सरकार के पास सारी शक्तियाँ केंद्रित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विभिन्न स्तरों की सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करें।

संघवाद के कुछ आवश्यक तत्व होते हैं जिनके बिना किसी राज्य को वास्तविक अर्थों में संघीय नहीं कहा जा सकता। सबसे पहला तत्व है संविधान की सर्वोच्चता। संघीय व्यवस्था में संविधान ही केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन निर्धारित करता है। कोई भी सरकार संविधान से ऊपर नहीं होती। दूसरा महत्वपूर्ण तत्व शक्तियों का संवैधानिक विभाजन है। केंद्र और राज्यों को अलग-अलग विषयों पर कानून बनाने का अधिकार दिया जाता है। भारत में यह विभाजन संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के माध्यम से किया गया है।

संघवाद का तीसरा आवश्यक तत्व स्वतंत्र न्यायपालिका है। न्यायपालिका संविधान की संरक्षक होती है और केंद्र तथा राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों का निपटारा करती है। यदि किसी कानून या सरकारी निर्णय से संविधान का उल्लंघन होता है, तो न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है। चौथा तत्व संविधान की कठोरता है। संघीय व्यवस्था में संविधान को संशोधित करने की प्रक्रिया सामान्य कानूनों की अपेक्षा अधिक कठिन होती है ताकि केंद्र या राज्य अकेले अपने हित में संविधान में परिवर्तन न कर सकें।

पाँचवाँ महत्वपूर्ण तत्व द्विस्तरीय शासन व्यवस्था है। संघीय राज्यों में सामान्यतः दो स्तर की सरकारें होती हैं—केंद्रीय सरकार और राज्य सरकारें। दोनों अपने-अपने क्षेत्र में कार्य करती हैं तथा नागरिकों पर प्रत्यक्ष रूप से अधिकार रखती हैं। छठा तत्व द्विसदनीय विधायिका है, जिसमें संसद का एक सदन जनता का प्रतिनिधित्व करता है और दूसरा राज्यों का। भारत में लोकसभा और राज्यसभा इसी व्यवस्था के उदाहरण हैं।

संघवाद की सफलता के लिए सहयोग और समन्वय भी आवश्यक है। केवल शक्तियों का विभाजन पर्याप्त नहीं होता, बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग भी होना चाहिए। इसी कारण आधुनिक संघवाद को सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) कहा जाता है।

यद्यपि संघवाद लोकतांत्रिक शासन के लिए उपयोगी व्यवस्था है, फिर भी इसके समक्ष अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। सबसे प्रमुख समस्या केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति संघर्ष की होती है। कई बार राज्यों को लगता है कि केंद्र सरकार उनके अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रही है, जबकि केंद्र राष्ट्रीय हितों का हवाला देकर अपने अधिकारों का विस्तार करना चाहता है। इससे राजनीतिक तनाव पैदा हो सकता है।

दूसरी प्रमुख समस्या वित्तीय असमानता की है। अधिकांश संघीय देशों में राजस्व के प्रमुख स्रोत केंद्र सरकार के नियंत्रण में होते हैं, जबकि राज्यों पर व्यय की अधिक जिम्मेदारियाँ होती हैं। इससे राज्यों की आर्थिक निर्भरता बढ़ जाती है। भारत में भी कई राज्यों ने समय-समय पर अधिक वित्तीय स्वायत्तता की माँग की है।

तीसरी समस्या क्षेत्रीयता और अलगाववाद की है। जब किसी राज्य या क्षेत्र को लगता है कि उसकी पहचान, संस्कृति या आर्थिक हितों की उपेक्षा हो रही है, तो वहाँ पृथकतावादी या स्वायत्तता की माँगें उभर सकती हैं। यह राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती बन जाती है।

चौथी समस्या प्रशासनिक समन्वय की होती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, परिवहन और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय आवश्यक होता है। यदि समन्वय का अभाव हो, तो नीतियों का प्रभाव कम हो जाता है।

पाँचवीं समस्या राजनीतिक दलों की भूमिका से जुड़ी होती है। जब केंद्र और राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारें होती हैं, तो कई बार राजनीतिक प्रतिस्पर्धा संघीय सहयोग में बाधा उत्पन्न करती है। इसके परिणामस्वरूप विकास योजनाओं और नीतियों के क्रियान्वयन में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

समकालीन युग में संघवाद के स्वरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। आज का संघवाद पारंपरिक संघवाद से भिन्न है। पहले केंद्र और राज्यों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से अलग माना जाता था, जबकि आज दोनों स्तरों की सरकारें अनेक क्षेत्रों में मिलकर कार्य करती हैं। इस प्रवृत्ति को सहकारी संघवाद कहा जाता है।

वैश्वीकरण ने संघवाद की प्रकृति को प्रभावित किया है। आर्थिक नीतियों, व्यापार, निवेश और तकनीकी विकास के कारण राज्यों और केंद्र के बीच नए प्रकार के सहयोग की आवश्यकता बढ़ी है। इसके साथ ही प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) की अवधारणा भी उभरी है, जिसमें विभिन्न राज्य निवेश आकर्षित करने, बेहतर प्रशासन प्रदान करने और विकास के नए मॉडल प्रस्तुत करने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं।

डिजिटल शासन, ई-गवर्नेंस और सूचना प्रौद्योगिकी ने भी संघवाद को नया स्वरूप दिया है। अब नीति निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में केंद्र तथा राज्यों के बीच अधिक समन्वय संभव हो गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि राष्ट्रीय संकटों से निपटने के लिए संघीय सहयोग कितना आवश्यक है।

भारत में नीति आयोग की स्थापना, जीएसटी परिषद की कार्यप्रणाली तथा अंतर-राज्यीय परिषद जैसी संस्थाएँ सहकारी संघवाद को मजबूत करने के प्रयासों का उदाहरण हैं। इसके साथ ही राज्यों को अधिक आर्थिक और प्रशासनिक अधिकार देने की माँग भी समय-समय पर उठती रही है, जो संघवाद के निरंतर विकास को दर्शाती है।

संघवाद और मौलिक अधिकारों का संबंध भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मौलिक अधिकार नागरिकों की स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की रक्षा करते हैं, जबकि संघवाद शासन की शक्तियों को संतुलित करता है। यदि सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण हो जाए, तो नागरिक अधिकारों के हनन की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए संघवाद अप्रत्यक्ष रूप से मौलिक अधिकारों की सुरक्षा में योगदान देता है।

भारतीय संविधान के भाग-III में मौलिक अधिकारों का प्रावधान किया गया है। इनमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार तथा संवैधानिक उपचारों का अधिकार शामिल हैं। इन अधिकारों की रक्षा का दायित्व केंद्र और राज्य दोनों सरकारों पर है।

स्वतंत्र न्यायपालिका संघवाद और मौलिक अधिकारों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करती है। यदि केंद्र या राज्य सरकार किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, तो न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है। इस प्रकार न्यायपालिका संविधान, संघवाद और नागरिक स्वतंत्रताओं की संरक्षक बन जाती है।

भारतीय संघवाद की विशेषता यह है कि यहाँ राष्ट्रीय एकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता दोनों को समान महत्व दिया गया है। एक ओर केंद्र सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक स्थिरता जैसे विषयों पर पर्याप्त शक्तियाँ प्रदान की गई हैं, वहीं दूसरी ओर राज्यों की स्वायत्तता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

लोकतांत्रिक शासन का एक ऐसा मॉडल है जो विविधताओं से भरे समाज में एकता और स्वायत्तता के बीच संतुलन स्थापित करता है। इसके आवश्यक तत्व संविधान की सर्वोच्चता, शक्तियों का विभाजन, स्वतंत्र न्यायपालिका और द्विस्तरीय शासन व्यवस्था हैं। यद्यपि इसके समक्ष शक्ति संघर्ष, वित्तीय असमानता और क्षेत्रीयता जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं, फिर भी सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद की आधुनिक प्रवृत्तियाँ इसे अधिक प्रभावी बना रही हैं। मौलिक अधिकारों के साथ इसका घनिष्ठ संबंध नागरिक स्वतंत्रता, लोकतंत्र और संवैधानिक शासन को सुदृढ़ करता है। इसी कारण संघवाद आज भी आधुनिक राजनीतिक व्यवस्था की एक अनिवार्य और प्रासंगिक अवधारणा बना हुआ है।

संघवाद एवं मौलिक अधिकार
(Federalism and Fundamental Rights)
(A) वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)

एक शब्द / एक वाक्य में उत्तर दीजिए
  1. संघवाद (Federalism) क्या है?
  2. संघवाद का मुख्य उद्देश्य क्या है?
  3. संघीय शासन व्यवस्था में शक्तियों का विभाजन किसके द्वारा किया जाता है?
  4. संघवाद का प्रथम आवश्यक तत्व क्या है?
  5. भारत में शक्तियों का विभाजन किन तीन सूचियों के माध्यम से किया गया है?
  6. संघ सूची क्या है?
  7. राज्य सूची क्या है?
  8. समवर्ती सूची क्या है?
  9. संघवाद में स्वतंत्र न्यायपालिका का क्या कार्य है?
  10. संघीय संविधान सामान्यतः किस प्रकार का होता है?
  11. द्विस्तरीय शासन व्यवस्था से क्या अभिप्राय है?
  12. द्विसदनीय विधायिका क्या है?
  13. भारत में संसद के दो सदनों के नाम लिखिए।
  14. सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) क्या है?
  15. प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) क्या है?
  16. संघवाद की सबसे प्रमुख समस्या क्या है?
  17. वित्तीय असमानता से क्या आशय है?
  18. क्षेत्रीयता (Regionalism) क्या है?
  19. संघवाद में प्रशासनिक समन्वय क्यों आवश्यक है?
  20. नीति आयोग किस प्रकार के संघवाद को बढ़ावा देता है?
  21. जीएसटी परिषद किसका उदाहरण है?
  22. अंतर-राज्यीय परिषद का उद्देश्य क्या है?
  23. भारतीय संविधान के किस भाग में मौलिक अधिकारों का वर्णन है?
  24. भारतीय संविधान में कितने मौलिक अधिकार हैं?
  25. मौलिक अधिकारों का संरक्षक कौन है?

(B) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. संघवाद का मुख्य उद्देश्य है—

(A) सत्ता का केंद्रीकरण

(B) सत्ता का विकेंद्रीकरण ✅

(C) राजतंत्र की स्थापना

(D) न्यायपालिका को समाप्त करना

2. संघीय शासन व्यवस्था का आधार है—

(A) संसद

(B) संविधान ✅

(C) राष्ट्रपति

(D) मंत्रिपरिषद

3. भारत में शक्तियों का विभाजन किया गया है—

(A) दो सूचियों में

(B) तीन सूचियों में ✅

(C) चार सूचियों में

(D) पाँच सूचियों में

4. निम्नलिखित में संघवाद का आवश्यक तत्व कौन-सा है?

(A) संविधान की सर्वोच्चता ✅

(B) निरंकुश शासन

(C) एकदलीय शासन

(D) सैन्य शासन

5. संघवाद में संविधान का संरक्षक होता है—

(A) संसद

(B) राष्ट्रपति

(C) स्वतंत्र न्यायपालिका ✅

(D) चुनाव आयोग

6. आधुनिक संघवाद की प्रमुख विशेषता है—

(A) शक्ति का पूर्ण केंद्रीकरण

(B) सहकारी संघवाद ✅

(C) राजतंत्र

(D) निरंकुश शासन

7. राज्यों के बीच विकास की प्रतिस्पर्धा को कहा जाता है—

(A) सहकारी संघवाद

(B) प्रतिस्पर्धी संघवाद ✅

(C) एकात्मक शासन

(D) प्रशासनिक विकेंद्रीकरण

8. भारत में राज्यों का प्रतिनिधित्व किस सदन में होता है?

(A) लोकसभा

(B) राज्यसभा ✅

(C) विधान सभा

(D) विधानसभा परिषद

9. भारतीय संविधान के भाग-III में वर्णित हैं—

(A) नीति-निर्देशक तत्व

(B) मौलिक अधिकार ✅

(C) मूल कर्तव्य

(D) चुनाव संबंधी प्रावधान

10. मौलिक अधिकारों की रक्षा का अंतिम दायित्व किसका है?

(A) संसद

(B) राष्ट्रपति

(C) न्यायपालिका ✅

(D) प्रधानमंत्री

(C) अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer)
  1. संघवाद की परिभाषा दीजिए।
  2. संघवाद के दो प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
  3. संविधान की सर्वोच्चता से क्या आशय है?
  4. शक्तियों के विभाजन का महत्व लिखिए।
  5. स्वतंत्र न्यायपालिका का महत्व बताइए।
  6. द्विस्तरीय शासन व्यवस्था क्या है?
  7. सहकारी संघवाद क्या है?
  8. प्रतिस्पर्धी संघवाद क्या है?
  9. वित्तीय संघवाद क्या है?
  10. क्षेत्रीयता की समस्या क्या है?
  11. जीएसटी परिषद का महत्व लिखिए।
  12. नीति आयोग की भूमिका बताइए।
  13. मौलिक अधिकार क्या हैं?
  14. मौलिक अधिकारों के दो उदाहरण दीजिए।
  15. संघवाद और मौलिक अधिकारों का संबंध स्पष्ट कीजिए।

(D) लघु उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
  1. संघवाद की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
  2. संघवाद के आवश्यक तत्वों का वर्णन कीजिए।
  3. संघवाद की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
  4. संघवाद की प्रमुख समस्याओं का वर्णन कीजिए।
  5. सहकारी संघवाद की व्याख्या कीजिए।
  6. प्रतिस्पर्धी संघवाद का अर्थ एवं महत्व स्पष्ट कीजिए।
  7. वैश्वीकरण का संघवाद पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
  8. डिजिटल शासन और संघवाद के संबंध की व्याख्या कीजिए।
  9. भारतीय संघवाद की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
  10. संघवाद एवं मौलिक अधिकारों के संबंध को स्पष्ट कीजिए।

(E) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10/15 अंक)
  1. संघवाद की अवधारणा, विशेषताएँ एवं आवश्यक तत्वों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  2. संघवाद की प्रमुख समस्याओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
  3. आधुनिक युग में सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद की अवधारणा का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  4. भारतीय संघवाद की प्रकृति एवं विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
  5. वैश्वीकरण एवं सूचना प्रौद्योगिकी के युग में संघवाद के बदलते स्वरूप का विश्लेषण कीजिए।
  6. संघवाद और मौलिक अधिकारों के पारस्परिक संबंधों की विवेचना कीजिए।
  7. भारतीय संघवाद में नीति आयोग, जीएसटी परिषद एवं अंतर-राज्यीय परिषद की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
  8. संघवाद में स्वतंत्र न्यायपालिका की भूमिका का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  9. संघवाद की चुनौतियों एवं उनके समाधान पर आलोचनात्मक चर्चा कीजिए।
  10. आधुनिक लोकतांत्रिक शासन में संघवाद की प्रासंगिकता का विश्लेषण कीजिए।

(F) तुलनात्मक/विश्लेषणात्मक प्रश्न (M.A. स्तर)
  1. संघवाद और एकात्मक शासन व्यवस्था में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  2. पारंपरिक संघवाद एवं सहकारी संघवाद का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
  3. सहकारी संघवाद एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  4. भारतीय संघवाद की तुलना अमेरिकी संघवाद से कीजिए।
  5. क्या भारत वास्तविक अर्थों में एक संघीय राज्य है? समालोचनात्मक विवेचन कीजिए।
  6. भारतीय संघवाद में केंद्र और राज्यों के मध्य शक्ति संतुलन का मूल्यांकन कीजिए।
  7. वित्तीय संघवाद की प्रमुख समस्याओं एवं उनके समाधान का विश्लेषण कीजिए।
  8. संघवाद राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय स्वायत्तता के बीच संतुलन कैसे स्थापित करता है? स्पष्ट कीजिए।
  9. स्वतंत्र न्यायपालिका संघवाद एवं मौलिक अधिकारों की संरक्षक किस प्रकार है? विवेचना कीजिए।
  10. "आधुनिक संघवाद केवल शक्तियों का विभाजन नहीं, बल्कि सहयोग, समन्वय और प्रतिस्पर्धा का मॉडल है।" इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

(G) संभावित परीक्षा के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न (Most Expected Questions)
  1. संघवाद की अवधारणा, विशेषताएँ एवं आवश्यक तत्वों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  2. भारतीय संघवाद की प्रमुख समस्याओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
  3. सहकारी संघवाद एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  4. संघवाद और मौलिक अधिकारों के पारस्परिक संबंधों की व्याख्या कीजिए।
  5. भारतीय संघवाद में स्वतंत्र न्यायपालिका, नीति आयोग एवं जीएसटी परिषद की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

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