Unit- 01

Birth, Growth And The Political Trends In The Indian National Movemen
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन : उद्भव, विकास एवं राजनीतिक प्रवृत्तियाँ

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन आधुनिक भारत के इतिहास और राजनीति विज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण विषय है। यह केवल ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने का संघर्ष नहीं था, बल्कि भारतीय समाज में राष्ट्रीय चेतना, राजनीतिक जागरूकता, सामाजिक परिवर्तन, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा आधुनिक राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया का भी प्रतीक था। लगभग दो शताब्दियों तक चले इस आंदोलन ने भारत की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संरचना को गहराई से प्रभावित किया। इसके परिणामस्वरूप भारतीयों में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित हुई, लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव मजबूत हुई और स्वतंत्र भारत के संविधान, शासन व्यवस्था तथा राजनीतिक संस्कृति का आधार तैयार हुआ। भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का अध्ययन केवल स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारतीय राज्य, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद की जड़ों को समझने का भी प्रमुख माध्यम है।

अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपना राजनीतिक प्रभुत्व स्थापित करना प्रारंभ किया। प्लासी (1757) और बक्सर (1764) के युद्धों के बाद अंग्रेजों की शक्ति निरंतर बढ़ती गई और धीरे-धीरे भारत का अधिकांश भाग उनके नियंत्रण में आ गया। ब्रिटिश शासन ने एक ओर आधुनिक शिक्षा, रेल, डाक, तार, मुद्रण, न्यायिक व्यवस्था तथा प्रशासनिक संस्थाओं का विकास किया, वहीं दूसरी ओर उसकी आर्थिक नीतियों ने भारतीय उद्योगों को कमजोर किया, कृषि व्यवस्था को संकटग्रस्त बनाया और व्यापक आर्थिक शोषण को जन्म दिया। भारतीय संसाधनों का निरंतर दोहन, धन की निकासी, ऊँचे कर, विदेशी वस्तुओं का प्रभुत्व तथा स्वदेशी उद्योगों का पतन भारतीय समाज में असंतोष का प्रमुख कारण बना। यही असंतोष आगे चलकर राष्ट्रीय आंदोलन की पृष्ठभूमि बना।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उद्भव के अनेक कारण थे। सबसे महत्वपूर्ण कारण ब्रिटिश शासन की शोषणकारी आर्थिक नीति थी। दादाभाई नौरोजी ने अपनी प्रसिद्ध ‘धन-निकासी सिद्धांत’ (Drain Theory) के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि भारत की संपत्ति निरंतर इंग्लैंड भेजी जा रही है, जिससे देश निर्धन होता जा रहा है। आर. सी. दत्त ने भी ब्रिटिश आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए बताया कि औपनिवेशिक शासन ने भारतीय कृषि और उद्योग को गंभीर क्षति पहुँचाई। आर्थिक शोषण ने भारतीयों में असंतोष और राजनीतिक चेतना को जन्म दिया।

राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में आधुनिक शिक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था। अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार से भारतीयों को उदारवाद, राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, समानता, स्वतंत्रता और संवैधानिक शासन जैसे आधुनिक राजनीतिक विचारों का ज्ञान हुआ। जॉन लॉक, रूसो, मिल, बर्क और मैजिनी जैसे पश्चिमी विचारकों के विचारों ने भारतीय बुद्धिजीवियों को गहराई से प्रभावित किया। शिक्षित भारतीयों ने यह अनुभव किया कि यदि ब्रिटेन में लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों का सम्मान किया जाता है, तो भारत में भी जनता को समान अधिकार मिलने चाहिए। आधुनिक शिक्षा ने तर्कशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राजनीतिक जागरूकता का विकास किया, जिसने राष्ट्रीय आंदोलन को वैचारिक आधार प्रदान किया।

सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों ने भी राष्ट्रीय चेतना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद सरस्वती, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, स्वामी विवेकानंद, ज्योतिराव फुले, महादेव गोविंद रानाडे तथा अन्य समाज सुधारकों ने भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वासों और सामाजिक असमानताओं का विरोध किया। इन आंदोलनों ने आत्मविश्वास, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय गौरव की भावना को बढ़ावा दिया। भारतीयों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करना सीखा और विदेशी शासन के विरुद्ध मानसिक रूप से तैयार होने लगे।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उद्भव में संचार और परिवहन के साधनों का भी महत्वपूर्ण योगदान था। रेल, डाक, तार तथा समाचार-पत्रों ने देश के विभिन्न भागों के लोगों को एक-दूसरे के संपर्क में लाया। समाचार-पत्रों ने ब्रिटिश शासन की नीतियों की आलोचना की और राष्ट्रीय चेतना का प्रसार किया। ‘अमृत बाजार पत्रिका’, ‘द हिन्दू’, ‘केसरी’, ‘मराठा’, ‘बंगाली’ तथा अन्य समाचार-पत्रों ने जनता को राजनीतिक रूप से जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी प्रकार भारतीय भाषाओं के साहित्य ने भी राष्ट्रवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाया।

सन् 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुई। ए. ओ. ह्यूम की पहल पर स्थापित कांग्रेस ने प्रारंभ में भारतीयों और ब्रिटिश सरकार के बीच संवाद का माध्यम बनने का प्रयास किया। कांग्रेस के प्रारंभिक नेताओं, जैसे दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता, सुरेंद्रनाथ बनर्जी और बदरुद्दीन तैयबजी ने संवैधानिक तथा शांतिपूर्ण उपायों के माध्यम से प्रशासनिक सुधारों, भारतीयों की सरकारी सेवाओं में भागीदारी तथा विधायी परिषदों के विस्तार की मांग की। इस चरण को उदारवादी युग कहा जाता है। उदारवादी नेताओं का विश्वास था कि ब्रिटिश सरकार न्यायप्रिय है और उचित तर्क तथा शांतिपूर्ण आग्रह के माध्यम से भारतीयों की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में राष्ट्रीय आंदोलन में एक नया चरण प्रारंभ हुआ जिसे उग्रवादी युग कहा जाता है। बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल जैसे नेताओं ने यह मत व्यक्त किया कि केवल प्रार्थनाओं और याचिकाओं से स्वतंत्रता प्राप्त नहीं की जा सकती। उन्होंने स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा तथा आत्मनिर्भरता पर बल दिया। तिलक का प्रसिद्ध कथन—“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा”—भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का प्रेरणादायक नारा बन गया। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन ने राष्ट्रीय आंदोलन को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया और पहली बार बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, महिलाओं, व्यापारियों तथा किसानों ने इसमें सक्रिय भागीदारी की।

राष्ट्रीय आंदोलन का सबसे व्यापक और निर्णायक चरण महात्मा गांधी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ। गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह की सफलता के बाद भारत लौटकर भारतीय राजनीति को नई दिशा दी। उन्होंने सत्य, अहिंसा, आत्मबल, जनसहभागिता तथा नैतिक शक्ति को राजनीतिक संघर्ष का आधार बनाया। चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा आंदोलन तथा अहमदाबाद मिल श्रमिक आंदोलन ने गांधीजी को राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित किया। इसके बाद असहयोग आंदोलन (1920–22), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–34), नमक सत्याग्रह, व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा भारत छोड़ो आंदोलन (1942) ने स्वतंत्रता संघर्ष को व्यापक जनांदोलन का स्वरूप प्रदान किया। गांधीजी ने स्वतंत्रता संग्राम को केवल राजनीतिक आंदोलन न बनाकर सामाजिक सुधार, ग्राम स्वराज, अस्पृश्यता उन्मूलन, खादी, स्वदेशी, महिला सशक्तिकरण और सांप्रदायिक सद्भाव जैसे रचनात्मक कार्यक्रमों से भी जोड़ा।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसमें समाज के लगभग सभी वर्गों की भागीदारी रही। किसान, मजदूर, विद्यार्थी, महिलाएँ, व्यापारी, बुद्धिजीवी, पत्रकार, वकील तथा विभिन्न धार्मिक और भाषाई समुदायों ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई। सरोजिनी नायडू, अरुणा आसफ़ अली, विजयलक्ष्मी पंडित, कस्तूरबा गांधी और उषा मेहता जैसी महिलाओं ने आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों ने अपने बलिदान से युवाओं में राष्ट्रीय भावना का संचार किया। सुभाषचंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फ़ौज की स्थापना कर सशस्त्र संघर्ष की परंपरा को नई दिशा दी। इन सभी धाराओं ने मिलकर स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक और बहुआयामी बनाया।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में विभिन्न राजनीतिक प्रवृत्तियाँ भी समानांतर रूप से विकसित हुईं। प्रारंभिक चरण में उदारवादी प्रवृत्ति प्रमुख थी, जो संवैधानिक सुधारों और क्रमिक परिवर्तन में विश्वास करती थी। इसके बाद उग्रवादी प्रवृत्ति सामने आई, जिसने स्वराज, स्वदेशी और जनसंघर्ष को प्राथमिकता दी। क्रांतिकारी प्रवृत्ति ने सशस्त्र संघर्ष और बलिदान के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करने का मार्ग अपनाया। गांधीवादी प्रवृत्ति ने सत्याग्रह, अहिंसा और जनसहभागिता पर आधारित संघर्ष को राष्ट्रीय आंदोलन का मुख्य आधार बनाया। इसी काल में समाजवादी विचारधारा का भी विकास हुआ। जवाहरलाल नेहरू, जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव और कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के अन्य नेताओं ने आर्थिक समानता, सामाजिक न्याय और योजनाबद्ध विकास पर बल दिया। साम्यवादी विचारधारा ने मजदूरों और किसानों के अधिकारों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया। इसके अतिरिक्त मुस्लिम लीग, हिंदू महासभा तथा अन्य संगठनों ने भी अपनी-अपनी राजनीतिक विचारधाराओं के आधार पर राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने भारत जैसे विशाल, बहुभाषी, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित की। इस आंदोलन ने भारतीयों को यह विश्वास दिलाया कि वे अपनी राजनीतिक नियति स्वयं निर्धारित कर सकते हैं। इस संघर्ष ने लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, मौलिक अधिकार, समानता और संवैधानिक शासन जैसे आदर्शों को मजबूत आधार प्रदान किया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारतीय संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, संघीय व्यवस्था, मौलिक अधिकारों तथा स्वतंत्र न्यायपालिका की अवधारणाएँ काफी हद तक राष्ट्रीय आंदोलन के अनुभवों और आदर्शों से प्रेरित थीं।

यद्यपि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सांप्रदायिक तनाव, जातीय विभाजन, आर्थिक विषमता, ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियाँ, विभाजन की त्रासदी तथा विभिन्न राजनीतिक मतभेद इसके समक्ष गंभीर समस्याएँ थीं। फिर भी इन चुनौतियों के बीच राष्ट्रीय आंदोलन ने लोकतांत्रिक परंपराओं, जनसहभागिता, राजनीतिक शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना को निरंतर मजबूत किया। अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की, किंतु इसके साथ ही देश का विभाजन भी हुआ, जिसने लाखों लोगों को विस्थापन और हिंसा का दर्द दिया। इसके बावजूद स्वतंत्र भारत ने लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपनी यात्रा प्रारंभ की और राष्ट्रीय आंदोलन के मूल आदर्शों को संविधान के माध्यम से संस्थागत रूप प्रदान किया।

इस प्रकार भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन केवल विदेशी शासन से मुक्ति का संघर्ष नहीं था, बल्कि यह राष्ट्रीय चेतना, लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक सुधार, आर्थिक न्याय और आधुनिक राष्ट्र-निर्माण की एक दीर्घकालिक प्रक्रिया थी। इसके उद्भव में औपनिवेशिक शोषण, आधुनिक शिक्षा, सामाजिक सुधार आंदोलनों, संचार माध्यमों और राजनीतिक जागरण की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके विकास में उदारवादी, उग्रवादी, गांधीवादी, क्रांतिकारी तथा समाजवादी जैसी विभिन्न राजनीतिक प्रवृत्तियों ने अपने-अपने स्तर पर योगदान दिया। इन सभी धाराओं के संयुक्त प्रयासों ने भारतीय जनता को स्वतंत्रता के लक्ष्य के लिए संगठित किया और आधुनिक भारत की राजनीतिक, संवैधानिक तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव रखी। इसलिए भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का अध्ययन केवल अतीत की घटनाओं का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतांत्रिक चरित्र, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक विकास को समझने की कुंजी भी है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions) (2–5 अंक)
  1. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन से क्या अभिप्राय है?
  2. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
  3. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उद्भव के दो प्रमुख कारण लिखिए।
  4. ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीति ने राष्ट्रीय आंदोलन को कैसे प्रभावित किया?
  5. दादाभाई नौरोजी के धन-निकासी सिद्धांत (Drain Theory) को स्पष्ट कीजिए।
  6. आर. सी. दत्त का भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में क्या योगदान था?
  7. आधुनिक शिक्षा ने राष्ट्रीय चेतना के विकास में क्या भूमिका निभाई?
  8. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में समाचार-पत्रों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  9. सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों का राष्ट्रीय आंदोलन पर क्या प्रभाव पड़ा?
  10. राजा राममोहन राय का राष्ट्रीय जागरण में योगदान लिखिए।
  11. स्वामी दयानंद सरस्वती का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान स्पष्ट कीजिए।
  12. स्वामी विवेकानंद ने राष्ट्रीय चेतना को किस प्रकार प्रभावित किया?
  13. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब और किसने की?
  14. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की?
  15. कांग्रेस के प्रारंभिक उद्देश्य क्या थे?
  16. उदारवादी नेताओं की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
  17. दादाभाई नौरोजी का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान लिखिए।
  18. गोपाल कृष्ण गोखले के विचारों को स्पष्ट कीजिए।
  19. उग्रवादी आंदोलन से क्या अभिप्राय है?
  20. लाल-बाल-पाल कौन थे?
  21. बाल गंगाधर तिलक का प्रसिद्ध कथन लिखिए।
  22. बंगाल विभाजन कब हुआ और इसका क्या प्रभाव पड़ा?
  23. स्वदेशी आंदोलन क्या था?
  24. बहिष्कार आंदोलन से क्या अभिप्राय है?
  25. महात्मा गांधी भारतीय राजनीति में कब सक्रिय हुए?
  26. सत्याग्रह क्या है?
  27. असहयोग आंदोलन का उद्देश्य क्या था?
  28. सविनय अवज्ञा आंदोलन से क्या अभिप्राय है?
  29. नमक सत्याग्रह का महत्व स्पष्ट कीजिए।
  30. भारत छोड़ो आंदोलन कब प्रारंभ हुआ?
  31. "करो या मरो" का नारा किसने दिया?
  32. चंपारण सत्याग्रह का महत्व लिखिए।
  33. खेड़ा सत्याग्रह किससे संबंधित था?
  34. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन का महत्व क्या था?
  35. भगत सिंह का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान लिखिए।
  36. चंद्रशेखर आजाद का योगदान स्पष्ट कीजिए।
  37. सुभाषचंद्र बोस का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान लिखिए।
  38. आज़ाद हिंद फ़ौज की स्थापना किसने की?
  39. गांधीवादी विचारधारा की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
  40. राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  41. सरोजिनी नायडू का योगदान लिखिए।
  42. अरुणा आसफ़ अली का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान बताइए।
  43. राष्ट्रीय आंदोलन में किसानों की भूमिका क्या थी?
  44. राष्ट्रीय आंदोलन में विद्यार्थियों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  45. राष्ट्रीय आंदोलन में मजदूरों का योगदान लिखिए।
  46. समाजवादी विचारधारा का राष्ट्रीय आंदोलन पर क्या प्रभाव पड़ा?
  47. कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना कब हुई?
  48. राष्ट्रीय आंदोलन में साम्यवादी विचारधारा की भूमिका लिखिए।
  49. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की दो प्रमुख उपलब्धियाँ लिखिए।
  50. स्वतंत्र भारत के संविधान पर राष्ट्रीय आंदोलन का क्या प्रभाव पड़ा?

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions) (10–20 अंक)
  1. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उद्भव के प्रमुख कारणों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  2. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विकास का क्रमबद्ध वर्णन कीजिए।
  3. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
  4. उदारवादी तथा उग्रवादी नेताओं की विचारधाराओं का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
  5. बंगाल विभाजन तथा स्वदेशी आंदोलन का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
  6. महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का विकास स्पष्ट कीजिए।
  7. असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
  8. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में क्रांतिकारियों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
  9. सुभाषचंद्र बोस एवं आज़ाद हिंद फ़ौज के योगदान का विश्लेषण कीजिए।
  10. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की भूमिका का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  11. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में किसानों एवं मजदूरों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  12. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की प्रमुख राजनीतिक प्रवृत्तियों का विश्लेषण कीजिए।
  13. गांधीवादी, समाजवादी एवं क्रांतिकारी विचारधाराओं का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
  14. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की उपलब्धियों एवं सीमाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
  15. आधुनिक भारत के निर्माण में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के योगदान का विवेचन कीजिए।
  16. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में समाचार-पत्रों एवं आधुनिक शिक्षा की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  17. सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों का राष्ट्रीय आंदोलन पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
  18. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन और भारतीय संविधान के मध्य संबंध का विश्लेषण कीजिए।
  19. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास का अध्ययन कीजिए।
  20. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की राजनीतिक विरासत का मूल्यांकन कीजिए।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) (उत्तर सहित)

1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब हुई थी?
(A) 1882
(B) 1885
(C) 1888
(D) 1890
उत्तर – (B)

2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किसने की?
(A) लॉर्ड कर्जन
(B) ए. ओ. ह्यूम
(C) लॉर्ड रिपन
(D) विलियम बेंटिक
उत्तर – (B)

3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
(A) दादाभाई नौरोजी
(B) डब्ल्यू. सी. बनर्जी
(C) गोपाल कृष्ण गोखले
(D) बदरुद्दीन तैयबजी
उत्तर – (B)

4. धन-निकासी सिद्धांत (Drain Theory) किसने प्रतिपादित किया?
(A) आर. सी. दत्त
(B) दादाभाई नौरोजी
(C) तिलक
(D) गोखले
उत्तर – (B)

5. 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा' यह कथन किसका है?
(A) महात्मा गांधी
(B) बाल गंगाधर तिलक
(C) जवाहरलाल नेहरू
(D) सुभाषचंद्र बोस
उत्तर – (B)

6. बंगाल विभाजन कब हुआ था?
(A) 1901
(B) 1905
(C) 1907
(D) 1911
उत्तर – (B)

7. स्वदेशी आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य था—
(A) विदेशी वस्तुओं का प्रचार
(B) स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार
(C) अंग्रेजों की सहायता करना
(D) कर बढ़ाना
उत्तर – (B)

8. महात्मा गांधी भारत कब लौटे?
(A) 1910
(B) 1915
(C) 1919
(D) 1922
उत्तर – (B)

9. गांधीजी ने अपना पहला सफल सत्याग्रह कहाँ किया?
(A) खेड़ा
(B) अहमदाबाद
(C) चंपारण
(D) बारडोली
उत्तर – (C)

10. असहयोग आंदोलन कब प्रारंभ हुआ?
(A) 1917
(B) 1920
(C) 1925
(D) 1930
उत्तर – (B)

11. नमक सत्याग्रह किस आंदोलन का भाग था?
(A) असहयोग आंदोलन
(B) सविनय अवज्ञा आंदोलन
(C) भारत छोड़ो आंदोलन
(D) स्वदेशी आंदोलन
उत्तर – (B)

12. भारत छोड़ो आंदोलन कब प्रारंभ हुआ?
(A) 1939
(B) 1940
(C) 1942
(D) 1945
उत्तर – (C)

13. "करो या मरो" का नारा किसने दिया?
(A) तिलक
(B) गांधीजी
(C) नेहरू
(D) पटेल
उत्तर – (B)

14. आज़ाद हिंद फ़ौज का नेतृत्व किसने किया?
(A) भगत सिंह
(B) सुभाषचंद्र बोस
(C) चंद्रशेखर आजाद
(D) राजगुरु
उत्तर – (B)

15. निम्नलिखित में से कौन उग्रवादी नेता थे?
(A) गोखले
(B) दादाभाई नौरोजी
(C) बाल गंगाधर तिलक
(D) फिरोजशाह मेहता
उत्तर – (C)

16. लाल-बाल-पाल में 'लाल' से आशय है—
(A) लाला लाजपत राय
(B) लाल बहादुर शास्त्री
(C) लाला हरदयाल
(D) लालाजी टंडन
उत्तर – (A)

17. गांधीजी के राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख आधार था—
(A) हिंसा
(B) सत्य और अहिंसा
(C) सैन्य शक्ति
(D) राजतंत्र
उत्तर – (B)

18. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी—
(A) अंग्रेजी शिक्षा का प्रसार
(B) भारत की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय चेतना का विकास
(C) रेलवे का विकास
(D) व्यापार में वृद्धि
उत्तर – (B)

19. स्वतंत्र भारत के संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव किसका पड़ा?
(A) औपनिवेशिक शासन
(B) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के आदर्शों का
(C) केवल ब्रिटिश संसद का
(D) केवल न्यायपालिका का
उत्तर – (B)

20. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की एक प्रमुख राजनीतिक प्रवृत्ति थी—
(A) उदारवाद
(B) उग्रवाद
(C) गांधीवाद
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (D)

21. निम्नलिखित में से कौन समाजवादी विचारधारा से संबंधित नेता थे?
(A) जयप्रकाश नारायण
(B) आचार्य नरेंद्र देव
(C) जवाहरलाल नेहरू
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (D)

22. राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की सक्रिय भूमिका का उदाहरण है—
(A) सरोजिनी नायडू
(B) अरुणा आसफ़ अली
(C) कस्तूरबा गांधी
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (D)

23. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का मूल उद्देश्य था—
(A) करों में वृद्धि
(B) ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करना
(C) राजतंत्र की स्थापना
(D) विदेशी व्यापार बढ़ाना
उत्तर – (B)

24. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में समाचार-पत्रों का मुख्य कार्य था—
(A) मनोरंजन करना
(B) राष्ट्रीय चेतना और राजनीतिक जागरूकता फैलाना
(C) व्यापार बढ़ाना
(D) कर संग्रह करना
उत्तर – (B)

25. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम था—
(A) 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति और लोकतांत्रिक भारत की स्थापना
(B) ब्रिटिश शासन का विस्तार
(C) राजतंत्र की स्थापना
(D) सैन्य शासन की स्थापना
उत्तर – (A)

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